आजकल मीडिया जगत के कई अखबारों में न्यूनतम वेतनमान के नाम पर कई विभागों एवं कंपनियों के खिलाफ काफी कुछ लिखा जाता है. छापा जाता है कि मजदूरों का शोषण किया जा रहा है, और भी ना जाने क्या-क्या? पर क्या अखबारों में नौकरी करने वाले लोगों को न्यूनतम वेतनमान मिलता है? शायद ज्यादातर अखबारों में हालत कमोवेश एक जैसा ही है. सभी जगह जिला स्तरीय पत्रकारों और स्ट्रिंगरों को न्यूनतम वेतनमान तक नहीं दिया जाता है.
क्या शोषण के नाम पर लम्बा चौड़ा भाषण छापने वाले अखबार अपने कर्मचारियों का शोषण नहीं करते हैं? हिन्दुस्तान की ही बात करें तो उत्तराखण्ड के गढ़वाल के जिलों में जो संवाददाता कार्यरत हैं, उन्हें अभी भी 1500 से 2500 रुपये में कार्य करना पड़ रहा है. हिन्दुस्तान ही नहीं दैनिक जागरण सहित तमाम अखबारों में कार्यरत रिपोर्टरों को इसी के आसपास मानदेय दिया जाता है. कहीं कहीं तो इससे भी कम.
जागरण में कार्यरत कई ऐसे रिपोर्टर हैं, जिन पर त्यौहारों पर भी विज्ञापन लाने के लिए दबाव डाला जाता है, लेकिन उनके वेतन के बारे में कभी नहीं सोचा जाता है. उन्हें न्यूनतम वेतन तक उपलब्ध नहीं कराया जाता है. जागरण के लिए काम करने वालों को तो कहीं कहीं पांच सौ रुपये ही मिलते हैं. आखिर कब तक अखबार और बड़े मीडिया हाउस अपने संवाददाताओं का शोषण करते रहेंगे?
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.












manmohan
March 18, 2011 at 10:45 am
भड़ास4मीडिया
इस सवाल पर जल्दी कुछ होना चाहिए……
सौरभ भरद्वाज
March 17, 2011 at 6:59 pm
बात तो बिलकुल सही है कितनो ने तो पत्रकारिता लाइन से सिर्फ इसी कारन से तौबा कर ली.
जिनके ऊपर पत्रकारिता का भूत अभी भी सवार है उनकी हालत अन्दर से कितनी दीन-हीन है यह या तो वे खुद जानते हैं या उनकी कंपनी.
औरों की क्या कहू मै खुद 3 साल से पत्रकारिता लाइन में धक्के खा रहा हूँ पढाई खत्म होने के बाद भी माँ-बाप से पैसे मांग रहा हूँ पर दुनिया के सामने बड़ा पत्रकार कहला रहा हूँ.
amit kumar
March 17, 2011 at 4:40 pm
ye baat thik hai. mera manan hai ki aaj kal shab se jada sohosdd news pepar me he ho raha hai. jaadatar news pepar 5000 se 6000 rupe per manth per kam kara rahe hai jen me sub-editor tak shamil hai.
Anirudh Mahato
March 17, 2011 at 4:44 pm
likhe gaye baten bilkul sahi hai. ishliye patrakar raste se bhatak jaten hai. managment ko sochna chahiye
uttam malviyta
March 17, 2011 at 3:41 pm
To phir is mamle me naiduna/navdunia akhbar nishchit tour par in akhbaro se behtar hai. yah sansthan na keval jarurat ke mutabik sammanjanak vetan deta hai balki anya suvidhaye bhi badi udarta ke sath apne karmchariyo ko uplabdh karai jati hai. muze apne sansthan par garva hai.
pappu pandit
March 18, 2011 at 2:32 pm
आज की पत्रकारिता से जुड़े सच्चे पत्रकारों की बेबसी देख कबीर दास की पंक्ति इस प्रकार याद आ जाती है कि “कबीरा खड़ा बाजार में लिए कलम – कैमरा हाँथ , जो घर फूंके आपना चले हमारे साथ………..| पप्पू पंडित
manish kumar mishra
March 24, 2011 at 6:27 am
SER,
MERE SATH BHI AAISA HI HUA HAI,AARYAN CHANAL PATNA
NEE 31/10/10 KO SANJAY MISHRA,HIRA LAL, MANOJ KUMAR
SINGH,SARVEES KUMAR NEE MERI PATNI SUDHA RANI KO
BANDHAK BANAKAR MUJHEE BLACKMEL KIYA,EK MUJAFAR-
PUR KI MAHILA KEE SATH MILKAR YOUN SOSAN KA NEWS
CHALAYA,LIVE MEE.JAB US AAURAT SEE POLIC NEE PUCHA
TO RITA DEVI NEE KAHA AARYAN CHANAL NEE AAISA
KAHNEE KO KAHA, MAINEE KAH DIYA.RITA DEVI KA 164,
AUR FIR MEE BHI YAHI BAYAN HAI.JAB MAINEE INSAF KEE
LIYEE PM,RASTRPATI, CM(BIHAR )MAHILA AAYOG ,
MANWADHIKAR AAYOG, KO LIKHA TO 1 MAH PAHLE HI
KOTWALI MEE FIR NO-64/11 LIKH LIYA PAR KOI KARWAHI NAHI
HUI,YOUN SOSAN KA LIVE CHALNEE KEE BAD MERE SARE
RISTEEDAR AUR PESEENTS NEE NATA TOR LIYA,GHAR SEE
NIKALNE MEE SARM AATI HAI,EK AATANKWADI YA NAKSALI KISI
KO EK BAR MARTEE HAI PAR AARYAN CHENAL WALO NEE TO
JIVAN BHAR MARNEE KEE LIYEE CHOR DIYA,TAKI KOI YA TO
NAKSALI BAN JAY YA AATM HATTYA KAR LEE TAKI FIR EK NEWS
CHALA SAKEE.IN PAR KARWAI HONA CHAIYEE.TAKI NAKEEL KASA
RAHE.AARYAN CHANAL KA.
DR. MANISH KUMAR MISHRA
C/O-DINESH PRASAD MANDAL,
SAHABAD(MUSAHRI )
POST-GANGAPUR
PS-SULTANGANG,
DIST-BHAGALPUR( BIHAR)
PIN-813213
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