गाजीपुर में हमला कर फोटो पत्रकार को लूटने के मामले में आबकारी विभाग के शेष अभियुक्तों की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस खामोश है। अब तक घटना में लूटे गये कैमरों की भी बरामदगी नहीं हुई है। इसको लेकर पत्रकारों में रोष बढ़ता जा रहा है। बीते बुधवार को आबकारी विभाग के दफ्तर में डिप्टी सीएमओ डा. आरके मेहरा की पिटाई की घटना को कैमरे में कैद करते वक्त पत्रकार गुलाब राय पर हमला किया गया था।
हमले के दौरान आबकारी कर्मियों और ठेकेदारों ने गुलाब को मारपीट कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था और उनके दो कैमरे लूट लिये थे। हालांकि इस मामले में पुलिस का रवैया शुरू से पक्षपातपूर्ण रहा, मगर मीडिया कर्मियों के दबाव के चलते आखिर में प्राथमिकी दर्ज करनी पड़ी थी। फिर पुलिस ने कुछ ले दे के बिना वादी का बयान लिये लूट की धारा ही बदल दी, लेकिन सीजेएम विजय आजाद ने गिरफ्तार आबकारी निरीक्षक राजेश यादव तथा मुख्य आरक्षी विन्ध्याचल राय को आईपीसी की धारा 394 के तहत वारंट बनाने को कहा और फिर उन दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था।
मुकदमे में दो नामजद अभियुक्तों के अलावा आठ अज्ञात अभियुक्त हैं। यह लोग भी विभागीय कर्मी हैं या ठेकेदार हैं, लेकिन पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए अब तक कहीं कोई दबिश नहीं डाली है। इस सिलसिले में पुलिस कप्तान डा. मनोज कुमार का दावा है कि -शेष अभियुक्तों को भी शीघ्र गिरफ्तार कर लूटे गये कैमरे बरामद किये जायेंगे, लेकिन पुलिस की लापरवाही उसकी निष्पक्ष कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ी कर रही है। क्या इन पुलिस वालों को पत्रकारों से भी रिश्वत की उम्मीद है या फिर कहीं आरोपियों ने उनकी जेबें गरम तो नहीं कर दी है।












Media
April 8, 2011 at 7:55 am
सेवा में
मीडिया परिवार
निवेदन ये है की हिंदुस्तान(Hindustan Times) के फोटो ग्राफ़र आज़म हुसैन को जान से मारने की धमकी दी जिसकी खबर ७-०४-२०११ के अमर उजाला में छपी है. आज़म हुसैन का दोष सिर्फ इतना था की वोह पूरी इमानदारी से फोटो ग्राफी व रिपोर्टिंग करते है जिसकी तारीफ में हमें कुछ नहीं कहना है उसकी इमानदारी और होसले के बारे में लखनऊ की मीडिया जगत में काफी अच्छी पहचान है. इस वक़्त आवशकता है की मीडिया परिवार को एक होने की. आज़म हुसैन जैसे कितने पत्रकार है जिन्हें समाज के भय से खामोश हो जाना पड़ता है .
घटना उस समय की है जब ६ अप्रैल को दिन में एक बजे नगर निगम के अधिकारी व ठाकुर गंज पोलिस बगैर किसी नोटिस के महजबीं फातिमा पति महताब अली निवासी ४६७/ १५२ क के घर में घुस गए उस समय महजबीं फातिमा की पुत्री रिंकी १९ वर्षीय अकेली थी घर में उसके साथ गली गलोच की और घर के कमरे में धकेल कर बंद कर दिया और घर का बाथरूम व कुछ हिस्सा तोड़ डाला. बड़े अफ़सोस की बात है की इस घटना को नगर निगम के अधिकारी व ठाकुर गंज पोलिस ने इस दूरभागय कम को अंजाम दिया जो देश के सविधान को भूल चुके है.ये अधिकारी मोहम्मद अली जफ़र व उनके तीनो पुत्र मीसम नकवी, शान नकवी, (जो पेशे से खुद को वकील बताते है) मीसम नकवी शिया कॉलेज में दलाली करके स्टुडेंट का एडमीशन करवाते है जबकि इरम नकवी की खुद की परचून की दुकान है से हाथ मिला चुके है जबकि ठाकुरगंज की पुलिस अभी तक शान नकवी और मीसम नकवी का साथ देते आ रहे है. एक वर्ष से ज्यादा वक़्त बीत चुका है अपने पडोसी महजबीं फातिमा के परिवार को परेशान करते हुवे जिसकी रिपोर्ट ठाकुरगंज पोलिस को भी है.
अजाम हुसैन की जान को खतरा है जबकि आज़म हुसैन की माँ काफी समय से बीमार है इस घटना से वोह और ज्यादा बीमार हो गेई है मीडिया से अनुरोध है की वोह मामले की विस्तृत जानकारी लेकर अपने मित्र आज़म हुसैन की मदद करे.इस देश को इमानदार पत्रकार की ज़रुरत है. आशा है की आप सब सहयोग देंगे.
आपका आभारी
थ्रू मीडिया परिवार