बृजलाल कानून में अज्ञानी हैं : नरेंद्र यादव

नरेंद्र का इटावा में स्वागत-सत्कार
नरेंद्र का इटावा में स्वागत-सत्कार
उत्तर प्रदेश के स्पेशल डीजीपी बृजलाल को कानून का ज्ञान नहीं है, तभी तो वो कुछ का कुछ बोलते हैं। यह कहना है यूपी पुलिस वेलफेयर एसोसियेशन के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह यादव का। अपने संगठन को ताकत देने के इरादे से पूरे राज्य भर के दौर पर निकले हुए हैं नरेंद्र। नरेंद्र की हर गतिविधि पर नजर रखने के लिये खुफिया पुलिस के एक नहीं, दर्जन भर के करीब कर्मियों को आला अफसरों के इशारे पर लगाया गया है।

इटावा में नरेंद्र किससे मिले, क्यों मिले, क्या किया, इसे संकलित करके खुफिया विभाग के लोगों ने अपने आला अफसरों के पास रिपोर्ट भेज दी है। यहां तक कि खुफिया विभाग के लोगों ने नरेंद्र के साथ आए एसोसिएशन के पदाधिकारियों की प्रेस वार्ता के दौरान फोटोग्राफी भी की है। आला आईपीएस अफसरों की मनमानी रोकने के इरादे से गठित किए गए संगठन का असर अब राज्य भर के तमाम जिलों मे धीरे धीरे नजर आने लगा है। लेकिन इस सबके बाबजूद आला अफसरों की मनमानी जारी है। संगठन के पदाधिकारियों को परेशान करने के इरादे से आनन फानन में एक जिले से दूसरे जिलों मे तबादले किये जा रहे हैं ताकि संगठन का कामकाज प्रभावित हो जाये।

आईपीएस अफसरों के विरोध के बावजूद खड़े किए गए संगठन यूपी पुलिस वेलफेयर एसोसियेशन के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह यादव शनिवार को अपने गृह जिले इटावा आये जहां पर उनका संगठन के पदाधिकारियों के अलावा कुछ चुनिंदा पुलिसजनों ने कालका मेल ट्रेन से उतरते ही स्वागत किया। संगठन को मजबूती देने के इरादे से इटावा आये नरेंद्र सिंह से तमाम पुलिस जन सादी वर्दी में ही मिले हैं। खुद नरेंद्र सिंह सादी वर्दी में आये थे।

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र सिंह यादव का कहना है कि वे जल्द ही राजधानी लखनउ में संगठन की एक अहम बैठक आला अफसरों की अनुमित के बाद करेंगे जिसमे पूरे राज्य भर के पदाधिकारी हिस्सा लेंगे। इटावा में पत्रकारों से बात करते हुये नरेंद्र सिंह का कहना था कि अब तक राज्य के 40 जिलों और करीब 25 पीएसी बलों मे संगठन का गठन कर दिया गया है और जल्द ही पूरे राज्य में संगठन का गठन हो जायेगा।

प्रेस कांफ्रेंस में नरेंद्र के साथ सुभाष यादव
प्रेस कांफ्रेंस में नरेंद्र के साथ सुभाष यादव
इस संगठन को खड़ा करने के चक्कर मे नरेंद्र सिंह के खिलाफ रासुका समेत 32 आपराधिक मामले यूपी के कई जिलों मे कायम किये गये लेकिन इसके बाबजूद भी इलाहबाद उच्च न्यायालय के निर्देश पर इस संगठन को बड़ी मुश्किल से खड़ा कर पाये हैं। नरेंद्र सिंह बताते हैं कि पूरे देश के 17 राज्यों मे पुलिस संगठन बने हुये हैं, इसी से प्रेरणा लेकर उत्तर प्रदेश में पुलिस संगठन को खड़ा किया गया है।

राज्य भर के हर पुलिसकर्मी के वेतन से प्रति माह 25 रुपये बिना किसी नियम के काटा जाता था, जिसे उच्च न्यायालय के आदेश पर रुकवाने मे कामयाबी मिल गई है। ऐसा ही पीएसी बल से पानी के नाम पर की जाने वाली मनमानी वसूली को भी रुकवा दिया है। उत्तर प्रदेश में वैसे तो कई विभागों में काम करने वालों के अपने संगठन हैं लेकिन पुलिस कर्मियों का सठंगन नया है। दो दशक से अधिक लंबी लड़ाई के बाद पुलिस संगठन बनाने में कामयाबी मिलने से इसके गठन में लगे पुलिस जनों मे खासा उत्साह है। इस संगठन का नाम यूपी पुलिस वेलफेयर एसोसियेशन रखा गया है। देश के दूसरे राज्यों में पुलिस यूनियनों की तर्ज पर यूपी के पुलिसकर्मियों ने भी समस्याओं के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए 90 के दशक में यूनियन गठित करने की पहल की थी जिसका नतीजा अब दिख रहा है।

लेखक दिनेश शाक्य सहारा समय उत्तर प्रदेश उत्तराखंड न्यूज चैनल के इटावा में रिपोर्टर हैं. उनसे संपर्क dinesh.sahara@gmail.com के जरिए किया जा सकता है.

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