मनोज मनु आपने हमें बेवकूफ क्‍यों बनाया!

उमेश
उमेश
यशवंतजी, सितम्‍बर-अक्‍टूबर 2010 में सहारा एमपी-सीजी ने सागर, मध्‍य प्रदेश में रिपोर्टर नियुक्‍त करने के लिए चैनल में विज्ञापन निकाला, सागर से 22 लोगों ने रिज्‍यूम भेजे, जिसमें से दो लोगों को दिल्‍ली बुलाया. एक मुझे और एक प्रिंट के पत्रकार को. दोनों का इंटरव्यू चैनल हेड मनोज मनु ने लिया, लेकिन आज तक उन्‍होंने हम दोनों में से किसी को नहीं लिया. कई बार फोन पर सम्‍पर्क किया तो जवाब‍ मिलता कि मामला ठंडे बस्‍ते में चला गया है.

फिर एक बार मनोज मनु जी से बात हुई तो उन्‍होंने बोला कि किसी और को ज्‍वाइन करवा दिया है. जबकि सागर में अभी सहारा का कोई नया रिपोर्टर नहीं आया है. सहारा के दो रिपोर्टर पहले से काम कर रहे हैं, दोनों ही दलाली में जुटे हैं. ज्‍यादा शिकायतों के बाद एक को हटाने का मन बनाया था मनोज मनु जी ने, लेकिन फिर ना जाने क्‍या हुआ कि आज तक वही दोनों रिपोर्टर सहारा का काम कर रहे हैं.

चलो ठीक है कि आप का चैनल है, आप जिसको चाहें रखें ना रखें, लेकिन आप हम जैसों का भी सोचों जिन्‍हें आपने सागर से दिल्‍ली बुलाया. सागर जैसे छोटे शहर के पत्रकार कितने धनवान हो सकते हैं ये आप समझ सकते हैं. दिल्‍ली आने-जाने और रूकने के खर्च को हम ये समझ कर सह गए कि कोई राहगीर हमें बेवकूफ बनाकर ये पैसे ठग ले गया.

उमेश यादव

सागर, मध्‍य प्रदेश

Comments on “मनोज मनु आपने हमें बेवकूफ क्‍यों बनाया!

  • pankaj dubey says:

    bhai aap ke bath se mijhe hamdardi hai pr kya karoge bhai ham dusro ke khber chapte chapte apni khber ko bekhber kr baidthe hai

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  • कुमारी शैलजा, इन्दौर says:

    सहारा अब अपने नाम की खा रहा है, और इसके कर्ता-धर्ता उगाही में जुटे हैं…………

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  • vinod yadav says:

    Umesh ji sahara ki TRP girne ka karan h inke fargi riportar sagar ho ya seoni sabhi jagah yhi stiti h seoni ke riportar to sadhna ke riportar ke dalal h jesi deeling wo karta sahara ke riportar uski ardali me tenat rhte h jile me bhrstachar ka jvlant udahran khawasha bordar h jha se yha ke patrkar palte h sahara or sadhna ke blekmelar patrkaro ke liye to ye oxijan h banki to sara asman fta h kha kha thigde lgayoge

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  • मेरी सहानुभूति आपके साथ है उमेश जी। लेकिन अगली बार ऐसा कोई आदमी आपको इंटरव्यू के लिए बुलाए, तो आनेके पहले ज़रा अपनेसंपर्कों के ज़रिए, दोस्तों से या सीधे सहारा जैसे चैनलों के दफ्तर में डेस्क वगैरह पर ही फोन कर के परख लेना चाहिए कि बुलाने वाले की औकात क्या है। आप काफी दुखी हैं और मैं आपका दुख समझ सकता हूं। लेकिन ये जान कर मन को तसल्ली दे लीजिए कि जिस आदमी ने आपको बुलाया था, वो असल में खुद ही किसी अँधे की बांटी हुई रेवड़ी खा कर ऐश कर रहा है। न तो उसमें वो काबिलियत है कि किसी को नौकरी देने या न देने का आधार तय कर सके। और न ही वो इस लायक है कि भड़ास जैसे बड़े प्लैटफॉर्म पर उसकी चर्चा हो, क्योंकि समें भी उसे लगेगा कि वो नाम कमा रहा है। आप पत्रकार हैं, टेलीविजन में दलाली कर रहे ऐसे लोगों के खिलाफ़ अखबार में मोर्चा खोलिए, ताकि आपकी तरह किसी और को चपत न लगे। बाकी आपके मन की तसल्ली के लिए एक बात और बता दूं, जिन जनाब ने आपका इंटरव्यू ले कर आपको नौकरी न मिलने के बारे में बताया तक नहीं, जल्दी ही किसी रोज़ उनके साथ भी यही दुर्गति होने वाली है। एक सुबह वो सो कर उठए तो उन्हें पता लगा था कि वो बाइट कलेक्टर से चैनल हैड बना दिए गए हैं। ऐसे ही किसी सुबह सो कर उठेंगे तो पता पड़ेगा कि चैनल हैड से सहारा की किसी पाराबैंकिंग यूनिट में क्लर्क हो गए हैं !

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  • navneet singh says:

    kya baat hai sanjay ji chaaaa gaye aap wah wah kam se kam koi to hai jo sahara ki gahraayee ko jaanta hai baap re baap kya baat kahi hai sanjay ji maza aa gaya dil khush kar diya aap ne

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