गाजीपुर जनपद में यूं तो पत्रकारों के कई संगठन हैं और ये सभी संगठन पत्रकारों के हितों के नाम पर अलम्बरदारी कर रहे हैं। ये दीगर बात है कि पत्रकारों के हितों के नाम पर चल रहे इन संगठनों का सबसे महत्वपूर्ण काम आपसी राजनीति, गुटबंदी और खेमेबाजी ही नजर आ रहा है, ऐसे में पत्रकारिता की मुख्यधारा से जुड़े लोग चाहे वो संवाददाता हों, छायाकार हों या जनपद में विभिन्न अखबारों के ब्यूरो चीफ, पत्रकारिता के नाम पर चलने वाले इन संगठनों से किनारा कर अपने कामों में मशगूल बने रहते हैं।
यही वजह है कि पत्रकारों के हितों के नाम पर कुछ गोष्ठियां-बैठक कर तथाकथित पत्रकार संगठन जनपद भर में पत्रकारिता की मर्यादा गरिमा और शुचिता के सामने गम्भीर सवाल खड़े कर रहे हैं। महज आपसी चकल्लस, बेसिरपैर की गुटबाजी और व्यक्तिगत स्वार्थ सिद्धि में पूरी तरह लिप्त इन संगठनों ने आम लोगों को भी गुमराह कर रखा है। ऐसे में गाजीपुर में पत्रकारिता की मुख्यधारा में काम कर रहे लोगों ने व्यवसायिक प्रतिद्वंदिता और प्रतिस्पर्धा को दरकिनार कर एक नई पहल शुरू की है। जनपद में सभी महत्वपूर्ण समाचार पत्रों और मुख्य न्यूज चैनलों के लोगों ने पत्रकारिता की गरिमा और शुचिता के मद्देनजर एक प्लेटफार्म बनाने का निर्णय लिया।
नतीजा एक्टिव जर्नलिस्ट फोरम के गठन की रूपरेखा बनाई गई। जिसमें पत्रकारिता की मुख्य धारा में काम कर रहे लोग शामिल होंगे। इसमें प्रिंट मीडिया से अमर उजाला, दैनिक जागरण, आज, राष्ट्रीय सहारा, तथा इलेक्ट्रानिक मीडिया से आजतक, महुआ न्यूज, ईटीवी, सहारा न्यूज, इंडिया टीवी जैसे अग्रणी मीडिया संस्थानों से जुड़े लोग (जिनका कार्यक्षेत्र गाजीपुर है) शामिल हैं। एक्टिव जर्नलिस्ट फोरम के गठन का एक मात्र उद्देश्य मीडिया की मुख्यधारा में काम कर रहे संवाददाताओं, छायाकारों एवं विभिन्न मीडिया संस्थानों के ब्यूरो प्रमुखों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष करना और कार्यक्षेत्र में आने वाली विभिन्न समस्याओं का निराकरण करना है।
गौरतलब है कि फोरम में छद्म पत्रकारिता के वेश में अपना व्यक्तिगत हित साधने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। ऐसे में जनपद में पत्रकारिता की गरिमा, मर्यादा और शुचिता के साथ मीडियाकर्मियों के हितों की रक्षा करने के लिए फोरम ने अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है। राह मुश्किल जरूर लेकिन फोरम से जुड़े लोगों के हौसले बुलन्द नजर आ रहे है। इतना ही नही पत्रकारिता की मुख्यधारा से जुड़े लोगों के एक प्लेटफार्म पर खड़े होने की वजह से बहुरूपिए पत्रकारों की जमात और इनको संरक्षण देने वाले प्राशसनिक और पुलिस अधिकारियों के बीच हड़कम्प नजर आ रहा है। प्रेस विज्ञप्ति












rahul
March 26, 2011 at 1:43 pm
sa…..bas…..! rahul mau/ghazipur ” star news” reporter
vinay tewari
March 26, 2011 at 1:51 pm
yer Karya ati uttam hai, Bas imandari se karya ho to aur bhi accha
pappu pandit
March 26, 2011 at 3:25 pm
पत्रकारिता जगत में एक और संगठन “एक्टिव जर्नलिस्ट फोरम” का अभ्युदय प्रशंसनीय है | आज लोकतंत्र का चतुर्थ स्तम्भ खतरे में है , बाहरी तत्वों से नही इस स्तम्भ का कथित अंग बने लोगो से ही खतरा बना है | तमाम दलाल मानसिकता के लोग जिन्हें पत्रकारिता का ककहरा तक मालूम नही वह शुद्ध हिंदी तक लिख पाते नही और अपने आप को बड़का पत्रकार कहते है | प्रतिशत बताने की जरूरत नही आप अपने आस – पास नजरे घुमाकर देख ले खुद समझ जायेंगे | इस प्रकार के कथित पत्रकार हर पत्रकार वार्ता में आगे की पंक्ति में ही बैठने की मार करते है | कुर्सी नही मिला तो पीछे की खाली कुर्सी उनके हाँथ में आ जाती है, उसे बलपूर्वक खींच कर आगे की पंक्ति में लगाकर आसीन हो जाते है फिर शुरू हो जाता है साहब से नजदीकी बढ़ाने का सिलसिला | हर आलय में पसरे भ्रष्टाचार की गंगा में डुबकी लगाने के लिए दलालों ने माकूल स्तम्भ समझ लिया है | पत्रकारिता क्षेत्र में तमाम संगठन होने के बावजूद पत्रकारिता से जुड़े तमाम लोग गन्दी मानसिकता वाले दलाल टाइप के पत्रकारों की करतूत से माता सरस्वती के साधक अपने आप को कही – कही पत्रकार बताने में भी शर्म महसूस करते है | वह इसलिए की एक कप चाय पीकर साहब की जी हुजूरी करने व दो – चार घण्टा बटर पालिस (आधुनिकता की दौड़ में तेल नही बटर की) करने से मान नही बल्कि अपमान ही मिलता है | इसकी चिंता दलालों को नही है इनका तो मूल मन्त्र है “आपन काम बनता भाड़ में जाये ……………….| माफिया मानसिकता वाले कथित पत्रकारों को हांसिये पर लाने के लिए गाजीपुर के जागरूक पत्रकारों को कोटि कोटि शुभकामना | अन्य जनपद के पत्रकार भी इससे सबक ग्रहण करेंगे |
amit mukherji
March 26, 2011 at 4:15 pm
देश की दिशा और दशा में मीडिया की बहुत बड़ी भूमिका होती है …क्योकि जनता के मुद्दों मिडिया ही उठती है ऐसे में कुछ ऐसे सुरविर भी है जो शायद मिडिया का मतलब भी नही जानते की इस पेशे में काम करने का मकशद क्या है ….और ऐसे लोग जब कुछ अच्छे मिडिया कर्मियों की नाव पर सवार हो जाते है तो नाव बीच मझदार में डगमगाती है तो डूबने का खतरा सब पर आ जाता है ….पत्रकारिता तो जीवन के बारहों रंग से मिलकर बना है !लेकिन कुछ रंगीन पत्रकार इस पेशे को बदनाम करते है ऐसे में आप लोगों का ये कदम सराहनीय है …
sanjay mishra
March 26, 2011 at 4:17 pm
एक्टिव जर्नलिस्ट फोरम के गठन के उपलक्ष्य में हमारी ओर से ढेर सारी शुभकामनायें ! भविष्य में इस संगठन की गूँज पूरे भारत में सुनने की कामना करता हूँ …..
amit mukherji
March 26, 2011 at 4:21 pm
देश की दिशा और दशा में मीडिया की बहुत बड़ी भूमिका होती है …क्योकि जनता के मुद्दों मिडिया ही उठती है ऐसे में कुछ ऐसे सुरविर भी है जो शायद मिडिया का मतलब भी नही जानते की इस पेशे में काम करने का मकशद क्या है ….और ऐसे लोग जब कुछ अच्छे मिडिया कर्मियों की नाव पर सवार हो जाते है तो नाव बीच मझदार में डगमगाती है तो डूबने का खतरा सब पर आ जाता है ….पत्रकारिता तो जीवन के बारहों रंग से मिलकर बना है !लेकिन कुछ रंगीन पत्रकार इस पेशे को बदनाम करते है ऐसे में आप लोगों का ये कदम सराहनीय है ……
nitin
March 26, 2011 at 5:27 pm
ghazipur k patrkaro ka yeh kadan ek nai pahal k sath hi patrakar k vesh me dalalon k muh par jordar tamacha hai… badhai ho. meri shubhkamnaye hai is foram k sath……..
rakesh pandey
March 26, 2011 at 6:55 pm
बहुत बढ़िया कदम……पत्रकारिता की आड़ में धंधा करने वालों पर लगाम लगेगा………अन्य प्रदेशों में रहने वाले पत्रकारों से जुड़ाव के लिए भी मंच तैयार करना चाहिए…….. बेहतर प्रयास के लिए साधुवाद !
uday
March 27, 2011 at 2:32 am
Best Of Luck frnds…..
manish mishra
March 27, 2011 at 9:45 am
kaun kahta hai aasmaan me surakh ho nahi sakta,ek pathar to tabiyat se uchalo yaro,ki tarz par ghazipur ke kuch jakruk media karmiyo ka ye kadam besak media ki grima aur suchita ke mutabik hai.
ghandi
March 27, 2011 at 11:53 am
naye sagthan banane wale patrakaro ko kutto se seekh leni chahiye, jab rat ke andhere me koi unper pathar marta hai to sabhi ek hokar katne ke liye daudate hai, apani biradari per koi hamala kare ye unhe bardast nahi hota. bhale hi aapas me roj lade, per kya kare samaj to aaj patrakaro ko kutta samajane laga hai. so isme bhi hod lag gai, roti ke liye rojana alag alag sagathan banane lage hai. hum achhe brand ke kutte hai. baki sadak chhap hai. hum haddi sahit kha kar pacha lete hai, aaj kal murga kam milne laga hai, so naya sagthan se kam asan ho jayega. thanxxxxxxxx.
baklol
March 28, 2011 at 3:56 am
is foram k gathan se nishchit hi tathakathit patrkaro ki gand fat gayi hogi ki ab dukan chalegi kaise…..
azad
March 29, 2011 at 12:46 pm
is foram ka swagat hai. camment bhi achchhe lage lekin sach ye hai ki har achchhe kam ka virodh jarur hota hai. vyavastha yahi kahti hai. par sahi raste par chalne wale nigetive comment se nahi ghabrate. ant me srimaan GANDHI ko ek salah, gandhi naam rakhane se gandhi jaisi soch rakhna jyada jaruri hai. bhai sahab aapne patrakaron ko KUTTA aur inke pese ko kuttagiri ke rup me paribhishit kiya. beshak aap ko kuttagiri ka achchha anubhaw hoga. ek sawal- aap kis kategari me aate hain…..
ek patrakar
March 29, 2011 at 12:50 pm
GANDHI ji hum aise patrakar hai jo aapke jaisi soch rakhne wale KUTTO ko palte tak bhi nahi. aur agar aap ne khud ko KUTTA maan liya hai to patrakarita chhod dijiye, nahi to dusare VASTVIK KUTTE bhi apanane se gurej karegen……..
the reporter
March 29, 2011 at 12:53 pm
baklol bhai, nishchit hi tamam tathakathit patrakaron ki gaand fat gai hai. lekin aadat se majbur, khujalimare apni-apni uchakane se baaz nahi aa rahe hain.