रुला गया आलोक तोमर का यूं चले जाना

रविवार की सुबह जब पूरा उत्तर भारत होली के जश्न में डूबा था, ठीक तभी एक ऐसी खबर आई, जो समूचे पत्रकार जगत को शोक के काले रंग में भिगो गई। खबर यह थी कि वरिष्ठ पत्रकार आलोक तोमर अब इस दुनिया में नहीं रहे। यह तो सही है कि जो व्यक्ति सफल होता है, उसके शत्रु भी होते हैं और मित्र भी। चूंकि प्रभाषजी के निधन के बाद आलोक ने मीडिया की शुचिता की मशाल भी अपने हाथों में थाम ली थी। अत: कुछ मीडिया घरानों व कुछ पत्रकारों को भी वे समय-समय पर आईना दिखाते रहते थे।

लिहाजा, संभव है कि उनके निधन को गंभीरता से न लिए जाने का नाटक भी किया जाए, पर सच यही है कि आलोक का न रहना पत्रकारिता जगत का बहुत बड़ा नुकसान है। उनकी धारदार रिपोर्टिंग, रिपोर्ट या लेख लिखते समय शब्दों का उनका चयन और यदि किसी पर कोई आरोप लगाया, तो उसके समर्थन में उसी लेख या रिपोर्ट में दर्जनों प्रमाणों को पेश कर देने की पत्रकारीय प्रतिभा सिर्फ आलोक तोमर में ही मौजूद थी।

वे सचमुच आदर्श पत्रकार थे-धीर, गंभीर और बेहद जुझारू। करीब एक वर्ष हो गया, जब पता चला था कि आलोक तोमर को कैंसर है, लेकिन इसके बावजूद अभी दो सप्ताह पहले तक भी वे सक्रिय थे और राजनीति, मीडिया तथा समाज की विद्रूपताओं को देश के सामने उजागर करने के अभियान में लगे हुए थे। भरोसा नहीं होता कि अब वे हमारे बीच नहीं रहे, पर भरोसा न करने से कुछ नहीं हो सकता। सच यही है कि वे अब हमारे बीच नहीं हैं।

सच के पक्ष में उठने वाली एक बुलंद और निर्भीक आवाज क्रूर काल ने ऐसे समय हम से छीनी है, जब उसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी। बस, अब उनकी यादें ही शेष हैं, जो सच की राह पर चलने वाले पत्रकारों को रास्ता दिखाएंगीं। सुकर्मों से कालातीत हो चुके
आलोक तोमर को भावभीनी श्रद्धांजलि।

यह लेख राज एक्‍सप्रेस भोपाल के संपादकीय में छपा है. जिसे राजेंद्र चतुर्वेदी ने लिखा है.

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Comments on “रुला गया आलोक तोमर का यूं चले जाना

  • Bijender Sharma says:

    वह आज भी हमारे बीच में हैं रहेंगे भी हमारी प्रेणना बनकर मेरा मानना है की वह हाथ में कलम नहीं बन्दुक लेकर चलते थे यही बात बात मुझे उनकी पससंड थी अक्सर मैंने फ़ोन पर पर उनसे हिमाचल आने की बात्त की तो हर बार उनका भरोसा मुझे मिला जनसत्ता के बाद मेरा उनके साथ डेटलाइन इंडिया से भी गहरा नाता रहा आलोक तोमर की सबसे बड़ी खासियत उनका संवेदनशील होना था
    बिजेंदर शर्मा धर्मशाला

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  • arshad ali khan says:

    rajendr ji aaj yani 21 march ko to raj express ki chutti he,phir yeh lekh raj express me kab chhap gaya?

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  • vikram dutt says:

    ये बात अलग है की हम जैसे लोगों को तोमर साहब से रूबरू होने का मौका नहीं मिला > लेकिन उनकी पत्रकारिता की तीखी धार से हमने भी बहुत कुछ सीखा > इस दुःख की घडी में हम उनके शोक संतप्त परिवार के साथ है और भगवान से दुआ करते है की उन्हें सद्मार्ग प्रदान करे >

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