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”इन तस्‍वीरों को देखकर नहीं रोक पाया अपने आंसू”

जिंदगी में आज तक मैं कभी भी आलोक तोमर जी से नहीं मिला और न ही अंतिम क्षणों में अपने आखों को उनकी एक झलक ही दिखला पाया. हाँ उनके बारे में सुना बहुत कुछ था. कुछ दिन पहले एक मित्र ने तोमर जी के जिन्दादिली का एहसास कराया था. कुछ चीजें भड़ास के माध्यम से पहले भी पढ़ने का मौका मिला था.

जिंदगी में आज तक मैं कभी भी आलोक तोमर जी से नहीं मिला और न ही अंतिम क्षणों में अपने आखों को उनकी एक झलक ही दिखला पाया. हाँ उनके बारे में सुना बहुत कुछ था. कुछ दिन पहले एक मित्र ने तोमर जी के जिन्दादिली का एहसास कराया था. कुछ चीजें भड़ास के माध्यम से पहले भी पढ़ने का मौका मिला था.

मैं पत्रकार बनने आया था और बना भी, लेकिन पत्रकारिता का वर्तमान दौर और हालात ने कुछ ऐसा बना दिया कि अब पत्रकारों के बारे में ज्यादा जानने की उत्सुकता नहीं रहती. आलोक तोमर जी के बातों और शब्दों का जो निर्भीक अंदाज़ होता था, वो अब अतीत सा लगने लगा है. उनको सुनकर जानकर देश में पत्रकारिता की भावी पीढ़ी को जरूर बल और संबंल मिलेगा. सत्ता के गलियारे में बैठे  लोगों तक वेबाक आवाज पहुंचाने के लिए आलोक सर के रूप में हिम्मत जरूर मिलेगी, लेकिन क्या दुबारा कोई आलोक तोमर बन  पायेगा?

यह अब मुझे संभव तो नहीं दूर-दूर तक नजर नहीं आता. आज तक मेरी आँखें उस इंसान का झलक पाने के लिए कभी बैचेन नहीं  रहीं, लेकिन उनके बारे में जानकार, उनकी दरियादिली और हौंसले को बहुत करीब से सुनकर मुझे लगा कि उनसे जरूर मिलूँगा, लेकिन मैं अंत समय तक नहीं मिल पाया. मुझे बहुत दुःख हुआ और आज उनकी चिरनिद्रा लीन तस्वीरें देख कर मैं अपने आँखों से गिरने वाले आंसुओं को रोक नहीं पाया. आज तक सिर्फ अपनों के लिए रोया, लेकिन ऐसा इंसान जिनसे कभी बातचीत नहीं, कभी मिला नहीं और वो अनजान इंसान मेरे दिल के इतने पास कि आँखों से जुदा होकर इतना प्यार दे गया.

शायद इसकी उम्मीद नहीं थी. पर उनके दर्शन हुए. अंतिम दर्शन के रूप में सिसकतीं सी दिखने वाली कुछ तस्वीरें, लेकिन यह मेरे लिए उन्हें संजोये रखने के लिए ताउम्र बहुत बड़ा तोहफा है. हम आपको पत्रकारिता के अमर योद्धा के रूप में याद जरूर रखेंगें सर. और ईश्वर से यह प्रार्थना करूंगा कि एक बार अगले जन्म में आपके साथ जरूर मिला दें. फिर वो जो रिश्ता आपने जाने-अनजाने में सिसकते आंसू के रूप में दिया है उसका कर्ज जरूर अदा करूँ. ईश्वर ने इस सफ़र में आपसे हमें मिलने का भी मौका नहीं दिया, लेकिन हां आपसे मिलते रहेंगे, आपके शब्दों के साथ के साथ, आपकी लेखनी के साथ. अंतिम दर्शन में मैं आँखों से टपकते आसूं और चेहरे पर गर्व के साथ अंतरात्मा से भावभीनी श्रद्धांजलि देना चाहता हूँ. ईश्वर आपकी आत्मा को शांति प्रदान करें. सर अंत में आपने जिस तरह निडर होकर यहां पत्रकारिता की, उसके लिए हम आपको हमेशा नमन करते रहेंगे.. अलविदा सर.

लेखक मिथिलेश सिन्‍हा इंडिया न्‍यूज में प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं.

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0 Comments

  1. pankaj kumar

    March 22, 2011 at 3:25 pm

    mithilesh ji,us din maine apse bat kiya tha…aap jitna dukhi dikh rahe the vaisa pahle kabhi apko nahi dekha…..lekin aaj isko padh ke ye andaja laga pa raha hu ki bina mile aap alok ji ke kitne karib the….ab to apse bat karke aur padh ke mai bhi alok tomar ji se utna hi jud gaya hu jab ki kabhi na to mila hu na bahut janta hu unke bare me…aise patrakar ko salam jisne patrakarita me ek misal pesh ki aur jise yad kar ke ham log gaurvanvit nmahsus karte hai….

  2. bimlesh chaturvedi

    March 22, 2011 at 3:41 pm

    sahi likha sir aapne alok ji ke liye kuch bhi bolna hamare liye chota hoga ..bhawan unki aatma ko shanti de.aur journalist ko ek accha sikha de ..dhnyawad …Alok sir amar rahe ..

    Vimlesh chaturvedi.

  3. vijay

    March 22, 2011 at 5:21 pm

    लेकिन क्या दुबारा कोई आलोक तोमर बन पायेगा?……..bhai mithilesh tumhare aankhon me aanshoo is liye aaye ki teri antar aatma aur zameer abhi tak zinda hai, wo mari nahi hai, aur haan tu apne hi aanshoo se sabak le aur kosis kar ki tu hi aalok tomar jaisa ban jaye , nirbhik , imandar , , .tum kisi ka intezaar mat karo ki koi kab aalok tomar jaisa banega , tum bano bhai mere ……….kam se kam tumhare aanshooo to bahe ….kitano ke aanshoo tak sookh gaye honge , is liye mere bhai apne aankhon ke nami ko banaye rakho kuki us se aatma ki jaro ko pani milta hai……..rahi baat aalok sir ka to aise logon ki aatma ko hamesha shanti milti hai,
    alok sir jaise log kabir ke dohe ke saman hote hain
    jo kuch gandhi de nahi to bhi vas subas …….

    alok sir jaise logo ko alvida nahi kahte dost ……aise log hamesha tumhare jaise imandaar patrakar ke patrakarita me bas te hai………..:)

  4. Gaurav singh

    March 23, 2011 at 3:25 pm

    mujhe pta hai sir aapne jo yanha likha hai usse aapke vyktitvo ka parIchay khud ho jata hai ki aap kya sochten hain antaratma se . Maine yeh article padhne ke baad bhadas ko serch kiya tabhi alok tomar ji ki sahi taswir samne aaye…bhagwan unki aatam ko shanti de… alok sir amar rahen hamra akhirI salam kabul karen…

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