साप्ताहिक कैनविज टाइम्स में प्रभात रंजन दीन का कदम पड़ते ही भूचाल आ गया है. उन्होंने चीफ एडिटर के रूप में ज्वाइन किया, दूसरी ओर इसके संपादक राघवेंद्र त्रिपाठी समेत आठ लोगों ने इसे अलविदा कह दिया. अंदरखाने में कई खबरें हैं, लेकिन बताया जा रहा है कि राघवेंद्र का तबादला बरेली किए जाने के बाद उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया. कैनविज टाइम्स का प्रकाशन पिछले साल जनवरी से संपादक राघवेंद्र त्रिपाठी की देखरेख में हो रहा था. इस अखबार के मैनेजिंग एडिटर कैनविज ग्रुप के एमडी कन्हैया लाल गुलाटी हैं. यह कंपनी सेल्स एंड मार्केटिंग क्षेत्र के अलावा बीमा, कंस्ट्रक्शन, फैशन, शॉपिंग, एजुकेशन, हेल्थ केयर, रिजॉर्ट्स एंड मोटेल्स में काम कर रही है.
सूत्रों का कहना है कि अपने इन्हीं कामों को सरपरस्ती देने के लिए इस अखबार को निकालने की योजना बनाई गई. अखबार के टाइटिल से लेकर प्रकाशन तक की जिम्मेदारी राघवेंद्र को सौंपी गई थी. तब से लेकर अब तक वे इस अखबार के संपादकीय प्रभारी का दायित्व निभा रहे थे. कुल बारह लोगों की टीम के साथ वे इस अखबार के प्रकाशन का जिम्मा संभाले हुए थे. राघवेंद्र इस अखबार का संपादक बनने से पहले दैनिक जागरण, राष्ट्रीय सहारा समेत कई अखबारों में काम कर चुके थे. लखनऊ से प्रकाशित होने के कारण यह अखबार आसपास के कई जिलों में भी जाता था.
इसी बीच यह कंपनी जमीन प्लाटिंग के क्षेत्र में भी उतर गई. लखनऊ के मोहनलाल गंज एवं देवा रोड पर इस कंपनी ने प्लाटिंग कराई और प्लाट का आवंटन कर दिया गया. किसी मामले को लेकर एनओसी लटक गया. इसी को लेकर कंपनी के एमडी अपने संपादक पर एलडीए से एनओसी दिलवाने का दबाव बनाने लगे. राघवेंद्र ने ऐसा कोई कार्य कराने में असमर्थता जताते हुए अपने हाथ खड़े कर दिए. इसके बाद भी उन पर लगातार एनओसी दिलाने का दबाव डाला जाता रहा. इसी दौरान प्रभात रंजन दीन को अखबार चीफ एडिटर बना दिया गया. राघवेंद्र का तबादला बरेली के लिए कर दिया गया. इससे नाराज होकर राघवेंद्र ने इस्तीफा दे दिया. उनके अखबार छोड़ने के बाद चीफ सब एडिटर श्यामल कुमार त्रिपाठी, सब एडिटर दिवाकर मिश्रा, सब एडिटर विजय शुक्ल, रिपोर्टर ललित मिश्रा, फोटोग्राफर लकी नकवी, सर्कुलेशन मैनेजर संतोष शुक्ला तथा सिस्टम इंजीनियर दुर्गेश टंडन ने भी संस्थान से इस्तीफा दे दिया.












ankur dube
January 15, 2011 at 7:26 am
sahi hai jo kam raghvendra nahi kar paye wo prabhat ji karwate rahenge. kanwhizz ko sarkar ki nazro se bachna hai aur prabhat ji ko paisa chahiye.
imran khan
January 15, 2011 at 7:28 am
prabhat ji ka to itihas raha hai sansthan badalte rahne ka, pahle dna ka batta baitha diya ab kan whiz ki bari hai………….
Ashish Dubey
January 15, 2011 at 7:46 am
waise jo kuchh bhi huwa wo theek nahi huwa. CMD kanhaiya gulati ji ne bilkul bhi theek nahi kiya. aath logo ki job chhooti. chalo ab aage dekho kya jo kaam mr. raghvendra tripathi nahi karwaaye wo kaam mr. prabhat ranjan deen karwayenge? LDA ka NOC ka Kaam.. jiski vajah se aath logo ki job gayi….
dekhiye aage aage hota hai kya?
ANJEET
January 13, 2011 at 5:44 pm
prabhat sir apko bahut-bahut badhai ho