प्रिय अनिमेष, मैं न्यूज़ एक्सप्रेस चैनल का एंकर अतुल अग्रवाल हूं। आपने भड़ास4मीडिया पोर्टल पर जगजीत सिंह की मौत वाले अपने लिखे भ्रामक लेख में एंकर अतुल अग्रवाल का नाम लिया है। आपके विचार प्रकाशित भी हुए हैं, जिसके मुताबिक ‘एंकर अतुल अग्रवाल चीख-चीख कर जगजीत सिंह की मौत वाली ख़बर पढ़ रहे थे।’ आपका ये कथन सवर्था सत्य के परे है और मेरी व्यक्तिगत और व्यावसायिक छवि को धूमिल करने वाला है।
मैं आपसे आग्रह करता हूं कि कृपया अपने कथन की पुष्टि करने हेतु प्रमाण प्रस्तुत करें। क़पया साबित करें कि उक्त समाचार एंकर अतुल अग्रवाल ही पढ़ रहे थे। कोई वीडियो फुटेज अथवा दस्तावेज़ी प्रमाण दीजिए। मैं चुनौती देता हूं कि आप साबित करें कि ये ख़बर मैनें पढ़ी थी। अगर मैनें नहीं पढी होगी तो आपको क्या सज़ा होनी चाहिए, ये तय करने का अधिकार भी मैं आप ही के पास छोड़ता हूं। अनिमेष दास जी, मैं आपको खुली चुनौती दे रहा हूं कि इस पूरी प्रक्रिया में मेरा दोष साबित करके दिखाएं।
देखिए, आप पत्रकारिता के छात्र हैं। आप पत्रकारिता का भविष्य हैं लेकिन किसी व्यक्ति के खिलाफ छद्म युद्द चला कर, अगर आप पार्टी बन रहे हैं तो ये आपकी नासमझी है। अलग-अलग जगहों पर पत्रकारिता से जुड़ी बड़ी-बड़ी बातें करने भर से कोई बड़ा नहीं बन जाता। किसी भी तथ्य को प्रकाशित अथवा प्रसारित करने के पहले दिल में ईमानदारी होनी चाहिए। मेरी सलाह है आपको कि आंखें खोल कर ईमानदारी से पत्रकारिता के सिद्धांतों पर अमल करने की हिम्मत भी पैदा करिए अपने अंदर। दूसरों को बुरा कहने के पहले खुद को देखिए कि आप खुद क्या हैं, कैसे हैं? किसी के भी बारे में कुछ भी ऊटपटांग छापने-छपवाने के पहले सोचिए कि आपके शब्दों का असर क्या हो सकता है?
कृपया मुझ जैसे छोटे पत्रकार की चुनौती कुबूल करिए और साबित करिए कि मैनें ही जगजीत सिंह को जीते जी मार डालने वाली ख़बर की एंकरिंग की थी। अगर आप साबित नहीं कर सकते तो ईमानदारी प्रदर्शित करते हुए कृपया अपने भ्रामक पत्र का खंडन भी प्रकाशित करवाइए। इस पेशे में कुछ अर्सा पहले आने के नाते आप मेरे छोटे भाई जैसे हुए। मेरी व्यक्तिगत सलाह भी है आपको। कृपया कुछ भी कहने अथवा लिखने अथवा सोचने के पहले एक बार खुद से ईमानदारी से सवाल ज़रूर किया करिए। यकीन मानिए जवाब भी ईमानदार मिलेगा और ईमानदार आत्म-संतुष्टि भी।
शुभेच्छु,
अतुल अग्रवाल
पत्रकारिता के छात्र अनिमेष का जो पत्र प्रकाशित हुआ है, उसमें से अब अतुल अग्रवाल का नाम हटा दिया गया है क्योंकि संज्ञान में लाए जाने पर भड़ास4मीडिया को पता चला कि अतुल अग्रवाल का नाम जानबूझकर घसीटा गया है. वह उस वक्त एंकरिंग नहीं कर रहे थे, जिस वक्त जगजीत के निधन की खबर प्रसारित की गई. दूसरी बात, कौन सी खबर चलाई जाए और कौन सी खबर नहीं चलाई जाए, इसके लिए जिम्मेदार न्यूज एंकर नहीं होता. वह वही चीज पढ़ता बोलता बताता है जिसे वरिष्ठ लोग कई लेवल पर ओके करने के बाद उसके सम्मुख ले जाते हैं. भड़ास4मीडिया की इस मामले में लापरवाही यह है कि अनिमेष द्वारा भेजे गए पत्र को उनका निजी विचार मान कर प्रकाशन कर दिया गया, तथ्यों को जांचे बगैर. फिलहाल उस खबर को संशोधित कर दिया गया है और अतुल अग्रवाल से क्षमा याचना के साथ उनके लिखे इस पत्र को यहां प्रमुखता से प्रकाशित किया जा रहा है ताकि सही तथ्य सबके सामने पहुंच सके. अगर आपको भी भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित किसी खबर, लेख, विचार, कमेंट के तथ्यों पर आपत्ति है तो आप फौरन [email protected] पर मेल करके हमारा ध्यान दिला सकते हैं. हम अपनी गल्तियों को कुबूल करने की क्षमता रखते हैं और उसे शीघ्र अतिशीघ्र दुरुस्त करने का माद्दा भी. -एडिटर, भड़ास4मीडिया












rajan mishra
September 26, 2011 at 7:51 pm
atul sir aapki chawi dhumil karne ki kosis hui hai us time to aap anchoring vi nahi kar rahe the…..ye public city pane ke liye kiya gya lagta hai
Kuldeep Bhardwaj
September 26, 2011 at 7:58 pm
Yashwant bhai jee
Ye galat hai ….atul agrwal g jaise varishth aur anubhavi ke liye ye vakya kaphi kashtkari hai ….wo bilawazah charcha ke kendrbindu me aane se kaphi marmahit lag rahe hai ….phir bhi unhone kaphi saymit shabdon me apna virodh darz karya hai ….ye unka badappan hai. Aisa bhavishy me nahi iska khayal rakkhe .
With rgds
Kuldeep Bhardwaj
Patna (Bihar)
Shikaar
September 27, 2011 at 5:49 am
Atul ji bilkul sahi kah rahe hain, us waqt anchoring atul ji nahi balki bandar ki shakal waala anchor Dinesh gandpal anchoring kar raha tha. Jise t.p ke alawaa ek word bolne nai aata,main aapko ek aur baat batadu ye wahi dinesh gandpal hai jise india news me anchoring se hata dia gaya tha. Jiske baad zaidi saheb ka pair pakar ke isne jansandesh me dera daala. Aur phir mukesh kumar ka chamcha hone ka faayeda ise ek baar phir yahaan mil gaya. Ye aise anchor hain jinhe audition lene ke baad azad aur cneb ne bhi reject kar dia tha. Dhanya ho prabhu…
rakeshraj
September 27, 2011 at 7:05 am
ये जो ज्ञान आप दे अब दे रहे हैं कि स्क्रिप्ट से ऐंकर का कोई वास्ता नहीं होता वह ज्ञान पहले क्या घर के पाखाने में छोड़ आए थे. और ऐंठ तो ऐसे रहे हैं कि गलती करते हैं तो स्वीकारने का माद्दा भी रखते हैं. तुम जैसे मादा के पास कितना माद्दा है यह राहुल कुमार वाले प्रकरण में दिख चुका है.
vikas mishra
September 27, 2011 at 12:04 pm
हां ये बिल्कुल सच है कि अतुल अग्रवाल उस वक्त एंकरिंग नहीं कर रहे थे, जब खबर चली तो हर कोई चौंका, क्योंकि मुंबई में कोई भी इस खबर को कन्फर्म नहीं कर रहा था। उसी वक्त मैंने अतुल को फोन मिलाया था। बात हुई थी, अतुल ने बताया भी था कि अभी खबर रोक ली गई है। खैर उस खबर से अतुल का किसी प्रकार का लेना देना नहीं था, जबरन उनका नाम घसीटना ठीक नहीं है। अतुल के काम-काज पर कोई सवाल नहीं उठा सकता, अतुल बेहद जिम्मेदार पत्रकार हैं ये मैं जानता हूं।
animesh
September 27, 2011 at 12:58 pm
mein aapse sarwjnik taur par mafi mangta hu…mera koi irada nai tha publicity pane ka…mujhe bad mein pata chala unka naam dinesh kanpal ji hai
B4M
September 27, 2011 at 2:28 pm
mere dwara likhya hue ek patra se ek anchor ka naam galat publish ho gaya…jiski wajah se mein sarwajnik taur par mafi mangta hu…jagjit singh k bare mien newx express par galat khabar padhne wale wo atul agarwal ji nai the… balki woh dinesh kanpal ji the..to mein unse sarwjnik taur par mafi mangta hu…hamar is mafinama ko jarur chape
asif khan
September 27, 2011 at 4:05 pm
मैं श्रीमान अतुल अग्रवाल की बात से पूरी तरह सहमत हूं। अतुल एक जिम्मेदार पत्रकार है और बड़ा नाम। जाहिर सी बात है कोई भी ऐरा गेरा अतुल के साथ अपना नाम जोड़कर खुद की पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है। वैसे भी एक एंकर को जो निर्देश मिलते है वो उन्ही का पालन करता है। खबर की सत्यता की जांच करना मुकेश कुमार का काम था अब उन्हे नये नये चैनल लांच करने से फुर्सत नही है तो अतुल अग्रवाल क्या करते।
कुमारसौवीर, लखनऊ
September 27, 2011 at 5:58 pm
अतुल जी।
यकीन तो आ ही गया होगा आपको, कि हमारी बिरादरी में शामिल होने वाले यह सद्य-स्तनपाई कई मामलों में गैरजिम्मेदाराना हरकत कर बैठते हैं।
हमारा दायित्व तो यह है कि इनकी गलतियों को क्षमा करें, लेकिन इंगित करने के साथ।
त्राहि-माम, त्राहि माम
क्यों कि यही तो हमारा भविष्य। आप वरिष्ठ हैं उससे। बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुधि ले, लेकिन सतर्कता के साथ। आपका दामन साफ है, उस पर दाग की कल्पना ही आप क्यों करते हैं।
किसी में हिम्मत ही नहीं, कि सच पर पर्दा की जगह गर्दा डाल ले।