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कानाफूसी

बुरे फंसे इनकी नौकरी करके

: सैकड़ों पत्रकार हुए बेरोजगार : कुछ दिन तक ग्वालियर के अखबारी जगत में सब कुछ ठीक-ठाक था। कलम के कारीगरों की पौं-बारह थी। दनादन ग्वालियर में मीडिया जगत में धनकुबेर पांव पसार रहे थे और कलम के हर छोटे-बड़े कारीगर को उसकी क्षमता के मुताबिक काम करने का मौका मिल रहा था। या यूं कहें सभी का सिर कड़ाही में था। लेकिन पलक झपकते ही सब कुछ ध्वस्त हो गया। धन कुबेरों का मीडिया में कूदना और पत्रकारों का धन कुबेरों से धन उलीचना।

: सैकड़ों पत्रकार हुए बेरोजगार : कुछ दिन तक ग्वालियर के अखबारी जगत में सब कुछ ठीक-ठाक था। कलम के कारीगरों की पौं-बारह थी। दनादन ग्वालियर में मीडिया जगत में धनकुबेर पांव पसार रहे थे और कलम के हर छोटे-बड़े कारीगर को उसकी क्षमता के मुताबिक काम करने का मौका मिल रहा था। या यूं कहें सभी का सिर कड़ाही में था। लेकिन पलक झपकते ही सब कुछ ध्वस्त हो गया। धन कुबेरों का मीडिया में कूदना और पत्रकारों का धन कुबेरों से धन उलीचना।

अब यही पत्रकार हर पल यही सोच-सोचकर परेशान हो रहे हैं कि वे कल क्या करेंगे। क्योंकि अब उनकी नौकरी जा चुकी है। हम बात कर रहे हैं ग्वालियर के प्रकाशित होने वाले परिवार टुडे अखबार और भोपाल से मीडिया में कूदने के बाद ग्वालियर से एडीशन शुरू करने वाले राज एक्सप्रेस की। परिवार टुडे अखबार के हर दफ्तर पर जिला प्रशासन ताला जड़ चुका है। इस अखबार का मालिक चिटफंडिया है और चिटफंड से माल जुटाने के बाद माल बचाने के लिए मीडिया में जंप मारी थी। पर जंप बेकार गई। इसके सभी संस्थान सील हैं।

प्रशासन ने कहा है कि पहले लोगों की एक-एक पाई का हिसाब-किताब करो फिर अपने संस्थानों के ताले खुलवाने की बात करो। आलम यह है कि परिवार टुडे का ग्वालियर से प्रकाशन बंद है। सात रोज से इस दफ्तर में ताले लटके हुए। अखबार से जुड़े एक सैकड़ा से अधिक लोग घर पर बैठे हैं। इन्हें मालिक ने मई माह की सैलरी का लिफाफा पकड़ा दिया है और कहा है कि शेष राशि जल्द ही दे देंगे। परिवार टुडे से जुड़े और एक ही रात में बेरोजगार हुए पत्रकारों की संख्या 34 है।

दूसरे अखबार के मारे हुए वे पत्रकार हैं जो मालिक के गुस्से का शिकार हुए हैं। इनके मालिक का गुस्सा सातवें आसमान पर इसलिए है क्योंकि उनकी इंच-इंच जमीन पर सरकार फीता डाले बैठी है। राज एक्सप्रेस के भोपाल स्थित जमीन-जायजाद के कारोबार का जब से प्रशासन ने हिसाब लेना शुरू किया है, गाज पत्रकारों पर गिर रही है। रविंद्र जैन के समूह से बाहर होने की खबर तो मय फोटो के राज एक्सप्रेस में ही साया हुई थी। अब मालिक के गुस्से की गाज बारिश के इस मौसम में गिर रही है उन लोगों पर जो रविंद्र जैन के हर निर्देश का पालन करते थे।

ग्वालियर में रविंद्र जैन की नाक का बाल कहे जाने वाले समाचार संपादक कौशल मुदगल उस लिस्ट में शामिल हैं, जिन्हें संस्थान की सीढि़य़ां चढऩे से मना कर दिया गया। सिटी चीफ अरविंद श्रीवास्तव भी घर बैठा दिए गए हैं। सत्यवीरसिंह कुशवाह से भी घर बैठने को कह दिया गया है। अरविंद श्रीवास्तव ने अपने एक कथित साले को भी पत्रकार बनाकर राज एक्सप्रेस में एंट्री दिलवा दी थी। इसे भी मना कर दिया गया है। एक ही झटके में राज एक्सप्रेस ग्वालियर से जुड़े चार पत्रकार घर बैठा दिए गए हैं।

कहा जा रहा है कि यह लोग मालिक से ज्यादा रविंद्र जैन का आदेश आज भी मान रहे थे। इसमें सच्चाई कितनी और मिलावट कितनी है यह तो पता नहीं पर मालिक ने इस बात को सच माना है। परिवार और राज एक्सप्रेस से अचानक घर बैठाए गए इन पत्रकारों को समझ में नहीं आ रहा है कि अब वे क्या करें क्योंकि चिटफंडिए अब ग्वालियर में अखबार में घुसने से कतरा रहे हैं और जो बाकी अखबार हैं, उसमें ऐसे हालात नहीं हैं कि इन सभी को एडजस्ट किया जा सके।

जिस तेजी से ग्वालियर में पत्रकारों के लिए रोजगार के अवसर छप्पर फाड़कर निकले थे ठीक उसी गति से उन पर संकट की सुनामी आ गयी है। बीते एक माह में सौ से ज्यादा पत्रकार या तो अपनी नौकरी गँवा चुके हैं या इसके मुहाने पर बैठे हैं। बीते दो साल पहले ग्वालियर में पत्रकारिता की नौकरी में एकदम जबरदस्त बूम आया था, जब इस इलाके में कुकुरमुत्तों की तरह फैलीं चिट फंड कम्पनियों को अपना मीडिया हाउस खड़ा करने का चस्का लगा।

इसके चलते पहले बीपीएन टाइम्स नामक दैनिक अखबार शुरू हुआ। इसके बाद परिवार टुडे नामक दैनिक फिर केएमजे नामक एक लोकल न्यूज़ चैनल। इसके बाद कई चिटफंडिये इधर-उधर से फ्रेंचाइजी ले आये। एक भोपाल से वन समुदाय लाकर निकालने लगा तो एक राष्‍ट्रीय हिंदी मेल नाम का अखबार निकालने लगा। कुछ के होर्डिंग लगे हैं और उनकी फाइल कॉपी छप रही है, लेकिन ग्वालियर के कलेक्टर आकाश त्रिपाठी द्वारा जैसे ही चिटफंड कम्पनी की और राज्य सरकार द्वारा बिल्डर्स की मुश्‍की कसीं गईं, वैसे ही इनसे जुड़े मालिकों का मीडिया बुखार तेजी से धड़ाम होकर गिरने लगा।

ग्वालियर में प्रशासन ने पहला शिकार बनाया परिवार चिट फंड कम्पनी को। इसके खाते और संपत्ति सीज की गयी और इसकी चपेट में इसके अखबार परिवार टुडे की मशीन यूनिट भी आ गयी। एक-दो दिन मालिकों ने इधर-उधर से अखबार भी निकला लेकिन गुरुवार को अन्तत:  पूरे स्टाफ को वेतन देकर प्रबंधन ने पूरे स्टाफ से हाथ जोड़ लिए। अखबार बंद कर दिया। बाकी बचे अखबार भी कभी भी बंद हो सकते हैं।

पूरे प्रदेश में अपनी नकारात्मक पत्रकारिता के लिए जाना जाने वाला अखबार राज एक्‍सप्रेस एवं इसके मालिक अरुण सहलोत को प्रशासन ने अपने शिकंजे में क्या कसा वे बिल्ली हो गए। खुद की बदतमीजियों और ब्लैकमेलिंग की प्रवृत्ति से हुई दुर्गति का ठीकरा एक संपादक के सर फोड़कर सरकार के सामने सरेंडर होने का नाटक भी काम नहीं आया तो उनका भी मीडिया किंग बनने का भूत उतरने लगा। इसके चलते ग्वालियर एडिशन से भी आधा दर्जन लोग तो बाहर का रास्ता देख बैठे,  वहीं एक दर्जन से ज्यादा की छुट्टी पक्की है। लोग मान रहे हैं कि देर-सबेर सही इसको बंद होना है।

एक अनुमान के मुताबिक आगमी कुछ दिनों में एक सैकड़ा से ज्याद पत्रकार बेरोजगार हो जायेंगे। इनमें से ज्यादातर सामाजिक स्तर पर भी संकट में हैं। इनमें से ज्यादातर लोग पहले अल्प वेतनभोगी और छोटे ओहदेदार थे,  लेकिन चिट फंड वालों की इस क्षेत्र में अज्ञानता का फायदा उठाकर ऊंचे पदों और ऊंची तनख्वाह पर नौकरी पा गए। इसके चलते वे अपनी बिरादरी से भी कट गए थे, लेकिन अब अचानक इनका सेंसेक्स औंधे मुंह गिर पड़ा और ये बेरोजगारी  के मुहाने पर आ खड़े हुए तो दुतरफा परेशानी है। लेकिन असली समस्या तो रोजगार की है। अब इतने वेतन पर तो दूर नाम के लिये भी नौकरी मिलना भी दूभर हो गया है। इनमें से कई तो स्थापित अखबारों में अपनी जमी-जमाई नौकरी छोड़कर गए थे। आने वाले दिन ग्वालियर के पत्रकारों के लिए बहुत चिंता भरे हैं।

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0 Comments

  1. abhishek

    June 10, 2011 at 2:13 pm

    sir jee bilkul sahi kaha aapney jis tarah sey bpn ney paanv pasarey hain kaval 3 saal mein 5 rajya 9 edition lagta hain logo ka karoro rupyaa maar liya aur lala ne vo paissa bpn news network mein laga diya halat yeh kar diye ki 3 saal mein 9 edition nikal diye yeh to bhaskar kaa bhi baap ho gaya aur aap ko andhar ki ek khabar bataoon iskey yotiraditya sindhiya se sambhandh hain isliye bacha huaa hain lekin jyotiraaditya bhi kuch nahi kar payengey kunki vo parivaar today ki mairaathan mein bhagey they to lala vakeel singh baghel 5 class paass savdhaan ho jao

  2. प्रेम

    June 10, 2011 at 2:51 pm

    मैंने यहां नौकरी से अलग हुए पत्रकारों व पत्र संपादन से सम्बंधित अन्य कार्यकर्ताओं के बारे में पढ़ा और इन्हीं पन्नों पर पढ़े सुब्रत रॉय द्वारा पत्रकारिता पर नियंत्रण के सुझाव देख मैं सोचता हूं कि क्यों न ये बेरोजगार हुए लोग आपस में मिल एक नया समाचार पत्र स्थापित करें जो सच्चाई और राष्ट्रधर्म पर आधारित हो| ऐसा प्रयास धन कुबेरों से दूर एक सामाजिक उधमिता का प्रतीक होगा|

  3. rohit

    June 10, 2011 at 3:31 pm

    yashwant ji jisne bhi likha hai sahi likha hai kyoki inme se kuch logo ne gwalior me blekmailing suru kar di thi or wo bhi ravindra jain ke naam par kyo ki ravindra bhi prash ka bada blackmailr hai or jahir si baat hai baap balckmailar hoto to beta to usse das kadam aage hi hoga na. baise bhi kosal mudgal ne to ravindra ke bahi bupendra jain ne milkar kai vyapariyo se bauli ki hai. halaki ye sikayat akhbaar ke malik tak bhi pahuchi lekin ravindra ki bajah se sare mamle daba diye gaye. kala dhan bhi sabhi ne mil bant kar khaya hai isi ka nateeza sabhi ko bhugatna pad raha hai.

  4. kaushal mudgal

    June 12, 2011 at 3:37 am

    jisne be rhoit k naam se comment dala hai wo muje bataye….

    mene teri maa ki boli lagai thi ya teri sister ki…himmat hai tou saamne aakar baat kar….or rahi baat naukri ki tou mai 20 june tak ki vidivat chutti par hu–jaa kar office me leave form dhek le…

    —-KAUSHAL MUDGAL—-

  5. ajay gode

    June 13, 2011 at 10:36 am

    bure ka natija bura hi hota he sheopur me bhi pariwar today ke patrkaro dwara blekmeling ka vyapar badi jor se chalu tha jo news papar band hone ke sath hi band ho paya he

  6. ajay

    June 13, 2011 at 4:23 pm

    koshal tum yadi saccha ho to phir raj ma deepak shivhra sa likhit ma mafi kyon mangi manajmant ka aaga kyon girgira raha ho* itna hi jagruk patrkar ho to nokri ka liya r jain sa phon kyon lagva raha ho *manajmant ko delhi ka nam par chutti lakar deendayal mol ma kiska sath miting kar raha tha * rairu factori sa 2lakh kisna khaya phir tumhara hatta hi s jain na khabar kasa laga dee ha in savalo ka jabav ya phir aab tumha annu nokri dilayaga ya phir cha cha jonral stor par nokri ka irada ha ya phir r jain sa kahakar yah comant bhi rukvaoga ………@

  7. KAUSHAL MUDGAL

    June 15, 2011 at 3:44 pm

    Dear—- JISNE BE AJAY K NAAM SE COMMENT DALA HAI WO PAD LE…………….
    Lagta hai ki tum 5vi pass ho…kyu ki 1 tou tum english thik nahi likh paa rahe…aur rahi baat rairu distlaries ki tou Aug 2010 ki RAJ EXPRESS ki file utha kar pad lo ki Kaushal ne waha ki kitni news lagayi aur haal he mai mauro ki maut k baad sabse jayada news kis paper ne lagayi….iske baad be yadi tume khujli ho tou rairu distlaries ki koi be news with proof do..mai apne naam se lagata hu…kyu ki mai tumahari tharah kisi k PAIR chukar nahi balki Apni mhenat ki dum par naukri karta hu….
    ok—-dear…kabi baito saamne tou tumhari aur be hasrte puri aur galatfahemi dur kar du…warna tum ese he rah jayoge—iske alaawa apne godfather k jaane k gum mai kisi DAABE par DAARU PIO….
    ———KAUSHAL MUDGAL—-

  8. amar

    June 16, 2011 at 7:14 am

    mr. ajay dusro par ungli uthane se pahle apne gireba me jhankkar deko tum to apno ke hi sage nahi ho, tumne to apne hi sathi patrkaro ke vetan me katoti ka idia malik ko diya he jis se tumhare number malik ki najro me bad jaye, sale biradri ke gaddar, sahi kaha he kisi ne kutte ki puch ko 12 mahine bhongli me rakho rahegi tedi ki tedi, yad rakhna yaha se nikale gaye to ab sandhya samachar me bhi nokri nahi milegi, is baar to caca bhi hathli nahi laga sakenge

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