पत्रकारों की चार किताबों का नीतीश ने किया लोकार्पण

किताबपटना में सामूहिक रूप से तीन वरिष्ठ पत्रकार और एक कार्टूनिस्ट की पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 27 दिसम्बर 2010 को वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित दैनिक हिन्दुस्तान, पटना के वरिष्ठ संवाददाता श्रीकांत की पुस्तक ‘बिहार : राज और समाज’ तथा दैनिक हिन्दुस्तान के ही समन्वय संपादक अजय कुमार की पुस्तक ‘चुनाव : अथ बेताल कथा’ के साथ-साथ प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित वरिष्ठ पत्रकार/लेखक हेमंत की पुस्तक ‘इस देश में जो गंगा बहती है’ और हिन्दुस्तान पटना के कार्टूनिस्ट पवन की पुस्तक ‘कार्टूनों की दुनिया’ का लोकार्पण किया।

इसके बाद समारोह को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि जहां पवन के कार्टून रोज सुबह गुदगुदाते हैं, वहीं अजय और श्रीकांत के आलेख चिंतन और विचार देते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में बहुत कुछ है और बिहार के लेखक बहुत कुछ कर रहे हैं। इस अवसर पर श्रीकांत ने ‘बिहार: राज और समाज’ पुस्तक की चर्चा करते हुए कहा कि इसमें बिहार की राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक सहित अन्य पहलुओं में हुए बदलाव को आकड़ों व तथ्यों के साथ रखा गया है।

अजय कुमार ने अपनी पुस्तक ‘चुनाव : अथ बेताल कथा’ के लिखे गये प्रसंग की चर्चा की और चुनाव के दौरान अखबार के लिए लिखे स्तंभ ’फिर बेतलवा डाल पर’ पर प्रकाश डाला। अखबार में लिखे गये अस्सी स्तंभ ‘फिर बेतलवा डाल पर’ का ही संकलन है ‘चुनाव : अथ बेताल कथा’। वहीं कार्टूनिस्ट पवन ने ‘कार्टूनों की दुनिया’ पुस्तक की चर्चा की।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, ग्रामीण कार्य मंत्री भीम सिंह, शिक्षा मंत्री पीके शाही और सांसद शिवानंद तिवारी सहित कई पत्रकार, साहित्यकार उपस्थित थे।

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Comments on “पत्रकारों की चार किताबों का नीतीश ने किया लोकार्पण

  • मदन कुमार तिवारी says:

    बलात्कारी के पक्षधर उप मुख्य मंत्री के हाथों क्या अर्पित करवा रहे हो। छोडने वाला नही हूं चमचो ।

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  • madan kumar tiwary says:

    बडे माहिर खिलाडी हो भाई आपलोग , चुनावी मदद को वसुलना शुरु भी कर दिया। आज नीतीश सता में हैं तो उनसे लोकार्पण करवाया , अगर लालू रहते तो उनसे करवाते । लेकिन भैया जिस लोक को अर्पण कर रहो हो अपनी किताबें, संकलन और कार्टून , वह स्वीकार भी करेगा की नही तुम्हारा अर्पण , यह सोचा है। खैर वह करे या न करे , सरकारी पुस्तकालयों में खरीद का तो जुगाड बैठा हीं लिया।

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