जी न्यूज के सीईओ पुनीत गोयनका ने ‘कंपेन इंडिया’ मैग्जीन के एक जुलाई वाले अंक के लिए एक इंटरव्यू दिया है. इसमें उन्होंने दावा किया है कि… ”वे देश में एकमात्र न्यूज प्रतिष्ठान हैं जो धन पैदा कर पा रहे हैं. अन्य सभी न्यूज प्रतिष्ठान आजकल घाटे में जा रहे हैं. जी के लिए खबरों का धंधा (न्यूज बिजनेस) बढ़िया है.” उन्होंने इंटरव्यू अंग्रेजी में दिया है, इसलिए पढ़ लीजिए कि उन्होंने अंग्रेजी में क्या कहा-
“The news business is doing phenomenally well for Zee. We are the only news entity in the country that makes money. All other news entitites in this country are losing money as of today. From that perspective, that’s working well.” पुनीत गोयनका का यह खुलासा काफी मायने रखता है. जी न्यूज देश के सबसे पुराने चैनलों में से एक हैं. इस फील्ड में एनडीटीवी से लेकर आजतक, टाइम्स नाउ, हेडलाइंस टुडे, स्टार न्यूज, सीएनएनआईबीएन, आईबीएन7, आवाज आदि चैनल हैं पर जी न्यूज का ही सिर्फ लाभ में होना बताता है कि देर सबेर ढेर सारे चैनल बंद हो जाएंगे.
यहां उन चैनलों के नाम नहीं गिनाए गए हैं जो नए खुले हैं या फिर खुलने की प्रक्रिया में हैं. जब बड़े न्यूज चैनलों का यह हाल है तो छोटे चैनलों का क्या होगा, इसका अंदाजा आप लगा सकते हैं. छोटे में वही न्यूज चैनल चल पाएंगे जिनका मूल धंधा कुछ और है, जैसे बिल्डरों का चैनल तब तक चलेगा जब तक बिल्डर का बिल्डर वाला धंधा ठीकठाक चलता रहेगा. इसी तरह चिटफंडियों का चैनल भी तभी तक सही सलामत है जब तक उनका चिटफंड का धंधा पैसा उगाह रहा है.
कहा यह भी जाता है कि ज्यादातर न्यूज चैनल अपने मालिकों के ब्लैकमनी को ह्वाइट में तब्दील करने के लिए खोले गए हैं इसलिए न्यूज चैनलों को आमतौर पर घाटे में दिखाया जाता है. सालाना जो आय व्यय की रिपोर्ट तैयार की जाती है उसमें व्यय भारी भरकम दिखाया जाता है जो सच्चाई से परे होता है. उस बहाने काफी पैसा मीडिया मालिक बचा लेता है. आपका क्या खयाल है?












raj kumar
July 6, 2011 at 3:45 pm
great….hum b zee news me he….
चंदन सिंह
July 6, 2011 at 4:21 pm
जी न्यूज एकमात्र ऐसा चैनल है जो सिर्फ खबरें दिखाता है…वो कभी भी टीआरपी की चूहादौड़ में नहीं दौड़ता…इस चैनल में आज भी खबर जिंदा है और इसीलिए ज़ी न्यूज़ फायदे में है…जबकि दूसरे चैनल एक दूसरे की होड़ में काम करते हैं और टीआरपी के ऊपर नीचे होते ही उनके मालिकों और रहनुमाओं की सांसें थमने लगती हैं…
ek patrkar
July 7, 2011 at 3:57 am
etv bhi margdarshi chit fund company ke kala dhan ko bachane ke liye hi khola hai.
jasvinder singh sabharwal
July 7, 2011 at 3:58 pm
very good sir. .only one channel in india. .zee group. .zee group
ramhit nandan
July 17, 2011 at 7:04 am
its a good news. may god bless zee news and all its employees.
naveen rana noida
September 1, 2011 at 6:59 am
good job
yusuf
February 12, 2012 at 10:28 pm
lekin reporters aur anya logon ki pagar to badhao.