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न्यूज चैनलों और अखबारों का नीतीशीकरण

अनंत झाबिहार में होने वाले विधान सभाचुनाव का परिणाम भले ही 24 नवम्बर को आने वाला हो, मगर मीडिया के सबसे ताकतवर माने जाने वाले इलेक्ट्रानिक चैनलों ने तो हद ही कर दी है. आखिर अभी पहले चरणों का चुनाव भी नहीं हुआ है और देश के सबसे ताकतवर माने जाने वाले स्तम्भ ने तो नीतीश को मानो दुबारा मुख्यमंत्री बना ही दिया है. आखिर मीडिया क्या साबित कर रही है? आखिर खुद को सबसे अव्वल कहने वाले समाचार चैनल स्टार न्यूज़ को ये क्या हो गया है?

अनंत झाबिहार में होने वाले विधान सभाचुनाव का परिणाम भले ही 24 नवम्बर को आने वाला हो, मगर मीडिया के सबसे ताकतवर माने जाने वाले इलेक्ट्रानिक चैनलों ने तो हद ही कर दी है. आखिर अभी पहले चरणों का चुनाव भी नहीं हुआ है और देश के सबसे ताकतवर माने जाने वाले स्तम्भ ने तो नीतीश को मानो दुबारा मुख्यमंत्री बना ही दिया है. आखिर मीडिया क्या साबित कर रही है? आखिर खुद को सबसे अव्वल कहने वाले समाचार चैनल स्टार न्यूज़ को ये क्या हो गया है?

सरोकारों की पत्रकारिता तो बहुत दूर की बात, अब तो बस सिर्फ चहुंओर नीतीश ही नीतीश हैं. ‘कौन बनेगा मुख्यमंत्री’ जैसा बेकार कार्यक्रम दिखलाकर आखिर दीपक चौरसिया किसकी मार्केटिंग कर रहे हैं, ये तो वही जानें लेकिन इस बेशर्म पत्रकारिता ने तो घिन्न मचा रखा है. पिछले दिनों स्टार न्यूज़ और नील्सन ने बिहार में चुनावी सर्वे कराया. बिहार की कुल 243 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए. सर्वेक्षण की रिपोर्ट जब स्टार न्यूज़ पर चली तो इस विशेष कार्यक्रम के एंकर किशोर आजवानी भी हैरत में थे.

इस सर्वे ने नीतीश की चाटुकारिता की नयी मिसाल लिख दी. कुल 243 सीटों के लिए हो रहे इस चुनाव में बकौल सर्वे कुल 120 सीट जदयू को मिलने का दावा किया, जबकि पिछले चुनाव में जदयू को मात्र 88 सीटें ही मिली थी. वहीँ दूसरी और नीतीश की सहयोगी दल भाजपा को 50 सीटें मिलने की बात कही गयी और गत चुनाव में यह संख्या 55 थी. राजद और लोजपा दोनों के सीटों में लगभग 50 प्रतिशत की गिरावट का दावा भी चैनल ने किया है. कांग्रेस के दोगुने होने वाले लाभ के बारे में भी इस सर्वे रिपोर्ट में दिखलाया गया है. यानि नीतीश बाबू भी खुश और राहुल बाबा भी खुश. तो क्या देश के आम लोग इस बात को मान लें कि स्टार न्यूज़ ने सरकारों को खुश रखने का भार अपने कंधे पर ले लिया है.

अब बात अंदरखाने की. नीतीश अपने मुख्यमंत्रित्व काल में अपने तानाशाही के लिए भी ज्यादा चर्चित रहे है. बिहार के बड़े बड़े अखबारों को सरकार का कोपभाजन उस समय बनना पड़ा जब किसी मीडिया वर्ग ने नीतीश की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने की कोशिश की. बिहार के बड़े अख़बारों के सरकारी विज्ञापन तक अलिखित रूप से बंद कर दिए जाते थे. चूँकि इस बात की भी संभावना है की नीतीश की सरकार दुबारा सत्ता में लौट सकती है, ऐसे में सभी मीडिया वर्ग नीतीश की नाराजगी क्यों मोल लेगा. यानि बिहार का पाठक और दर्शक फिर से ‘बुडबक’ बन चुका है. स्टार न्यूज हो या सहारा हो या सीएनईबी या दैनिक जागरण या हिंदुस्तान, सबके सब नीतीशीकरण के शिकार हो चुके हैं. अगर आपको कोई ऐसा चैनल या अखबार दिखाई दे जो नीतीशीकरण का शिकार न हुआ हो तो जरूर बताइएगा.

लेखक अनंत झा पिछले एक दशक से झारखंड की पत्रकारिता में सक्रिय हैं. प्रिंट और इलेक्ट्रानिक, दोनों मीडिया में काम करने का अनुभव है. इन दिनों यायावरी कर रहे हैं.

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0 Comments

  1. rakes sinha

    October 21, 2010 at 5:05 am

    झा जी नमस्ते….
    आपकी नजर में भले ही मीडिया चाटुकारिता पर उतर आई हो .लेकिन आप खुद मीडिया में रहे है. ya फिर है. तो आपको भी पता होगा .अगर सर्वे में जनता बोलेगी तो लोग उसे दिखायेंगे ही. अब आप किस भाव से इसे नितिशिकरण कि संज्ञा दे रहे है. ये आप खुद ही जानते होंगे . लेकिन बुद्धिजीविओ के इस ब्लॉग पर मैं मानता हूँ .शायद ही कोई आप कि इस राय से इत्तेफाक रख पायेगा. वैसे बिहार में जुमला है कि दस में से नौ लोग अगर झूठ को सच बोल रहे हों तो वो अंततः सच बन जाता है.एक आदमी सच भी बोले तो वो झूठ साबित होता है. नितीश सत्ता में आये या नहीं. ये मीडिया कि जिम्मेवारी नहीं है. लेकिन जनता बोलती है. जनता विचारती है. तो उसे दिखाना मीडिया का दायित्व है. अनुमान है आप बिहार से ही है. तो आपको बिहार कि असलियत पता ही होगा . झा जी बिहार सच मूच बदला है. और वो लोगो के साथ साथ मीडिया को भी नजर आ रही है. सो जनता कि आवाज को जनता तक पहुँचने दीजिये. शायद बिहार कि भलाई इसी में है. वैसे मै बता दू मैं कोई पत्रकार नहीं हु. ब्लॉग का पता मिला आपको पढ़ा .तो रहा नहीं गया…और फिर आप खुद से सवाल कर लीजिये ना क्या जिन्दगी भर पूरी खालिस सच्ची पत्रकारिता ही आपने कि है.
    धन्यवाद
    नमस्कार
    राकेश सिंहा
    मुंगेर [b][/b][b][/b]

  2. मि‍थि‍लेश

    October 21, 2010 at 5:46 am

    झा जी,
    आप भी बरे नमकहराम नि‍कले, पासवान जी आपको इतना पैसा दि‍ए, ि‍फर भी आप नीतीश को ठीक से गाली नहि‍ दे सके, आप लोगों में यही दि‍क्‍कत है पैसा भी ले लेते हैं और काम भी ठीक से नहि‍ करते हैं, वैसे आपने अपने जात के अनुसार अच्‍छा काम कि‍या है
    , क्‍योकि‍ बि‍हार झारखंड में अगर आप दस साल से नेताओं से पैसा लेकर लेखन कर रहे है तो आपको नौकरी भी मि‍लती रहेगी, वैसे आपका नाम पहली बार सुना है
    मि‍थि‍लेश

  3. Sanjeet Mandal

    October 21, 2010 at 6:02 am

    Anant ji Aap bahut Had tak Thik kah rahe hain. Lekin Kya aap nahi jante BJP Or Congress ne kya-kya nahi kiya tha. Media ki baat jahan tak hai to power-power ki baat hai. Jab laloo ji sashan me the to wo media ka use karte the. Ab nitish kumar kar rahe hain. Akhir chhannel or newspaper ko survive bhi to karna hai.

  4. Vikash Agnimitra.

    October 21, 2010 at 9:13 pm

    Bura jo dekhan mai chala bura na miliyo koi , jo dil aapan dhund liya, mujhsa bura na koi. Anant jee is shlok ko charitarth kyon kar rahe hai. Aap Muh kholiye to sahi aapke bhi muh se beimani ki boo ayegi, kyoki Hamam mein sub nange hain.

  5. naveen kumar

    October 22, 2010 at 12:17 am

    hi, this is Naveen Kumar from Chapra, Bihar. According to me I do not know what is going to be in bihar and nobody also knows this….. I am not JDU, BJP, LJP, RJD or Congress or any other political party’s Suporter but i would like to say one more thing to media organizations that please do not misguied the people of bihar with ur false servey….. thanks

  6. कुमार गौरव

    October 22, 2010 at 1:04 am

    झा जी, आपने अपने दस साल के अनुभव का ज़िक्र किया है , मैं कहता हूँ अगर यही अनुभव आपने पाया है तो भांड में गया आपका अनुभव . आप पत्रकारिता छोड़ कर दाल -चावल का दुकान कर लीजिये .
    अगर सर्वेक्षण में नितीश को बहुमत से जीतता पाया गया है , तो क्या टीवी चेनल वाले लालू की सरकार बनता दिखा देंगे . वैसे आप जैसे टूटपूंजे पत्रकार से बात करना ही बेकार है , इसलिए गरिया नहीं रहा हूँ .
    सरकार बन जाने दीजिये फिर लिखिएगा … तब तक चावल दाल बेचिए

  7. anurag sharma

    October 23, 2010 at 11:29 pm

    nitish ke baare me dikhai gayi khabar me galat kya hai. aaj bihar ke paas nitish se behtar koi leader nahi hai. nitish is the real hero of bihar. media wahi dikhati hai jo janta mahsoos karti hai. janta yahi mahsoos kar rahi hai ki nitish se behtar koi nahi, kuchh nahi.

  8. pankaj choudhary

    November 22, 2010 at 2:10 pm

    anant babu aap jha hai to jaroor maithil brahmin honge, me bhi ek mathil brahiman hoo, ye bat batana bahut jaroori hai kyoki bihar me jat pat k bat kiye bina rajniti nahi ki ja sakti hai aur na rajniti par bahsh ki ja sakti hai, hame ye nahi samjh me aaya kab se bihar me ek brahiman lalu ko support karne laga?
    aap lalu aur nitish ji me kaishe tulna ki ja sakti hai kyoki jokar aur engineer me koi tulna hi nahi hai.
    kya apko 5 saal me koi badlaw najar nahi ayaa? kya aapko bihar k har gali me rod najar nahi aaya? kya aapko bihar me apharn udog band hua najar nahi aaya?
    kya aapko bijli pahle se jyada aata hua najar nahi aaya?
    agar aapko najar nahi aaya to aankh cheak karwao

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