मजीठिया बोर्ड की सिफारिशें मानी जाएं : केंद्र

नई दिल्‍ली : केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा है कि मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें मानी जांए. क्‍योंकि पत्रकारों और गैर पत्रकारों के बढ़े हुए वेतन की सिफारिशें तितरफा बैठकों और सरकार की छानबीन का नतीजा है. जस्टिस जीआर मजीठिया की सिफारिशों की आखिरी रपट को चुनौती देते हुए अदालत में एबीपी प्राइवेट लिमिटेड (जहां से बांग्‍ला दैनिक आनंद बाजार पत्रिका व टेलीग्राफ का प्रकाशन होता है) ने याचिका डाल रखी है.

केंद्र सरकार का कहना है कि यह कहना अनुचित है कि यह न्‍याय संगत नहीं है, अतार्किक है और याचिका दायर करने वाले के अधिकारों के खिलाफ है. इस मामले की सुनवाई 12 सितम्‍बर को होनी है. केंद्र का कहना है वेतन देने की नियोक्‍ता की क्षमता के आधार पर ही वेतन का ढांचा तक किया गया. बोर्ड ने कानून की संदर्भित व्‍यवस्‍था के चलते वेतन की दरों को अखिल भारतीय आधार पर न तो स्‍थाई तौर पर तय किया और संशोधित किया. ‘अस्थिर वेतन’  (वैरिएबल पे) के मुद्दे पर केंद्र सरकार का कहना है कि ”अखबारी कर्मचारियों को ‘वैरिएबल वेतन’ बतौर मिलने वाली राशि समुचित है.”

वेजबोर्ड अनिवार्य तौर पर कहते रहे हैं कि अखबारी कर्मी चाहे वे ठेका-मजदूर हों या फिर नियमित कर्मचारी उनके वेतन उसी लिहाज से तय हों. खासतौर से वेतन तय करने और संशोधित करने की सिफारिशों के लिए ही गठित किए बोर्ड ने अपने बुद्धि विवेक से सेवानिवृत्ति और दूसरे मुद्दों पर सिफारिशें दी हैं.

केंद्र का कहना है कि वेजबोर्ड ने जब अपनी रपट दे दी है तो ऐसे में इसके गठन के तौर-तरीकों पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए. क्‍योंकि वेजबोर्ड तितरफा संगठन है जिसकी सिफारिशें इससे जुड़े सभी लोगों को इसलिए माननी चाहिए क्‍योंकि वे सहज और तार्किक हैं. इसके साथ ही केंद्र ने यह भी कहा है कि यदि बोर्ड कोई ऐसी सिफारिश करता है जो इसके कार्यक्षेत्र में नहीं होती तो आदेश जारी करने के पहले इसकी पूरी छानबीन की जाती है.

समय समय पर वेजबोर्ड के गठन का इतिहास दुहराते हुए केंद्र ने साफ कहा है कि वेजबोर्ड की सिफारिशों को अमान्‍य, स्‍वेच्‍छाचारी और अतार्किक नहीं कहा जा सकता. केंद्र ने इस आरोप को खारिज किया कि इन सिफारिशें से संविधान के तहत याचिकाकर्ता को हासिल अभिव्‍यक्ति की आजादी पर असर पड़ता है. केंद्र का कहना है कि याचिकाकर्ता के तमाम भय निर्मूल हैं इसलिए याचिका खारिज की जाए.  साभार : जनसत्‍ता

Comments on “मजीठिया बोर्ड की सिफारिशें मानी जाएं : केंद्र

  • Kya media corporate mafia ke haanth me ja raha hai? Aaj ek sarkari chaprasi chaparasi ka vetan 15000 Rs aur ek clerk ka vetan 25000 Rs se kam nahi hai. Desh ka manyata prapt special correspondent ko clerk ka vetan bhi nasib nahi hota. Correspndent ko to chaprasi se bhi kam vetan milta hai. Aakhir Majithiya report kyon lagu nahi ho raha hai? Kendra ko lagta hai ki media malik ya mafia unse naraj ho jayega. Kendra kitna kamjore hai issi se pata chalta hai. Kendra ko sochna chahiye ki Anna ki aandhi me use media se kya madad mili. Phir ek aandhi aane wali hai. Chet jayiye. Majithiya lagu kijiye.

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