: आईआरडीएस की सचिव डा. नूतन ठाकुर ने दायर किया : पत्रिका में छपे एक लेख से चरित्र हनन का आरोप : आनंद कुमार, संस्थापक, सुपर 30, पटना के विरुद्ध नयी दिल्ली से प्रकाशित बिजिनेस वर्ल्ड नामक पत्रिका के अक्टूबर प्रथम अंक में, जो 11 अक्टूबर 2010 को प्रकाशित हुआ था “Super 30: True Or False? The success story that got Anand Kumar much fame now has many holes” अर्थात “सुपर 30: सत्य या असत्य? आनंद कुमार को असीम लोकप्रियता दिलाने वाली सफलता की कहानी में कई सारे छेद हैं” नामक एक लेख प्रकाशित हुआ. उक्त लेख की लेखिका शालिनी एस शर्मा हैं.
इस लेख में यह कहा गया था कि यदि सतह को तनिक भी खुरचा जाए तो आनंद कुमार की कहानी में कई सारे छेद नज़र आयेंगे, और कई सारे आधे-अधूरे सच भी. सुपर 30 वह नहीं है जो वह दिखता है. यह भी आरोप लगाया गया था कि आनंद कुमार द्वारा तीस में से तीस गरीब बच्चों को आईआईटी भेजने का उनका दावा गलत है. उस लेख में यह भी कहा गया है कि कुमार उन 30 लड़कों का नाम उजागर नहीं करते.
लेख में यह आरोप लगाया गया है कि चूंकि उनके द्वारा सुपर 30 के अलावा रामानुजम स्कूल ऑफ मैथेमेटिक्स में भी हज़ारों ऐसे बच्चे पढ़ रहे हैं, जो पैसे दे कर अध्ययन कर रहे हैं. अतः आईआईटी में स्थान पा लेने वाले वे तथाकथित सुपर 30 वास्तव में ऐसे बच्चे हो सकते हैं, जिन्हें कुमार रामानुजम स्कूल ऑफ मैथेमेटिक्स में पढ़ाया हो. लेखिका का आरोप है कि इस प्रकार कुमार सुपर 30 और रामानुजम स्कूल ऑफ मैथेमेटिक्स को चतुराई से मिला देते हों.
इसके लिए लेखिका ने कंकड़बाग कॉलोनी, पटना के संजीव कुमार, जिन्होंने आईआईटी में 1725 वां स्थान पाया और कोमल अग्रवाल, पटना नामक दो लड़कों के नाम भी गिनाए हैं, किन्तु सुपर 30 से जुड़े लोगों से हुयी डा. नूतन ठाकुर की वार्ता के अनुसार तथ्यों को गलत ढंग से प्रस्तुत किया गया है. इस लेख के अनुसार वर्ष 2000 में अभयानंद नामक एक 1977 बैच के आईपीएस अधिकारी के साथ मिल कर आनंद कुमार ने सुपर 30 का आइडिया शुरू किया था. लेकिन 2007 में अभयानंद आनंद कुमार से अलग हो गए क्योंकि तब तक स्थिति काफी बिगड चुकी थी.
लेख के अनुसार अभयानंद के जाने के बाद आज सुपर 30 केवल नाम के लिए बचा है, जिसका उपयोग रामानुजम स्कूल ऑफ मैथेमेटिक्स के लिए बच्चे बढ़ाने के मुखौटे के रूप में किया जाता है. लेखिका के अनुसार- “ऐसा लगता है कि स्वयं कुमार भी यह बात जान चुके हैं कि उनका यह बुलबुला बहुत जल्द ही फूटने वाला है और वे सुपर 30 को समेट कर किसी सुरक्षित रास्ते को तलाशने में लग गए हैं.”
संस्था इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड डोक्यूमेंटेशन इन सोशल साइंसेस (आईआरडीएस) द्वारा आईआरडीएस पुरस्कार 2010 के नाम से शिक्षा कार्यों हेतु एस रामानुजम पुरस्कार आनंद कुमार को 24 जुलाई 2010 को प्रदान किया गया था. आईआरडीएस संस्था की सचिव की हैसियत से और व्यक्तिगत रूप से प्रभावित होने के आधार पर डा. नूतन ठाकुर ने प्रथमदृष्टया इन तमाम असत्य, भ्रामक तथा हानिपरक बातों को बिना किसी भी आधार के लिखे जाने के आधार पर शालिनी एस शर्मा द्वारा आनंद कुमार को जान-बूझ कर नुकसान पहुचाने के उद्देश्य से उनका चरित्र हनन के आरोप में धारा 500, भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, लखनऊ के कोर्ट में धारा 200, दंड प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अनुसार परिवाद दायर किया है. परिवाद उनके अधिवक्ता अभय कुमार सिंह द्वारा दायर किया गया है.
साथ ही डा. नूतन ठाकुर ने आनंद कुमार को पत्र लिख कर इस सम्बन्ध में सबों के सामने स्थिति स्पष्ट करने और अपने विरुद्ध इस लेख में लगाए गए आरोपों का समुचित जवाब देने का भी निवेदन किया है. उन्होंने कहा है कि आनंद कुमार ने अपने कार्यों से जनता में बहुत अधित आशाएं जाग्रत की हैं और ऐसे में उनसे यह अपेक्षित है कि उन पर लगे आरोपों को वे अपनी ओर साफ़ करें.











