पत्रकार शंकर भाटिया ने उठाया ‘उत्‍तराखंड के सुलगते सवाल’

सुलगते सवालदस साल पहले उत्तराखंड जिन सवालों के समाधान की तलाश में वजूद में आया था, आज वे सभी सवाल फिर खतरनाक ढंग से उसका पीछा कर रहे हैं। विकास के पैमाने पर मैदान और पहाड़ के बीच की खाई पहले की अपेक्षा गहरी हुई है। पहाड़ पहले भी उत्तर प्रदेश में रहते हुए आर्थिक गतिविधियों से कटा हुआ एक उपेक्षित क्षेत्र था, और आज भी जब एक राज्य के रूप में उत्तराखंड दस साल की यात्रा पूरी कर चुका है।

राजीव गांधी पर किताब का लोकार्पण, कइयों का सम्मान

नई दिल्ली : राजीव गांधी देश के ऐसे प्रधानमंत्री थे जिन्होंने ”भारत महोत्सव” जैसे आयोजनों से जहां नई पीढ़ी को देश की संस्कृति से जोड़ा वहीं कंप्यूटर और सूचना प्रौद्योगिकी के जरिए उन्हें प्रगति का नया रास्ता भी सुझाया. ये उदगार ”प्रवासी संसार” पत्रिका द्वारा आयोजित ”राजीव गांधी स्मृति संध्या” में सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने व्यक्त किए. कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली के तीनमूर्ति भवन में जगदीश पीयूष की पुस्तक ”राजीव गांधी के सपनों का भारत” का लोकार्पण करने के लिए किया गया था.

तीन पीढि़यों की त्रिवेणी है ‘लफ्जों की गवाही’ : डा. वेद प्रकाश

: जयपुर के प्रेस क्‍लब में हुआ किताब का लोकार्पण : पत्रकारिता की तीन पीढिय़ों के प्रति श्रद्धा, सम्मान और प्रोत्साहन की त्रिवेणी का पयार्य है पत्रकारिता पर लिखी गई पुस्तक ‘लफ्ज़ों की गवाही’। ये कहना है प्रख्यात पत्रकार और विदेशी मामलों के स्तंभकार डॉ. वेद प्रताप वैदिक का। वैदिक रविवार को पिंकसिटी प्रेस क्लब में 21 मीडियाकर्मियों के साक्षात्कारों पर लिखी गई पुस्तक के लोकार्पण अवसर पर मुख्य अतिथि के तौर पर बोल रहे थे।

पूर्व राष्‍ट्रपति एपीजे अब्‍दुल कलाम ने किया कुलदीप श्रीवास्‍तव की किताब का विमोचन

नई दिल्ली : कुलदीप श्रीवास्‍तव की पुस्‍तक ‘भोजपुरी सिनेमा का पचास साल : 25 चर्चित फिल्में’  का विमोचन पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने हिंदी भवन के सभागार में किया. यह पुस्तक भोजपुरी सिनेमा के पचास साल के सफ़रनामा पर प्रकाश डालती है. कुलदीप श्रीवास्तव मूलत: बिहार सिवान के रहने वाले है, जो पिछले कई सालों से भोजपुरी फिल्मो पर लिखते आ रहे है.

सहारनपुर में दो पत्रकारों की पुस्‍तक का लोकार्पण

हाल ही में यहां आईएमए सभागार में आयोजित एक भव्य समारोह में दो पत्रकारों की पुस्तकों- ‘गाथा पांवधोई की’ व ‘अपनी धरोहर’ का सहारनपुर के मंडलायुक्त सुरेशचंद्रा, जिलाधिकारी चौब सिंह वर्मा, इलाहाबाद के जिलाधिकारी आलोक कुमार और पर्यावरणविद डा. एसके उपाध्याय ने लोकार्पण किया। दोनों ही पत्रकार मेरठ से प्रकाशित ‘दैनिक जनवाणी’ से संबद्ध हैं।

‘शूद्रों का प्राचीनतम इतिहास’ और ‘गदर जारी रहेगा’ का 26 को लोकार्पण

: शूद्रों का प्राचीनतम इतिहास : एसके पंजम की पुस्तक ‘शूद्रों का प्राचीनतम इतिहास’ में वैज्ञानिक व तर्कसंगत तरीके से इस सवाल का जवाब खोजा गया है कि शूद्र वर्ग कौन है, इसकी उत्पति कैसे हुई ? इसी क्रम में सृष्टि, पृथ्वी व जीव की उत्पति से होते हुए भारत में नस्लों की उत्पति तथा शूद्र वर्ण एवं जाति नहीं, बल्कि नस्ल हैं, इसका विशद अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। वैदिक काल में शिक्षा, सभ्यता और संस्कृति की क्या स्थिति रही है, बौद्ध काल में शिक्षा, आर्थिक व सामाजिक व्यवस्था कैसी रही है, भारतीय समाज में दास प्रथा और वर्ण व्यवस्था व उसकी संस्कृति व संस्कार किस रूप में रहे हैं आदि का वृहत वर्णन है।

म से मुलायम, म से मायावती, क से किताब

”मुलायम और मायावती, दो ऐसे राजनेता हैं जिनके इर्द-गिर्द ही पिछले दो दशकों में उत्तर प्रदेश की राजनीती घूमती रही है. इन दोनों में म अक्षर से थोड़े पुराने किस्म के नाम, ग्रामीण परिवेश के बहुत साधारण घर, राजनीती से पूर्व शिक्षण कार्य जैसी समानता के अलावा यह भी सामान है कि दोनों पिछडों और दलितों की राजनीती से जुड़े रहे हैं, दोनों अपनी-अपनी पार्टी के सुप्रीमो हैं जिनकी पार्टी उनके नाम से चलती है और दोनों सामान्यतया एंटी कांग्रेस माने जाते हैं.” ये बातें एक परिचर्चा में कही गईं.

अरविंद कुमार सिंह की नई किताब : डाक टिकटों में भारत दर्शन

अरविंद जीडाक व्यवस्था पर पुस्तक लिख कर चर्चा में आए वरिष्ठ पत्रकार और रेल मंत्रालय (रेलवे बोर्ड) में परामर्शदाता अरविंद कुमार सिंह की एक और नई पुस्तक प्रकाशित हो गयी है। इस पुस्तक का नाम है- ‘डाक टिकटों में भारत दर्शन’ और इसका प्रकाशन किया है, नेशनल बुक ट्रस्ट इंडिया (भारत सरकार) ने। बड़े आकार में 228 पृष्ठों की इस रंगीन पुस्तक का मूल्य 300 रुपए है।

निरंजन परिहार की किताब राज बब्बर के हाथों विमोचित

[caption id="attachment_18217" align="alignleft" width="292"]पत्रकार निरंजन परिहार द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘जिन दर्शन, तिन चंद्रानन’ का विमोचन करते हुए फिल्म अभिनेता और कांग्रेस सांसद राज बब्बर, पूर्व केंद्रीय मंत्री सांसद डॉ. संजय सिंह, सूफी संत अरविंद गुरुजी, प्रवीण शाह, मोती सेमलानी, ललित शक्ति, संगीतकार राम शंकर व राजस्थान भाजपा के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी।पत्रकार निरंजन परिहार द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘जिन दर्शन, तिन चंद्रानन’ का विमोचन करते हुए फिल्म अभिनेता और कांग्रेस सांसद राज बब्बर, पूर्व केंद्रीय मंत्री सांसद डॉ. संजय सिंह, सूफी संत अरविंद गुरुजी, प्रवीण शाह, मोती सेमलानी, ललित शक्ति, संगीतकार राम शंकर व राजस्थान भाजपा के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी।[/caption]मुंबई । विख्यात फिल्म अभिनेता और कांग्रेस सांसद राज बब्बर ने मीडिया विशेषज्ञ निरंजन परिहार द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘जिन दर्शन, तिन चंद्रानन’ का निमोचन किया। राज बब्बर  ने इस अवसर पर कहा कि आज की सबसे बड़ी जरूरत युवा पीढ़ी को जगाने की है। अमेठी के राजा और पूर्व केंद्रीय मंत्री सांसद डॉ. संजय सिंह एवं सूफी संत अरविंद गुरुजी इस समारोह में विशिष्ट अतिथि थे।

 

संवेदनात्मक विषय पर सनसनी न फैलाएं

: संजय द्विवेदी की पुस्तक का लोकार्पण समारोह : प्रभात झा बोले- खबर की कोई विचारधारा नहीं होती : भोपाल। पत्रकारिता सदैव मिशन है, यह कभी प्रोफेशन नही बन सकती। रोटी कभी राष्ट्र से बड़ी नहीं हो सकती। मीडिया के हर दौर में लोकतंत्र की पहरेदारी का कार्य अनवरत जारी रहा है। उक्त आशय के वक्तव्य वरिष्ठ पत्रकार एवं सांसद प्रभात झा ने व्यक्त किए। वे संजय द्विवेदी की पुस्तक ‘मीडिया: नया दौर नई चुनौतियां’ के लोकार्पण पर बोल रहे थे।

शाहिदी व शुंगलू ने नाटक के दृश्य पेश किए

: इंदौर मे कलमकारों की रचनात्मकता ने समा बांधा : नाटक संग्रह के विमोचन मे देश के कई बड़े पत्रकार, रंगकर्मी और कलाकर्मी समिति के मंच पर जुटे : पत्रकार आमतौर पर अखबारों में पढ़ी और न्यूज़ चैनल्स पर देखी जानी वाली खबरों की भाषा के माध्यम से खुद को अभिव्यक्त करते हैं मगर अपनी स्थापना के सौ वर्ष पूरे करने जा रही देश की शीर्षस्थ संस्थाओ में से एक हिन्दी साहित्य समिति, इंदौर द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया से जुड़े पत्रकार कुछ अलग ढंग से लोगों से रूबरू हुए.

करकरे पर लिखी गई किताब पर मुकदमा

: पूर्व आईजी ने लिखी है यह किताब : हालिया रिलीज एक किताब  ‘हू किल्‍ड करकरे? द रियल फेस ऑफ टेरिरिज्‍म इन इंडिया’ अपने विवादित कंटेंट की वजह से सुर्खियों में है. मुंबई  पर हुए  आतंकवादी हमले के घटनाक्रमों पर लिखी गई पूर्व आईजी एसएम मुशर्रिफ की इस किताब पर मुकदमा दर्ज हुआ है. नवी मुंबई निवासी एन्‍वे सतपुते ने पूर्व आईजी मुशर्रिफ और किताब को पब्लिश करने वाली कंपनी फैरोस मीडिया एंड पब्लिशिंग प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ याचिका दायर की थी.

परवेज अहमद के नाट्य संग्रह का लोकार्पण

इंदौर और उज्जैन में आयोजित कार्यक्रमों में प्रेस क्लब आफ इंडिया के अध्यक्ष परवेज अहमद के नाट्य संग्रह ”ये धुआं कहां से उठता है’ का लोकार्पण किया गया. शिक्षक दिवस और हिन्दी पखवाड़ा के तहत इंदौर और उज्जैन में आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय हिन्दी पत्रकारिता के पुरोधा राजेन्द्र माथुर को याद किया गया.

‘नवभारत’ द्वारा प्रकाशित किताब का सीएम ने किया विमोचन

मुंबई से प्रकाशित हिन्‍दी दैनिक ‘नवभारत’ द्वारा प्रकाशित पुस्‍तक ‘कर्मयोगी’ का विमोचन मुख्‍यमंत्री अशोक चव्‍हाण ने किया. बुधवार को मुख्‍यमंत्री ने मंत्रालय स्थित अपने कार्यालय में इस पुस्‍तक का विमोचन करने के बाद कहा कि सफलता की कहानियों से युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है.

‘सेल’ के पूर्व चेयरमैन की किताब से खुले कई राज

[caption id="attachment_17978" align="alignleft" width="142"]किताब : कवर पेजकिताब : कवर पेज[/caption]: इंदिरा गांधी के ‘योग गुरु’ चाहते थे स्टील की हेराफेरी : भिलाई की एक कंपनी, एक मुख्यमंत्री और उनके भाई के कारनामों का खुलासा : सत्ताधारी लोग कैसे ‘सेल’ से लाभ उठाते हैं, इसका विस्तार से है जिक्र : सत्ता के अनैतिक दबाव के कारण तत्कालीन सेल चेयरमैन ने ले ली थी लंबी छुट्टी : स्टील लाबी ने इंदिरा गांधी काल की सबसे ‘युवा ताकतवर राजनीतिक हस्ती’ को अपने प्रभाव में ले लिया था :

संजय गौड़ की किताब ‘जर्नलिज्म स्कैण्डल्स’

पत्रकारिता का क्षेत्र वर्तमान में बहुविध एवं व्यापक है। जीवन के समस्त पक्षों का संचय इसमें मिलता है। समाज के विकास और सरोकारों से पत्रकारिता का गहरा संबंध है। यही वजह है कि आज आम आदमी का रुझान भी पत्रकारिता क्षेत्र में हुआ है। वह न केवल सरोकारों के रूप में इससे जुड़ना चाहता है बल्कि अपने आसपास घट रहे परिवेश में भी उसकी गहरी रुचि है। पत्रकारिता कभी मिशन का पर्याय हुआ करती थी पर उसका रूप वर्तमान में किस प्रकार परिवर्तित हुआ है यह आज अहम् मुद्दा है। संजय गौड़ की पुस्तक ‘‘जर्नलिज्म स्कैण्डल्स’’ इन्हीं पक्षों को छूती हुई एक अभिनव अवधारणा को अपने में समेटे है।

पत्रकारिता बनी वेश्या, पत्रकार बने दलाल

[caption id="attachment_15625" align="alignleft"]अखिलेश अखिल अपनी नई किताब के साथअखिलेश अखिल अपनी नई किताब के साथ[/caption]वेश्याएं खूब बिकती हैं। आम औरतों को कोई पूछता नहीं। भूख, गरीबी, तंगी से आम महिलाएं रोती रहती हैं, लेकिन वेश्याओं का बाजार गर्म रहता है। पत्रकार भूखे मरते हैं, लेकिन पत्रकारिता के दलाल कभी भूखे नहीं मरते। उनकी खूब चलती है। यह बात अलग है कि जब विद्रूप होती पत्रकारिता की स्थिति पर बहस होती है तब ये दलाल पत्रकार भी हाय तौबा मचाते हैं, रोते हैं। भाषण देते हैं और पत्रकारिता के नाम पर बिजनेस करने वाले लोगों को गरियाते हैं। शायद आपको यकीन न हो, लेकिन सच्चाई यही है कि पत्रकारिता वेश्या बन गई है और पत्रकार बन गए हैं दलाल। वेश्या बनी पत्रकारिता खूब बिक रही है।

”…शायरी ख़ुदकशी का धंधा है…”

[caption id="attachment_15556" align="alignnone"]लोकार्पण समारोहलोकार्पण समारोह : बाएं से दाएं- श्रीमती ख़ुशनुम राव, श्रीमती राजश्री बिरला, ललित डागा, डॉ.कर्ण सिंह, प्रो.नंदलाल पाठक और श्री विश्वनाथ सचदेव[/caption]

संगीत कला केंद्र द्वारा आयोजित एक भव्य समारोह में मुम्बई के वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. नंदलाल पाठक के काव्य संकलन ‘फिर हरी होगी धरा’ का लोकार्पण डॉ. कर्ण सिंह ने किया।

मीडिया को आतंकवाद का आक्सीजन कहा जाने लगा

किताब‘आतंकवाद और भारतीय मीडिया’ नामक किताब बाजार में : आतंकवाद पूरी दुनिया में अब संगठित रूप ले चुका है। इसने अपनी कामयाबी के लिए सूचना क्रांति का भी खतरनाक तरीके से भरपूर फायदा उठाया है। नवंबर 2008 में मुंबई के आतंकी हमले की बर्बरता को पूरी दुनिया ने किस तरह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिये खुली आंखों से देखा था, यह सच किसी से छिपा नहीं है। उन दिनों मीडिया के इस मनमानेपन को लेकर सत्ता के गलियारों से देश भर के आम बुद्धिजीवियों तक काफी तीखी प्रतिक्रियाएं सुनने में आई थीं। तब कई बार माना गया था कि उस आतंकी हमले का लाइव प्रसारण नितांत गैर-जिम्मेदराना था। ऐसा नहीं होना चाहिए था। तभी से यह जानना भी जरूरी लगने लगा था कि आतंकवाद की घटना से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संबंधित संस्थाओं, विषयों यानी भारतीय राज्य, समाज, कानून, पुलिस, खुफिया तंत्र, अंतररा्ष्ट्रीय सहयोग, मानवाधिकार आदि पर मीडिया का दृष्टिकोण क्या होना चाहिए? मुंबई के 26/11 के बाद बाटला हाउस मुठभेड़ और अंतुले प्रकरण भी कुछ इसी तरह की सुर्खियों में रहे थे। तब भी मीडिया के उचित-अनुचित को लेकर देश भर में उंगलियां उठी थीं। इन्हीं संदर्भों को रेखांकित करती हुई आतंकवाद पर हिंदी, अंग्रेजी तथा उर्दू समाचार पत्रों के दृष्टिकोणों की गहरी छानबीन करने वाली एक नई किताब आई है ‘आतंकवाद और भारतीय मीडिया’। इसके लेखक हैं प्रो. राकेश सिन्हा।

पदमपति की किताब और प्रभाषजी का आमुख

किताबजिन गिने-चुने पत्रकारों ने हिंदी पत्रकारिता में खेल समाचारों की दूरगामी महत्ता को समय से पहले पहचाना और अखबारों के लिए अपरिहार्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उन्हीं में एक हैं सुविख्यात पत्रकार पदमपति शर्मा। तीन दशकों तक आज, दैनिक जागरण, अमर उजाला और लोकमत समाचार पत्रों में खेल पत्रकारिता की अलख जगाते रहे पदमति की हाल ही में एक अत्यंत उपयोगी पुस्तक आई है- ‘खेल पत्रकारिता’। यह पुस्तक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की शोध परियोजना के अंतर्गत प्रकाशित की गई है। यह 174 पृष्ठों की पुस्तक खेल प्रेमियों और खेल पत्रकारों के साथ ही, इस विषय के विद्यार्थियों के लिए भी भरपूर ज्ञानवर्द्धक है।

अरविंद को महाश्वेता देवी ने दी बधाई

महाश्वेता देवी का हिंदुस्तान में प्रकाशित स्तंभअरविंद कुमार सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और इन दिनों भारतीय रेल मंत्रालय की मैग्जीन ‘भारतीय रेल’ के संपादकीय सलाहकार के रूप में दिल्ली में कार्यरत हैं। अरविंद ‘भारतीय डाक : सदियों का सफरनामा’ नामक जिस किताब के लेखक हैं, उसकी चर्चा आज मशहूर लेखिका और सोशल एक्टिविस्ट महाश्वेता देवी ने की है। महाश्वेता देवी हिंदुस्तान अखबार में प्रत्येक रविवार को परख नामक कालम लिखती हैं। उनका लिखा यह कालम आनंद बाजार पत्रिका भी बांग्ला में प्रकाशित करता है। आज के कालम में महाश्वेता देवी ने अरविंद कुमार सिंह को भारतीय डाक, चिट्ठियों के इतिहास, डाकियों पर केंद्रित किताब लिखने के लिए बधाई दी है। साथ ही, पत्रों के घटते चलन को एक गंभीर सांस्कृतिक खतरा बताया है।

इरफान की राहुल पर किताब का विमोचन

किताबवरिष्ठ टीवी पत्रकार इरफान शेख द्वारा देश के युवा नेता राहुल गांधी पर लिखी गई किताब ‘द मैजिक आफ राहुल गांधी’ का विमोचन पिछले दिनों दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने किया। किताब में इरफान ने मुस्लिम समुदाय की चिंताओं और युवाओं के सोचने के तरीके को अभिव्यक्त किया है। साथ ही बताया है कि किस तरह राहुल नौजवानों के विश्वास पर खरे उतरने के लिए प्रयास कर रहे हैं। लेखक का मानना है कि राहुल गांधी का जाति-धर्म में विश्वास न कर सिर्फ भारतीयता में भरोसा करना सबसे सकारात्मक बात है।

इस किताब का एक अंश यहा प्रकाशित किया जा रहा है-

सन्नी पर किताब में पदम का अध्याय

पदमपति शर्मा क्रिकेट सुपरस्टार रहे सुनील गावस्कर के 60वें जन्मदिन के मौके (10 जुलाई) पर वरिष्ठ खेल पत्रकार देबाशीष दत्ता द्वारा लिखित किताब ‘सुनील गावास्कर, द लिटिल मास्टर‘ की समीक्षा समाचार एजेंसियों ने रिलीज की। इस किताब का लोकार्पण विभिन्न शहरों में होना प्रस्तावित है। किताब बाजार में आने ही वाली है। इसमें एक अध्याय मशहूर खेल पत्रकार पदमपति शर्मा का लिखा हुआ है। आजकल महुआ न्यूज में अपनी सेवाएं दे रहे पदमजी वैसे तो हिंदी के पत्रकार हैं लेकिन किताब अंग्रेजी में होने के नाते उनके लिखे का अंग्रेजी तर्जुमा इस किताब में प्रकाशित किया जा रहा है। किताब रिलीज होने के पहले ही हम यहां पदमजी के लिखे को भड़ास4मीडिया के पाठकों के लिए प्रकाशित कर रहे हैं, ताकि सुनील गावस्कर के व्यक्तित्व के बारे में नई पीढ़ी के पत्रकार अपने वरिष्ठों के दृष्टिकोण को जान-समझ सकें। पदमपति से संपर्क करने के लिए padampati.sharma@gmail.com या 09312587442 का सहारा ले सकते है।

अरविंद की किताब के पाठ 8वीं के बच्चे पढ़ेंगे

Arvind Kumar Singhदैनिक हरिभूमि,  दिल्ली के स्थानीय संपादक अरविंद कुमार सिंह द्वारा लिखित और नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित किताब भारतीय डाक के एक खंड चिट्ठियों की अनूठी दुनिया को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने आठवीं क्लास की हिंदी टेक्स्ट बुक वसंत-3 में शामिल किया है। भारतीय डाक पर अरविंद कुमार सिंह द्वारा लंबे शोध के बाद लिखी गई किताब को अब एनबीटी द्वारा अंग्रेजी समेत कई भाषाओं में अनूदित कर प्रकाशित किया जा रहा है।