पंकज शुक्ला से परेशान पंकज शुक्ला ने फेसबुक पर दुखड़ा रोया

जी. हेडिंग लगाने में कोई गड़बड़ नहीं हुई है. गड़बड़ी का कारण बना है नाम. पंकज शुक्ला दो लोगों के नाम हैं, दोनों लोग मीडिया में हैं, जर्नलिस्ट हैं. दोनों का बरेली से रिश्ता है. दोनों की उम्र लगभग एक है. दोनों ही पंकज शुक्ला प्रिंट और इलेक्ट्रानिक माध्यमों के अच्छे जर्नलिस्ट हैं. इन दिनों एक प्रिंट में हैं तो दूसरे टीवी में. दोनों मीडिया में नौकरी छोड़ते पकड़ते रहते हैं. इस कारण जब कोई अज्ञानी पत्रकार सुनता है कि पंकज शुक्ला ने फलां जगह ज्वाइन कर लिया तो वो अपने परिचित पंकज शुक्ला को फोन मिला देता है और पता चलता है कि वो ये वाले पंकज शुक्ला नहीं हैं.

इसी टेंशन से परेशान एक पंकज शुक्ला ने फेसबुक पर हाथ जोड़कर विनती करके कहा है कि न्यूज एक्सप्रेस चैनल में नौकरी मांगने के लिए मुझे फोन मेल न किया करें क्योंकि मैं वो वाला पंकज शुक्ला नहीं हूं, वो वाले पंकज शुक्ला दूसरे हैं. ये वाले पंकज शुक्ला ने जब वो वाले पंकज शुक्ला के बारे में फेसबुक पर लिख डाला तो लोगों को भी मौका मिल गया मजा लेने का. और यह क्रम जारी है. एक सज्जन ने तो वो वाले पंकज शुक्ला का मोबाइल नंबर तक डाल दिया ताकि आगे से किसी को कनफ्यूजन न रहे. ये वाले पंकज शुक्ला इन दिनों मुंबई में हैं और नई दुनिया के रेजीडेंट एडिटर हैं. ये वाले पंकज शुक्ला जी न्यूज में काम कर चुके हैं, एक भोजपुरी फिल्म बना चुके हैं. अमर उजाला में काम कर चुके हैं. वो वाले पंकज शुक्ला इन दिनों न्यूज एक्सप्रेस चैनल में इनपुट इंचार्ज हैं. उसके पहले सीएनईबी में हुआ करते थे. दैनिक जागरण में भी रहे हैं. ये वाले पंकज शुक्ला की वो वाले पंकज शुक्ला से नाम मिलने के कारण हो रही परेशानी का संदेश पढ़ें, जो फेसबुक से लिया गया है.

Pankaj Shukla : मैंने कुछ दिन पहले भी यहां लिखा था कि मेरा न्यूज एक्सप्रेस चैनल से किसी तरह का संबन्ध नहीं है, लिहाजा इस न्यूज़ चैनल में काम करने के इच्छुक लोग मुझे फोन करके, संदेश भेजकर या ईमेल करके अपना समय व्यर्थ न करें। वहां जो पंकज शुक्ला इनपुट के प्रभारी हैं, वे पहले सीएनईबी, इंडिया न्यूज, लाइव इंडिया और दैनिक जागरण (अभिषेक शुक्ल “पंकज” के नाम से) में रहे हैं। उन्हीं से संपर्क करें।

Sunil Singh : naam ka kahar jari hai.

Sarfaraz Saifi : लगता है लोग आपको परेशान कर रहे है ,कुछ ज्यादा ही

Chandan Pratap Singh : पंकज भाई, आप कहें तो पंकज भाई का नंबर दे दूं?

Prasoon Shukla : jab ye abhishek shukla hain to pankaj nवaam kyo rakh liya..

Sanjeev Chauhan : भाई जी जिस पंकज के नाम से आप पीड़ित हैं, उनका नंबर भी फेसबुक पर डाल दें…लो कर लो बात इस नंबर पर नौकरी के लिए पंकज शुक्ला से ….सबको बांट दो…मुझे आशीर्वाद दो। क्योंकि आपकी समस्या का समाधान मैं कर रहा हूं… PL NOTE PANKAJ SHUKLA’S NO.9999264439

Mayank Tiwari : sir ab to aapke bansal news me jane ki khabar hai…

Pankaj Shukla : ‎@ Sunil Singh – हां, भाई अब तो बहुत हो गया। लोग तो न्यूज एक्सप्रेस के दफ्तर पहुंचकर मुझे ढूंढ भी रहे हैं और चैनल के दफ्तर से ही मुझे फोन करके पूछते हैं कि आप कहां बैठे हैं?

Pankaj Shukla : ‎@ ‎Sarfaraz Saifi – हां, भाई। दिक्कत ये है कि लोग अपने से ही मान लेते हैं कि पंकज शुक्ल की बात चली है तो मैं ही होऊंगा। अब मैं इतना मशहूर भी नहीं।

Pankaj Shukla : ‎@ ‎Chandan Pratap Singh – नंबर तो है मेरे पास भी और उनसे बातचीत भी है। मुझे कष्ट उनसे नहीं उनके चाहने वालों से है। ज्यादा दिन नहीं जब किसी संवाद सहयोगी ने चैनल से पेमेंट न मिलने की बात भी कहनी शुरू कर दी।

Pankaj Shukla : @ Sanjeev Chauhan – पीड़ित नहीं भाई परेशान। और, किसी को आशीर्वाद देने लायक मैं खुद को नहीं पाता। आशीर्वाद देने लिए बड़ा बल चाहिए भाई।

Pankaj Shukla : @ Mayank Tiwari – ख़बरें तभी सच मानें जब पुष्टि हो जाए। जय जोहार।

Anuranjan Jha : नाम में क्या रखा है … कोई पंकज जी से पूछे …..

Anuranjan Jha : पंकज जी थोड़ा ठहरिए … जिले के रिपोर्टर्स पैसे भी मांगेंगे अब

इस यज्ञ में आप भी स्वाहा बोल सकते हैं, क्लिक करें- नाम का घनचक्कर

Comments on “पंकज शुक्ला से परेशान पंकज शुक्ला ने फेसबुक पर दुखड़ा रोया

  • shravan shukla says:

    hahaha..name ka chakkar aisa hi hota hai… meri wajah se shravan shukla ji ek baar fans chuke hai..madad mujjhe chahiye thi jo kisi ne ki nahi…name uska shravan hone ki wajah se unhe hi sab madad dene lag gaye hai…hahaha

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  • यशवंत भाई आपने यह एक ऐसा विषय छेड़ दिया है जिसका शिकार मैं भी पिछले कुछ वर्षों से बना हुआ हूँ… हालांकि इससे मुझे कुछ नुक्सान नहीं हुआ है और अभी तक सिर्फ कुछ लोगों को असमंजस का सामना करना पडा है… दरअसल जब मैं पंजाब केसरी दिल्ली में कार्यरत था तो वहां हमारे एक सहयोगी विजेंदर कुमार शर्मा भी सर्कुलेशन विभाग में काम करते थे… और पंजाब केसरी छोड़ने के कई वर्षों बाद उन्होंने अपनी एक संस्था बना डाली है — आल जर्नलिस्ट ऐसोसिएशन और अपने नाम को भी रख डाला वी.के. शर्मा ! जब उन्होंने मीडिया जगत में अपने सन्देश भेजे तो लोगों ने मुझे बधाई डे डाली… जबकि वो काम मैंने नहीं किये थे और ना ही कोई ऐसोसिएशन बनायी थी … मैं तो साधारण गति से अपनी पत्रकारिता के पथ पर चलने वाला एक शांत सा पत्रकार/ सम्पादक रहा हूँ… लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स का हिंदी संस्करण लिखने में स्वयं को व्यस्त रखता हूँ और अब इंडिया न्यूज़ चैनेल में रिपोर्टिंग करता हूँ… बीच में कुछ बार अपने दोस्त विजेंदर कुमार शर्मा यानि नए रूप में बने वी.के. शर्मा से बातचीत भी हुई है लेकिन उन्होंने अपने नाम परिवर्तन का औचित्य कभी जाहिर नहीं किया.. सच तो यही है कि वरिष्ठता का ध्यान रखते हुए कनिष्ठों को कुछ विचार कर स्वयं ही ऐसे असमंजस के कार्यों को निपटा लेना चाहिए… किसी का नाम पहले से ही रखा गया है और उसी क्षेत्र में कोई जबरदस्ती वो ही नाम रखकर भ्रान्ति पैदा करता है तो उसे सभ्य नहीं कहा जा सकता… मीडिया जगत में काफी समय से लोग मुझे जानते हैं और कई लोगो ने सिर्फ वी.के. कहने भर से ही मुझे पहचाना है उसमे पंजाब केसरी के श्री अश्विनी कुमार जी की बात करें या फिर एनडीटीवी के आशीष भार्गव की.. सभी मुझे पिछले बीस-बाईस वर्षों से वी.के. शर्मा के नाम से जानते हैं… इसलिए यदि भाई विजेंदर कुमार शर्मा अपने असली नाम से ही अपनी पहचान बनाए रखें तो भ्रान्ति का सिलसिला थम सकेगा… वैसे विजेंदर भाई बहुत अच्छे इंसान हैं और मीडिया में कुछ अच्छा करने का प्रयास कर रहें हैं… धन्यवाद….

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