कनिमोझी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके के नेता एम करुणानिधि की दूसरी शादी से हुई पहली बेटी है। बुढ़ापे की संतान के प्रति पिता का प्रेम बहुत है और कनिमोझी भी पिता के राजनैतिक संकटों से सुलझने के लिए दिल्ली में दादागीरी से ले कर जोड़ तोड़ में लगना कोई बुरी बात नहीं मानती। प्रवर्तन निदेशालय ने तो अपने आपको बेदाग और कानून का आदर करने वाली करार दे रही सुपर दलाल नीरा राडिया अपनी सेवाएं बेचने के लिए तैयार थी हीं। अखबारों और टीवी चैनलों पर भी वे मतलब की अफवाहे चलवा रही थी। वार्तालाप का ये हिस्सा आपका ज्ञान कुछ बढ़ाएगा-
नीरा- शायद तुम्हारे पिता जी को बता दिया गया है कि बालू और मारन को कोई भारी भरकम मंत्रालय नहीं मिलेगा।
कनिमोझी- किसने कहा?
नीरा- बहुत साफ साफ बोल दिया गया है। उनकी भी समझ में आ गया होगा।
कनि- किसी ने उनसे बात नहीं की। यही तो मुसीबत है। मुझे बताओं कि कौन उनसे बात करने आया था?
नीरा- जहां तक मुझे पता है, यह तो कोई संदेश देने आया था या फिर खुद प्रधानमंत्री ने तुम्हारे पिता से बात की है।
कनि- नहीं, प्रधानमंत्री ने कोई बात नहीं की। पिता जी से तो सिर्फ मैं बात कर रही हूं। प्रधानमंत्री के पास बैठी थी और फोन लगाया था। प्रधानमंत्री ने हाल चाल पूछा था और तुम भी जानती हो कि प्रधानमंत्री मेरे पिता से फोन पर बात कर के इस तरह की बाते नहीं कर सकते। प्रधानमंत्री वैसे भी बहुत धीरे बोलते हैं और मेरे पिता को ठीक से सुनाई भी नहीं पड़ता और फिर बातचीत इतनी लंबी भी नहीं हुई कि ये सब कहा जा सकता है। किसी से कहा होगा और यह पता नहीं कि जिससे कहा गया है उसने ठीक ठीक वही बोला है या नहीं।
नीरा- सही बात है, मुझे पता करने दो कि किसने संदेश पहुंचाया है………..। हे भगवान, एक ही चीज पर कितने लोग काम कर रहे हैं। मुझे तो भरोसा ही नहीं होता।
कनि- नीचे के स्तर पर अगर किसी को संदेश मिलता तो भी उसकी हिम्मत नहीं थी कि वह मेरे पिता से जा कर कह सके। आखिर उस आदमी की कोई तो विश्वसनीयता होनी चाहिए।
नीरा- सही बात है।
कनि- मुझे भी इसी तरह की कुछ खबर मिली थी मगर मुझे पता नहीं कि किसी सीनियर नेता ने खबर पहुंचाई हैं या नहीं। अगर प्रधानमंत्री को कुछ कहना ही होता तो मैं उनके पास इतनी देर बैठी थी, वे मुझे भी कह सकते हैं।
नीरा- तुम्हारी बात भी सही है। मैं फिर से पता लगाती हूं और फिर मैं फोन करुंगी और पक्की खबर दूंगी।
कनि- एक बात और समझ लो, एक आदमी फोन कर सकता है। गुलाम नबी आजाद मुझे सीधे फोन कर सकता है और कुछ भी बता सकता है और मैं भी सीधे डैड के पास जा कर कोई भी बात बोल सकती हूं। मगर हवा में बात होगी तो हमारी बहुत बदनामी होगी।
नीरा- मैं समझ गई और उम्मीद है कि साढ़े बारह बजे मैं तुम्हारी मां से भी मिलूंगी।
कनि- ठीक है, मैं तो यही हूं। मगर मां को मत बताना वरना वो कुछ का कुछ कहेगी और सारा काम बिगाड़ देगी। तुम तो एक काम करो, तुम गुलाम से कहो कि मुझसे बात करे। मैं यही हूं और इंतजार कर रही हूं।
बातचीत बहुत लंबी हैं और दस टेप हमारे पास आ चुके हैं। बाकी बातचीत सुनने के लिए आप टेप ही सुन लें तो बेहतर होगा। सात टेप यहां दिए जा रहे हैं….
लेखक आलोक तोमर जाने-माने पत्रकार हैं.











