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नोट वोट कांड : राजदीप ने स्टिंग की सीडी अब भी नहीं दिखाई तो समझिए वो पत्रकारिता के खलनायक हैं!

याद करिए वो वक्त. अमेरिका के साथ परमाणु करार का मसला गर्म था. वामपंथी दलों ने मनमोहनी सरकार के परमाणु करार समर्थक होने पर अपना सपोर्ट वापस ले लिया था. देखते ही देखते कांग्रेस नीत गठबंधन वाली केंद्र सरकार अल्पमत में आ गई. सांसदों की खरीद फरोख्त शुरू हुई. कांग्रेसी और सपाई थैलियां खोलकर बैठ गए.

याद करिए वो वक्त. अमेरिका के साथ परमाणु करार का मसला गर्म था. वामपंथी दलों ने मनमोहनी सरकार के परमाणु करार समर्थक होने पर अपना सपोर्ट वापस ले लिया था. देखते ही देखते कांग्रेस नीत गठबंधन वाली केंद्र सरकार अल्पमत में आ गई. सांसदों की खरीद फरोख्त शुरू हुई. कांग्रेसी और सपाई थैलियां खोलकर बैठ गए.

भाजपा व अन्य विपक्षी दलों के सांसदों पर डोरे डाले जाने लगे.  भाजपा सांसदों ने पैसे लेकर कांग्रेसी सरकार बचाए जाने के आफर के बारे में अपने बड़े नेताओं को बताया. तब भाजपा नेतृत्व ने राजदीप सरदेसाई और आईबीएन को इसलिए पकड़ा क्योंकि उन्हें इनके इमानदार होने पर भरोसा था. राजदीप ने भी वादा किया कि वे स्टिंग करेंगे और दिखाएंगे भी. कोई लालच उन्हें डिगा नहीं पाएगा. पर राजदीप सरदेसाई झूठे साबित हुआ. स्टिंग तो उन्होंने कर लिया पर दिखाया नहीं. इस तरह सांसदों को खरीदे जाने की पूरी कहानी जनता के सामने आने से रह गई.

आखिरकार राजदीप की दगाबाजी से आहत भाजपा ने अपने सांसदों को वो नोट संसद में दिखाने को कहा जिसे कांग्रेस को वोट देने के लिए रिश्वत के तौर पर दिया गया था. इस नोट लहराने के कांड ने नोट वोट कांड को सुर्खियों में लाया. जांच के नाम पर दिल्ली पुलिस सत्ता के दबाव में लीपापोती करती रही पर जब हाल में कोर्ट ने पुलिस को फटकारा तो दिल्ली पुलिस फिर सक्रिय हुई. और, होना वही था, जिसकी आशंका सबको थी. पुलिस कमजोर कड़ियों को पकड़ रही है. सुहैल हिंदुस्तानी और संजीव सक्सेना को पकड़ा है. बाकियों से सिर्फ पूछताछ की खानापूरी की जा रही है.

पर क्या यह सवाल नहीं उठाना चाहिए कि दिल्ली पुलिस आखिर राजदीप सरदेसाई से वो सीडी क्यों नहीं ले रही जिसमें नोट के बदले वोट की पूरी चित्रमय व प्रामाणिक कहानी है. अगर दिल्ली पुलिस सिर्फ इसी इविडेंस का परीक्षण करा लेती तो सारा मामला आसानी से खुल जाता और दोषियों की शिनाख्त हो जाती. पर केंद्र में कांग्रेस की जो सरकार है वह अपने दागदार चेहरे को कभी जनता के सामने नहीं लाने देगी. इसीलिए जांच के नाम पर केवल नाटक व छलावा हो रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि मीडिया कहां है. जिस मीडिया को पोलखोल अभियान का हिस्सा बनना चाहिए, वही मीडिया मामले को दबाए है.

पत्रकारिता का नायकत्व यह था कि राजदीप सरदेसाई उसी समय स्टिंग वाली सीडी को अपने अंग्रेजी और हिंदी न्यूज चैनलों पर प्रसारित कर देते. पर उन्होंने नहीं किया. उन्होंने अपने पत्रकारिता की नैतिकता की हत्या की. उन्होंने मीडिया का मजाक उड़ाया. उन्होंने अपने न्यूज चैनलों को सरकार के सामने गिरवी रखकर सौदा कर लिया. आखिर क्यों न कहा जाए कि नोट वोट कांड में चौथे स्तंभ का सबसे बड़ा खलनायक राजदीप सरदेसाई है. अब भी उनके पास वक्त है. मुद्दा गर्म है. उनमें थोड़ी भी शर्म व हया बाकी है तो उन्हें स्टिंग वाली सीडी का प्रसारण कर देना चाहिए या फिर उस सीडी को दिल्ली पुलिस व अन्य मीडिया हाउसों को सौंप देना चाहिए ताकि जनता के पास सच पहुंच सके.

कहने वाले तो ये भी कहते हैं कि 22 जुलाई से 11 अगस्त के बीच जो खेल हुआ उसमें कौन सा खेल हुआ राजदीप सरदेसाई के चैनलों व मनमोहनी सरकार के बीच करोड़ों की डील हो गई और वो स्टिंग वाली सीडी छिपा दी गई. मीडिया स्टडी ग्रुप ने जो सर्वे किया है उसमें राजदीप सरदेसाई को लोगों ने पत्रकारिता का खलनायक माना है. यह भी आशंका प्रकट की है कि राजदीप ने स्टिंग वाली सीडी के जरिए कांग्रेस करोड़ों रुपये की वसूली की होगी. इस शोध में दिल्ली और कई शहरों के पत्रकारों ने राय दी कि आईबीएन और इनके बॉस राजदीप सरदेसाई को खुले तौर पर दोषी माना जाना चाहिए और इनके इस कृत्य को न्यूज चैनल चलाने के लाइसेंस का उल्लंघन मानना चाहिए.

आखिर, अमर सिंह और अहमद पटेल के घर जो स्टिंग राजदीप व उनके चैनल ने कराए, उसकी सीडी को 19 दिनों तक क्यों दबाए रखा गया. बाद में यह मामला सुर्खियों में आया लेकिन वह सीडी सामने नहीं आई. तब भी राजदीप पर उंगली उठी थी लेकिन वो चुप्पी साधे रहे या फिर गोलमोल बातें करते रहे. यहां तक कि विकीलीक्स ने भी खुलासा कर दिया था कि नोट वोट कांड में मनमोहन सिंह की सरकार की तरफ से और उनकी कांग्रेस पार्टी की तरफ से कई सांसदों को खरीदा गया था. अब उम्मीद कोर्ट से ही है. कोर्ट जिस तरह से पुलिस की जांच पर नजर रखे हुए है, उससे उम्मीद की जानी चाहिए कि वह जल्द ही आईबीएन और राजदीप को भी निर्देश देगी कि वह स्टिंग वाली सीडी पुलिस को और कोर्ट को सौंपें.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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0 Comments

  1. Ravi teja

    July 25, 2011 at 7:17 pm

    naya kya hai sabhi mauka paa ke chaukka lagate hai rajdeep ko bhhe congress rajyasabha se MP banwa degi or baad me ye agle RAJEEV SHUKLA ban jayenge

  2. Dhananjay jha

    July 25, 2011 at 8:41 pm

    Yashwant.. correct your information before writing anything, second thing do not presume in journalism. you or your source of this information have any proof that Rajdeep deal with congress?
    do not forget Rajdeep is the man who give ordinary citizen to a voice in his channel through “citizen journalist”, otherwise never an ordinary citizen can approach indian news channel for his/ her voice. all man have some compulsion in his/ her life, Rajdeep have also, whats wrong in it. without proof do not finger out in public place like this, thanks

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