पांच लाख माह में राडिया के नौकर बने थे बैजल

: रतन और राडिया के नंगे अवतार : प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सीबीआई को हड़काने और सर्वोच्च न्यायालय के सामने गिड़गिड़ाने के बाद आखिरकार ए राजा और उसकी संदिग्ध सहेली और दलाल नीरा राडिया के घर और कार्यालयों पर छापों की अनुमति दे दी। सीबीआई को मालूम था कि उसे क्या चाहिए और वह उसे मिलता जा रहा है। सबसे ज्यादा मुसीबत में रतन टाटा हैं जो भेद नहीं खुले इसके लिए सर्वोच्च न्यायालय तक अर्जी लगाने चले गए थे कि उनके निजी जीवन के रहस्य सामने नहीं आने चाहिए। आज के छापों ने उन पर भी कोई आवरण नहीं छोड़ा। प्रदीप बैजल दूर संचार नियामक प्राधिकरण- ट्राई के मुखिया थे।

उन्हें इस जिम्मेदारी के कारण स्पेक्ट्रम घोटाले पर अंकुश रखना था और इसी काम के लिए वे तैनात भी किए गए थे। कल उनके घर और उनके एक रिश्तेदार के फॉर्म हाउस पर भी छापा पड़ा। किसी को आश्चर्य नहीं हुआ जब नीरा राडिया के निजी कागज प्रदीप बैजल की अलमारियों से बरामद हुए। सीबीआई अधिकारी बगैर किसी आधिकारिक बयान के अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि नीरा राडिया के दक्षिण दिल्ली स्थित सौ करोड़ के फॉर्म हाउस से मिली डायरी और एलबम को मान रहे हैं जिनमें राडिया के साथ उसके लगभग सभी संपर्क मौजूद हैं और उनके नाम, फोन नंबर और समय समय पर दी गई रकम भी दर्ज है। यह मामला अब हवाला घोटाले का पिता ही नहीं, परदादा साबित होने वाला है। कई चर्चित और जानी मानी विभूतियां ऐसी भी हैं जिन्हें नीरा ने नारियों से कतार्थ किया हैं और उनकी वीडियो फिल्म और तस्वीरें भी खींच ली है। ऐसे लोगों के लिए नीरा राडिया बाकायदा विष कन्या बन कर प्रकट हुई है।

राजा, केतन और उसके सहयोगियों के ठिकानों पर पहले भी छापे पड़ चुके हैं लेकिन नीरा राडिया और ए राजा के घर पर एक साथ छापे मार कर सीबीआई ने जाहिर कर दिया है कि वह किसी को छोड़ने वाली नहीं है। नीरा राडिया इन छापों के वक्त सामने नहीं आई और कनॉट प्लेस के पास गोपालदास टावर्स में वैष्णवी कम्युनिकेशंस पर तड़के छापा मारने के लिए सीबीआई की सात टीमों में से दो को ताले भी तोड़ने पड़े। इसी इमारत में टाटा और अंबानी के भी कार्यालय है और रतन टाटा बहुत बड़ी आफत में फंस गए हैं।

रतन टाटा नीरा राडिया से न सिर्फ व्यापारिक रिश्ते रखते थे बल्कि निजी तौर पर भी नीरा और टाटा काफी करीब थे और यह बात कई टेलीफोन संवादों में जाहिर हो चुकी है। सीबीआई अधिकारियों की सूचना पर भरोसा करे तो रतन टाटा और नीरा राडिया के कुछ अंतरंग क्षण भी उनकी पकड़ में आए हैं। नीरा राडिया के खिलाफ अभियान का नेतृत्व सीबीआई के डीआईजी विनिता ठाकुर ने किया। विनिता ठाकुर ने बताया कि प्रदीप बैजल एक जमाने में नीरा राडिया को आदेश दे सकते थे लेकिन अब तो वे बाकायदा नीरा की नौकरी करते हैं और पांच लाख रुपए महीने पाते हैं।

नीरा के जाल में बहुत नामी लोग हैं और इनमें आज के छापों से जाहिर हुआ कि बड़ी और छोटी कृपाएं पाने वाले चालीस से ज्यादा तो पत्रकार है। लोग नाहक ही बरखा दत्त, वीर सांघवी और कुछ प्रभु चावला जैसे अल्लू पल्लू पत्रकारों को घेर कर शोर मचा रहे हैं। जिन पत्रकारों की जन्मपत्री नीरा राडिया के यहां से बरामद हुई उनमें से कई ऐसे मीडिया घरानों के हैं जो अपने आपको बहुत पाक साफ कहने वाले बनते हैं। कोलकाता, दिल्ली और चेन्नई में खास तौर पर नीरा राडिया संपर्क हैं।

ए राजा की बात अगर करें तो उनकी सबसे बड़ी मुसीबत उनके रोकड़े का हिसाब लगा कर ठिकाने लगाने वाले हवाला व्यापारी महेश जैन के यहां पड़ा छापा है और यहां कमाल की बात यह है कि राजा के यहां पड़े छापे में सीबीआई को महेश जैन का नाम राजा की डायरी से मिला था। आम तौर पर आर्थिक घपलों में नेताओं के नाम हवाला वालों के डायरी से मिलते हैं। तमिल टाइगर्स की समर्थक पत्रिका नक्कीरन के संपादक कामराज के घर चेन्नई में छापा पड़ा। तमिल राष्ट्र का नारा बुलंद करने वाले और करुणानिधि परिवार के अंतरंग जगदीश गास्पर के घर पर भी छापा पड़ा मगर वे शायद पहले से सतर्क थे इसीलिए उनके यहां से आखिरी समाचार मिलने तक कोई खास बरामदगी नहीं हुई थी।

नीरा के पैसों पर बहुत दिनों तक पलने वाले ए राजा के सचिव और बाद में आर्थिक सलाहकार रहे आर के चंडोलिया के यहां पहले ही छापे पड़ चुके हैं और वहीं से मिली हुई जानकारी को आधार बनाया गया है। जिस दिन यानी 25 नवंबर को नीरा राडिया को प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने बुला कर नौ घंटे तक पूछताछ की थी उसके बाद भी नीरा राडिया की हिम्मत माननी पड़ेगी कि उसने पत्रकारों के बीच जा कर कहा था कि मैं 500 पन्नों के दस्तावेज इन अफसरों को दे कर उनका मुंह बंद कर आई हूं। राडिया को लोगों का मुंह बंद करने की पुरानी आदत है। चाहे नोटों से करे, चाहे होठो से, चाहे शराब से, चाहे शबाब से।

लेखिका सुप्रिया रॉय पत्रकार हैं. इन दिनों डेटलाइन इंडिया न्यूज एजेंसी में वरिष्ठ पद पर कार्यरत हैं.

Comments on “पांच लाख माह में राडिया के नौकर बने थे बैजल

  • बिल्‍लू says:

    राडिया को लोगों का मुंह बंद करने की पुरानी आदत है। चाहे नोटों से करे, चाहे होठो से, चाहे शराब से, चाहे शबाब से।….रतन टाटा की पूरी साख इन होठों ने ही धूल में मिला दी। टाटा ने शादी नहीं कि तो क्‍या बरात तो देख ही ली।

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