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ईटी में रोहिणी ने ”राडिया-राय रैकेट” का राजफाश किया

: दो करोड़ रुपये रिश्वत की पेशकश करने वाला पत्रकार : दी इकोनोमिक टाइम्स की पत्रकार रोहिणी सिंह ने उपेंद्र राय के चेहरे से पर्दा उठा दिया है. ईटी में रोहिणी की बाइलाइन छपी खबर में विस्तार से बताया गया है कि कैसे प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों को रिश्वत का लालच देकर राडिया के अनैतिक काम कराने की कोशिश की गई. और राडिया की तरफ से काम कराने में जुटे ये सज्जन कोई और नहीं बल्कि सहारा मीडिया के सर्वेसर्वा हैं उपेंद्र राय.

: दो करोड़ रुपये रिश्वत की पेशकश करने वाला पत्रकार : दी इकोनोमिक टाइम्स की पत्रकार रोहिणी सिंह ने उपेंद्र राय के चेहरे से पर्दा उठा दिया है. ईटी में रोहिणी की बाइलाइन छपी खबर में विस्तार से बताया गया है कि कैसे प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों को रिश्वत का लालच देकर राडिया के अनैतिक काम कराने की कोशिश की गई. और राडिया की तरफ से काम कराने में जुटे ये सज्जन कोई और नहीं बल्कि सहारा मीडिया के सर्वेसर्वा हैं उपेंद्र राय.

बहुत कम उम्र में सड़क से शिखर तक पहुंचने वाले इस शख्स के कामकाज के रहस्यों पर से पर्दा उठने लगा है. सहारा की चिटफंड कंपनी के एजेंट के रूप में करियर की शुरुआत करने वाले उपेंद्र राय बाद में राष्ट्रीय सहारा अखबार के लखनऊ संस्करण में संवाद सूत्र बन गए थे. धीरे धीरे वे सहारा में आगे बढ़ने लगे. बाद में मुंबई चले गए. स्टार न्यूज का साथ पकड़ा. मुंबई की दुनिया उपेंद्र राय को रास आई और वहां बड़े बड़ों के साथ रिश्ते कायम कर बड़े बड़ों के हिसाब से कामकाज करना शुरू कर दिया.

बाद में इसी प्रभाव व रूप का दर्शन कराकर सहाराश्री सुब्रत राय सहारा को मोहित किया और सहारा मीडिया में सर्वेसर्वा बन गए. तमाम तरह के कानूनी विवादों, आरबीआई की पाबंदियों, इनकम टैक्स के पचड़ों में फंसे सहारा ग्रुप को एक संकटमोचक की तलाश थी और उपेंद्र राय में यह संकटमोचक सहाराश्री को दिख गया. बस क्या था. सहारा मीडिया के शीर्ष पर आसीन सभी लोगों के सिर कलम कर कुर्सी उपेंद्र राय के लिए खाली करा दी गई और उपेंद्र राय ने कुर्सी पर बैठते ही बाकी बचे खुचे विरोधियों को निपटा दिया.

सहारा मीडिया में इन दिनों उपेंद्र राय का राज चलता है. सबने उनकी सत्ता को स्वीकार भी कर लिया है. लेकिन तभी राडिया स्कैंडल के प्रकट हो जाने से उपेंद्र राय का भी भेद खुलने लगा. उपेंद्र राय और राडिया के बीच बातचीत का टेप भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित होने के बाद उपेंद्र राय और सहारा की तरफ से एक लीगल नोटिस भड़ास4मीडिया को भिजवाया गया. कुछ और खबरों पर भी उपेंद्र राय ने लीगल नोटिस भड़ास4मीडिया को भिजवाया.

लेकिन सच्चाई देर तक छुपने वाली नहीं थी. उपेंद्र राय और नीरा राडिया के रिश्तों पर से परत हटने लगी है. अब यह पता चलने लगा है कि दरअसल उपेंद्र राय कोई और नहीं बल्कि नीरा राडिया गैंग के एक प्रमुख खिलाड़ी हैं और जिस तरह नीरा राडिया के संपर्क अनंत हुआ करते थे और कोई भी काम वह करा पाने में सक्षम हुआ करती थी, उसी चेन को पकड़कर उपेंद्र राय ने खुद को सहारा के संकटमोचक के रूप में प्रस्तुत किया. और इस झांसे में सहाराश्री सुब्रत राय सहारा आ भी गए.

वैसे भी, सुब्रत राय सहारा तो कोई दूध के धुले नहीं हैं. उन्हें ऐसे ही बंदों की जरूरत होती है जो मीडिया, ज्यूडिसिरी, ब्यूरोक्रेसी, पालिटिशियन्स आदि को सफलतापूर्वक मैनेज कर सके. और अभी तक इस खेल में उपेंद्र राय सफल दिख रहे थे लेकिन राडिया टेपकांड ने उनकी कलई खोल दी. ताजे खुलासे के बाद यह माना जा रहा है कि सहारा समूह अपनी इज्जत बचाने के लिए उपेंद्र राय को देर सबेर किनारे कर देगा क्योंकि इतने बड़े आरोप व इतने बड़े विवाद के कारण सहारा मीडिया की ब्रांड इमेज को बड़ा झटका लगा है.

जिस तरह प्रभु चावला को टीवी टुडे ग्रुप से चलता किया गया, जिस तरह वीर सांघवी को एचटी में किनारे किया गया, हो सकता है उपेंद्र राय को भी कम महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर या तबादला करके सहारा अपनी साख बचाने का काम करे. हालांकि यह भी संभव है कि जिस तरह एनडीटीवी समूह ने बड़ी ढिठाई से अब तक बरखा दत्त का बचाव किया है, उसी तरह सहारा समूह भी उपेंद्र राय के एहसानों तले दबे होने के कारण उनका अंत तक बचाव करे.  यहां हम द इकोनोमिक टाइम्स में छपी उपेंद्र राय से संबंधित खबर को स्कैन करके प्रकाशित कर रहे हैं. इस खबर में उपेंद्र राय और नीरा राडिया, दोनों का बयान है, जिसमें दोनों ने लगाए गए आरोपों से इनकार किया है.

ईटी हिंदी डॉट कॉम में प्रकाशित खबर

2जी मामले में पत्रकार ने की रिश्वत की पेशकश

रोहिणी सिंह

नई दिल्ली : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सीबीआई से एक मामले की जांच करने को कहा है, जिसमें कथित रूप से एक पत्रकार ने कॉरपोरेट लॉबीइस्ट नीरा राडिया की तरफ से ईडी के एक अधिकारी से संपर्क किया था। पिछले साल नवंबर में भेजे गए पत्र में ईडी ने कहा था कि सहारा न्यूज नेटवर्क में सीनियर एडिटोरियल पद पर काम करने वाले उपेंद्र राय ने ईडी के एक अधिकारी को काम कराने के बदले ‘भुगतान’ की पेशकश की थी। इस पत्र को गोपनीय बताया गया था।

इस पत्र में लिखी गई बातें ईटी को बताई गई हैं। ईडी के अतिरिक्त निदेशक आर पी उपाध्याय द्वारा यह पत्र सीबीआई के तत्कालीन निदेशक अश्विनी कुमार को भेजा गया था। इसे ईडी के निदेशक अरुण माथुर की इजाजत से भेजा गया था। ईटी द्वारा पूछे गए सवालों के जवाबों में राय ने राडिया की तरफ से ईडी से संपर्क करने की बात खारिज कर दी। राडिया की पीआर एजेंसी वैष्णवी ने कहा कि उन्हें इस तरह के किसी मामले की जानकारी नहीं है। 25 नवंबर को लिखे गए इस पत्र में आरोप लगाया गया था कि राय ने राडिया की तरफ से ईडी अधिकारी से मदद मांगी थी और उन्होंने संकेत दिया था कि वह इसके लिए 2 करोड़ रुपए भुगतान करने को तैयार हैं। राय ने ईडी अधिकारी से यह भी कहा था कि वह राडिया को 12 साल से जानते हैं।

राय ने यह कहते हुए ईडी के अधिकारी से मिलने का समय मांगा था कि वह कुछ ऐसी जानकारियां देना चाहते हैं, जो 2जी स्पेक्ट्रम मामले की जांच करने वाले अधिकारियों के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं। पत्र में लिखी गई बातों के मुताबिक, ईडी अधिकारी ने राय के प्रस्ताव को विनम्रता से खारिज करने के बाद इस मामले की जानकारी अपने बॉस माथुर को दी थी। उसके बाद माथुर ने ‘उचित विचार-विमर्श और जरूरी कार्रवाई’ के लिए इस मामले को सीबीआई को भेज दिया था। अधिकारी का नाम इस पत्र में नहीं बताया गया है। माथुर ने इस मामले के बारे में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। सीबीआई के प्रवक्ता ने भी इस बारे में कुछ नहीं बताया। लेकिन, ईडी के एक दूसरे अधिकारी ने ईटी को बताया कि कुछ दिन पहले राय के खिलाफ शिकायत दोबारा सीबीआई के मौजूदा डायरेक्टर ए पी सिंह को भेजी गई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अपनी पहचान जाहिर नहीं करने की शर्त पर अधिकारी ने कहा कि सीबीआई मामले की जांच कर रही है।

राय, राडिया ने ईडी के आरोप को खारिज किया है। राय ने राडिया की तरफ से ईडी के अधिकारी से मुलाकात करने के आरोप का जोरदार खंडन किया। उन्होंने कहा कि यह झूठी और उनकी छवि खराब करने वाली अफवाहें हैं, जो उनके विरोधियों द्वारा फैलाई जा रही हैं। ईमेल से ईटी को दी गई जानकारी में राय ने कहा, ‘किसी अथॉरिटी द्वारा की जाने वाली जांच से संबंधित किसी मामले में मैंने कभी किसी व्यक्ति, अथॉरिटी से संपर्क नहीं किया है, इस मामले को तो छोड़ ही दीजिए। इस मामले में आपके पास जो भी जानकारी है या आपके द्वारा पेश की गई है, वह गलत है और ये झूठी अफवाहें हैं जो मेरे विरोधियों और मुझसे शत्रुता रखने वाले लोगों द्वारा फैलाई जा रही हैं।’

राय ने यह भी कहा कि उन्होंने अधिकारियों (ईडी और सीबीआई) को इस आरोप को सही साबित करने की खुली चुनौती दी है। राय के मुताबिक, उन्होंने जनवरी 2010 में ईडी के एक अधिकारी की संदेहास्पद गतिविधियों के खिलाफ प्रधानमंत्री कार्यालय और वित्त मंत्रालय में शिकायत की थी। उन्होंने कहा कि यह उनसे बदला लेने की कार्रवाई भी हो सकती है।

राय ने यह भी कहा कि उन्होंने 2009 में ईडी के कुछ अधिकारियों के खिलाफ खबरें प्रसारित की थीं। राय ने कहा कि पिछले साल नवंबर में वह राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के साथ विदेश यात्रा पर गए थे और 10 दिनों तक देश से बाहर थे। ईडी का पत्र नवंबर के अंत में भेजा गया था, लेकिन इसमें यह नहीं कहा गया है कि यह कथित मामला नवंबर में हुआ था। राय ने राडिया के साथ पुराना संबंध होने से भी इनकार किया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने खबरों के बारे में राडिया से सिर्फ कुछ बार बातचीत की है।

उन्होंने कहा, ‘यह उनके नाम और छवि को खराब करने वाला अभियान है।’ ईटी को भेजी गई एक ईमेल में वैष्णवी कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस के एक प्रवक्ता ने राय के साथ राडिया के कथित संबंध को सिरे से खारिज कर दिया। राडिया के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘हमारे लिए काम करने वाले एक पत्रकार से संबंधित आपके सवाल पूरी तरह से हमारी जानकारी और समझ से बाहर हैं। यह बात जगजाहिर है कि हमने सभी जांच एजेंसियों के साथ सहयोग किया है और कहे जाने पर हम हमेशा व्यक्तिगत तौर पर मौजूद रहे हैं।’ प्रवक्ता ने यह भी कहा कि यह हमारी छवि को नुकसान पहुंचाने के मकसद से हमारे खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है।

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0 Comments

  1. anu

    May 3, 2011 at 2:01 pm

    sahara k log bhi rai sahab se bahut khush nahi hai, aur immandaar logo ka to yaha tak maanna hai ki rai ne sahara ki image ko dumil hi kiya hai, raiwaad failaya hai aur kaam karne wale chand logo jinke dam par sahara chalta hai ko baahar jane par majboor kiya hai

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