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मीडिया वालों ने भले भुला दिया लेकिन रेणु को फेसबुकियों ने याद रखा

[caption id="attachment_20149" align="alignleft" width="122"]फणीश्वर नाथ रेणुफणीश्वर नाथ रेणु[/caption]स्‍मरण : रेणु by Hrishikesh Sulabh on Monday, 11 April 2011 at 09:20 : आज रेणु की पुण्‍यति‍थि‍ है। 11 अप्रैल सन् 1977 को रेणु का देहावसान हुआ था।  उनका जन्‍म बि‍हार के पूर्णि‍या ज़ि‍ले के औराहीं हिंगना गांव में  4 मार्च सन् 1921 को हुआ था। लेखक के रूप में सक्रि‍य होने से पहले वे स्‍वतंत्रता संग्राम के योद्धा थे।

फणीश्वर नाथ रेणु

फणीश्वर नाथ रेणु

स्‍मरण : रेणु by Hrishikesh Sulabh on Monday, 11 April 2011 at 09:20 : आज रेणु की पुण्‍यति‍थि‍ है। 11 अप्रैल सन् 1977 को रेणु का देहावसान हुआ था।  उनका जन्‍म बि‍हार के पूर्णि‍या ज़ि‍ले के औराहीं हिंगना गांव में  4 मार्च सन् 1921 को हुआ था। लेखक के रूप में सक्रि‍य होने से पहले वे स्‍वतंत्रता संग्राम के योद्धा थे।

उन्‍होंने नेपाल की सशस्‍त्र क्रांति‍ में  भी भाग लि‍या। सन् 1950 में यक्ष्‍मा रोग से ग्रस्‍त होकर वे पटना के अस्‍पताल में भर्ती हुये और यहीं उनका परिचय लति‍काजी से हुआ और दोनों प्रणय-सूत्र में बंधे। इसके पहले उन्‍होंने कुछ कहानि‍यों की रचना की थी। इन्‍हीं दि‍नों  उन्‍होंने मैला आंचल की रचना की और सन् 1953 में इसके प्रकाशन के बाद उन्‍हें व्‍यापक स्‍वीकृति‍ और प्रति‍ष्‍ठा मि‍ली। रेणु ने अपनी रचनात्‍मकता से भारतीय गांवों के नये यथार्थ को नई कथा-भाषा में प्रस्‍तुत कि‍या। उनकी कहानि‍यों और उपन्‍यासों  में प्रेमचंद के बाद के हि‍न्‍दी गद्य का वि‍कास नई आभा के साथ प्रकट हुआ। नई कहानी के कोलाहल के बीच उन्‍होंने अपनी रचनाशीलता से  अलग रास्‍ते का नि‍र्माण कि‍या। सन् 1974 में वे आज़ादी के बाद के सबसे बड़े जन-आन्‍दोलन में शामि‍ल हुए और जेल गये। उनकी स्‍मृति‍ को प्रणाम करने के लि‍ए आज मैंने अपनी सुबह का आरम्‍भ उनके कथा-संकलन ‘ठुमरी’ से कि‍या।

Vibha Rani : मेरे पसंदीदा लेखक. मंटो की कहानियों की तरह ही उनकी कहाँई हर बार एक नया आनंद देती है.

Vibhuraj Chaudhary : शेयर कर रहे हैं… हम रेणु की पूर्णियां कमिश्नरी से हैं… उनके इलाके से…

Avinash Das : विभु, कमिश्‍नरी के अलावा कुछ गुण भी ले लो उनसे…

Binay Kumar : Shraddhanjali!

Girindranath Jha : नमन

Abhishek Pandit : lok jivan v bhawnayoo k mahan chitere ko meri ur se srdhasuman

Hasan Jawed : naman

सुशीला पुरी ‎: ” Mailaa aanchal ” ke amar shilpi ko saadar NMAN !

Prabhat Ranjan : सादर नमन.

विमलेश त्रिपाठी : उनकी कहानी रसपिरिया बार-बार याद आती है….. नमन…

Ajay Anand : रेनू जी को सादर नमन, मैं खुद को गौरवान्वित महसूस करता हूँ की मैं उस शहर का रहने वाला हूँ जहाँ रेनू जैसे कथाकार ने जन्म लिया, रंगकर्म के दौरान उनकी कई कहानियों का भी मंचन किया है, गढ़बनेली से पढाई की, जहाँ की पृष्ठभूमि पर मारे गए गुलफाम उर्फ़ तीसरी कसम की कहानी का ताना बना बुना गाया है ……….!!

Abhivyakti Parivar : अभिव्यक्ति परिवार की तरफ से रेनू जी को सादर नमन…………………!!!

Kamakhya Singh : रेणुजी को सादर नमन!

Aparna Manoj : renu ji ko saadar naman!

Manisha Jain : Shukriya Sulabhji..Renu ji ko naman..

Lalita Asthana : renuji ko naman.

Awanindra : Ashutosh Bhaiya Mati Gadi ki yaad aa rahi hai. Renu ji ko hardik shradhhanjali.

Ashutosh Partheshwar : नमन !

Bhanupartapnarain Mishra : great writer always live Indians heart….anti Dynasty front

Meethesh Nirmohi : Is mahan kathakar ko vinamr shrddhanjali.

Gita Pandit : naman…

Vikas Shekhar : Sulabh bhaiyaa, aapko bahot bahot dhanyabad … Renuji ko shat shat naman !

M.c. Gautam : PINJRE VALI MUNIYA KAHAN MILI

Kamlesh Kumar Diwan : sahitya me aanchalikta ke liye jaane jaate hai ,unhe naman

Shail Agrawal : pushpanjali

Vikas Tiwari : RENU JI KO MERA PRANAM HAI

Vinay Kumar : astha aaur abhaar. mahan renuji ke lia

Kalu Lal Kulmi : unko nkn

Pramod Srivastav : sahitykaro ka punyatithi aaj media ka visay nahi banta hai. Aapne unki punyathithi ka yad dilaya,sukriya! renu ji ko shat-shat mera naman.

Ajit Rai : Ye itni azeeb bat haiki Premchand ke baad ke sabse bade kathakar ki punyatithi yun hi gujar gayi.

फेसबुक पर रेणु को याद करने और अपनी टिप्पणी दर्ज कराने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं- स्मरण रेणु

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0 Comments

  1. Anjani Gautam

    August 5, 2011 at 2:45 pm

    yah kahna bilkul hi galat hai ki hum media walon n unhe bhula diya,isme sachhai nahi hai.bade adab se humne araria ke reporters ne jayanti aur punyatithi ko yaad kiya

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