सहारा के फर्जीवाड़े पर सेबी सख्‍त

: प्रतिबंध के बावजूद रकम जुटाने का मामला : भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सहारा समूह की दो कंपनियों के खिलाफ फिर से सख्त रुख अपनाया है। हाल ही में इन कंपनियों को जनता से धन जुटाए जाने से रोके जाने के बाद बाजार नियामक ने फिर से इनके खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए शुक्रवार को एक सार्वजनिक अधिसूचना जारी की है। समूह की दो कंपनियों सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन के खिलाफ मौजूदा जांच के तथ्यों को दोहराते हुए सेबी ने यह अधिसूचना जारी की है।

शुक्रवार को सार्वजनिक सूचना के जरिये सेबी ने निवेशकों को यह सूचित किया कि सहारा समूह की कंपनियों को ‘वैकल्पिक रूप से पूरी तरह परिवर्तनीय डिबेंचर'(ओएफसीडी) के जरिये कोष जुटाए जाने से प्रतिबंधित किए जाने का आदेश इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ न्यायपीठ द्वारा बरकरार रखा गया है। न्यायालय ने 7 अप्रैल 2011 को इस संबंध में आदेश जारी किया था। बहरहाल, सहारा समूह को इस संबंध में भेजे गए एक ईमेल संदेश का जवाब अभी तक नहीं मिला है।

सेबी से  नवंबर 2010 में सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन को अगला आदेश नहीं आने तक जनता से जुटाए जाने से प्रतिबंधित कर दिया था। इन कंपनियों पर यह आरोप लगाया था कि हालांकि उन्होंने ओएफसीडी के जरिये धन जुटाया था, लेकिन बाजार नियामक द्वारा इसकी इजाजत हासिल नहीं थी।

बाजार नियामक ने सुब्रत रॉय सहारा और रवि शंकर दुबे समेत इन कंपनियों के प्रवर्तकों को भी नया आदेश नहीं आने तक जनता से धन जुटाए जाने से प्रतिबंधित कर दिया था। इन प्रवर्तकों को इस मामले में सख्ती नहीं बरते जाने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। सार्वजनिक अधिसूचना के अनुसार हालांकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लखनऊ पीठ ने 13 दिसंबर 2010 को सेबी के आदेश को बरकरार रखा और नियामक को अपनी जांच बरकरार रखने को कहा गया। इस बीच सेबी ने सर्र्वोच्च न्यायालय में भी एक विशेष अनुमति याचिका दायर कर दी। सर्वोच्च न्यायालय ने इन कंपनियों से किसी भी तरह की जानकारी मांगने की अनुमति दे दी। साभार : बिजनेस स्‍टैंडर्ड

अपने मोबाइल पर भड़ास की खबरें पाएं. इसके लिए Telegram एप्प इंस्टाल कर यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *