एनडीटीवी के मालिक डा. प्रणय राय को जाने क्या हो गया है कि बरखा दत्त को एनडीटीवी से चिपका कर रखे हुए हैं. उन्हें अगर अब तक अकल नहीं आई है तो वे ये वीडियो देख लें.. सब समझ में आ जाएगा. अगर वे इस वीडियो को देखने के बाद भी बोझ ढोने के लिए इच्छुक हैं तो उन्हें बरखा मुबारक. भड़ास पर आज सुबह योगेश शीतल ने जो कुछ लिखा, उसे ये वीडियो प्रामाणिक बना रहे हैं. नीरा राडिय टेप कांड में फंसे ज्यादातर लोगों को उनके उनके मीडिया हाउसों ने ढक्कन कर दिया है…
…लेकिन सिवाय डा. प्रणय राय के, जिन्होंने बरखा का बाल तक बांका नहीं होने दिया. इन कथित सभ्य और एलीट मीडिया मालिकों को लगता है कि वे दुनिया के सबसे समझदार लोग हैं. तभी तो वे इतना बड़ा दोगलापन करने वालों को भी अपने साथ जोड़े हुए हैं. ये भीड़ प्रायोजित नहीं है. अन्ना हजारे के समर्थन में उमड़ा जनसैलाब प्रायोजित नहीं था. ऐसे में जब जनता जाग चुकी है, सब जान चुकी है, तब भी डा. प्रणय राय की बेहयाई न सिर्फ शर्मनाक है बल्कि यह बताने के लिए काफी है कि इस शख्स का दिल और दिमाग, शायद अब दोनों बीमार पड़ चुके हैं. देखें बरखा के खिलाफ कितना आक्रोश है लोगों में, इन वीडियोज को देखें… क्लिक करें…












मदन कुमार तिवारी
April 10, 2011 at 5:54 pm
भाई मेरे यह बहुत गलत हुआ , उसी बरखारुपी भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिये अन्ना महाराज अन्न-जल ग्रहण करना बंद करके ड्रामा कर रहे थें और बेवकुफ़ पब्लिक ने उसे भगा दिया । लोकपाल बिल पर ठहाके लगाओ । एक शर्त भी लगाईये । पहला मुकदमा जो किसी भ्रष्टाचारी या बली के बकरे के खिलाफ़ लोकपाल के यहां आयेगा , उसे अन्तिम परिणाम यानी सजा हो जाने तक में कम से कम ५-७ साल लगेंगे ।
भारतीय नागरिक
April 10, 2011 at 6:51 pm
हम भारतीय बड़े भोले होते हैं..
भारतीय नागरिक
April 10, 2011 at 6:52 pm
हम भारतीय बड़े भोले होते हैं.
जय कुमार
April 11, 2011 at 3:49 am
[u]बरखा ने मिडिया को किया बदनाम, फिर भी बरखा पर NDTV मेहरबान[/u]
written by जय कुमार, April 11, 2011
इस वीडियो में ” ख़बरों की खबर ” लेने वाले संजय अहिरवार मूकदर्शक की तरह एनडीटीवी की फजीहत होते देख रहे हैं. और हो भी क्यों न जनता जनार्दन की अदालत ने एनडीटीवी की बरखा को बिच बाजार रडिय का दलाल जो ठहरा दिया है. बरखा दत्त अब YELLOW JOURNALISM KI ROLE MODEL बन गयी हैं. जो पत्रकारिता कर समाज सेवा करने के बजाये ज्यादा पैसा कमाना चाहते हैं वो बरखा दत्त के पदचिन्हों पर चल सकते हैं………
I HATE NDTV
जो गरीबों की बात तो करती है, लेकिन गरीबों को लूटने वालों को खुद पनाह देती है……..>:(>:(>:(>:(>:(>:(
Vardhman Jain
April 11, 2011 at 8:10 am
Berkha Dutt go back. You just not got down the image of Journalism but also of Female personality.
sudhir
April 11, 2011 at 11:28 am
its not strange……………they r such type of man and same identity……..sirf dikhava bakee sab bakvaas
Sohan
April 14, 2011 at 5:39 am
पहला सुझाव .डॉ रॉय को पहले एन डी टीवी का नाम ‘प्रोफिट ‘ कर देना चाहिए. क्योंकि बरखा जी को इस में माहरत हासिल हो गई है.पुरानी खबरों में देखते थे बरखा जी बहुत सवेंदनशील है.पर उनके खिलाफ नारे लगे, पर कोई फर्क नहीं पड़ा. इसका मतलब पुराने दर्श्यो में सवेंद्न्शीलता ओढ़ी हुई और झूटी थी.भरसटाचार पर ऐसे नारे अगर किसी नेता के खिलाफ लगते तो क्या एन डी टीवी नहीं दिखाता? अब हमारे भी समाज आ गया..कैसे हमारे प्रान्त के करप्ट हांइ प्रोफाइल अंग्रेजी बोलने वाले और वाली नेताओ के पक्ष में स्टोरी होती थी.काश बरखा जी उन नेताओ से इंटरव्यू कर लेती जिन्हें भीड़ ने हजारे के यहाँ से खदेड़ दिया था.. ताकि दोनों को वही काम मिल जाता एक दुसरे अपने गिले शिकवे दूर कर लेते जनता के खिलाफ. ब धाई तो रादिया को देनी चाहिए.. अगर वो ये काम नहीं करती तो ये लोग आज महात्मा बने रहते .सुक्रिया..