पत्रकारिता के एक संत का यूं ही चले जाना

[caption id="attachment_21081" align="alignleft" width="99"]हरीश पंत[/caption]: जनसत्‍ता के पूर्व चीफ सब एडिटर हरीश पंत का निधन : चंडीगढ़ जनसत्ता में पूर्व मुख्‍य उपसंपादक रहे हरीश पंत ने मंगलवार को चंडीगढ़ के पीजीआई में अंतिम सांस ली। उन्हें अचानक तबीयत बिगडऩे के बाद अपने गांव नाहन (हिमाचल प्रदेश) से यहां लाया गया था। डाक्टरों के अथक प्रयास के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। बुधवार को नाहन में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

न्‍यायिक जवाबदेही में मीडिया को भी शामिल करने की सिफारिश

नई दिल्‍ली : संसद की एक स्‍थायी समिति ने प्रस्‍तावित न्‍यायिक मानदंड और जवाबदेही कानून के तहत शिकायतों की जांच के दौरान सूचनाओं को सार्वजनिक करने में मीडिया की जवाबदेही सुनिश्चित कराने की भी सिफारिश की है. हालांकि, समिति के अध्‍यक्ष अभिषेक मनु सिंघवी ने स्‍पष्‍ट किया है कि यह सिफारिश मीडिया की आवाज दबाने की कोशिश नहीं है.

मजीठिया बोर्ड की सिफारिशें मानी जाएं : केंद्र

नई दिल्‍ली : केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा है कि मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें मानी जांए. क्‍योंकि पत्रकारों और गैर पत्रकारों के बढ़े हुए वेतन की सिफारिशें तितरफा बैठकों और सरकार की छानबीन का नतीजा है. जस्टिस जीआर मजीठिया की सिफारिशों की आखिरी रपट को चुनौती देते हुए अदालत में एबीपी प्राइवेट लिमिटेड (जहां से बांग्‍ला दैनिक आनंद बाजार पत्रिका व टेलीग्राफ का प्रकाशन होता है) ने याचिका डाल रखी है.

जनसत्ता का रायपुर एडिशन बंद, कहीं कोई चर्चा तक नहीं

: एक अखबार की बंदी जब खबर तक न बने : आजकल मीडिया पर कलम चलाना बड़ा शगल बनता जा रहा है। हाल ही में अनिल बंसल की एक खबर पढ़ी जो अफसरों के सौतिया डाह पर थी। पर जितना सौतिया डाह पत्रकारों में है, उतना शायद किसी और प्रोफेशनल के बीच हो। मीडिया में जो घट बढ़ रहा है उसे देखते हुए इंडियन एक्सप्रेस के सहयोगी वीरेन्द्रनाथ भट्ट एक बार बोले- हिंदी में एक साईट बनाना चाह रहा हूँ, नाम रखा है ‘फाड़ डालो डाट काम’, कैसा रहेगा?

प्रभाष जोशी के जन्मदिन पर एक साथी का जाना

: जनसत्ता के लोग दोतरफा आलोचनाओं के शिकार होते रहे हैं पर ऐसे किसी आयोजन में उन्हें पूछा भी नहीं जाता जिसकी वजह जनसत्ता अखबार और प्रभाष जोशी हों : इस बार प्रभाष जोशी के जन्मदिन पर जनसत्ता से शुरू से जुड़े रहे वरिष्ठ पत्रकार सतीश पेडणेकर को विदाई दी गई। प्रभाष जोशी को याद किया गया और एक ऐसे साथी को विदा किया गया जो शुरू से प्रभाष जी की टीम का हिस्सा रहे।

सहारा ने अपनी ही खबर का खंडन क्यों छापा? शिवराज ने गद्दार सिंधिया को क्यों बचाया??

आज दो अखबारों में दो ध्यान देने वाली खबरें छपी हैं. राष्ट्रीय सहारा में प्रथम पेज पर जोरदार खंडन व खबर है. यह खंडन व खबर उन अफसरों को खुश करने के लिए प्रकाशित किया गया है जिससे उपेंद्र राय के राज में सीधे-सीधे पंगा लिया गया था. तब भड़ास4मीडिया ने संबंधित दो खबरें प्रकाशित की थीं, जिन्हें इन शीर्षकों पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं- एक आईपीएस को निपटाने में जुटा राष्ट्रीय सहारा और सहारा से भिड़े राजकेश्वर की बहन हैं मीनाक्षी.

प्रसारण मंत्रालय ने इमेजिन टीवी को नोटिस जारी किया

केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने छोटे पर्दे पर प्रसारित धारावाहिक ‘अरमानों का बलिदान आरक्षण’ के खिलाफ शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए इमेजिन टीवी चैनल को परामर्श जारी कर कानून के तहत निर्दिष्ट कार्यक्रम और विज्ञापन संहिता का सख्ती से पालन करने की हिदायत दी है। हालांकि चैनल ने मंत्रालय द्वारा पहले दिए जा चुके कारण बताओ नोटिस के बाद कार्यक्रम का नाम बदलकर ‘अरमानों का बलिदान’ करते हुए इसमें से आरक्षण शब्द हटा लिया है।

श्रेष्‍ठ पत्रकारिता के लिए जेएन प्रसाद को सम्‍मानित किया गया

कैडिंड कम्युनिकेशन व केकेएन ग्रुप ने 20 फरवरी 2011 को कोलकाता के पार्क होटल में और दक्षिण चौबीस परगना जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने कोलकाता के रोटरी सदन प्रेक्षागृह में 22 फरवरी 2011 को जनसत्ता के वरिष्ठ पत्रकार जयनारायण प्रसाद को बेहतरीन पत्रकारिता के लिए सम्मानित किया है। कैडिंड कम्युनिकेशन व केकेएन ग्रुप ने जनरल न्यूज (हिंदी) श्रेणी में जयनारायण प्रसाद (जनसत्ता) और संतोष सिंह (सन्मार्ग) को संयुक्त रूप से बेस्ट जर्नलिस्ट अवार्ड से सम्मानित किया, जबकि दक्षिण चौबीस परगना जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने जयनारायण प्रसाद को एक्सीलेंस अवार्ड इन मीडिया के पुरस्कार से नवाजा है। दक्षिण चौबीस परगना जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने कोलकाता प्रेस क्लब के अध्यक्ष प्रेमानंद घोष समेत 30 से ज्यादा पत्रकारों को सम्मानित किया।

पत्रकारों को चुनाव से पहले लैपटाप देगी असम सरकार

असम में पत्रकारों को मुफ्त में लैपटाप मिलने वाला है. दरअसल, विधानसभा चुनाव से पहले मुख्‍यमंत्री तरुण गोगोई राज्‍य के पत्रकारों को लुभाने के फेर में हैं. पत्रकारिता में दस साल पूरे कर चुके सभी पत्रकारों को अगले एक दो दिन में असम सरकार नया लैपटाप देने वाली है. गोगोई ने इसे साल की पहली जनवरी का तोहफा बताया है. उन्‍होंने इस बात से इनकार किया कि यह चुनाव से पहले पत्रकारों को लुभाने की कोशिश है. उन्‍होंने साफ कहा- इसका चुनाव से कोई लेना देना नहीं है.

जनसत्‍ता के पत्रकार सुनील दत्‍त को भ्रातृ शोक

जनसत्‍ता के देहरादून संवाददाता सुनील दत्‍त पांडेय के बड़े भाई कमल नयन पांडेय का रविवार को निधन हो गया. वे 53 साल के थे. पेट की बीमारी से पीडि़त थे. इलाज के लिए पहले उन्‍हें देहरादून मेडिकल कॉलेज में दाखिल कराया गया था, परन्‍तु वहां सुधार नहीं होने पर उन्‍हें नोएडा के फोर्टिस अस्‍पताल में …

एकजुट होकर संघर्ष करेंगे देशभर के पत्रकार

देश भर से आए विभिन्‍न पत्रकार संगठनों ने गुरुवार को दिल्‍ली में एक साझा मंच बनाने का एलान किया. लगभग 12 हजार पत्रकारों का प्रतिनिधित्‍व करने वाले इन संगठनों ने अपने साझा बयान  में कहा कि न्‍यूज पेपर्स और न्‍यूज एजेंसी कर्मचारी संगठन और दूसरे पत्रकार संगठन मिलकर एक राष्‍ट्रीय मंच की स्‍थापना करेंगे. इस मंच के जरिए देश भर के पत्रकार न सिर्फ सम्‍मानजनक वेज बोर्ड पाने के लिए बल्कि आचार संहिता और लोकतांत्रिक मीडिया के लिए भी साझा संघर्ष करेंगे.

तो इसलिए प्रो. एमपी सिंह का नाम जागरण ने नहीं छापा!

अजयविश्व का सबसे पढ़ा जाने वाला अखबार होने का दावा करने वाले दैनिक जागरण की पत्रकारिता का एक नया सच सामने आया है। 26 दिसंबर 2010 का अंक देखिए। काशी विद्यापीठ में 25 दिसंबर को एक महत्वपूर्ण गोष्ठी हुई थी। इस गोष्ठी को काशी विद्यापीठ के मानविकी संकाय में चंद्रकुमार मीडिया फाउंडेशन की ओर से आयोजित किया गया था, जिसका विषय था-“सच और पत्रकारिता।” बाकी सभी अखबारों और वेबपोर्टलों ने जहां फोटो सहित जबर्दस्त कवरेज दिया। जागरण ने इसे छोटे से सिंगल कालम में पेज 6 पर बिना किसी फोटो के निपटा दिया। जबकि इस संगोष्ठी में जागरण के समाचार संपादक राघवेंद्र चढ्ढा, वरिष्ठ रिपोर्टर नागेंद्र पाठक और फोटोग्राफर स्वयं मौजूद थे।

संसद घेरना, अदालत में गुहार जरूरी : नैयर

नई दिल्‍ली. राष्‍ट्रीय पत्रकारिता दिवस पर पत्रकारिता बचाओ के तहत हुए आयोजन में ज्‍यादातर की राय थी कि देश में बहुसंख्‍यक लोगों को आज भी भरोसा प्रिंट मीडिया पर ही है इसलिए इसे बचाए रखने के लिए सभी मीडियाकर्मियों को एकजुटत होना होगा. पूर्व सांसद और वरिष्‍ठ पत्रकार कुलदीप नैयर ने कहा कि वे जब पत्रकारिता में थे तब आज की अपेक्षा बेहतर माहौल था. आज वे ठेके पर पत्रकारों की नियुक्ति और विविध स्‍तरों पर पेड न्‍यूज का बोलबाला देख रहे हैं, उस पर उन्‍हें आश्‍चर्य है.

‘पत्रकारिता बचाओ’ दिवस मनाएं 16 नवम्‍बर को : डीयूजे

नई दिल्‍ली. दिल्‍ली यूनियन आफ जर्नलिस्‍ट्स (डीयूजे) ने सभी मीडियाकर्मियों से 16 नवम्‍बर (राष्‍ट्रीय पत्रकारिता दिवस) को पत्रकारिता बचाओ (सेव जर्नलिज्‍म) के रूप मनाने की अपील की है. वजह है नव उदारीकरण और आर्थिक मंदी के दौर में अभिव्‍यक्ति की आजादी पर तरह-तरह के बंधन, जिनकी वजह से पत्रकारों को निडर होकर काम करने में कठिनाई बढ़ी है.

अयोध्या : सुलह नहीं, फैसला चाहते हैं पक्षकार

लखनऊ / अयोध्या : उत्तर प्रदेश में अयोध्या के फैसले से पहले लखनऊ से लेकर फैजाबाद तक माहौल गरमा गया है। लखनऊ में सियासी पारा बढ़ रहा है तो अयोध्या में आशंका और तनाव। दूसरी तरफ अयोध्या मसले पर दोनों तरफ के पक्षकारों में सुलह की अंतिम कोशिश भी नाकाम होती नज़र आ रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में इस मामले के पक्षकारों के बीच सुलह की एक और कोशिश के लिए 17 सितम्बर की तारीख़ तय की गई है। पर कोई पक्षकार सुलह के मूड में नहीं है।

‘जनसत्ता’ से सहयोग क्यों बनाए रखें?

अठन्नी दाम बढ़ाकर संपादक ने पाठकों से सहयोग बनाए रखने की अपील की : जनसत्ता कभी नाम वाला अखबार हुआ करता था. क्या बनारस, क्या बेंगलूर. हर जगह इसके चाहने वाले हुआ करते थे. लेकिन आजकल का जनसत्ता उदास करने वाला होता है. कुछ अलग पढ़ने की चाहत रखने वालों को मायूसी हाथ लगती है. समाचार एजेंसियों की खबरों से भरे पड़े इस अखबार में इनके रिपोर्टरों की भी जो खबरें होती हैं, वे ऐसी नहीं होतीं कि जिससे पाठक कुछ नया पा सके या जिससे हड़कंप, कंपन या मंथन हो सके. उपर से अब इस 12 पेजी अखबार का दाम भी बढ़ा दिया गया है. तीन की बजाय अब साढ़े तीन रुपये में मिला करेगा यह. अठन्नी ज्यादा देने में किसी को दिक्कत नहीं लेकिन अठन्नी बढ़ाने के साथ क्वालिटी बढ़ाने का कोई भरोसा नहीं मिला है अखबार की ओर से.

गोयनका लोगों के बारे में गालियों से बात करते थे : प्रभाष जोशी

प्रभाष जोशीहमारा हीरो – प्रभाष जोशी

प्रख्यात पत्रकार प्रभाष जोशी का इंटरव्यू करने भड़ास4मीडिया की टीम उनके वसुंधरा स्थित निवास पहुंची तो शुरुआती दुआ-सलाम के बाद जब उनसे बातचीत शुरू करने का अनुरोध किया गया, तो उन्होंने हंसते हुए कहा- भई अपन के अंदर ‘भड़ास’ नाम की कोई चीज है ही नहीं। हालांकि जब प्रभाष जी से बात शुरू हुई तो बिना रूके दो घंटे से अधिक समय तक चली। इंटरव्यू में प्रभाष जी नए-पुराने सभी मुद्दों पर बोले।