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भ्रष्‍टाचार के आरोप से घिरे बीएस लाली हो सकते हैं निलंबित!

: राष्‍ट्रपति ने दी जांच पर सहमति : राष्‍ट्रमंडल खेल तथा क्रिकेट मैचों के प्रसारण अधिकार बेचने में पक्षपात एवं भ्रष्टाचार के आरोपों में फंसे प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बीएस लाली पर निलंबन की तलवार लटक रही है. उन्‍हें कभी भी निलंबित किया जा सकता है. राष्ट्रपति ने लाली पर लगे आरोपों की जांच सुप्रीम कोर्ट के जज से कराए जाने की सरकार के अनुरोध पर अपनी सहमति दे दी है. इसके बाद गेंद सरकार के पाले में चली गई है. सरकार अगर चाहे तो बीएस लाली को जांच के दौरान निलंबित कर सकती है. दूसरी तरफ लाली  ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है.

: राष्‍ट्रपति ने दी जांच पर सहमति : राष्‍ट्रमंडल खेल तथा क्रिकेट मैचों के प्रसारण अधिकार बेचने में पक्षपात एवं भ्रष्टाचार के आरोपों में फंसे प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बीएस लाली पर निलंबन की तलवार लटक रही है. उन्‍हें कभी भी निलंबित किया जा सकता है. राष्ट्रपति ने लाली पर लगे आरोपों की जांच सुप्रीम कोर्ट के जज से कराए जाने की सरकार के अनुरोध पर अपनी सहमति दे दी है. इसके बाद गेंद सरकार के पाले में चली गई है. सरकार अगर चाहे तो बीएस लाली को जांच के दौरान निलंबित कर सकती है. दूसरी तरफ लाली  ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है.

लाली पर केन्‍द्रीय सतर्कता आयोग ने क्रिकेट प्रसारण के अधिकारों को बेचने में पक्षपात करने और वित्तीय अनियमितताओं पर कई सवाल उठाए थे.  सैकड़ों फाइलों की जांच के बाद आयोग ने छह महीने पहले प्रसार भारती के मुख्य सतर्कता अधिकारी को अपनी रिपोर्ट दी थी. केन्‍द्रीय सतर्कता आयोग का निष्कर्ष था कि ट्वेंटी-20 विश्व कप समेत पांच क्रिकेट मैच श्रृंखलाओं में प्रसारकों को लाभ पहुंचाया गया. इससे प्रसार भारती को भारी नुकसान उठाना पड़ा. इसमें अधिवक्‍ताओं को जरूरत से ज्‍यादा फीस दिए जाने पर भी कई सवाल उठाए गए थे तथा कारण पूछा गया था.

यह भी बताया जा रह है कि बीएस लाली ने इस मामले में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के आदेश की भी अनदेखी की. यद्यपि 2006 में प्रसार भारती के सीईओ बनने वाले लाली सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए अपने को पाक साफ बता रहे हैं. उनका कहना है कि प्रसार भारती सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का स्‍वायत्‍तशासी निगम है, लिहाजा मंत्रालय का आदेश उसके लिए बाध्‍यकारी नहीं है या प्रसार भारती मंत्रालय का आदेश मानने के लिए बाध्‍य नहीं है.

लाली पर सीवीसी का शिकंजा तब और कस गया जब वह राष्‍ट्रमंडल खेलों के दौरान अपनी पसंदीदा कंपनी को सारे नियमों की अनदेखी करके प्रसारण अधिकार देने के आरोप में घिरे. लाली पर आरोप लगा कि सिस लाइव को प्रसारण अधिकार देने के लिए नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया. इस मामले में भी लाली अपने अधिकार का फायदा उठाते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की आपत्तियों के बावजूद सिस लाइव को प्रसारण अधिकार 246 करोड़ रूपये में बेच दिए.

इससे नाराज सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के हाथ बंधे हुए थे. भ्रष्‍टाचार के आरोपों के बावजूद मंत्रालय या सरकार कोई सीधी कार्रवाई नहीं कर सकती थी. मुश्किल यह थी कि स्‍वायत्‍तशासी संस्‍था के कर्ताधर्ता होने के चलते लाली को सरकार उनकी मर्जी के बगैर सीधे हटाने की कार्रवाई भी नहीं की जा सकती थी. प्रसार भारती के अधिनियम के तहत सीईओ को तभी हटाया जा सकता है, जब सुप्रीम कोर्ट का न्‍यायाधीश उन्‍हें दोषी करार दे. ऐसा बिना किसी जांच के संभव नहीं था. लिहाजा सरकार ने लाली के खिलाफ लगे आरोपों को देखते हुए राष्‍ट्रपति से उनके खिलाफ जांच की अनुमति मांगी थी. जिसको राष्‍ट्रपति ने हरी झंडी दिखा दी है.

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0 Comments

  1. rks

    December 11, 2010 at 9:43 am

    फिलहाल प्रसार-भारती की हालत देखकर तो लगता है कि यह प्रसाद-भारती बन गई है, क्योंकि यहां जो भी कमान संभालता है, वही प्रसार-भारती को प्रसाद समझ कर ग्रहण करने लग जाता है। यही कारण है कि प्रसार-भारती की स्थिति नहीं सुधर रही है। पिछले समय मृणाल पांडे जी ने कहा था कि प्रसार-भारती को बीबीसी बना देंगे, लेकिन ऐसा प्रयास कहीं दिखाई ही नहीं दिया। उपर से तमाम तरह के भ्रष्टाचार, प्रसार-भारती में होने के मामले सामने आ रहे हैं। यह तो दुर्भाग्यजनक है।

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