शाहिदी व शुंगलू ने नाटक के दृश्य पेश किए

: इंदौर मे कलमकारों की रचनात्मकता ने समा बांधा : नाटक संग्रह के विमोचन मे देश के कई बड़े पत्रकार, रंगकर्मी और कलाकर्मी समिति के मंच पर जुटे : पत्रकार आमतौर पर अखबारों में पढ़ी और न्यूज़ चैनल्स पर देखी जानी वाली खबरों की भाषा के माध्यम से खुद को अभिव्यक्त करते हैं मगर अपनी स्थापना के सौ वर्ष पूरे करने जा रही देश की शीर्षस्थ संस्थाओ में से एक हिन्दी साहित्य समिति, इंदौर द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया से जुड़े पत्रकार कुछ अलग ढंग से लोगों से रूबरू हुए.

इस यादगार आयोजन में कोई कलमकार, लेखक की भूमिका मे था तो कुछ ने नाटक के मंझे हुए कलाकार की तरह संवाद अदायगी के फन का जौहर दिखलाया और कोई फिल्मकार की तरह लोगों के सामने आया. मौक़ा था वरिष्ठ पत्रकार और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के अध्यक्ष परवेज़ अहमद के नाटक संग्रह “ये धुआँ सा कहाँ से उठता है और छोटी ड्योढीवालियाँ” के विमोचन का. हालांकि इसका विमोचन पहले दिल्ली में हो चुका है मगर किताब को पाठकों तक पहुंचाने के लिए अब अलग अलग शहरों में उसका विमोचन एक ज़रुरत सी बन गई है और अच्छी बात ये है कि इस परम्परा के चलते किताबें भी लोगों तक पहुंच जाती है और लेखक भी ज़्यादा से ज़्यादा लोगों से रूबरू होकर अपने लिखे पर उनकी राय सुन पाते हैं. ये कार्यक्रम भी इसी उद्देश्य के तहत आयोजित था.

कलमकारों की रचनात्मकता पर केन्द्रित इस कार्यक्रम में मंच पर साहित्य, रंगकर्म और पत्रकारिता की त्रिवेणी का संगम था और श्रोता समुदाय में शामिल लोग भी इन्हीं धाराओं से निकालकर आये थे. हिन्दी साहित्य समिति के प्रबंधमंत्री और वरिष्ठ खेल पत्रकार तथा लेखक प्रो. सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी, राष्ट्रपति के पूर्व कला सलाहकार एवं वरिष्ठ कलाकर्मी प्रमोद गणपत्ये, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के महासचिव पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ, टीवी पत्रकार प्रभात शुंगलू, दारेन शाहिदी, राजेश बादल, रंगकर्मी लोकेन्द्र त्रिवेदी और केशव राय ने “ये धुआँ सा कहाँ से उठता है और छोटी ड्योढीवालियाँ” का विमोचन किया. परवेज़ भाई ने दोनों नाटकों की पृष्ठभूमि लोगों के सामने प्रस्तुत की और इसके बाद लोग चैनल्स के परदे पर नज़र आने वाले दो पत्रकारों की परदे के पीछे छिपी प्रतिभा से मुखातिब हुए.

दारेन शाहिदी और प्रभात शुंगलू ने अपनी आवाज़ और अंदाज़ में इस नाटक के कुछ दृश्यों को प्रस्तुत किया. अपनी शानदार प्रस्तुति से इन्होंने सुधी श्रोताओं का दिल जीत लिया. नाटक के पात्रों में समाकर प्रस्तुत किये गए संवादों ने दर्शकों को सम्मोहित कर दिया. हिन्दी साहित्य दोनों कलमकारों को अदाकारों के रूप मे समिति के सभागार में मौजूद श्रोतओं ने जी भर के दाद दी. लोग उनकी प्रस्तुति के इस सम्मोहन से मुक्त हों, इसके पहले ही राजेश बादल द्वारा बनाई लघुफिल्म ने उन्हें अपने आकर्षण मे बांध लिया. रज्जू बाबू (श्री राजेन्द्र माथुर) के जीवन पर केंद्रित इस लघु फिल्म के माध्यम से लोग इंदौर से निकलकर देश भर मे हिन्दी पत्रकारिता के प्रतीक बने राजेन्द्र माथुर साहब के व्यक्तित्व और कृतित्व से रूबरू हुए. बादल ने बताया कि शब्द साधकों के जीवन और संघर्ष से नई पीढ़ी को जोड़ने के मकसद से वो और भी कुछ साहित्यकार और पत्रकारों के जीवन पर केन्द्रित लघु फिल्में बनायेंगे. इस रचनात्मक कार्यक्रम का संचालन भी युवा पत्रकार सुबोध खंडेलवाल किया और उनके संचालन के तरीके को भी मंचासीन अतिथियों और लोगों ने खूब सराहा.

मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति, इन्दौर के प्रधानमंत्री बसंत सिंह जौहरी की रिपोर्ट.

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