दैनिक जागरण, मेरठ के दफ्तर पहुंचे टीम अन्ना के सदस्य, देखें तस्वीरें

टीम अन्ना कल मेरठ में थी. यूपी में जनसभाओं के क्रम में ये लोग मेरठ पहुंचे थे. टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसौदिया, किरण बेदी और कुमार विश्वास शुक्रवार को दैनिक जागरण मेरठ के न्यूज़रूम में पहुंचे. वहां इन लोगों ने अखबार के कामकाज को देखा और दैनिक जागरण की टीम से मुलाकात की. इन लोगों का स्वागत दैनिक जागरण के निदेश तरुण गुप्ता ने किया.

संपादकीय प्रभारी मनोज झा ने टीम अन्ना के सदस्यों को अखबार के कामकाज से अवगत कराया. अखबार से जुड़े कुछ लोगों ने इस मौके की तस्वीरें फेसबुक पर सबसे साझा की हैं. उन्हीं में से दो तस्वीरों का यहां प्रकाशन किया जा रहा है.

दैनिक जागरण, मेरठ की वाट लगा दी सिटी चीफ दिनेश दिनकर ने

कई बार इतनी बड़ी गलती पत्रकार लोग कर बैठते हैं कि उसका खामियाजा पूरे अखबार को भुगतना पड़ता है. और गलती अगर जान बूझकर की जाए तो इसे अक्षम्य अपराध ही कहा जाएगा. ये नहीं पता कि दैनिक जागरण, मेरठ के सिटी चीफ दिनेश दिनकर ने यह गलती जानबूझ कर की या अनजाने में उनसे हो गई. लेकिन इतना जरूर है कि जितने लंबे समय से वे मेरठ में हैं, मेरठ की पत्रकारिता में हैं, क्राइम रिपोर्टिंग में हैं, उसके कारण उनसे ऐसी गलती की अपेक्षा नहीं थी.

दैनिक जागरण, मेरठ में पहले पेज पर आज एक खबर छपी है, ”लुटेरा थानेदार दो सिपाहियों समेत गिरफ्तार”, शीर्षक से. इसमें जिस थानेदार और एक सिपाही को लुटेरा बताया गया है, और गिरफ्तार बताया गया है, वह बिलकुल निराधार है. थानेदार और सिपाही अपनी ड्यूटी पर हैं. इस खबर के छपने से थानेदार की पत्नी को हार्ट अटैक हो गया है. खबर है कि उन्हें मेरठ के आनंद अस्पताल में भर्ती कराया गया है. थानेदार का नाम पवन शर्मा है और वे बागपत जिले के चांदीनगर थाने में तैनात हैं. जिस सिपाही को लुटेरा और गिरफ्तार बताया गया है उनका नाम मनोज दीक्षित है. वे एसओजी में तैनात हैं.

दरअसल हुआ यूं कि तीन सिपाहियों के शाहजहांपुर में गिरफ्तार करने की सूचना आई थी. ये तीनों सिपाही पवन, कपिल और निशांत चौधरी कभी मेरठ में एंटी आटो थेफ्ट सेल में हुआ करते थे. इनका काम गाड़ियों की चोरी और लूटपाट रोकना था लेकिन ये खुद गाड़ियों की चोरी करने वाला गैंग चलाने लगे. इन लोगों का तबादला गैर जिलों में कुछ महीने पहले कर दिया गया था पर इन्होंने ड्यूटी ज्वाइन नहीं किया था. बताया जाता है कि इन्होंने लखनऊ में लूट की. वहां लूट की सूचना फ्लैश हुई और ये लोग शाहजहांपुर में पकड़ लिए गए. सूचना जब मेरठ पहुंची तो दिनेश दिनकर और उनकी टीम ने पवन नाम के सिपाही को अंदाजन पवन शर्मा थानेदार मान लिया.

और जाने कहां से मनोज दीक्षित को गिरफ्तार और लुटेरा बता दिया. मेरठ में सबसे ज्यादा बिकने वाले अखबार दैनिक जागरण में फ्रंट पेज पर खबर छप जाने से निर्दोष थानेदार और एक सिपाही की जो किरकिरी हुई है, उससे पुलिस प्रशासन स्तब्ध है. खबर तो यहां तक है कि थानेदार की पत्नी के हार्ट अटैक के बाद पुलिस के कई अधिकारी और जवान गोलबंद होने लगे हैं और दैनिक जागरण को सबक सिखाने की तैयारी कर रहे हैं.

दैनिक जागरण, मेरठ के संपादक विजय त्रिपाठी का इस्तीफा

विजय त्रिपाठी
विजय त्रिपाठी
अभी अभी सूचना मिली है कि दैनिक जागरण, मेरठ के संपादक और वेस्ट यूपी स्टेट हेड विजय त्रिपाठी ने इस्तीफा दे दिया है. विजय के इस्तीफे का कारणों का पता नहीं चल पाया है पर कुछ लोगों का कहना है कि वे जल्द ही बेहतर पद व पैकेज के साथ किसी दूसरे संस्थान में नई पारी शुरू करने वाले हैं.

कुछ लोग उनके अमर उजाला जाने की संभावना व्यक्त कर रहे हैं तो कुछ लोग हिंदुस्तान के साथ नई पारी के बारे में कयास लगा रहे हैं. भड़ास4मीडिया को मिली जानकारी के अनुसार विजय त्रिपाठी को स्टेट एडिटर या रेजीडेंट एडिटर के रूप में अमर उजाला की देहरादून यूनिट में भेजा जा सकता है और देहरादून में कार्यरत निशीथ जोशी का तबादला कहीं अन्यत्र किया जा सकता है. इस मुद्दे पर जब भड़ास4मीडिया ने विजय त्रिपाठी से संपर्क किया तो उन्होंने कुछ भी टिप्पणी करने से फिलहाल इनकार कर दिया.

कानपुर के रहने वाले विजय त्रिपाठी अमर उजाला के साथ लंबी पारी खेल चुके हैं. वे अमर उजाला, कानपुर में जनरल डेस्क, प्रादेशिक डेस्क और सिटी डेस्क इंचार्ज रह चुके हैं. दैनिक भास्कर, चंडीगढ़ में कई वर्षों तक वरिष्ठ पद पर कार्यरत रहे हैं. वे स्वतंत्र भारत और राष्ट्रीय सहारा से भी जुड़े रहे हैं.  विजय त्रिपाठी के नेतृत्व में दैनिक जागरण, मेरठ में प्रोफेशनल वर्क कल्चर की शुरुआत हुई और अखबार के स्टाफ को उसी अनुरूप खुद को अपग्रेड करना पड़ा. विजय के अचानक इस्तीफा देने से दैनिक जागरण, मेरठ का प्रबंधन सकते में है. अभी यह पता नहीं चल पाया है कि जागरण, मेरठ का नया संपादक कौन होगा.

हिचकियां और सिसकियां के बीच फंस गई इनपुट और प्रादेशिक डेस्‍क इंचार्ज की गाड़ी

: अपडेट : हिचकियां और सिसकियां के बीच फंस गई दैनिक जागरण, मेरठ में दो लोगों की गाड़ी. पुराने गुबार बाहर निकले. संपादक के सामने इनपुट डेस्‍क इंचार्ज ने प्रादेशिक डेस्‍क इंचार्ज महोदय की ऐसी की तैसी कर दी. गाली-ग्‍लौज से बढ़ते-बढ़ते बात हाथ उठाने की नौबत तक जा पहुंची पर किसी तरह बीच बचाव कर मामले को बिगड़ने से रोका गया. इसको लेकर जागरण में तरह तरह की चर्चाएं हैं.

सूत्रों ने बताया कि इनपुट डेस्‍क इंचार्ज रियाज हाशमी एक समाचार की हेडिंग ‘कई लाशें और हिचकियां’ लगाई थी. यह खबर जब प्रादेशिक डेस्‍क पर पहुंची तो हिंचकियां को बदलकर सिसकियां कर दिया गया यानी हिचकियां सिसकियां बन गई. इसी हि‍चकियां और सिसकियां को लेकर इनपुट डेस्‍क इंचार्ज रियाज हाशमी और प्रादेशिक डेस्‍क इंचार्ज सौरभ शर्मा में मौखिक भिड़ंत हो गई. बात एक दूसरे की पोल खोलने तक पहुंच गई. सूत्रों ने बताया कि यह सिर्फ एक गलती या हेडिंग बदले जाने का गुबार नहीं था, बल्कि जागरण, मेरठ के भीतर चल रहे शीत युद्ध का नतीजा था. सूत्रों ने बताया कि पिछले काफी समय से कई इंचार्जों के बीच एक दूसरों को नीचा दिखाने, सबक सिखाने की ढंकी-छुपी कोशिशें होती रही हैं. बस गुबार अब जाकर निकला है.

उधर, इस प्रकरण पर रियाज हाशमी और सौरभ शर्मा, दोनों लोगों ने भड़ास4मीडिया को फोन कर सूचित किया कि उनके बीच जो कुछ हुआ, वह न्यूज रूम में कामकाज के दौरान होने वाली सामान्य बातचीत थी. किन्हीं शरारती तत्वों ने इस बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर दिया है जो निंदनीय है. इन दोनों का कहना था कि उनके बीच गाली-गलौज या हाथापाई जैसी कोई चीज नहीं हुई. खबरों पर थोड़ी बहुत बहस व बातचीत हर जगह होती है. इसे नाहक तूल देकर छवि खराब की जा रही है.

शाबास मदन मौर्या, जुग-जुग जियो

मदन मौर्या
मदन मौर्या
एक फोटोग्राफर हैं. मदन मौर्या. दैनिक जागरण, मेरठ में हैं. वरिष्ठ हैं. कानपुर के रहने वाले हैं लेकिन जमाना हो गया उन्हें मेरठ में रहते और दैनिक जागरण के लिए फोटोग्राफरी करते. इस शख्स के साथ अगर आप दो-चार दिन गुजार लें तो आपको समझ में आ जाएगा कि मिशनर जर्नलिस्ट या मिशनरी फोटोग्राफर किसे कहते हैं. इतना खरा और साफ बोलता है कि सुनने वालों को डर लगने लगता है.

चोर, उचक्के, दलाल टाइप पत्रकार मदन मौर्या के सामने नहीं पड़ना चाहते क्योंकि मदन मौर्या चोरों, उचक्कों और दलाल टाइप पत्रकारों को तुरंत ऐ चोर, ऐ दलाल या ऐ उचक्का कहकर पुकारने में तनिक देर नहीं करते और लगे हाथ, उसी सांस उसकी पूरी हिस्ट्रीशीट खोल देते हैं. ऐसे में सामने वाले को शर्मसार होते हुए दाएं-बाएं होना पड़ता है पर मदन मौर्या के मुखारबिंदु से उस उचक्का मार्का जर्नलिस्ट की कहानी जारी रहती है. और अगर किसी ने ज्यादा चां चूं चे पे ना नू ने की तो मदन मौर्या को दो हाथ छोड़ने में भी टाइम नहीं लगता.

और, बात चली है हाथ छोड़ने की तो बता दें कि जब पुलिस वाले घिनौना काम करने वाले किसी आरोपी या अपराधी को पकड़ते हैं तो इसकी सूचना मिलते ही मदन मौर्या थाने पहुंचते हैं और पहले हवालात से उस अपराधी को बाहर निकलवा कर दो दस बीस हाथ मारते हैं, उसके बाद फोटो खींचने का काम करते हैं. जब पूछो कि ऐसा क्यों करते हैं तो कहते हैं- क्या करें, खून खौल जाता है सुनकर कि इस हरामखोर ने किसी बच्चे से दुष्कर्म किया. ऐसे लोगों को तो पकड़कर गोली मार देने का काम करना चाहिए जिससे कोई भी ऐसा कुकृत्य करते डरे.

मदन मौर्या की अपने ज्यादातर सिटी इंचार्जों से नहीं पटी. शायद इसलिए भी कि मदन अपनी मर्जी के मालिक हैं और उनकी मर्जी में उनका कोई निजी स्वार्थ नहीं है, संस्थान और समाज का स्वार्थ रहता है. इसीलिए जागरण प्रबंधन भी मदन मौर्या को संरक्षण देता है अन्यथा मदन मौर्या के दैनिक जागरण में इतने दुश्मन हुए, इतनी शिकायतें प्लांड तरीके से कराई गईं कि वो जाने कबके बाहर हो चुके होते.

और, इस भूमिका के लिए मैं निजी तौर पर दैनिक जागरण, मेरठ के मालिकान की तारीफ करता हूं. मेरा निजी अनुभव है कि दैनिक जागरण समूह में सबसे ज्यादा ईमानदार, ट्रांसपैरेंट, डाउन टू अर्थ, जनपक्षधर और अपने ईमानदार कर्मियों के प्रति लायल डायरेक्टर्स अगर कहीं हैं तो वो मेरठ यूनिट में हैं. नरेंद्र मोहन के सगे भाई धीरेंद्र मोहन गुप्ता ने मेरठ यूनिट को शुरू कराया और कठिन मेहनत से जमाया व विस्तार किया. अब उनके दोनों पुत्र एक्टिव रोल में हैं. देवेश गुप्त और तरुण गुप्त. इन लोगों के अधीन मेरठ के अलावा आगरा, अलीगढ़, देहरादून आदि यूनिटें हैं.

मदन मौर्या फोटोग्राफरी का काम धीरेंद्र मोहन के जमाने से कर रहे हैं. और उनके पुत्र द्वय देवेश और तरुण गुप्ता ने भी मदन के मिजाज और काम को जांच परख लिया है. मदन न डरने वाला, न झुकने वाला, न काम में कोताही बरतने वाला. हमेशा एक्टिव रहने वाला फोटो जर्नलिस्ट. मेरठ में कहीं पत्ता भी खड़का तो सबसे पहले अगर किसी को खबर होगी तो मदन मौर्या हैं. नए फोटोग्राफर मदन का बहुत सम्मान करते हैं. और मदन भी उन नए लोगों को खूब संरक्षण देते हैं जो अपने काम और पत्रकारिता के प्रति ईमानदार होते हैं.
आप पूछेंगे कि इतनी भूमिका किसी एक आदमी के लिए क्यों बना रहा हूं. वो भी बता देता हूं.

पिछले दिनों जिन तस्वीरों पर पूरे यूपी में बवाल हुआ, उन तस्वीरों को कैमरे में कैद किया मदन मौर्या ने. और ये कारनामा उन्होंने पहली बार नहीं किया है. दर्जनों बार कर चुके हैं. मेरठ के मेडिकल कालेज में अगर कोई अपराधी फर्जी तरीके से अस्पताल में भर्ती हो गया और उसे पता लग गया कि मदन मौर्या आ रहे हैं तो वो सिर पर पांव रखकर भाग खड़ा होता है. उसी मदन मौर्या ने एक पुलिस अधिकारी के घर में घुसकर होमगार्डों के हो रहे उत्पीड़न की तस्वीरें उतारी. होमगार्ड लोग टायलेट साफ कर रहे थे, पोछा लगा रहे थे. और इनकी तस्वीरें उतारीं मदन मौर्या ने.

सोचिए, क्या आज के किसी फोटो जर्नलिस्ट में इतनी हिम्मत है कि वो किसी पुलिस अफसर के घर में घुसकर वहां के जंगलराज की तस्वीर उतार ले. यही हिम्मत तो नहीं है आज के पत्रकारों में, जिसके कारण बाकी संस्थाओं के भ्रष्ट लोग थर्राते थे मीडिया और पत्रकारों से. अब खुद पत्रकार भ्रष्ट हो गया है, मीडिया पतित हो चुकी है, सो हर कोई मीडिया और पत्रकारों को ब्लैकमेलरों का गिरोह कहता है. पर मदन मौर्या जैसे गिने-चुने लोग जब तक मीडिया में जहां जहां रहेंगे, मीडिया पर लोगों का भरोसा कायम रहेगा. मदन मौर्या की दोनों तस्वीरों को देखिए और उनके बेहतरीन काम के लिए उन्हें जरूर बधाई दीजिए. उनका फोन नंबर है- 09837099512.

उपरोक्त तस्वीरों से संबंधित खबर पढ़िए, क्लिक करें- एसपी ने होमगार्डों को सफाईकर्मी बना डाला

मेरठ में चाहे जो भी एसपी-डीएम रहे, इन एसपियों-डीएमों को शहर व जिले का खरा-खरा हाल बताकर उनकी निष्क्रियता का उलाहना देने से नहीं चूकते मदन. चूंकि मदन मौर्या का इन अफसरों से अपना कोई निजी काम नहीं पड़ता और न वे किसी दूसरे का कोई गलत काम कराते हैं, सो उनकी ईमानदार व बेबाक छवि के कारण अफसर भी उनकी बात को गौर से सुनते हैं और उनकी कही गई बात पर तुरंत कार्रवाई करते हैं. मदन के इस व्यवहार व व्यक्तित्व के कारण दर्जनों आईपीएस और आईएएस उनके फैन हैं जो कभी मेरठ में पोस्टेड रहे हैं.

करीब दो दशक से फोटोग्राफरी कर रहे मदन ज्यादातर वक्त एक्शन मोड में होते हैं. कई बार महसूस होता है कि ये आदमी नार्मल क्यों नहीं रहता. अब लगता है कि ये जो कुछ एबनार्मल लोग हैं, इन्हीं की हिम्मत और साहस के बदौलत देश-समाज में ज्यादातर लोग नार्मल जिंदगी जीने लायक माहौल पाते हैं. याद करता हूं आलोक तोमर जी को लगता है कि वो हमेशा एक खास किस्म की उत्तेजना में रहा करते थे. कुछ सोचा और तुरंत लिखने लगे, कुछ सुना और तुरंत अपना पक्ष तय कर उसका ऐलान कर दिया, कुछ पढ़ा तो तुरंत उसे आत्मसात कर उसके आदि-अंत की तलाश शुरू कर दी.

और, उसी उत्तेजना, उसी एक्शन मोड के कारण आलोक तोमर को कभी किसी से भय नहीं लगा, कुछ भी कहने में संकोच नहीं किया, जो महसूस किया उसे लिख डालने में कोई गुरेज नहीं किया. कई ऐसे लोग हैं. और जाने क्यों मुझे आजकल ऐसे लोगों से कुछ ज्यादा ही प्यार होने लगा है. फिलहाल तो मदन मौर्या के लिए यही कहूंगा कि शाबास, जुग-जुग जियो भाई, मुझे गर्व है कि मैंने कभी आपके साथ काम किया है.

‘मदन गान’ फिलहाल यहीं रोकता हूं.

यशवंत

एडिटर

भड़ास4मीडिया

मुकाबला धीरेंद्र मोहन व अतुल माहेश्वरी के बीच भी था

नौनिहाल शर्मा: भाग-38 : दैनिक जागरण के बाद अमर उजाला का भी मेरठ से संस्करण शुरू होने पर मेरठ के पुराने स्थानीय अखबारों का अस्तित्व संकट में पड़ गया था। उस समय मेरठ से दो दर्जन से ज्यादा दैनिक अखबार और करीब 800 साप्ताहिक अखबार पंजीकृत थे। इनमें से ज्यादातर नियमित थे। दैनिकों में प्रभात, मेरठ समाचार, हमारा युग और मयराष्ट्र बिकते भी थे। पर नये माहौल में उनकी बिक्री पर बहुत असर पड़ा। मेरठियों को जागरण और अमर उजाला में अपने आसपास की तमाम खबरें पढऩे को मिलने लगीं।

इसलिए लोकल अखबारों का सर्कुलेशन गिरने लगा। उन्होंने हॉकरों को पटाने की भरपूर कोशिश की, पर वे भी मजबूर थे। बड़े और बेहतर अखबरों के आने से अब पाठकों को अच्छा विकल्प मिलने लगा। इससे इन अखबारों के अलावा दिल्ली से आने वाले अखबार भी परेशानी में पड़ गये। नवभारत टाइम्स और हिन्दुस्तान की कॉपियां भी लगातार घटने लगीं। नवम्बर, 1987 में शुरू हुआ जनसत्ता जरूर लोगों को भा रहा था। पर उसमें भी मेरठ की खबरें कम ही रहती थीं। इसलिए अब सीधा मुकाबला जागरण और अमर उजाला में था। और इस मुकाबले में दो मोर्चे खुल गये थे। मेरठ शहर में जागरण आगे था, तो देहात में अमर उजाला। वैसे यह मुकाबला दोनों अखबारों के मालिकों धीरेन्द्र मोहन और अतुल माहेश्वरी के बीच भी था। धीरेन्द्र बाबू का ज्यादा ध्यान मार्केटिंग पर रहता था। उन्होंने संपादकीय विभाग पूरी तरह मंगल जायसवाल के हवाले कर रखा था। पर अमर उजाला में ऐसा नहीं था। अतुल जी खुद सारा काम देखते थे। संपादकीय विभाग पर भी उनकी पूरी नजर रहती थी। मीटिंग भी करते थे।

धीरेन्द्र बाबू केवल सोमवार को मीटिंग करते थे। अतुल जी रोज करते थे। धीरेन्द्र बाबू केवल उन खबरों पर ही जोर देते थे, जिनका असर मार्केटिंग पर पड़ता था। पर अतुल जी न केवल जागरण से, बल्कि दिल्ली के अखबारों से भी खबरों की तुलना करते थे। धीरेन्द्र बाबू संपादकीय विभाग के लोगों से सीधा संपर्क नहीं रखते थे, पर अतुल जी सबसे न केवल सीधा संपर्क रखते थे, बल्कि उन तक सब की पहुंच भी रहती थी। जागरण से एक पेस्टर मनोज जैरथ अमर उजाला में चला गया था। बीरू कुए पर रहता था। उसकी बहन की शादी में अतुल जी खुद गये थे। उनके विपरीत, धीरेन्द्र बाबू किसी स्टाफर से इस तरह के रिश्ते नहीं रखते थे। वे एलीट किस्म का व्यवहार करते थे। अतुल जी आम आदमी की तरह रहते थे। हालांकि बाद में उनमें भी काफी बदलाव आया, पर शुरुआती दिनों में वे बहुत सरल और स्टाफरों के दिलों को जीतने वाले व्यक्ति थे।

इलेक्ट्रा के अरुण जैन मेरठ के पहले मेयर थे। वे अखिल भारतीय टेबल टेनिस संघ के उपाध्यक्ष भी थे। देश का सबसे बड़ा इनामी टेबल टेनिस टूर्नामेंट मेरठ में कराते थे। खुद भी अच्छे खिलाड़ी थे। उस टूर्नामेंट में देश भर के सभी प्रमुख खिलाड़ी आते थे। शहर में उसका अच्छा-खासा माहौल रहता था। टूर्नामेंट के कई दिन पहले से खिलाड़ी मेरठ आने लगते थे। अमर उजाला का वह मेरठ में पहला साल था। सन 1986 की बात है। नौनिहाल की टेबल टेनिस में ज्यादा रुचि नहीं थी। पर वे देश के अंतरराष्ट्रीय खिलाडिय़ों को देखने के लिए जाते थे। पहले यह टूर्नामेंट स्टेडियम में होता था। फिर मवाना रोड पर अरुण जैन ने इलेक्ट्रा विद्यापीठ बना दिया, तो वहां होने लगा। उस साल यह टूर्नामेंट इलेक्ट्रा विद्यापीठ में हो रहा था। मैं कमलेश मेहता और मंजीत दुआ का सेमीफाइनल मैच कवर कर रहा था। नौनिहाल मेरे बराबर में बैठे थे। तभी प्लेइंग एरिना के एक कोने में हलचल हुई। कई लोग एक साथ आये। अरुण जैन तुरंत उस ओर लपके। मैं सुनील छइया को पहचानता था। वे मुरादाबाद से आये थे। मूलत: फोटोग्राफर थे। पर रिपोर्टिंग भी उतनी ही बेहतरीन करते थे। वे अमर उजाला के लिए बड़े एसेट साबित हुए। उनके साथ राजेन्द्र त्रिपाठी तथा और कई लोग भी थे। बीच में एक लंबे से, बहुत प्रभावशाली व्यक्ति थे। मैंने छइया जी से इशारे पूछा। उन्होंने कान में कहा, अतुल जी हैं।

अतुल जी यानी अतुल माहेश्वरी। अपने संपादकीय विभाग के छह प्रमुख लोगों से घिरे हुए। एक साथ कई काम करते हुए। अरुण जैन से बात कर रहे थे। मैच देख रहे थे। और राजेन्द्र को निर्देश देते जा रहे थे कि किस-किस एंगल से समाचार कवर किये जायें। उनकी नजर केवल खेल की खबरों पर ही नहीं थी। वे बड़े खिलाडिय़ों की निजी जिंदगी और यहां मिल रही सुविधाओं पर उनके विचारों पर भी खबरें चाहते थे। बाद में छइया जी ने उनसे परिचय कराया। हमें यह जानकर बहुत आश्चर्य हुआ कि वे जागरण के हर पत्रकार के बारे में काफी कुछ जानते थे। मसलन वह किस डेस्क पर काम करता है, उसकी कार्य शैली क्या है, अखबार में उसका क्या महत्व है और वह वहां संतुष्टï है। उनका दूसरे अखबार के बारे में ऐसा होमवर्क बहुत कुछ सिखाने वाला था। बाद में अमर उजाला के विस्तार में यह उनके काफी काम आया। उनकी नजर इस पर भी रहती थी कि  दोनों अखबारों में समाचारों की कवरेज में जो अंतर है, उसके लिए कौन-कौन से पत्रकार महत्वपूर्ण है। मसलन उन्होंने राजेन्द्र से कहा कि खेल में भुवेन्द्र जागरण के लिए अकेले डेस्क भी संभालता है और लोकल खेल समाचार भी कवर करता है, नौनिहाल लोकल खबरों के शीर्षकों के मास्टर हैं। इतना सब अतुल जी को पता था। यह उनके पेशेवर रुख के कारण था। इसका उनके अखबार को तो फायदा होता ही था, उनके लिए पूरा स्टाफ पूरी जी-जान से काम करता था।

बाद में नौनिहाल ने एक भष्यिवाणी की कि अतुल जी अब जागरण के पत्रकारों को लेना शुरू करेंगे। और उनके ज्यादातर अनुमानों के अनुसार यह भी सच निकला। कई लो जागरण से अमर उजाला गये। कई जाकर लौटे भी। हालांकि जैसा आजकल मेरठ से इसी महीने शुरू हो रहे ‘जनवाणी’ ने किया, वैसा जागरण और अमर उजाला कभी नहीं कर पाये थे। अब तो यशपाल ने जागरण की आधी टीम को ही इस नये अखबार में शिफ्ट करा दिया है।

बहरहाल। नौनिहाल ने जो कहा था, उसके अनुसार, वे खुद भी कुछ साल बाद अमर उजाला में चले गये। दरअसल, वे अतुल जी से बहुत प्रभावित थे। साकेत के गोल मार्केट में चाय की चुस्कियों के बीच अगले दिन उन्होंने कहा था कि अतुल माहेश्वरी प्रोफेशनल अखबार मालिक हैं।

‘1975 में आपात काल ने देश में पत्रकारिता को एक नयी दिशा दी। सेंसर के बंधन से मुक्त होने के बाद पत्रकारिता में एक नया जोश  गया। पत्रकार नयी जिम्मेदारी से काम करने लगे। खोजी पत्रकारिता में तेजी आयी..’

‘लेकिन गुरू, इसका अतुल जी से क्या मतलब?’

‘यार, तू बीच में बोल पड़ता है। पूरी बात सुने बिना।’

‘हां, बताओ आगे…’

‘तो बात ये है कि अब पत्रकारिता नयी दिशा-दशा में चलेगी। ऐसे में अखबारों के मालिकों और मैनेजमेंट का प्रोफेशनल होना जरूरी है। अब लाला टाइप अखबार नहीं चलेंगे।’

‘मतलब उनके दिन लद गये?’

‘नहीं। दिन तो नहीं लदे। हो सकता है कि वे अपने ढांचे के कारण खूब सफल भी रहें। पर पाठकों की नजरों में प्रोफेशनल अखबार ही चढ़ेंगे।’

‘मतलब ऐसे में उन मालिकों के अखबारों की पौ-बारह रहेगी, जो नये ढर्रे से अखबार चलायेंगे। बड़े कॉरपोरेट हाउसों के अखबारों को वह सफलता नहीं मिलेगी, क्योंकि वहां पुराने ढर्रे से काम होता है।’

भुवेंद्र त्यागीढाई दशक बाद भी ये बात सच है!

लेखक भुवेन्द्र त्यागी को नौनिहाल का शिष्य होने का गर्व है. वे नवभारत टाइम्स, मुम्बई में चीफ सब एडिटर पद पर कार्यरत हैं. उनसे संपर्क  bhuvtyagi@yahoo.com के जरिए किया जा सकता है.

बड़े अखबारों के भेदिए घूम रहे जनवाणी के आफिस के आगे-पीछे

: जनवाणी ने दो और अच्छे पत्रकारों को दैनिक जागरण से तोड़ा : बागपत ब्यूरो चीफ जयवीर तोमर और जहीर हसन ने जागरण को गुडबाय कहा : जागरण में भले ही दो की वापसी हो गई पर अभी कई विकेट गिरने को तैयार हैं : अमर उजाला और हिंदुस्तान के कर्मी भी जनवाणी का दामन थामने को बेताब : मेरठ यूनिट से जुड़े बागपत जिले के इंचार्ज व सीनियर सब एडिटर जयवीर सिंह तोमर और सब एडिटर जहीर हसन ने दैनिक जागरण को बाय बाय बोल दिया है. ये दोनों जनवाणी का दमन थामने वाले हैं. इन दोनों को मनाने के लिए संपादक राजवीर सिंह बागपत आये लेकिन दोनों ने पूरी तरह से पक्का फैसला कर लिया है. उधर, पश्चिमी यूपी की अखबारी दुनिया का केंद्र इन दिनों मेरठ में छीपी टैंक स्थित जनवाणी का दफ्तर बना हुआ है. पत्रकारों को तोडऩे, जोडऩे और मनाने की कवायदों के अलावा क्राइसिस मैनेजमेंट करने में जुटे लोग मेरठ में जनवाणी के आगामी कदमों पर ध्यान रख रहे हैं. सूत्र बताते हैं कि जनवाणी के मौजूदा ऑफिस के बाहर जागरण, अमर उजाला और हिंदुस्तान के ‘भेदिये’ हैं, तो वहीं जागरण, अमर उजाला और हिंदुस्तान के विकेट गिराने में जनवाणी के शीर्ष लोग लगातार कसरत कर रहे हैं.

हाल ही में खबर मिली है कि दैनिक जागरण की बागपत ब्यूरो की पूरी टीम ने संपादकीय टीम के इंचार्ज जयवीर तोमर समेत इस्तीफा दे दिया है, जिन्हें मनाने मेरठ से जागरण के पुराने विश्वस्त राजबीर सिंह को बागपत भेजा गया है. अब देखना यह है कि राजवीर सिंह जागरण की कितनी और विकटों को गिरने से बचा पाते हैं. उधर करीब एक माह पहले जागरण प्रबंधन से खफा होकर इस्तीफा देने वाले मृदुल त्यागी भी फिर से जागरण की टीम का हिस्सा बन गये हैं. इसी तरह लखनऊ में जागरण के उर्दू अखबार की लांचिंग टलने के बाद नोएडा में कुछ दिन गुजारने वाले पश्चिमी यूपी के धुरंधर पत्रकार रियाज हाशमी भी इस्तीफे के बाद पुन: जागरण में लौट आये हैं. खबर है कि जनवाणी ने सभी डेस्कों के लिए अंतिम लिस्ट फाइनल कर ली है जिसमें हर पद के लिए तीन लोगों को रखा गया है ताकि एक या दो के वापस अपने पुराने संस्थान पहुंचने पर भी कोई फर्क न पड़े. जागरण से जनवाणी पहुंचे अक्षय और हर्ष कुमार इस लिस्ट को अंतिम रूप दे रहे हैं.

अब तक जो खबरें छनकर आई हैं, उनके अनुसार जागरण से जनवाणी पहुंचे अक्षय कुमार को जनरल डेस्क और जागरण के पुराने कर्मचारी व हाल ही में पश्चिमी यूपी के पाक्षिक ‘एक कदम आगे’ में कार्यरत सचिन श्रीवास्तव को फीचर डेस्क की जिम्मेदारी दी गई है. इन दोनों ने ही अपनी-अपनी टीम फाइनल कर ली है. प्रादेशिक डेस्क और सिटी की टीम की जिम्मेदारी किसे दी गई है इस बारे में अभी पुष्ट खबरें पता नहीं चली हैं. उधर जनवाणी में लोगों के आने का सिलसिला लगातार जारी है. जागरण की विभिन्न यूनिट के करीब 40 लोग अगले एक-दो सप्ताह में जनवाणी का हिस्सा बन सकते हैं. हालांकि जागरण प्रबंधन ने इस स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं और जागरण का दामन छोडऩे वालों की लिस्टें तैयार करवानी शुरू कर दी हैं. लोगों को रोकने के लिए प्रलोभन और इग्नोरेंस की नीति अपनाई जा रही है.

इसके साथ अमर उजाला और हिंदुस्तान ने अपने-अपने ‘भेदिये’ जनवाणी के दफ्तर के बाहर तैनात कर दिये हैं. जागरण में तो हाल यह है कि जो लोग छुट्टी के लिए एप्लीकेशन देते हैं उनकी हर मूवमेंट पर प्रबंधन कड़ी नजर रख रहा है. छोटी-मोटी गलतियों के अलावा खबर रिपीट होने और हैडिंग गलत होने पर भी जागरण प्रबंधन सख्ती नहीं बरत रहा है. सूत्र बताते हैं कि जागरण, अमर उजाला और हिंदुस्तान के कई शीर्ष पदाधिकारी जो जनवाणी का हिस्सा नहीं बनेंगे, लेकिन जनवाणी टीम को पूरी मदद के मूड में हैं. असल में विभिन्न अखबारों में प्रबंधन के बढ़ते जोर के कारण संपादकीय के कई लोग अपने-अपने अखबारों से नाखुश हैं और उन्हें उम्मीद है कि यशपाल सिंह जैसे खांटी और आदर्शवादी पत्रकार के नेतृत्व में जनवाणी में संपादकीय की सत्ता पुन: स्थापित होगी और अन्य अखबारों की भी आंखें खुलेंगी. अगर जनवाणी अखबार सफल होता है तो यह संपादकीय टीम की मैनेजमेंट पर जीत के रूप में देखा जाएगा. यशपाल सिंह के व्यक्तिगत संबंधों के कारण भी कई पुराने दिग्गज उन्हें परदे के पीछे से भरपूर सहयोग कर रहे हैं. सूत्र बताते हैं कि जागरण, उजाला व हिंदुस्तान प्रबंधन की मीटिंग खत्म होते ही मीटिंग में डिस्कस हुए मुद्दों और उनकी रणनीति यशपाल सिंह के पास पहुंचा दी जाती है.

रियाज हाशमी और मृदुल त्यागी जागरण में वापस

दैनिक जागरण से इस्तीफा देने के बावजूद ये दोनों जागरण से दूर न रह सके. वापस लौट आए. मृदुल त्यागी आई-नेक्स्ट, मेरठ में हुआ करते थे. इस्तीफे से पहले उन्हें प्रस्ताव दिया गया कि वे दैनिक जागरण में काम कर लें, अगर आई-नेक्स्ट में दिल नहीं लग रहा है तो. पर वे अड़े रहे और इस्तीफा देकर घर बैठ गए. दिन महीने गुजरे और फिर बातचीत शुरू हो गई. आखिरकार वे जागरण, मेरठ में लौट ही आए.

इसी तरह रियाज हाशमी के साथ भी लगातार घटनाएं हो रही हैं. वे मेरठ से नोएडा भेजे गए. नोएडा से वापस मेरठ. और मेरठ में दैनिक जागरण से इस्तीफा देकर जनवाणी संग जाने का ऐलान कर दिया. लेकिन अब पता चल रहा है कि रियाज भी जागरण वापस लौट रहे हैं और उन्हें दैनिक जागरण, देहरादून का स्टेट ब्यूरो चीफ बनाया जा रहा है. उधर, मृदुल त्यागी को दैनिक जागरण में स्टेट डेस्क का हेड बनाया गया है.

कुलदीप, पारुल और अरुण अमर उजाला से जुड़े

एक एसएमएस के जरिए मेरठ से सूचना मिली है कि कुलदीप शर्मा ने दैनिक जागरण, मेरठ को बाय बोल दिया है. उन्होंने अमर उजाला, मेरठ के साथ नई पारी शुरू की है. हाल में ही कुलदीप ने हिंदुस्तान, बुलंदशहर से आकर जागरण, मेरठ में बतौर क्राइम रिपोर्टर ज्वाइन किया था. एसएमएस में कहा गया है कि जागरण प्रबंधन ने सेलरी को लेकर जो वादा कुलदीप से किया था, वह उस पर कायम नहीं रहा और सेलरी कम मिली. तभी खफा कुलदीप छुट्टी पर चले गए और बाद में इस्तीफा दे दिया. कुलदीप के साथ डीएलए, मेरठ से पारुल और हिंदुस्तान, मेरठ से अरुण शर्मा ने भी अमर उजाला, मेरठ ज्वाइन किया है. दोनों को अमर उजाला में ट्रेनी पद पर रखा गया है.

कुणाल ने हिंदुस्तान और ऋषि ने पत्रिका संग शुरू की नई पारी

दैनिक जागरण, मेरठ से कुणाल देव के बारे में खबर आ रही है कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है. वे कई वर्षों से दैनिक जागरण के साथ थे और वेस्ट यूपी के कई जिलों में काम कर चुके हैं. वे सीनियर सब एडिटर के पद पर थे. उन्होंने हिंदुस्तान, जमशेदपुर के साथ नई पारी शुरू की है.

ऋषि जायसवाल के बारे में सूचना मिली है कि उन्होंने अमर उजाला, आगरा से इस्तीफा देकर पत्रिका, ग्वालियर ज्वाइन कर लिया है.

एक मेल के जरिए मिली सूचना के अनुसार सुनील भदौरिया ने इंडियन न्यूजलाइन सर्विस (हिंदी मैग्जीन) के साथ नई पारी शुरू की है. वे पंजाब केसरी, आज समाज आदि जगहों पर काम कर चुके हैं.

रियाज और सुभाष भी ‘जनवाणी’ पहुंचे

रियाज़ हाशमी
रियाज़ हाशमी
: दोनों ने अपने-अपने संस्थानों से दिया इस्तीफा : दैनिक जागरण, मेरठ से रियाज हाशमी ने इस्तीफा दे दिया है.  रियाज हाशमी का 14 अक्टूबर को लखनऊ के लिए मेरठ से तबादला किया गया था. उन्हें जागरण प्रकाशन लिमिटेड द्वारा अधिग्रहीत मिड-डे ग्रुप के उर्दू अखबार इन्क़लाब के शीघ्र प्रकाशय यूपी संस्करण का संपादक बनाया गया था.

मगर उन्हें लगातार 15 दिनों तक नोएडा बैठाया गया और अंत में बताया गया कि इन्क़लाब का यूपी संस्करण अभी लंबा टल गया है. 2 नवंबर को इसी कारण से उन्हें वापस मेरठ भेज दिया गया. रियाज़ इसी बात से खिन्न थे और लग रहा था कि उन्हें जागरण की आंतरिक राजनीति का शिकार बनाया गया है. एक हफ्ते से रियाज़ अपने घर पर थे और मेरठ प्रबंधन ने उन्हें शीघ्र ही नई जिम्मेदारी देने का आश्वासन दिया था. सोमवार को रियाज़ ने मेरठ पहुंचकर अपना इस्तीफा निदेशकों को सौंप दिया. माना जा रहा है कि रियाज़ मेरठ से जल्द प्रकाशित होने वाले हिंदी दैनिक जनवाणी में अच्छे पद व पैकेज पर ज्वाइन करेंगे.

रियाज हाशमी के इस्तीफे से दैनिक जागरण, मेरठ को फिर काफी बड़ा झटका लगा है. जागरण, वेस्ट यूपी के पुराने लोगों में से एक रियाज हाशमी लंबे समय से सहारनपुर में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत रहे. आठ माह पहले उन्होंने मेरठ में बतौर वेस्ट यूपी स्टेट डेस्क हेड ज्वाइन किया था. रियाज़ हाशमी जागरण के पुराने और कर्मठ लोगों में गिने जाते रहे हैं. 1999 में अमर उजाला हरियाणा में लांचिंग कराते समय ही रियाज़ को दैनिक जागरण प्रबंधन सहारनपुर में बतौर ब्यूरो चीफ लाया था. तब दैनिक जागरण की शहर में 1700 और जिले में 4 हजार कॉपियां बिकती थीं.

रियाज़ के कार्यकाल में दैनिक जागरण की शहर में 19 हजार से अधिक और जिले में 40 हजार से अधिक प्रतियां बिकने लगीं. खबर और कंटेट जेनरेटर के तौर पर पहचान बनाने वाले रियाज़ हाशमी हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू भाषाओं पर भी अच्छी पकड़ रखते हैं और हिंदुस्तान टाइम्स व क़ौमी आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में भी काम कर चुके हैं. कंप्यूटर पर कार्य करने में अभ्यस्त पुराने पत्रकारों में से भी वह एक हैं. बताया गया है कि दैनिक जागरण के निदेशकों ने इस्तीफा देने पहुंचे रियाज़ हाशमी से करीब दो घंटों तक मैराथन वार्ता की, लेकिन रियाज़ को मनाने में सफल नहीं हो सके. रियाज़ के इस्तीफे के बाद जागरण प्रबंधन डैमेज कंट्रोल में जुट गया है. इस महीने दैनिक जागरण से संपादकीय समेत विभिन्न विभागों से कई और बड़े नामों के संस्थान छोड़ने की प्रबल संभावनाएं हैं.

एक अन्य जानकारी के मुताबिक अमर उजाला, मेरठ से सुभाष ने भी इस्तीफा दे दिया है. सुभाष खेल डेस्क पर कार्यरत थे. उनके भी जनवाणी ज्वाइन करने की सूचना है. सुभाष मेरठ के ही रहने वाले हैं. अमर उजाला से पहले वे दैनिक जागरण में कार्यरत थे. सुभाष को जनवाणी के संपादक यशपाल सिंह का करीबी बताया जाता है.

 

दैनिक जागरण, मेरठ से सात गए, दो जुड़े

: सभी सरकुलेशन विभाग के : जनवाणी ज्वाइन किया : अमर उजाला व हिंदुस्तान के एक-एक पत्रकारों ने जागरण, मेरठ ज्वाइन किया : अमर उजाला, लखनऊ के साथ चार पत्रकार जुड़े : दैनिक जागरण, मेरठ के साथ दो पत्रकारों ने नई पारी शुरू की है और सरकुलेशन विभाग के सात कर्मचारियों ने इस्तीफा दिया है. जिन दो लोगों ने संपादकीय विभाग में ज्वाइन किया है उनके नाम हैं राहुल पांडेय और रवि प्रकाश. राहुल इससे पहले अमर उजाला, गाजियाबाद में कई वर्षों से कार्यरत थे.

वे पहले भी दैनिक जागरण, मेरठ में काम कर चुके हैं लेकिन तब वे आई-नेक्स्ट के हिस्से हुआ करते थे. रवि प्रकाश दैनिक हिंदुस्तान, चंड़ीगढ़ के साथ संबद्ध थे. दैनिक जागरण, मेरठ के सरकुलेशन विभाग के जिन सात कर्मचारियों ने इस्तीफा दिया है उनके नाम हैं-  आशीष शर्मा, दीपक उपाध्याय, जयविंदर सिंह, निशीथ वर्मा, सोकरन, हरिमोहन और सौरभ त्यागी. ये सभी सीनियर एक्जीक्यूटिव व एक्जीक्यूटिव हैं. इन सभी ने मेरठ से ही प्रकाशित होने वाले नए हिंदी दैनिक जनवाणी के साथ नई पारी शुरू की है. जनवाणी से जुड़े वरिष्ठ लोगों ने संपादकीय व प्रोडक्शन से कई लोगों को तोड़ने के बाद अब सरकुलेशन विभाग पर निशाना साध दिया है. इस तरह जागरण, मेरठ को झटके पर झटका लगने का सिलसिला जारी है.

जागरण के सरकुलेशन प्रभारी इंद्रजीत चौधरी जनवाणी के इस झटके के बाद डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं और बाकी लोगों को रोकने की कवायद कर रहे हैं. दैनिक जागरण, मेरठ के निदेशक तरुण गुप्ता भी सभी विभागों के प्रत्येक कर्मचारियों से मिल कर उनकी दिक्कतें व उनकी निष्ठा का पड़ताल कर रहे हैं ताकि जनवाणी जाने वाले संभावित लोगों को रोका जा सके. उधर, पता चला है कि जनवाणी के वरिष्ठ लोगों ने दीवाली की सुबह मेरठ के सेंटरों का दौरा किया और सभी हाकरों व एजेंटों को दिवाली के मौके पर मिठाई का डिब्बा भेंट कर जनवाणी से जुड़ाव का एहसास कराया.

एक अन्य सूचना के मुताबिक दैनिक जागरण, मेरठ में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार और संपादकीय प्रभारी राजवीर सिंह ने ग्राम प्रधान का चुनाव जीत लिया है. वे अब प्रधान बन चुके हैं. संपादक के रूप में वे पहले से ही दैनिक जागरण में कार्यरत हैं. इस तरह प्रधान – संपादक, दोनों ही पदवी राजवीर सिंह के पास आ गई है.

उधर, अमर उजाला, लखनऊ ने भी दैनिक जागरण को झटका देने का सिलसिला जारी रखा हुआ है. जागरण समूह के कुल तीन लोगों ने अमर उजाला, लखनऊ ज्वाइन किया है. दैनिक जागरण और आई-नेक्स्ट से इस्तीफा देकर जिन लोगों ने अमर उजाला, लखनऊ ज्वाइन किया है, उनके नाम हैं- अखिलेश अग्निहोत्री, राकेश वर्मा और सौरभ शर्मा. राकेश आई-नेक्स्ट, लखनऊ के साथ थे. सौरभ आई-नेक्स्ट, बरेली में थे. अखिलेश दैनिक जागरण कानपुर छोड़कर आए हैं. इससे पहले आई-नेक्स्ट, वाराणसी के आशीष ने भी इस्तीफा देकर अमर उजाला, लखनऊ ज्वाइन किया. इन्हें जोड़ लें तो कुल चार लोग अमर उजाला, लखनऊ के हिस्से बने हैं. उधर, अमर उजाला को लखनऊ में जमाने के लिए और गिरते सरकुलेशन को थामने के लिए प्रबंधन ने दाम घटाने का फैसला किया है. अब इस अखबार को दो रुपये का कर दिया गया है. माना जा रहा है कि लखनऊ के दूसरे अखबार भी देर सबेर इस रास्ते को अपना सकते हैं.

जागरण, मेरठ से हर्षवर्द्धन और मनीष का भी इस्तीफा

मेरठ में दैनिक जागरण को जोर का झटका जोर से लगने का सिलसिला जारी है. ताजी सूचना के मुताबिक मेरठ से लांच हो रहे गाडविन ग्रुप के हिंदी अखबार दैनिक जनवाणी के साथ हर्षवर्धन और मनीष शर्मा भी हो लिए हैं. ये दोनों अभी तक दैनिक जागरण, मेरठ में थे. हर्षवर्धन उर्फ हर्षी लंबे समय से दैनिक जागरण, मेरठ के साथ रहे. वे पेजीनेशन, प्रासेस और प्रोडक्शन के सबसे तेजतर्रार कार्यकर्ता और नेता रहे हैं. इन दिनों उनका पद प्रोडक्शन सुपरवाइजर का था.

हर्षवर्द्धन को रोकने के लिए जागरण प्रबंधन ने भरपूर कोशिश की लेकिन उन्होंने इस्तीफा देकर नए लांच होने जा रहे अखबार का दामन थाम लिया. सूत्रों का कहना है कि दैनिक जागरण के जनरल डेस्क इंचार्ज के पद से इस्तीफा देकर गाडविन ग्रुप के अखबार का संपादक बनने वाले तेजतर्रार पत्रकार यशपाल ने जागरण से विकेट गिराने का काम तेज कर दिया है. पिछले दिनों सिटी चीफ पद से रवि शर्मा ने इस्तीफा दिया. हर्षवर्द्धन के इस्तीफा को जागरण के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. देखना है कि आने वाले दिनों में और कौन कौन लोग अपने अपने अखबारों का दामन छोड़कर दैनिक जनवाणी के हिस्से होते हैं. कुल मिलाकर इन दिनों मेरठ की मीडिया में माहौल गरम है और कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं.

मेरठ से लांच होगा ‘दैनिक जनवाणी’

रवि शर्मा
रवि शर्मा
: यशपाल के बाद रवि शर्मा का भी इस्तीफा : दैनिक जागरण, मेरठ में भगदड़ : कई और लोग हैं कतार में : रियाज हाशमी उर्दू दैनिक इन्कलाब के रेजीडेंट एडिटर (यूपी) बनाए गए : अवनीश त्यागी का तबादला जागरण के स्टेट ब्यूरो के लिए लखनऊ हुआ : दैनिक जागरण मेरठ के न्यूजरूम में भगदड़ मची हुई है। कई बड़े नाम संस्थान छोड़ चुके हैं या विदा हो चुके हैं। जनरल डेस्क प्रभारी यशपाल सिंह ने सोमवार को इस्तीफा दिया तो सिटी चीफ रवि शर्मा ने मंगलवार को निदेशकगणों को इस्तीफा सौंप दिया। दोनों गॉडविन ग्रुप के अखबार ‘दैनिक जनवाणी’ में गये हैं जो जल्द ही मेरठ से प्रकाशित होने जा रहा है। वहीं, दैनिक जागरण में वेस्ट यूपी स्टेट डेस्क हेड रियाज हाशमी को जागरण ग्रुप के लखनऊ से प्रकाशित होने जा रहे उर्दू दैनिक इन्कलाब का रेजीडेंट एडिटर बना दिये जाने के कारण सोमवार को उन्हें रिलीव कर दिया गया। इसके अलावा सिटी रिपोर्टिंग टीम के दो सदस्य रजनीश त्रिपाठी और अनुज मित्तल पिछले हफ्ते जागरण को अलविदा कहकर अमर उजाला चले गये। इससे पहले सिटी के क्राइम रिपोर्टर सचिन त्यागी इस्तीफा दे चुके हैं।

वहीं, मंगलवार को ही मेरठ सिटी टीम के वरिष्ठ रिपोर्टर अवनीश त्यागी को रिलीव कर दिया गया है। उन्हें लखनऊ में दैनिक जागरण स्टेट ब्यूरो के लिए रवाना किया गया है। इसके

यशपाल
यशपाल
अलावा एक और पुराने जर्नलिस्ट दूसरे अखबार से संपर्क में हैं जिनके कभी भी इस्तीफा देने की संभावना है। अगले एक हफ्ते में दैनिक जागरण की संपादकीय टीम से दर्जन भर लोग एक के बाद एक-एक करके इस्तीफे देने की योजना बनाए हुए हैं। विज्ञापन और तकनीकी टीम के भी कई लोग जागरण को छोड़ने जा रहे हैं। संक्रांतिकाल की स्थिति में दैनिक जागरण के निदेशकगणों ने मंगलवार की शाम को कोर टीम की मीटिंग की, जिसमें संस्थान छोड़ने वाले संभावित लोगों के नामों पर चर्चा हुई।

दैनिक जागरण, मेरठ के सिटी चीफ रवि शर्मा इसके पहले दैनिक जागरण, आगरा में सिटी चीफ थे। आगरा में उन्होंने पिछले साल सितम्बर में सिटी इंचार्ज के रूप में कार्य संभाला। उनके कार्यकाल में आगरा में जागरण के प्रसार में अच्छी खासी ग्रोथ हुई। प्रबंधन ने रवि को मेरठ में फिर बुला लिया, इसी साल अगस्त माह में। रवि ने समय समय पर प्रबंधन द्वारा दिये गये विभिन्न लक्ष्य हासिल किये। संपादकीय के साथ ही साथ विज्ञापन व प्रसार में उन्हें महारत हासिल है। रवि ने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। बाद में सब एडिटर के रूप में दैनिक जागरण में आए। यहीं वह लगातार प्रमोशन पाते रहे। अभी उनका पद दैनिक जागरण में मुख्य उप संपादक का था।

दैनिक जागरण, मेरठ में हलचल, कई इधर-उधर

दैनिक जागरण, मेरठ से कई सूचनाएं आ रही हैं. सबसे बड़ी खबर तो यह है कि वरिष्ठ खेल पत्रकार और जनरल डेस्क इंचार्ज यशपाल ने इस्तीफा दे दिया है. उनके बारे में कहा जा रहा है कि जागरण प्रबंधन ने अभी उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है.

कुछ लोगों का कहना है कि यशपाल मेरठ से नए लांच हो रहे गाडविन ग्रुप के अखबार में अच्छे पद व पैकेज पर जा रहे हैं. वहीं, कुछ लोग बता रहे हैं कि जागरण की आंतरिक राजनीति से क्षुब्ध होकर उन्होंने इस्तीफा दिया है. एक अन्य सूचना के मुताबिक दैनिक जागरण, मेरठ से दो रिपोर्टरों ने इस्तीफा दे दिया है. इनके नाम अनुज मित्तल और रजनीश त्रिपाठी है. दोनों के बारे में बताया जा रहा है कि इन लोगों ने अमर उजाला, मेरठ ज्वाइन किया है. उधर, एक खबर ये भी है कि दैनिक जागरण, मेरठ के वरिष्ठ पत्रकार अवनीश त्यागी को जागरण के लखनऊ स्टेट ब्यूरो में भेजने की तैयारी चल रही है. ऐसा स्टेट ब्यूरो के जरिए वेस्ट यूपी से जुड़ी खबरों की संख्या व गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए किया जा रहा है.

न्यूज रूम में ‘अबे-तबे’ शुरू!

: राजवीर सिंह फिर आए फार्म में : रिटायरमेंट में बचे हैं एक साल : कई लोग नौकरी तलाशने में जुटे : दैनिक जागरण, मेरठ में कुछ समय से साइडलाइन चल रहे बुजुर्ग पत्रकार और डिप्टी न्यूज़ एडीटर राजवीर सिंह फिर सक्रिय हो गए हैं. रिटायरमेंट के ठीक पहले प्रबंधन ने उन्हें खुलकर खेलने का मौका प्रदान कर दिया है. राजवीर सिंह तकरीबन एक साल से संस्थान में किनारे कर दिये गये थे. तब से वह केवल मेरठ में अखबारों की समीक्षा करके अपनी भड़ास निकाल रहे थे. समाचार संपादक विजय त्रिपाठी के आने के बाद से राजवीर सिंह का न्यूज़ रूम में प्रवेश निषेध था.

कुछ महीनों से राजवीर सिंह लगातार विजय त्रिपाठी से मिलजुल रहे थे. वेस्ट यूपी स्टेट हेड बनने के बाद से विजय त्रिपाठी व्यस्त चल रहे हैं. उन्होंने भी राजवीर सिंह की सिफारिश प्रबंधन से कर दी. प्रबंधन ने राजवीर सिंह को मेरठ यूनिट के न्यूज़ रूम का प्रशासनिक दायित्व सौंप दिया है. विजय त्रिपाठी ने इससे पहले भी प्रयोग किया था और राजवीर सिंह के व्यवहार, भ्रष्टाचार और आतंक से मुक्त कराने के लिए मनोज झा को प्रादेशिक डेस्क प्रभारी बनाया था. लेकिन मनोज झा भी धीरे-धीरे कई तरह के विवादों में फंसते गए.

मनोज झा को पिछले दिनों इनपुट डेस्क प्रभारी बना दिया था. इसके तहत मनोज झा के पास खबरों की मॉनिटरिंग का काम रह गया है. राजवीर सिंह ने नई व्यवस्था की कमान शुक्रवार से संभाल ली है. विजय त्रिपाठी इन दिनों वेस्ट यूपी के दौरे पर हैं. दो दिनों में ही राजवीर सिंह ने न्यूज रूम में फिर अपने तेवर दिखा दिए हैं. वे प्रबंधन को दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि उनके काम करने से अखबार समय से छूट रहा है. न्यूज़ रूम में डेस्क प्रभारियों से ‘अबे-तबे’ करके राजवीर सिंह अहसास करा रहे हैं कि वह अंतिम पारी खेल रहे हैं और साल भर बाद उनका रिटायरमेंट होना है.

न्यूज रूम में यह चर्चा है कि राजवीर सिंह ने अपने पुराने चेलों बिजनौर प्रभारी अशोक चौहान, मुजफ्फरनगर प्रभारी नीरज गुप्ता और सहारनपुर प्रभारी अवनींद्र कमल को तो बाकायदा फोन पर ही खुली छूट देते हुए हिसाब-किताब की पुरानी मासिक व्यवस्था बहाल कर दी है. प्रबंधन के इस कुप्रबंधन से त्रस्त जागरण के कुछ वरिष्ठ साथी नौकरी छोड़ने की फिराक में हैं. कुछ लोग भास्कर प्रबंधन के वरिष्ठों के संपर्क में हैं तो कुछ मेरठ के गॉडविन ग्रुप के नये अखबार के व्यवस्थापकों में गिने जाने लगे हैं.

उधर, राजवीर सिंह के न्यूज रूम में सक्रिय हो जाने और रवि शर्मा के फिर से सिटी इंचार्ज बना दिए जाने को मेरठ की मीडिया के जानकार लोग दूसरे रूप में ले रहे हैं. इनका मानना है कि पंचायत चुनाव नजदीक होने के कारण निदेशक गुप्ताज को कमाऊ पूतों को आगे करना ही था. राजवीर व रवि एडवरटोरियल, पेड न्यूज और लाइजनिंग के उस्ताद रहे हैं व चुनावों में इस जोड़ी ने अच्छी खासी कमाई करवाई है, सो, इसस जोड़ी को फिर से बहाल कर प्रबंधन ने चुनाव से अच्छी कमाई कर लेने की पूरी रणनीति बना ली है. ऐसे में काम करने वालों के लिए दौरे करने, दूसरे अखबारों में नौकरी तलाशने व किनारे पड़े रहने के अलावा करने के लिए और कुछ बचता नहीं है.

मेरठ से आई एक पत्रकार की चिट्ठी पर आधारित. इस विश्लेषण से कोई अगर सहमत-असहमत हो तो अपनी बात नीचे कमेंट बाक्स में लिख सकता है या फिर bhadas4media@gmail.com पर मेल कर सकता है. मीडिया से जुड़ी सूचनाएं, खबरें, हलचल, लेख, सम्मान, गतिविधि आदि हम तक bhadas4media@gmail.com के जरिए पहुंचा सकते हैं. अनुरोध करनने पर भेजने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा.

जागरण ग्रुप से मृदुल ने तौबा किया

: इस्तीफे का नोटिस भेजा : अमर उजाला में जाने की चर्चा : आई-नेक्स्ट, मेरठ से सूचना है कि डिप्टी न्यूज एडिटर मृदुल त्यागी ने पिछले सप्ताह प्रबंधन को इस्तीफे का नोटिस भेज दिया. मृदुल उत्तराखंड व वेस्ट यूपी स्टेट हेड के रूप में आई-नेक्स्ट की तीन यूनिटों मेरठ, देहरादून और आगरा के कामधाम को देखते थे. मृदुल चार सदस्यीय आई-नेक्स्ट थिंक टैंक के सदस्य भी थे. इस थिंक टैंक के पास संपादकीय नीति से संबंधित फैसले लेने का अधिकार है. सूत्रों के मुताबिक मृदुल ने प्रबंधन को एक माह का नोटिस भेजा है. संभवतः 23 को मृदुल का नोटिस पीरियड पूरा होगा.

बताया जाता है कि आई-नेक्स्ट व जागरण प्रबंधन ने मृदुल की मनुहार की लेकिन मृदुल आई-नेक्स्ट में अब किसी कीमत पर काम करने को राजी नहीं है. मृदुल त्यागी ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि अब वह जागरण समूह में कार्य नहीं करेंगे. वजह क्या है, यह तो पता नहीं चल पाया है लेकिन सूत्र बताते हैं कि मृदुल ने अभी तक किसी दूसरे अखबार में भी जाब के लिए कोई बात नहीं की है. ऐसे में यह कुछ नहीं कहा जा सकता कि मृदुल इस्तीफे के बाद क्या करने जा रहे हैं.

मृदुल त्यागी ने अपना इस्तीफा ग्रुप एडमिन हेड अजय मिश्रा के इस्तीफे के बाद दिया है. इसकी कॉपी दैनिक जागरण के समूह संपादक संजय गुप्ता, निदेशक देवेश गुप्ता, निदेशक तरुण गुप्ता के अलावा आई-नेक्स्ट हेड आलोक सांवल को भी भेजी गई है. मृदुल त्यागी तेजतर्रार पत्रकारों में माने जाते हैं. चर्चा यह भी है कि उनकी अमर उजाला के एक स्थानीय संपादक के जरिए निदेशक अतुल माहेश्वरी से बात लगभग पक्की हो चुकी है.

मृदुल पहले भी अमर उजाला में छह साल तक काम कर चुके हैं. शशि शेखर के कार्यकाल में प्रतिभावान लोगों के अमर उजाला से पलायन के दौर में मृदुल त्यागी ने भी अमर उजाला को गुडबाय बोल दिया था. उन्होंने संडे इंडियन मैग्जीन, दिल्ली में बतौर चीफ एडिटर काम किया है. दैनिक हिंदुस्तान में सीनियर कापी एडिटर व दैनिक जागरण, मेरठ में सीनियर रिपोर्टर रहे हैं. इस पूरे प्रकरण के बारे में भड़ास4मीडिया की तरफ से मृदुल त्यागी से जब संपर्क का प्रयास किया गया तो उनका मोबाइल आउट आफ कवरेज बताता रहा.

दैनिक जागरण, मेरठ व आगरा में बदलाव

आनंद शर्मा संपादकीय प्रभारी : अवधेश माहेश्वरी चीफ रिपोर्टर : दैनिक जागरण में मैनेजरों से संपादकीय अलग करने की जो कवायद शुरू हुई है उसी के तहत खबर है कि दैनिक जागरण, आगरा का नया संपादकीय प्रभारी आनंद शर्मा को बनाया गया है. अभी तक सरोज अवस्थी जनरल मैनेजर के रूप में संपादकीय समेत सभी विभागों के हेड हुआ करते थे.

आनंद शर्मा इन दिनों दैनिक जागरण, मेरठ में चीफ रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं. आनंद की जगह दैनिक जागरण, आगरा के सिटी डेस्क प्रभारी अवधेश माहेश्वरी को नया चीफ रिपोर्टर बनाकर दैनिक जागरण, मेरठ भेजे जाने का फैसला हुआ है. सूत्रों के मुताबिक पहली बार चीफ रिपोर्टर की प्रोफाइल में काम करने जा रहे अवधेश माहेश्वरी को कुछ महीने आनंद शर्मा मेरठ में रहकर गाइड करेंगे. उधर, मेरठ से आगरा भेजे गए रवि शर्मा के बारे पता चला है कि उन्हें प्रबंधन ने आगरा में ही काम करते रहने को कहा है. आगरा में विनोद भारद्वाज प्रादेशिक इंचार्ज के रूप में काम देखते रहेंगे.

दैनिक जागरण, मेरठ के नए चीफ रिपोर्टर बनाए गए अवधेश माहेश्वरी प्रतिभावान पत्रकारों में माने जाते हैं. पंद्रह साल पहले नवभारत से पत्रकारिता शुरू करने वाले अवधेश लगभग दो साल अमर उजाला, आगरा में जनरल डेस्क पर रहे. वहां से इस्तीफा देकर जागरण के साथ पारी की शुरुआत की. यहां वह रिपोर्टिंग से जुड़ गए और ताज कारीडोर समेत कई घपलों-घोटालों का खुलासा किया.