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भारतीय न्यूज चैनलों को आईसीसी ने दिखा दी औकात

: मस्त है पवार साहब…हम भले हो पस्त : पवार साहब की मुस्कुराहट थमे नहीं थम नहीं। शेट्टी साहब पवार साहब की खुशी में और भी खुश हो गए हैं। क्यों ना हो ऐसा। खबरें जो लगातार अच्छी  है। स्टेडियम हाउस फुल  है। कंपनियां कॉरपोरेट बॉक्स की मुंहमांगी कीमत देने को तैयार हैं। टेलिविजन रेटिग प्वाइंट यानी टीआऱपी उफान पर है। खिताबी मुकाबले के लिए राइट होल्डर ब्रॉडकास्टर अंतिम समय में बुक होने वाले 10 सेकेंड विज्ञापन के लिए 24 लाख रुपये तक वसूल रही है। अब तो इंटरनेशनल क्रिकेड काउंसिल को भारत में किए आयोजन से कमाई पर आयकर में छूट दी गयी।

: मस्त है पवार साहब…हम भले हो पस्त : पवार साहब की मुस्कुराहट थमे नहीं थम नहीं। शेट्टी साहब पवार साहब की खुशी में और भी खुश हो गए हैं। क्यों ना हो ऐसा। खबरें जो लगातार अच्छी  है। स्टेडियम हाउस फुल  है। कंपनियां कॉरपोरेट बॉक्स की मुंहमांगी कीमत देने को तैयार हैं। टेलिविजन रेटिग प्वाइंट यानी टीआऱपी उफान पर है। खिताबी मुकाबले के लिए राइट होल्डर ब्रॉडकास्टर अंतिम समय में बुक होने वाले 10 सेकेंड विज्ञापन के लिए 24 लाख रुपये तक वसूल रही है। अब तो इंटरनेशनल क्रिकेड काउंसिल को भारत में किए आयोजन से कमाई पर आयकर में छूट दी गयी।

यानी सब कुछ उम्मीदों से काफी बेहतर। ये है तस्वीर का एक पहलू। अब देखिए दूसरा  पहलू। आईसीसी की भारतीय महिला अधिकारी भारतीय तिरंगे को अपने पांव के नीचे रखने में परहेज नहीं कर रही है। क्यों तिरंगे के साथ प्लास्टिक के डंडे पर आईसीसी का लोगों बना हुआ है। इससे आईसीसी के व्यावसायिक नुकसान होने का खतरा बन गया। दूसरी ओर टिकट खरीदने के लिए लोग गए, लेकिन लाठी खाकर लौटे। वजह स्टेडियम की कुल क्षमता के 30-40 फीसदी के लिए ही टिकट बिके। वैसे काला बाजार में टिकट उपलब्ध है। 2500 रुपये का टिकट डेढ़ लाख रुपये तक में। औकात है तो खरीद लीजिए।

वैसे औकात तो भारतीय न्यूज चैनलों को भी आईसीसी ने दिखा दी। पहले मोहाली से बाहर किया। किसी तरह बात बनी। लेकिन अब खिताबी मुकाबले के 24 घंटे पहले धकिया के निकाल दिया।  कहा पहले हमारी शर्तों मानों, फिर आओ प्रैक्टिस  सेशन के साथ मैच के पहले और बाद का प्रेस कॉन्फ्रेंस करने।  आइए जाने खास  शर्तें क्या है। पहला तो ये कि हर घंटे मैच के कुछ सैकेंड के ही फुटेज दिखा सकते हैं। वहीं दूसरी ओर लगातार जो स्कोर  बोर्ड चलता है विज्ञापनों के साथ, वो बंद करो। दूसरी  शर्त तो को लेकर सूचना एवं  प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव, आईसीसी के अधिकारी, राइट होल्डर ब्रॉडकॉस्टर और न्यूज ब्रॉडकास्टिंग एसोसिएशन के अधिकारियों के बीच 4 घंटे के करीब की बैठक भी चली। कोई टस से मस नहीं हुआ। नतीजा शुक्रवार को न्यूज चैनलों के संवाददताओं और कैमरामैन के साथ पहले तो हुई बदसलूकी, फिर मान्यता ही रद्द कर दी गयी।

ये सब कुछ  वही आईसीसी कर रहा है जिसके  मुखिया है भारत के कृषि मंत्री शरद पवार। अब ऐसा तो है नहीं कि अधिकारी कोई कदम  उठाए और पवार साहब को पता  ही नहीं चले। लेकिन कोई  हल नहीं। पवार साहब तो बस मुस्कराए ही जा रहे। कोई उनसे पूछे कि क्या आस्ट्रेलिया या इंग्लैंड में उन्ही का आईसीसी इतनी सख्ती कर पाएगा। आईसीसी पहले तो हिम्मत ही नहीं कर पाएगी और हिम्मत करे तो वहां की सरकार ऐसा नहीं करने देगी।

अब पवार साहब का एक और खेल देखिए। आईसीसी को भारत में विश्व कप के आयोजन से हुई कमाई पर आयकर में छूट देने का प्रस्ताव कैबिनेट की बैठक में आया तो वो वहां मौजूद ही रहे। कायदा तो है कि अगर कहीं कोई हित का टकराव है तो है वहां से हट जाना चाहिए। लेकिन पवार साहब की मौजूदगी में चंद मंत्रियों की आपत्ति के बावजूद आयकर छूट का प्रस्ताव पारित हो गया। दलील है कि विश्व स्तर के आयोजनों की दावेदारी के समय आयकर में छूट का भरोसा देना होता है। इंटरनेशनल कमिटमेंट जरुरी है।

आयकर छूट की कुल रकम बनती है 45 करोड़ रुपये। यानी आयोजन के दौरान आईसीसी को हर रोज सरकार की ओर से औसतन 1 करोड़ रुपये की छूट। वहीं आम आदमी के हितों की दुहाई देने वाली यूपीए सरकार ने इस बजट में आम आयकर दाता को हर महीने केवल 171 रुपये की राहत दी वो भी तब जब महंगाई ने लोगों को जीना हराम कर रखा है।  वैसे कुछ  लोग कह रहे हैं कि देश  में क्रिकेट धर्म है और धार्मिक आयोजनों में  धक्का मुक्की, तकलीफें  और बिना हिसाब किताब के खर्च आम है। अब विश्व कप क्रिकेट में यही सब हो रहा है तो हैरानी नहीं होनी चाहिए। फिर भी ये हैरानी तो होनी ही चाहिए कि ये सबकुछ एक भारतीय की नजर तले हो रहा है, लेकिन वो तो बस नजर फेर बस मुस्करा रहा है।

लेखक शिशिर सिन्हा बहुमुखी प्रतिभा के धनी तेज-तर्रार पत्रकार हैं.

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0 Comments

  1. Shahnawaz Alam

    April 1, 2011 at 3:01 pm

    not good for country..

  2. Manoj Raj Singh

    April 1, 2011 at 4:05 pm

    जय हो हिंदुस्तान की और हिंदुस्तान के मंत्रियों की, पहले हमसे वोट लें और फिर हमीं को बाहर निकालें, आईसीसी ने जो भी किया वो पूरे भारतियों का अपमान है। एसा इसलिए भी क्योंकि सिर्फ भारतीय पत्रकारों को बाहर का रास्ता दिखाया गया जबकि बाहरी मीडिया को किसी भी प्रतिबंध का सामना नहीं करना पड़ा।

  3. rajesh sharma

    April 1, 2011 at 5:46 pm

  4. rajesh sharma

    April 1, 2011 at 5:47 pm

    आई सी सी को 45 करोड़ की आयकर में छूट, मीडिया का ढकोसला , क्युकी मीडिया को कवरेज की इजाजत नहीं /

    Aaj Tak’s Profile

    Aaj Tak
    केंद्रीय मंत्री मंडल ने आईसीसी को 45 करोड़ रुपये के आयकर छूट दिय जाने की स्‍वीकृति दी है. आईसीसी एक अमीर संस्‍था है ऐसे में उसे आयकर छूट क्‍यों दिया जा रहा है यह बहुत लोगों के समझ से पड़े है. क्‍या आईसीसी को आयकर में छूट दिया जाना चाहिए?
    ·

    Rajesh Sharma Media ko bhi income tax se releif milni chahiye hain naa ?
    8 hours ago · Like
    Between You and Suresh Kumar

    Suresh Kumar 01 April at 13:37 Report
    राजेश जी, मीडिया को छूट मिले न मिले लेकिन आईसीसी को छूट क्‍यों मिलनी चाहिए?

    Rajesh Sharma 01 April at 14:45
    आई सी सी को इनकम टैक्स में छूट बिलकुल नहीं मिलनी चाहिए पर मुझे ये बताइए पत्रकारों को मुफ्त रेल यात्रा क्यूँ मिलनी चाहिए /

    Rajesh Sharma 01 April at 14:53
    आई सी सी को इनकम टैक्स छूट इसलिए दी जा सकती हैं
    १. ये एक संस्था हैं
    २. ये खेल प्रसार से सम्बंधित हैं
    ३. इसमें किसी का व्यक्तिगत लाभांश नहीं हैं
    ४. आई सी सी द्वारा आयोजित क्रिकेट मैच से पर्यटन को बढ़ावा मिलता हैं
    ५. भारत में हुए मैच में जो टिकट बीके हैं उसका एक हिस्सा बी सी सी आई को भी मिलेगा

    Suresh Kumar 01 April at 15:23 Report
    आपकी बात एक पत्रकार बनाम एक संस्‍था की हो जाती है.

    आईसीसी कोई गरीब संस्‍था नहीं है. भारत में इस खेल को सिर्फ पैसे के लिए बढ़ावा दिया जा रहा है. और आईसीसी अगर बीसीसीआई को टिकट बिक्री में हिस्‍सा दे रही है तो कोई एहसान नहीं कर रही है. बीसीसीआई के कारण आईसीसी का खजाना भरता है.

    Rajesh Sharma 01 April at 15:52
    मेरा मानना ये हैं की सरकार के हर कदम पे सवाल खड़ा करना मीडिया का एकमात्र उद्देश्य नहीं होना चाहिए / सूचना के अधिकार के तहत आप सरकार से जवाब मांग सकते हैं की यह कदम क्यूँ उठाया गया /
    यथोचित जवाब न मिलने पर मीडिया उसे छापे / क्या मीडिया ही एकमात्र फैसला करने का हक़ रखती हैं जो किसी दुसरे पक्ष की सुने बिना उसे गुनाहगार ठहरादे / कामनवेल्थ गेम्स के वक़्त जो छीछालेदार भारतीय मीडिया
    ने किया क्या वो सही किया ? सारी दुनिया के सामने देश की मिटटी पलित करके रख दी / इनकम टैक्स में अगर सरकार ने छूट दी हैं आई सी सी को तो उसका जरुर कोई तो तर्क होगा ? सरकार संसद में भी जवाब देह हैं / पर भारतीय मीडिया खुद को सही गलत का एकमात्र निर्णय कर्ता मानती हैं / सारे टी वी चैनल खोलिए न्यूज़ वाले , क्या दिखा रहे हैं समाचार के नाम पर देखिये / इतने बड़े बड़े मीडिया हाउस कैसे बन गए ? क्या सारा पैसा सराफत की पत्रकारिता का हैं ? मीडिया को इतनी छूट कैसे मिलती हैं ? मीडिया पर इनकम टैक्स के छापे क्यूँ नहीं पड़ते ? मीडिया पत्रकारों का समूह हैं और जो उदहारण मैंने पत्रकार के रेल किराये में छूट का दिया हैं वो बानगी हैं मीडिया को मिलने वाली छूट का /

    Suresh Kumar 01 April at 16:17 Report
    माफ कीजिएगा राजेश जी… ऐसे कई मुद्दे है जिस पर आप सवाल उठा सकते हैं और मैं भी… लेकिन अभी तक शायद ऐसा नहीं हुआ है कि जिस संस्‍था को लाभ मिलना हो उसका मुखिया उस बैठक में निर्णय करने की स्थिति में बैठा हो. केंद्रीय मंत्रिमंडल में शरद पवार शामिल है और वर्तमान में आईसीसी के अध्‍यक्ष भी हैं. ऐसे में वो मंत्रिमंडल की बैठक में थें. कायदे से ऐसा नहीं होना चाहिए था. सूचना एवं प्रसारण मंत्री समेत कई अन्‍य मंत्रियों ने इस कदम का विरोध किया था बावजूद इसके आयकर छूट की मंजूरी दी गई. अभी छूट दी जा रही है और लग रहा है यह देशहित में नहीं है तो विरोध होना ही चाहिए. सूचना के अधिकार के तहत ही कॉमनवेल्‍थ में हुए घोटालों पर से पर्दा उठा और शायद आने वाले समय में वर्ल्‍डकप को लेकर भी ऐसा कुछ हो तो इसमें आश्‍चर्य की कोई बात नहीं होगी. अगर आप इसके पक्ष में हैं तो यह आपका अपना मत है. जरुरी नहीं है कि मीडिया सभी मुद्दों पर सही ही हो लेकिन ऐसा भी नहीं है कि हरदम गलत ही हो. रहा सवाल इन्‍कम टैक्‍स के छापे का तो क्‍या यह मीडिया की जिम्‍मेदारी है कि वह छापे मारने के लिए कहे…. राजेश जी देश में काम करने के लिए संस्‍थाएं मौजूद है उन्‍हें अपना काम ईमानदारी से करना चाहिए. सिर्फ विरोध के लिए विरोध हो ऐसा कोई मकसद नहीं… बदलाव हो.. अच्‍छे के लिए हो, देश के लिए हो, आम आदमी के फायदे के लिए हो तो बेहतर.

    Rajesh Sharma 01 April at 16:25
    क्या आपको ऐसा नहीं लगता की मीडिया को फाईनल के प्रसारण का अधिकार न मिलना इस मुद्दे की उछालने की वजह हैं जैसे कामनवेल्थ में भी सारा अधिकार प्रसार भारती के पास था / मुझे तो ऐसा ही लगता हैं /
    ४५ करोड़ से भारत के रेवेन्यु का क्या नुकसान हो जायेगा जहा हजारो करोड़ रुपये हसन अली जैसे दबाकर बैठे हैं / आज तक भारतीय मीडिया ने हसन अली के मामले को क्यूँ नहीं प्रकाशित किया था /
    मीडिया को आत्म अवलोकन करना चाहिए / आईना खुद ही गन्दा हो तो तस्वीर साफ़ कैसे दिखेगी /

    Suresh Kumar 01 April at 16:34 Report
    राजेश जी, मीडिया को फाइनल के प्रसारण का अधिकार नहीं चाहिए और वह मीडिया कर भी नहीं सकती है. मीडिया सिर्फ यह कह रही है कि उसे टीम कैप्‍टन के प्रेस कांफ्रेंस में जाने से नहीं रोका जाए. प्रैक्टिस कर रहे खिलाडि़यों या फिर खेल के मैदान में क्‍या स्थिति है इसकी जानकारी देने से नहीं रोका जाए लेकिन आईसीसी को इसपर भी आपत्ति है. रही बात हसन अली की तो इंडिया टुडे ने 2008 में भी इसकी पूरी रिपोर्ट प्रकाशित की थी और इस वर्ष भी पूरी खोज रिपोर्ट प्रकाशित की है. आप चाहे तो इसे पढ़ सकते हैं. सजग होना बहुत जरुरी है राजेश जी, ऐसा मेरा मानना है.

    Rajesh Sharma 01 April at 16:56
    सुरेशजी मैं भी यही मानता हूँ की सजग होना बहुत जरुरी हैं / १९८२ से सक्रीय भारत के प्रमुख हवाला माफिया के बारे में देश की सबसे प्रमाणित समाचार पत्रिका २००८ में खोजी रिपोर्ट प्रकाशित करती हैं /
    लेकिन आई सी सी को दिए जाने वाली इनकम टैक्स रिबेट फाईनल खेल के ख़तम होने से पहले ही सुर्ख़ियों में होती हैं / सुरेशजी आप मानो या न मानो लेकिन भारत की मीडिया भी बिकाऊ हैं / आप मीडिया में हैं इसलिए ये बात आपको अखर सकती हैं लेकिन ये कठोरतम सच्चाई हैं / नेता, मंत्री , मीडिया , पुलिस , पक्ष , विपक्ष , वोट , न्यायलय सब बिक रहा हैं, सब बिकता हैं / मैं नाम तो नहीं लेना चाहूगा लेकिन अगर आपके मीडिया हाउस के एक विशेष व्यक्ति के हिसाब किताब का चिटठा निकाला जाए तो पता चल जायेगा की मीडिया कितना बड़ा बिकाऊ हैं / अब मेरे पास सबूत तो हैं नहीं की उनका नाम लु या वो भाई साहब आर टी आई के दायरे में भी नहीं आते / हाँ एक तरीका हैं जैसे एम् एल ये , एम् पी अपनी संपत्ति की घोषणा करते हैं वैसे मीडिया वाले भी करे और हर साल ग्रोथ देखि जाये /

    हम विषय से न भटके तो बेहत्तर हैं , अगर भारत सरकार ने आई सी सी को आय कर में छूट दी हैं तो कोई गलत नहीं किया होगा, सरकार के अपने तर्क होगे पहले उसपर विस्तृत चर्चा करे फिर शरद पवार पर वाण कृपाण ताने /

    Suresh Kumar 01 April at 17:15 Report
    बिल्‍कुल सही राजेश जी. कौन कितना बिकाऊ है यह उसके खुद के संस्‍कार पर निर्भर करता है ऐसा मेरा मनना है. दूसरी बात मीडिया पर्सन के हिसाब किताब का है तो लीगल तरीके से एक प्रोफेशनल व्‍यक्ति जो अर्जित कर रहा है उसपर सवाल उठाया जाना शायद ठीक नहीं है. यह उसके स्किल को दिए जाने वाला मेहनताना है. मीडिया पर्सन भी अपना इनकम टैक्‍स जमा कराते हैं और अपनी संपत्ति का ब्‍योरा सरकार को देते हैं. यह कोई पोलिटिकल पोस्‍ट है नहीं कि लोग अपनी संपत्ति का खुलासा करें. वैसे कोई भी आदमी अपनी संपत्ति का ब्‍योरा देने को स्वतंत्र है.
    रही बात आईसीसी को आयकर में छूट दिए जाने की तो इसमें कई तरह की खामी दिखी है जिसका उल्‍लेख पहले मैं कर चुका हूं. पवार साहब से कुछ लेना देना नहीं है लेकिन अगर भारत सरकार के खजाने में 45 करोड़ आता है तो क्‍यों न आए. गलत तरीके से किसी को क्‍यों फायदा पहुंचाया जाए…. सरकार ने जो तर्क दिए उससे खुद उसके खेलमंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्री एवं कई अन्‍य मंत्री भी सहमत नहीं थे. अगर यही फैसला एकमत से हुआ होता तो शायद यह चर्चा का विषय नहीं बनता…

    Rajesh Sharma 01 April at 17:52
    सुरेशजी मैं प्रोफेसनल कमाई की बात नहीं कर रहा हूँ / जो कमाई गलत तरीके से कमाई गयी हो, जन साधारण की भाषा में दो नम्बर की कमाई / ऐसी कमाई से
    अच्छी से अच्छी महँगी गाडी और महल जैसे घर बनाने वाले मीडिया में कम नहीं हैं /

    सबसे पहले मैं ये बता दू सुरेश जी की इनकम टैक्स एक्ट में ये प्रावधान हैं और उपस्थित प्रावधानों के तहत ही आई सी सी को छूट दी गयी हैं / वो भी मेरे हिसाब से
    सिर्फ टिकट बिक्री से हुयी या होनेवाली आमदनी में जो की कुल आमदनी का एक छोटा हिस्सा हैं / ऐसा नहीं हैं की आई सी सी को फायदा पहुचाने के लिए कोई नया
    कानून बनाया गया हो / लोकतंत्र में अपना पक्ष रखने का सबको अधिकार हैं और इस विषय की मंत्री मंडल में चर्चा भी हुयी हैं , जब चर्चा होगी तो पक्ष विपक्ष दोनों ही होगे /
    लेकिन निर्णय कानून के अनुसार ही हुआ परिलक्षित होता हैं / आप भी इनकम टैक्स एक्ट देखे और मैं भी पढ़ लेता हूँ / क्या उसमे ऐसा कही लिखा हुआ हैं की जो संस्था
    आर्थिक रूप से मजबूत होगी उसको ये छूट नहीं दी जा सकती / अगर ऐसा लिखा हुआ हैं और फिर भी आई सी सी को फायदा पहुचाया गया हैं तो वो गलत हैं /

    Rajesh Sharma 01 April at 17:59
    सुरेश जी मैंने संसद द्वारा पारित THE TAXATION LAWS (AMENDMENT) ACT, 2005#NO. 55 OF 2005$[28th December, 2005.]
    की कापी संलग्न की हैं / कृपया देखे /http://www.trilinesurevy.com/uploads/media/vikas_doc/docs/acts_new/1167482608_THE_TAXATION__LAWS.pdf
    http://www.trilinesurevy.com/uploads/media/vikas_doc/docs/acts_new/1167482608_THE_TAXATION__LAWS.pdf
    http://www.trilinesurevy.com
    Posted by Rajesh Sharma

  5. AVANEESH

    April 2, 2011 at 6:17 am

    सब चोर हैं….हर तरफ भ्रष्टाचार है ..जिसकी चलती है वो राजा है…जसकी नहीं चलती वो गधा है किसी काम का नहीं है….क्रिकेट क्या कहीं भी ले लो..बस सरकारी होना चाहिए….हमें भी आदत हो गई है ऐसे ही जीने की कोई ना तो सुधर सकता है और ना ही कोई सुधारना चाहता है…हम भारतीयों की एक आदत है तब तक गलत काम करते रहे जब तक पकड़े ना जाओ..और जब पकड़े जाओ तब माफी मांग लो…बस ऐसे ही चलते रहेगा…..मुझे भारतीय होने पर गरेव है लेकिन फिर से सोचता हूं आखिर वो गर्व करने लायक चीज हमारे पास क्या है सिर्फ और सिर्फ एका नाम भारत…..

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