रियाज और सुभाष भी ‘जनवाणी’ पहुंचे

रियाज़ हाशमी
रियाज़ हाशमी
: दोनों ने अपने-अपने संस्थानों से दिया इस्तीफा : दैनिक जागरण, मेरठ से रियाज हाशमी ने इस्तीफा दे दिया है.  रियाज हाशमी का 14 अक्टूबर को लखनऊ के लिए मेरठ से तबादला किया गया था. उन्हें जागरण प्रकाशन लिमिटेड द्वारा अधिग्रहीत मिड-डे ग्रुप के उर्दू अखबार इन्क़लाब के शीघ्र प्रकाशय यूपी संस्करण का संपादक बनाया गया था.

मगर उन्हें लगातार 15 दिनों तक नोएडा बैठाया गया और अंत में बताया गया कि इन्क़लाब का यूपी संस्करण अभी लंबा टल गया है. 2 नवंबर को इसी कारण से उन्हें वापस मेरठ भेज दिया गया. रियाज़ इसी बात से खिन्न थे और लग रहा था कि उन्हें जागरण की आंतरिक राजनीति का शिकार बनाया गया है. एक हफ्ते से रियाज़ अपने घर पर थे और मेरठ प्रबंधन ने उन्हें शीघ्र ही नई जिम्मेदारी देने का आश्वासन दिया था. सोमवार को रियाज़ ने मेरठ पहुंचकर अपना इस्तीफा निदेशकों को सौंप दिया. माना जा रहा है कि रियाज़ मेरठ से जल्द प्रकाशित होने वाले हिंदी दैनिक जनवाणी में अच्छे पद व पैकेज पर ज्वाइन करेंगे.

रियाज हाशमी के इस्तीफे से दैनिक जागरण, मेरठ को फिर काफी बड़ा झटका लगा है. जागरण, वेस्ट यूपी के पुराने लोगों में से एक रियाज हाशमी लंबे समय से सहारनपुर में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत रहे. आठ माह पहले उन्होंने मेरठ में बतौर वेस्ट यूपी स्टेट डेस्क हेड ज्वाइन किया था. रियाज़ हाशमी जागरण के पुराने और कर्मठ लोगों में गिने जाते रहे हैं. 1999 में अमर उजाला हरियाणा में लांचिंग कराते समय ही रियाज़ को दैनिक जागरण प्रबंधन सहारनपुर में बतौर ब्यूरो चीफ लाया था. तब दैनिक जागरण की शहर में 1700 और जिले में 4 हजार कॉपियां बिकती थीं.

रियाज़ के कार्यकाल में दैनिक जागरण की शहर में 19 हजार से अधिक और जिले में 40 हजार से अधिक प्रतियां बिकने लगीं. खबर और कंटेट जेनरेटर के तौर पर पहचान बनाने वाले रियाज़ हाशमी हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू भाषाओं पर भी अच्छी पकड़ रखते हैं और हिंदुस्तान टाइम्स व क़ौमी आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में भी काम कर चुके हैं. कंप्यूटर पर कार्य करने में अभ्यस्त पुराने पत्रकारों में से भी वह एक हैं. बताया गया है कि दैनिक जागरण के निदेशकों ने इस्तीफा देने पहुंचे रियाज़ हाशमी से करीब दो घंटों तक मैराथन वार्ता की, लेकिन रियाज़ को मनाने में सफल नहीं हो सके. रियाज़ के इस्तीफे के बाद जागरण प्रबंधन डैमेज कंट्रोल में जुट गया है. इस महीने दैनिक जागरण से संपादकीय समेत विभिन्न विभागों से कई और बड़े नामों के संस्थान छोड़ने की प्रबल संभावनाएं हैं.

एक अन्य जानकारी के मुताबिक अमर उजाला, मेरठ से सुभाष ने भी इस्तीफा दे दिया है. सुभाष खेल डेस्क पर कार्यरत थे. उनके भी जनवाणी ज्वाइन करने की सूचना है. सुभाष मेरठ के ही रहने वाले हैं. अमर उजाला से पहले वे दैनिक जागरण में कार्यरत थे. सुभाष को जनवाणी के संपादक यशपाल सिंह का करीबी बताया जाता है.

 

Comments on “रियाज और सुभाष भी ‘जनवाणी’ पहुंचे

  • Neeraj Upadhyay says:

    dosto maine bhi 3 sal amar ujala me stringership kiya hai par yar jo log yaha koi district bhi dekhte hai wo bhi apne aapko khuda samjhne lagtte hai, ab main ek Tax Advocate hoon aur thik practice chal rhi hai par yar ye reporting ka keeda abhi tak nhi mara 6 sal ho gaye chhode hue. yar agar kisi newpaper ya JANVANI me Legal Reporter ki koi jagah ho to mujhe bhi batana yaro . main muzzaffar nagar se hu dosto.
    Sabhi ptrakao ko dil se samman dete hue

    Tumhara bhai

    Neeraj upadhyay[b][/b][b][/b]

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  • anil verma unnao.07860055888 says:

    dainik jagaran & amar ujala jaise akhabar chod kar janvani me jaane waalo ko dhanyawaad. lekin apane chaheto ka bhi please dhayan jakhen.

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  • रियाज हाशमी जी को नये करियर की शुरूआत के लिए बधाई। और जनवाणी को भी बधाई कि उन्होंने वेस्ट यूपी के एक तेज तर्रार पत्रकार को संस्थान से जोड़ा है। निश्चित ही जनवाणी को रियाज के अनुभव का भरपूर लाभ मिलेगा। मुझे याद है कि रियाज कैसे स्थानीय खबरों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जोड़ने का हुनर रखते हैं। वो चाहे कांधार विमान अपहरण कांड हो, या वंदेमातरम मुद्दा ही क्यों ना हो- सभी खबरों की एक्सक्लूसिव ब्रेकिंग न्यूज़ रियाज ने दीं। आतंकवाद पर इनकी रिपोर्टिंग खास तौर पर मौलाना मसूद अजहर को छुड़ाने के लिए अपहृत विदेशी नागरिकों को मुक्त कराने की कार्रवाई में शहीद हुए इंस्पेक्टर ध्रुव लाल यादव की खबर और खालिस्तान कमांडो फोर्स के आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हुए सब इंस्पेक्टर इस्लामुलहक की लाइव खबरें और उनकी कॉपीराइटिंग आज भी अविस्मरणीय है। आशा है कि जनवाणी अखबारों की डुप्लीकेसी से बचेगा और एक नया आयाम स्थापित करेगा।

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  • जनवाणी की शुरूआत तो शायद धमाके दार अंदाज में होगी लेकिन जब बाजवा और गिरी जैसे लोग मीडिया को संचालित करने लगेंगें तो मीडिया का स्तर क्या रह जायेगा…गिरी को तो मेरठ के धुरंधर कथित पत्रकार और वर्तमान में राजनीति में संलग्न और हां साप्ताहिक अखबार चलाने वाले ललित भारद्वाज का समर्थन प्राप्त है तभी तो अपने वेंकटेश्वर इंस्टीट्युट में पत्रकारों को पीटने के बाद भी साफ बच गया .अब मीडिया का तो भगवान ही मालिक…………………..

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  • एस. एम. आसिफ says:

    रियाज़ भाई बधाई। शुक्र है आपका जागरण से मोह भंग तो हुआ। देर आयद-दुरुस्त आयद… ये जागरण वाले किसी के नहीं हुए। खून चूसते हैं और निचोड़कर फेंक देते हैं। इन्हें पैसा कमाकर देते रहो, बस। यहां तो नंबर दो के धंधे करने वाले ही टिके रह सकते हैं- जैसे दिनेश दिनकर। आपकी नजर एक शेर-
    ‘हम तो दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है
    जिस तरफ भी चल पड़ेंगे रास्ता बन जाएगा।’

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  • आज जागरण अखबार को ख्नुद को जगाने की ज़रूरत है, जागरण मे इस्तम्भ माने जाने वाले ओर पाठ्को मे अपनी खासी पकड रखने वाले रियाज़ भाई का जाना यकीनन जागरण के लिये असहनीय झट्का है…………………

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  • Moin Siddiqui says:

    Riyaz Bhai Zindabad……..

    Jab aap apna Qeemti khoon dekar Dainik Jagran ko Seench sakte hain…..toh hum samajh sakte hai ke Javani ki shuruvaat kitni dhamakedar hogi…..lage rahiye…hum aapke saath hai…….!!!!!!!!

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  • मुझे यकीन नहीं होता कि रियाज ने जागरण छोड़ दिया है। मेरा मानना है कि रियाज और जागरण क दूसरे के पूरक हैं। निश्चित ही रियाज जागरण वापस जाएंगे और जागरण वाले रियाज को बुलाएंगे। यह मीडिया जगत की सबसे बड़ी अफवाह लगती है।

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  • Yeh Jhoothi khabar hai, Riyaj aur jagran chhor dey yeh ho he nahi sakta. Woh agar jagran chhod deta tou aaj sampadak hota. Vaise riyaj ko electronic media join karna chahiye. Electronic media me sahityik logo ki kami hai. Gadhey panjeeri kha rahe hain. Magar Pehle iss khabar ki pushti jagran management ya riyaj tou kare. Tab tou aage koi baat chale.

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