लगा जैसे इनकी मां मरी हैं!

: कुंवर फतेहबहादुर की मां के मरने का मतलब समझ आया बनारसियों को : मसान बाबा ने भी तेलाही की यह इंतहा शायद ही कभी देखी हो : वाराणसी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर बुधवार को नौकरशाहों और पुलिसियों ने ऐसा नजारा पेश किया कि काशी के लोगों की आखें फटी की फटी रह गयीं। मौका था उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव (गृह) कुंवर फतेह बहादुर सिंह की मां की अंत्येष्टि का।

धाकड़ आईएएस और उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव (गृह) फतेह बहादुर सिंह की मां की मौत वैसे तो छोटी-मोटी खबर है ही। लेकिन इससे ज्यादा बड़ी खबर लोगों की जुबान पर यह थी कि पहली बार श्मशान घाट पर अंत्येष्टि देखने वालों के लिए कुर्सियां लगीं। और, नौकरशाहों ने बाकायदा कुर्सी पर बैठकर किसी चिता को जलते हुए देखा। इस घटना की कवरेज करने वाले पत्रकारों और फोटोग्राफरों ने बताया कि मणिकर्णिका घाट पर उन लोगों ने हजारों रसूखदार लोगों और मंत्रियो के परिजनों की अंत्येष्टि क्रिया देखी और कवरेज किया पर यहां कुर्सियां लगते जिंदगी में पहली बार देखा। आपको बता दें कि महाश्मशान में शवों की अंत्येष्टि का बेहद धार्मिक महत्व है और ऐसी मान्यता है कि मरने वाला सीधे स्वर्ग को जाता है।

यहां सती का कुंडल गिरा था इसी से इसका नाम मणिकर्णिका घाट पड़ा। कुंवर फतेह बहादुर सिंह की मां समराजी देवी (75) का निधन मंगलवार को देर रात लगभग ढाई बजे आजमगढ़ जिले के लालगंज (मेहनगर) स्थित गांव पौनी कलां में हुआ और शव बुधवार को दोपहर डेढ़ बजे बनारस के लिए चला। शव पहुंचने के पहले ही पूरे मणिकर्णिका घाट पर पुलिस की चाक चौबंद व्यवस्था कर दी गयी थी। पहली बार अन्यान्य शवों की अंत्येष्टि में भाग लेने आए शवयात्रियों को हटो-बढ़ो, दूसरी ओर से जाओ आदि झिड़कीनुमा शब्द इस महाश्मशान पर सुनने को मिले।

लेकिन, इंतहां तो तब हो गयी जब आईजी, डीआईजी, और कमिश्नर-डीएम जैसे लोगों में अर्थी को कंधा देने की होड़ दिखी। लगा जैसे इन अधिकारियों की मां मरी हैं। मसान बाबा के मंदिर के पास चबूतरे पर कुर्सियां लगीं जैसे अंत्येष्टि नहीं, किसी आयोजन के लिए वीआईपी आदि की आवभगत की जा रही हो। उस पर सशरीर नौकरशाह और उच्च पुलिसिये विराजमान थे। सभी लोग फतेहबहादुर सिंह को अपना चेहरा दिखाने को उतावले थे। यह उतावलापन इतना अधिक था कि शव को गंगा नहलाने की रस्म के दौरान आईएएस और आईपीएस जूता मोजा पहने घुटनों पानी में घुस गए और अंजुरी भर-भर कर गंगा जल की शव पर बौछार करने लगे। तेल लगाने की इस इंतहां में इन नौकरशाहों को अपनी ड्रेस की भी परवाह नहीं रही, न जान की। घुटनों पानी में घुसे इन नौकरशाहों को देख कई मल्लाह दौड़े ताकि कोई नौकरशाह तेल लगाने की इंतहां में गंगा में न चला जाए और उसका तामसी शरीर गंगा की गोद में न समा जाए।

इस अंत्येष्टि महासमारोह में वाराणसी के कमिश्नर, आईजी, डीआईजी, डीएम, एसपी सिटी, सभी थानों के सीओ, वीडीए के उपाध्यक्ष, अपर नगर आयुक्त, एडीएम प्रोटोकाल, सहित कई नये रंगरुट आईएएस और आईपीएस तथा आसपास के जिलों में पदस्थ आईएस और आईपीएस मौजूद थे। साथ ही पूरा श्मशान घाट पुलिस वर्दीधारियों की फौज से पटा था। अन्यान्य शवयात्री घाट की सामान्य सीढ़ियों के बजाए दूसरी ओर की सीढ़ियों का इस्तेमाल करने को बाध्य हुए। लकड़ियां आदि भी दूसरी ओर से शवों को जलाने के लिए ले जायी गयीं। कुंवर फतेह बहादुर को चेहरा दिखाने वालों की भीड़ की होड़ का आलम यह था कि अखबारों के जो फोटोग्राफर एक बार गंगा तट के पास पहुंच गए, उन्हें ऊपर आने में तीन से साढ़े तीन घंटे लग गए जब तक कुंवर साहब सहित फौज फाटा वहां से विदा नहीं हो गया। मसान बाबा ने भी तेलाही की यह इंतहां शायद ही कभी देखी हो! इस अंत्येष्टि महासमारोह की चर्चा जन-जन की जुबान पर है। साभार : पूर्वांचल दीप डॉट कॉम

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Comments on “लगा जैसे इनकी मां मरी हैं!

  • याद आ गई वो घटना .. , जब छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक बड़े न्यायाधीश का कुत्ता मर गया / फिर क्या था सारे छत्तीसगढ़ से बहुत सारे न्यायाधीशगण और बहुत से भ्रित्य छुट्टी लेकर साहब के बंगले बिलासपुर पहुच गए/ बड़े शोक के साथ उस कुत्ते की अंत्येष्टि का कार्यक्रम हुआ था / नौकरशाही का ये नजारा भी बड़ा खूबसूरत था /

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