: रतन टाटा और नीरा राडिया की बातचीत का टेप : प्रभु चावला ने सफाई दी हैं कि उन्होंने नीरा राडिया के साथ अपनी तेरह मिनट की बातचीत में टू जी स्पेक्ट्रम नीलामी के बारे में कोई बात नहीं की। दलाल कुल शिरोमणि प्रभु चावला कहते हैं कि नीरा ने तो उन्हें उनका ज्ञान जानने के लिए फोन किया था। इसके सबूत में उन्होंने वही बातचीत फिर भेज दी है जो हम पहले ही प्रकाशित कर चुके हैं।
प्रभु चावला ने कहा है कि वे टेलीकॉम दलाली नहीं कर रहे बल्कि अंबानी बंधुओं के बीच गैस को ले कर चल रही लड़ाई पर अपनी विशेषज्ञ टिप्पणियां दे रहे थे। देश को नहीं मालूम था कि दिल्ली के देशबंधु कॉलेज से जैसे तैसे पढ़ कर निकलने वाले प्रभु चावला गैस और प्राकृतिक संसाधनों के विशेषज्ञ हैं। चावला नहीं याद करना चाहते कि वे नीरा राडिया के सामने गिड़गिड़ा रहे थे कि मुकेश अंबानी उनके एसएमएस का जवाब तक नहीं देते। अपनी सफाई में कहा है और फोन पर भी गिड़गिड़ाए हैं कि उनके बेटे अंकुर को अंबानियों ने गैस मामले से अलग रखा है। एक कुख्यात रिश्वतकांड में अभियुक्त अंकुर चावला का पुत्र मोह समझा जा सकता है। मगर असली कहानी नीरा राडिया की है जिनको प्रवर्तन निदेशालय ने लगभग आठ घंटे जम कर रगड़ा। उन्होंने पांच सौ पन्नों के दस्तावेज दिए और जब पत्रकार सामने पड़े तो यह कहने से नहीं चूकी कि रतन टाटा के साथ स्पेक्ट्रम आवंटन में घोटाला हुआ है यह बात खुद सीएजी ने भी कही है। जाहिर है कि नीरा राडिया दोस्त और धंधे में सहयोगी बहुतों की होगी मगर उनकी व्यापारिक करवाचौथ रतन टाटा के लिए ही मनती है। अब सुनिए रतन टाटा और नीरा राडिया के बीच बर्खास्त हो चुके संचार मंत्री ए राजा के बारे में बातचीत-
नीरा राडिया- तुम मिडिल लिस्ट में कहीं हो रतन?
रतन टाटा- हां, मैं इजराइल में हूं।
नीरा- बजट तो अच्छा आ गया। ग्रामीण विकास का ध्यान रखा गया हैं।
टाटा- मैंने तो खैर किसी को कोई सलाह नहीं दी है। मुझे लगता है कि मेरी सबसे बड़ी चिंता यह है कि दयानिधि मारन ए राजा के पीछे सारे हथियार ले कर पड़ गया है और मैं उम्मीद ही कर सकता हूं कि राजा टिका रहेगा। फिसलने के बहुत चांसेज हैं।
नीरा- नहीं फिसलेगा। अभी जब खबर आई थी कि एक केंद्रीय मंत्री ने मद्रास उच्च न्यायालय के एक जज को एक फैसले में बदलाव करने के लिए फोन किया था तो मारन ने राजा का सीधे नाम लिया था।
टाटा- ऐसा क्या?
नीरा- भारत के चीफ जस्टिस ने बयान जारी किया। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने भी कहा कि किसी मंत्री का कोई फोन किसी जज के पास नहीं आया था। इसमें तो मारन की खुद की इज्जत खराब हुई। उसे लोग बेवकूफ समझने लगे।
टाटा- ऐसा तो होगा ही। चाहे जो हो अगर कुछ हुआ होता तो इससे कनिमोझी का फायदा होता और मारन को कुछ नहीं मिलने वाला था। वैसे भी बाल एसोसिएशन के अध्यक्ष ने खुली अदालत में सच और झूठ का फैसला कर दिया गया।
नीरा- अब तो टेलीकॉम युद्व के दूसरे सत्र की लड़ाई शुरू हो गई और पता नहीं कितने युद्व और होंगे।
टाटा- मुझे तो राजा पर हैरत हो रही है कि तुमने उसके लिए इतना किया, उसे कुर्सी पर बैठाया मगर वही तुम्हारे साथ खेल कर रहा है।
नीरा- मैंने कनि से बात की थी। मै उससे कल मिली थी और हम लोग साथ ही लौटे थे। मैंने कहा था कनि, देख लो क्या हो रहा है? राजा क्या कर रहा है? कनि ने कहा था कि वो राजा से बात कर के अपना रवैया ठीक करने के लिए कहेगी। इसके बाद मेरी राजा से बात हुई और उसने साफ साफ कहा कि नीरा तुम्ही बताओ कि मैं अदालत के फैसले के खिलाफ कैसे जाऊं? मैंने कहा कि मिस्टर राजा तुम अदालत के खिलाफ जा सकते हो। लाइसेंस के कागज में जो लिखा है उसे मानो तो कोर्ट को कोई दिक्कत नहीं होने वाली। आखिर चार चार मेगाहर्ट्स सबको देने की बात है। अब पता नहीं तुम्हारी समझ में आता है या नहीं।
टाटा- मगर अब यह नया एटॉर्नी जनरल या जो भी आया है…….
नीरा- नहीं रतन, ये तो अच्छा ही हुआ है। मैं बताती हूं क्यों। वे बेचारा तो सिर्फ संवैधानिक मामलों से निपटेगा। सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम अच्छा आदमी हैं। मैंने स्विमिंग पूल में उसके साथ क्या किया था, मैं बता चुकी हूं। उसे ही सही मामलों में परिभाषा करनी है और मैं उससे मिलने जा रही हूं। फोन पर बात हुई थी और साढ़े पांच छह बजे फिर फोन करने के लिए कहा था। मैं तो घर पर मिलती हूं। वैसे भी वो अनिल अंबानी से नफरत करता है और उनकी नहीं मानेगा। बहुत कड़क आदमी है। राजा भी उसे ही लाने की सोच रहा है। कल राजा जब पीएम से थ्री जी की बात कर रहा था तो उसने भी यह कहा था कि यह मामला ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स को देने की बजाय कैबिनेट नोट बना दिया जाए। ये जल्दी करना पड़ेगा क्योंकि अनिल को 6.25 मेगाहर्ट्स देने के बाद राजा खुद एटी एंड टी को अपने शेयर बेचने वाला है, बातचीत चल रही है।
टाटा- तो ये खेल है।
नीरा- राजा को कहीं न कहीं से शेयर खरीदने वाले चाहिए वरना उसके पहले के कर्जे भी डूब जाएंगे। जब तक वो फैसला नहीं जुगाड़ता, उसका अपना धंधा चौपट हो जाएगा।
टाटा- लेकिन ये तो घपला है। इसे कोई एक्सपोज क्यों नहीं करता?
नीरा- रतन, उन्होंने पूरा मीडिया खरीद रखा है। विज्ञापनों से पेट भर दिया है। मैं तुम्हे बता नहीं सकती कि कैसे कैसे खेल हुए हैं, खास तौर पर टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ और दैनिक भास्कर के साथ।
टाटा- दैनिक भास्कर?
नीरा- अरे वही अग्रवाल लोग जिन्हें मैंने तुमसे मिलवाया था और जो बात बात में पैसा मांग रहे थे। छोटे लोग हैं, धंधा बड़ा हो गया है। वे कहते हैं कि अगर हमने एक भी खबर खिलाफ छापी तो विज्ञापन मिलना बंद हो जाएंगे। मैंने कहा कि ठीक है तुम उनसे विज्ञापन लेते रहो और मैं दूसरों से बंद करवा दूंगी। आखिर विज्ञापन दिए ही इसलिए जाते हैं कि खिलाफ कुछ नहीं छपे और अपना मीडिया इतना लालची है यह तुम्हे बताने की जरूरत नहीं है।
बातचीत यहां सुने. आडियो प्लेयर पर क्लिक करें. आडियो शुरू होते वक्त कुछ सेकेंड्स की शांति है, फिर फोन इंगेज होने का टोन आएगा और फिर बातचीत शुरू होगी…
लेखक आलोक तोमर जाने-माने पत्रकार और डेटलाइन इंडिया के संपादक हैं.












Vinay Nayak
November 25, 2010 at 5:18 pm
Bhaskar ki dukaandari se to sab parichit hai. The punch line of whole matter is अरे वही अग्रवाल लोग जिन्हें मैंने तुमसे मिलवाया था और जो बात बात में पैसा मांग रहे थे। छोटे लोग हैं, धंधा बड़ा हो गया है।
timmy.
November 25, 2010 at 7:22 pm
The audio tape is not complete. Pls upload the full recording of the transcript.
bharat sagar
November 25, 2010 at 8:59 pm
Bahut khoob Sir !
om prakash gaur
November 26, 2010 at 2:44 am
स्वीमिंग पूल में सोलिसिटर जनरल से सामना. बहुत खूब. फिल्म जैसा आँखों को सकूँ देने जैसा सीन तो नहीं था ?
kamal
November 26, 2010 at 5:23 am
good;D
dhamendra singh
November 26, 2010 at 6:08 am
arre wahai agrawal lalchi, inke lalach ke bare me koun nahi janta. chote agrawal hai hai par lalchi bade hai.
sk.singh
November 26, 2010 at 11:36 am
Alok Sir ne etana badakamkiya hai joher koinahikar sakata
yashovardhan nayak
November 27, 2010 at 1:40 am
दैनिक भास्कर ने मध्य-प्रदेश के वित्त-विकास निगम से करोड़ो का कर्जा लिया यह ,बात उस समय प्रचंड बहुमत प्राप्त कर मुख्यमंत्री बनी “उमाभारती जी” की जानकारी में आई तो उन्होंने तीखे तेवर दिखाते हुए ,इस धनराशि को आवंटित करने वाले “आई.ए.एस” . अफसर “सुधीर-रंजन मोहंती” के खिलाफ जाँच शुरू करा दी ,इस घटना के बाद “उमा जी” के विरुद्द “भास्करअख़बार”और उसके नेटवर्क ka ऐसा अभियान चला कि “उमाजी”अर्श से फर्श पर आती चली गई ,बेशक उमा जी के राजनैतिक पतन में यही एक कारण नहीं रहा पर यह बहुत बड़ा कारण जरुर रहा है. आलोक जी , पत्रकारिता कि दुनिया में “रामनाथ गोयनका” नहीं बचे ,इसलिए “प्रभाष जोशी” भी नहीं आ रहे है.-यशोवर्धन नायक विनोदकुंज तिराहा ,झाँसी रोड ,टीकमगढ़ (मध्य-प्रदेश) पिन -472001 संपर्क -9893111310
rajkumar sahu, janjgir
November 27, 2010 at 5:45 am
tomar ji, bahut badhiya. media ke dalaalon ko, joota maaro saalon ko.
मदन कुमार तिवारी
November 27, 2010 at 5:25 pm
माननीय आलोक तोमर जी अगर आप वाकई देश के जाने माने पत्रकार हैं तो भगवान भला करे इस देश का। आपको अंग्रेजी का क ख ग भी नही आता है । और जिससे आपने ट्रांस्क्रि्प्ट करवाया है वह तो महा मुर्ख है। आप जैसे अंग्रेजी जानने वालों पर हीं यह किस्सा निकला है कि एक महिला का पति बेहोश हो गया और उस महिला को अंग्रजी बोलने का बहुत शौक था । उसने डाक्टर को फोन करके कहा कि मेरे पति अभी तक सेंस में थें अब नान सेंस हो गये। बी४एम की विश्वसनियता को बचा रहने दो। जो टेप तुमने लोड किया है उसे किसी अंग्रेजी जानने वाले से सुनवाओ। तब तुमको समझ में आयेगा की क्या लिखा और क्या सुना । और माननीय यशवंत जी प्रतिष्ठा बचाओ। पहले समझ लो की टेप में क्या बोला जा रहा तब ट्रांसक्रिप्सन छापो। आलोक तोमर को तो अंग्रेजी का ए बी सी डी नही पता यह मै समझ गया । लेकिन तुम तो अपने पोर्टल की प्रतिष्ठा का ध्यान रखो।
Ankit Khandelwal
November 28, 2010 at 5:59 pm
@Madan Kumar tiwary
Bilkul sahi keha aapne.. Alok tomar ki journalism chodkarke english sikhne ki jarurat hain… Is tape ke english translation main jaane kitni galtiya hain.. or kaafi baatein to tape ke ander hain hi nahi…aisa lagta hain ki mangandat tarike se kuch bhi keh diya gaya hain…
Or na hi jitni baatein tape main kahi gayi hain.. unse yeah saabit hota hain.. ki Ratan Tata ka ismein koi haath hain..
famous hone ke liye is tarike ke lekh chaapna bahut hi bekar tarika hain.
Or manaiya yashwant ji.. aap bhadas4 media ki sakh ko bachana chahtein to kam se kam is tarah ke lekh to bina jaanch padtal ke mat chahpeyin….