प्रभात खबर ने प्रतिद्वंद्वी अखबारों का नींद हराम किया

उत्तर बिहार में प्रभात खबर को मिल रही अच्छी सफलता ने हिन्दुस्तान और दैनिक जागरण की बेचैनी बढ़ा दी है। दोनों अखबारों को लगातार तगड़ा झटका लग रहा है। इनकी प्रसार संख्या में लगातार गिरावट ने सबको हैरत में डाल दिया है। उधर, इस झटके का सामना करने के लिए दैनिक जागरण ने तो अपनी तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन हिन्दुस्तान अभी भी नम्बर वन के नशे में चूर है। जबकि सबसे अधिक हिन्दुस्तानी ही प्रभात खबर में गये हैं।

हिन्दुस्तान का यह हाल तब है जब सबसे ज्यादा प्रसार संख्या में गिरावट इसी अखबार का है। सूत्रों के अनुसार, प्रभात खबर की भावी रणनीति को भांपकर दैनिक जागरण अपनी तैयारी में लग गया है। जागरण के प्रबंधन ने फैसला लिया है कि वह फिर से उसी रास्ते को पर चलेगा, जिससे उसने वर्ष 2000 और उसके बाद के साल में सफलता पायी थी। वही टीम और वही रणनीति। इसी के तहत अब जिलों की कमान फिर से उन्हीं लोगों के हाथों में सौंपने की तैयारी हो रही है, जिन लोगों ने जागरण को नम्बर दो पर पहुंचाया था। पुराने प्रभारियों व सेकेंड प्रभारियों को अपने-अपने गृह जिले में तैनात किया जा रहा है। ताकि उनके अनुभवों व कुशल कार्य कैशल से प्रभात खबर के इरादे को ध्वस्त किया जा सके।

जागरण प्रबंधन का इसके पीछे तर्क यह है कि इससे हॉकरों व पाठकों के बीच फैल रहे कनफ्यूजन व निराशा को कम किया जा सकेगा। फिर से एक नया माहौल और जोश का वातावरण बनेगा। मगर हिन्दुस्तान का प्रबंधन व संपादकीय विभाग फिलहाल टेंशन में तो जरूर है, पर किंकर्तव्यविमूढ़। संपादकीय विभाग इस चिंता में डूबा है कि क्या करें और क्या न करें। गौर करें तो हिन्दुस्तान अखबार से सबसे पहले सेल्स के अमरेश झा, पटना के विज्ञापन विभाग के जीएम पुनीत खंडेलिया, कौशल वर्मा, उसके बाद मुजफ्फरपुर के यूनिट मैनेजर सुरेश चचान और चार-पांच रोज पहले मुजफ्फरपुर के सेल्स प्रभारी पीके कार ने प्रभात खबर का दामन थाम लिया। ये सभी लोग यूनिट के स्थापना काल से हिन्दुस्तान के मजे हुए खिलाड़ी रहे हैं।

हाल यह है कि इन दिनों मुजफ्फरपुर यूनिट बगैर मैनेजरों के चल रही है। मुजफ्फरपुर में पिछले दस साल से सफल पारी खेल रहे पीके कार के प्रभात खबर में चले जाने के बाद तो उत्तर बिहार में हिन्दुस्तान की प्रसार संख्या लगातार गिर रही है। कहीं अखबार पहुंच रहा है तो कहीं नहीं। ज्यादा खराब हालत जिलों में हो गई है। खबर यह भी है कि प्रभात खबर में गये ये दिग्गज हिन्दुस्तानी भव्ष्यि में हिन्दुस्तान की परेशानी और बढ़ाने वाले हैं। इसकी तैयारी भी हो रही है। इन लोगों ने प्रभात खबर प्रबंधन को सलाह दी है कि हिन्दुस्तान को उसके पुराने फार्मूले से ही पटखनी देनी है। उसी पुराने कैसेट को फिर से बजाना है, जिसके सहारे हिन्दुस्तान ने उत्तर बिहार में झंडा गाड़ा था।

सूत्रों ने बताया कि प्रभात खबर अब जिलों में तोड़फोड़ करेगा। इन पूर्व हिन्दुस्तानियों ने प्रभात खबर प्रबंधन को बताया है कि जिलों में फिलहाल हिन्दुस्तान की जो कमजोर और अराजक हालत है, उसका फायदा आसानी से मिल सकता है। इसको देखते हुए सेल्स, विज्ञापन और संपादकीय विभाग के लिए वैसे लोगों की सूची बनायी जा रही है, जिन लोगों ने हिन्दुस्तान को इस मुकाम तक पहुंचाया। ताजा खबर के मुताबिक, इसकी शुरुआत चंपारण से होनेवाली है। यहां कभी हिट जोड़ी रही सुजीत-विजय को फिर से एक मंच पर लाने की तैयारी है। इसी जोड़ी ने दैनिक जागरण से मुकाबले के समय हिन्दुस्तान को ऊंचाई दी थी। इस जोड़ी को पूर्वी व पश्चिम चंपारण का संयुक्त प्रभार सौंपने की योजना है। इनमें एक चंपारण में तो दूसरे मुजफ्फरपुर हिन्दुस्तान के संपादकीय विभाग में तैनात हैं।

उत्तर बिहार के मीडिया जगत के जानकारों का कहना है कि प्रभात खबर यदि इस जोड़ी को एक मंच पर ला दिया तो चंपारण में हिन्दुस्तान को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। कारण कि इस जोड़ी की सेल्स, विज्ञापन व खबरों पर मजबूत पकड़ है। इसके अलावे दूसरे जिलों में भी पुराने हिन्दुस्तानियों को ये तोड़ने में कामयाब हो जायेंगे। हिन्दुस्तान के संपादकीय विभाग को भले ही इसकी चिंता न हो पर सेल्स और विज्ञापन विभाग जरूर चिंतित है। यदि प्रभात खबर की यह योजना सफल हो गई तो इसमें कोई दो राय नहीं कि हिन्दुस्तान को उत्तर बिहार के बाजार में बुरे दिन देखने को मिल सकते हैं।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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Comments on “प्रभात खबर ने प्रतिद्वंद्वी अखबारों का नींद हराम किया

  • tab to bahi g hindustan ko chahiye ki champaran ke purane bureao chief sanjay upadhayay ko wapas lana chahiye

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  • Till the resignation of Puneet Khandelia from advertisement and Arun Ashesh from editoral new Hindustan management was full in command and were taking everything very lightly. They were showing no respect and consideration for anyone and were behaving like kings. Prabhat Khabar was also not getting any resource worth naming from Hindustan. Till this time all who joined PK were either were on notice from Hindustan or were transferred to make them uncomfortable.
    It all changed with departure of these two from Hindustan which made PK a choice job instead of stopover job. ETV also brought few resources from hindustan specially in editorial while PK looked for top management resources.
    It is true that in coming days lot of action can be seen on this front after joining of Suresh Chachan which is also a handiwork of Puneet.
    it’s going to be very intense…………………..it seems.

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  • pawan panday gonda says:

    need to tab haram hogi jab paper bazar ma ayaga. kitne dino sa aa raha hai. tarkas ka management kya hai. samajh ma nahi ata

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  • yaswant ji kya prabhat khabar aapko jyda add de ra ha hain kyo kiaaj kal aap prabhat khabar ka jyada gun gan kar rahe hain or ha ek bat bole yadi jharkhand main koi patkaro ka soshan kiya wo hain harivansh ji hari vansh ji ki cahat hain ki patna ke sahare sasnsad bhawan pahun che lakin sayad hi unki ye icha purti ho nitish ke karib aane ke liye to un hone ek prayog kar chuke hain jamshedpur main ranjit ko editor bana kar

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  • rakesh singh says:

    bhai abhi bhaskar ane wala hai….. sab ka halat bura hoga… jo jharkhannd me hua…… khabi ranchi me pk number one hua karta tha….. but abhi halat karab hai…… wahe hall hindusatn ka bihar me hoga….. kheal me bhaut maza hai mera bhai… so enjoy….

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  • Hindustan ke bure din shuru ho gaye hain…. Punit khandelia ke jane ke baad Patna ki marketing team puri taraha bikhar gai hai……… Prashant Khare nebhi Hindustan ko chhod diya suna hai….. Target bhi meet karna mushkil hogaya hai……. Nai marketing team pareshan ho market mein ad ke liye mare mare ghum rahi hai……magar Pk aur DJ pani pilye hue hai…..

    Ab hindustan ke pas ek hi rasta bacha hai Punit khandelia aur Prashant Khare jaise logon ko team me wapas lana…..[b][/b]

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  • Satya Bachan Rahul Bhai.
    Agar Hindustan ka bhala cahte hain to un logon ko wapas bulana hoga jo ise chod kar chale gaye. Pichle koch dino ke ghatnain saaf batati hain ki iske bagai gujara nahin hone wala hai cahe kitne bhi bajigari kar li jaye
    1. Muzaffarpur ka haal to dayan ho hi gaya hai ab jara Bhagalpur ka haal sun lain……….Pichele do month se ek naya aadmi unit head banaya gaya tha UP se as usual. usne aate hi sari advertisement team bhi UP se pakad kar manga liya. Patna main baithe unke praneta log delhi ko batate rahin ki gajab ho jayega………..itni revenue aayegi ki rakh nahin payainge. 2 month bad special inquiry baitha di gayi hai kiyonki jabardast corrution hua hai. Kuch to bardast karte aate he lag gaye……..
    2. Monday ko delhi ne Patna ko revenue ke liya khoob danta…..kaha sab bekar ho. Iske baad ki dastan suniyain
    Bihar head chup chap HT Editor ko le kar PRD Secretary se milne chale gaye. Khoob batain hui ki mar rahian hain kuch kar dijiye. Tabhi wahan GM advertisement apane ek departmental saathi ko lekar pahunch gaya apli alag se PG karne. In sare tamashain main government team ko shamil bhi nahin kiya gaya aur wo bechare sooch rahen hai ki kya karain. Sunte hain ki sab dusri naukri khoj rahin hai.
    dhanyavad

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