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अपनी ही जमात में यूपी के स्पेशल डीजी को मात!

: समीक्षा बैठक में एक आईपीएस ने ही उठाई उंगली : एससी/एसटी के एक केस में भी मंत्री पड़े थे भारी : लखनऊ। कभी मंत्री से टकराव। प्रमुख सचिव गृह से रिश्तों में तल्खी! समीक्षा बैठक में हकीकत बयां करने से नहीं चूके कुछ आईपीएस। आखिर स्पेशल डीजी (अपराध एवं कानून व्यवस्था) बृजलाल की धाक क्यों कम हो रही है? क्यों आईपीएस बेधड़क उनके उन निर्देशों को प्रमुख सचिव के सामने बयां कर रहे हैं जिन पर अमल करने से वो मना कर चुके थे।

: समीक्षा बैठक में एक आईपीएस ने ही उठाई उंगली : एससी/एसटी के एक केस में भी मंत्री पड़े थे भारी : लखनऊ। कभी मंत्री से टकराव। प्रमुख सचिव गृह से रिश्तों में तल्खी! समीक्षा बैठक में हकीकत बयां करने से नहीं चूके कुछ आईपीएस। आखिर स्पेशल डीजी (अपराध एवं कानून व्यवस्था) बृजलाल की धाक क्यों कम हो रही है? क्यों आईपीएस बेधड़क उनके उन निर्देशों को प्रमुख सचिव के सामने बयां कर रहे हैं जिन पर अमल करने से वो मना कर चुके थे।

ट्रांस गोमती के एक थाने में जमीन के मामले में दर्ज एससी/ एसटी केस हो या फिर आगरा में दो समुदायों के बीच हुए झगड़े में गिरफ्तारी न होने का मामला हो। गत दिनों हुई समीक्षा बैठक में एक आईपीएस अफसर से जब प्रमुख सचिव गृह ने आरोपियों की गिरफ्तारी के बारे में पूछा तो उस आईपीएस ने स्पेशल डीजी की तरफ इशारा किया और बोले- गिरफ्तारी के लिए मना किया था इन्होंने।

बहुत दिन नहीं गुजरे। ट्रांसगोमती के एक थाने की घटना है। जमीन के मामले में दो पक्षों में विवाद हुआ और एक पक्ष ने दूसरे के खिलाफ एससी/एसटी ऐक्ट में मामला दर्ज कराया। रात ही में एक व्यक्ति को गिरफ्तार भी कर लिया गया। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक स्पेशल डीजी आरोपियों की गिरफ्तारी चाहते थे जबकि आरोपी पक्ष के तरफदार थे बसपा सरकार के एक मंत्री। स्पेशल डीजी के कहने पर मड़ियांव पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और जब यह बात मंत्री को पता चली तो वह आग बबूला हो गए।

मंत्री ने रात ही रात मुख्यमंत्री के बेहद करीबी बसपा के वरिष्ठ नेता से इसकी शिकायत की। इसके बाद एससी/ एसटी हटाकर रात में ही आरोपी को जमानत दे दी गई। यही नहीं इस मामले में प्रदेश सरकार ने सीओ अलीगंज का भी गैर जनपद तबादला कर दिया क्योंकि एससी/ एसटी मामले की जांच सीओ स्तर के अफसर को करनी होती है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि मंत्री के सामने स्पेशल डीजी का कद घट गया।

20 सितम्बर को प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर हुई समीक्षा बैठक में भी एक दौर आया जब स्पेशल डीजी को खिसियाहट हुई। आधिकरिक सूत्रों के मुताबिक बैठक चल रही थी। प्रदेशभर के जिला कप्तान, डीआईजी और आईजी शामिल थे। तभी प्रमुख सचिव गृह ने आगरा के कप्तान से पूछ लिया कि दो समुदायों के बीच हुए झगड़े में गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई तो उन्होंने बेबाक स्पेशल डीजी की तरफ इशारा किया और कहा कि उन्होंने मना किया था।

यह सुनते ही वह झुंझला गए और कहा चुप रहिए आप, मैंने कब कहा। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि गाजीपुर में जब कोर्ट के आदेश पर स्पेशल डीजी के खिलाफ वहां के कप्तान ने बिना बात किए जब केस दर्ज कराया तो इस पर उन्हें फटकारा गया था। तब कप्तान ने कहा था कि कोर्ट का आदेश था और उसने आदेश का पालन किया। समीक्षा बैठक में हुईं कुछ बातें और ऐसी घटनाओं से यह बात साफ होने लगी है कि स्पेशल डीजी की धाक कम हो रही है या फिर अब वह आईपीएस अफसरों की पसंद के मानकों पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं।

लखनऊ और इलाहाबाद से प्रकाशित हिंदी दैनिक डेली न्यूज एक्टिविस्ट में प्रकाशित सुनीत श्रीवास्तव की रिपोर्ट.

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