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यह खबर पढ़कर आप पर क्या बीतेगी? क्या सोचेंगे?

इस खबर को पढ़ आप स्तब्ध हो सकते हैं. शर्म से सिर झुका सकते हैं. सोच में पड़ सकते हैं. अफसोस करने लग सकते हैं. मुस्करा कर हंस भी सकते हैं. चाहें जो करें, लेकिन खबर को इगनोर नहीं कर सकते.  यह खबर देर तक आपके दिमाग में बैठी रहेगी. भड़ास4मीडिया के पास इस खबर व तस्वीर को एक पाठक ने भेजा है.

इस खबर को पढ़ आप स्तब्ध हो सकते हैं. शर्म से सिर झुका सकते हैं. सोच में पड़ सकते हैं. अफसोस करने लग सकते हैं. मुस्करा कर हंस भी सकते हैं. चाहें जो करें, लेकिन खबर को इगनोर नहीं कर सकते.  यह खबर देर तक आपके दिमाग में बैठी रहेगी. भड़ास4मीडिया के पास इस खबर व तस्वीर को एक पाठक ने भेजा है.

भेजने वाले की मंशा यह बताने की थी कि भड़ास वालों, देखो, कैसी कैसी खबरें छाप देते हैं अखबार वाले. लेकिन जब इस खबर को आप पढ़ते हैं तो पढ़ने-सोचने के कुछ देर बाद कई बड़े सवाल सामने आ जाते हैं. पहले तो अखबार में प्रकाशित खबर पढ़िए और फोटो देखिए, फिर आगे बढ़ते हैं…

खबर पढ़ने के बाद अब कुछ देर तक सोचिए.

फिर मेरे दिमाग में आए कुछ सवालों की लिस्ट को बांचिए-जांचिए, जो नीचे है, और तब अपने मन की बात बिलकुल नीचे कमेंट बाक्स में लिखकर बताइए…

  • पढ़ने के बाद तो तुरंत यह लगता है कि इस नीच इंसान को बिना देरी किए फांसी पर लटका कर काम तमाम कर देना चाहिए.

  • थोड़ा ठहरकर सोचने पर लगता है कि क्या ये इंसान समझदार नहीं है? अतिशय सेक्सुवल भावावेश में बजाय किसी लड़का-लड़की-महिला पर धावा बोलकर उसके साथ दुष्कर्म करने के, या किसी गरीब बच्चे-बच्ची महिला को फुसलाकर उसके साथ जबरदस्ती करने के, उसने दूसरा, कम अमानवीय, रास्ता अपनाया, जो उसे तुरंत सूझा और सामने दिखा होगा. उसने अमानवीय बनने की जगह, अजानवरीय बनना पसंद किया.

  • मुर्गे, बकरे आदि को मारकर खा जाने वाले मनुष्य क्या इसी दोषी युवक की तरह दोषी नहीं हैं? उसने तो कुतिया से कुकर्म किया, हम लोग तो मुर्गे, कुत्ते, बकरे, कबूतर, सांप, बंदर, चूहे, झींगा, हिरन, भैंस… जो पका मिल जाए, खा लेंगे. जानवर का जान लेना जुर्म नहीं और जानवर से दुष्कर्म की इतनी बड़ी सजा की उस आदमी की तस्वीर तक छाप दी गई? उसे खलनायक बना दिया गया? पुलिस वाले टोपी लगाकर सक्रिय हो गए?? एलीट तबके के लोग कुतिया के हक के लिए जिंदाबाद-मुर्दाबाद के अंदाज में आगे आ गए?

  • हम दिल्ली-मुंबई-लखनऊ-पटना सरीखे नगरों-महानगरों में रहने वाले भरे पेट-हरे नोट वाले बौद्धिक लोग क्या किसी चीज को सपाट तरीके से देखने के आदी नहीं हो गए हैं, जबकि हमारे आप पर दायित्व है कि ऐसी स्थितियों के अन्य पहलुओं पर भी बात करें, दूसरे पक्ष को भी सुनें, दूसरे पक्ष के हिसाब से भी सवाल पैदा करें. लेकिन सेक्स शब्द का उच्चारण करने से परहेज करने वाले हम हिंदी पट्टी के बौद्धिक हिप्पोक्रेट, सेक्स शब्द तक कहीं लिखा मिल जाता है तो सब छोड़कर उसे पढ़ने जानने के लिए टूट पड़ते हैं. इसलिए अखबार ने इस खबर को सपाट तरीके से ऐसे परोस दिया कि जो देखे वह पूरा पढ़े और आरोपी को फांसी देने वाली मानसिकता में आ जाए.

  • जिस देश के ज्यादातर शहरों से हर साल गरीब बच्चियां हजारों की संख्या में अचानक गायब हो जाया करती हों, फिर उन्हें कोलकाता-मुंबई-दिल्ली सरीखे वेश्यावृत्ति के गढ़ों में बेच दिया जाता हो, उम्र से जल्दी सेक्स के लायक बनाने के लिए तरह-तरह के अप्राकृतिक उपाय किए जाते हों, हारमोन के इंजेक्शन लगाए जाते हों, उस देश की सरकार व बुद्धिजीवी इसे कोई मुद्दा बना पाने का, मुद्दा मान पाने का माद्दा नहीं रखते, लेकिन एक कुतिया से किसी नशेड़ी ने यौनाचार किया हो तो वह इतना बड़ा मुद्दा बन जाता है किसी अखबार के लिए.

मैं आरोपी का बचाव नहीं कर रहा. मैं उसे निर्दोष भी नहीं मान रहा. लेकिन खबर पढ़ने के बाद कुछ सवाल जो दिमाग में आ रहे थे, उसे रखने की कोशिश की है. संभव है, गलत सोच रहा हूं. हो सकता है एक पुरुष हूं, आक्रामक हूं, हर चीज में, तो उपरोक्त फोटो वाले पुरुष के अंदर के जानवर को महसूस कर पा रहा होऊं. हो सकता है सही वही हो जो खबर पढ़कर सीधे व सपाट तरीके से समझ में आ रहा हो कि इसे फांसी दे दी जाए क्योंकि इसने दुनिया का महा पापा किया है. लेकिन यह हक तो बनता है न कि किसी चीज के दूसरे पहलू के बारे में बात की जा सके, किसी चीज में विपक्ष के पक्ष को भी रखा जा सके. सोचिए, और कुछ समझाइए भी मुझे.

यशवंत

भड़ास4मीडिया

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0 Comments

  1. shiva

    September 30, 2010 at 6:37 pm

    panish karo lekin photo nahi chapni chahiye,

  2. dhirendra pratap singh

    September 30, 2010 at 6:39 pm

    yashwant bhai bilkul alag dhang se jo soche usi ka naam to yashwant h.khair m aap ki baat se ittefak rakhta hu.

  3. jabalpur

    September 30, 2010 at 9:38 pm

    likhne wale se poocho ki kutiya gawahi de paygi kya

  4. bhishm singh dewal

    October 1, 2010 at 4:12 am

    कुतिया के साथ बलात्कार करने वाले को क्या सजा मिले यह अलग बात है, लेकिन मेरा कहना यह है की हमारे देश के दूर दराज गाँव में जब किसी गरीब मजदुर की बेटी की इज्जत लुटती है तो विज्ञापन के भूखे अख़बार वाले उसे लो प्रोफाइल बताकर संचिप्त समाचार में समेत देते हैं, मैं अख़बारों में कोने में रोज चार लाइन में छापी बलात्कार की ख़बरें देखता हूँ , यह कुतिया किसी बड़े आदमी की तो नहीं लेकिन बड़े सहर की है, तभी अख़बार ने देखो किस तरह फोटो सहित सजाया है, बलात्कार पीडित कुतिया ने अन्न जाल त्याग दिया इस बात को भी पिर्मुखता दी गयी है, अफ़सोस होता है पत्रकारिता का ये रूप देखकर– भीष्म सिंह देवल

  5. abhai

    October 1, 2010 at 7:25 am

    why didnt u mosaic the face of the victim (the bitch)….???????? u are also guilty dude…

    i hv to laugh at accused… at victim… at police … at localites… at newspaper … at you and at myself also.

    can’t opine right, wrong or otherwise at this vexed issue.. probably more complex than ayodhya, kashmir, palestine… it makes out to me as if to resolve civilization of mankind.

  6. Hindu Hindi Hindustani

    October 1, 2010 at 7:33 am

    yashwant ji aapki baat bilkul sahi hai. ham iska poora samarthan karte hain aur aisi tathakathit patrakarita par laanat dalte hain.

  7. Abhishek shrivastava

    October 1, 2010 at 8:51 am

    yaar mujhe to yahi bataya gya hai ki kutta insaan ko kaat le to khabar nahi hai..per insaaan agar kutaa ko kaat le to khabar hai..aur fir to ya kaatne ka nahi blatkaar ka maamla hai..yaswant bhaiya aap kyo mamle ko tool de rahe ho…..aap to patrakaar ho

  8. ranjeet mandsori

    October 1, 2010 at 9:24 am

    iske liye kaafi hadd tak vo dhandhebaaz bhi gunahgaar hai jo animal sex wali porn movies bazaaar mei paroste hai.ek bahut bada tabka aisi movies ka shoukeen hota hai to socho k kitne dimaago mei kuchh naya wala fitooor kyo nahi uth sakta. malwa ilaake mei so many times sex wid sheep…cow…etc wale kisse bhi ujagr huye hai. aaj insaan k dimaag mei sex aisa ghus gaya hai k kuchh uske aagey dikhaai nahi deta. apni bhookh mitaane k liye aise vahshi…nashedi….kuchh nahi sochte……

  9. ranjeet mandsori

    October 1, 2010 at 9:29 am

    so many times insaaan nashey mei jaanwar kese banta hai ye uska example hai. kahi na kahi isk peechhe animal sex wali porn movies ka bhi kasoor hai..jis k kai log diwane hai. dekhne k baad aisa fitoor dimaag mei uthna mamooli baat hai. nashey mei insaan ko apni bhookh k samne kuchh nahi dikhta…tabhi to itne rape case samne aatey hai..aur is se 1000% to samne aa hi nahi paatey.

  10. ranjeet mandsori

    October 1, 2010 at 9:31 am

    insaan kese janwar ban jata hai ye is baat ka saboot hai. nashey ka to bahana hota hai….asli karan hai apni bhookh mitaana. vo ye nahi dekhta k khane k liye kya samne hai….iske liye animal sex wali porn movie k dhandhebaaz bhi kaafi had tak zimmedar hai.

  11. abhi

    October 1, 2010 at 9:55 am

    sahi kaha yashwant bhaiya, sayad aapka ye kadam baaki kutiyon ki ijjat bacha sake…

  12. laxmi

    October 1, 2010 at 9:57 am

    yashwant bhai is bekar ke maamle ko tool dene ki jagah agar nabalig bachiyon ke saath ho rhi haiwaniyat ka mudda utahya hota to jyada acha hota.

  13. chandan srivastava

    October 2, 2010 at 4:06 pm

    ego photu hamro lage ba yashwant ji…bakri ke bachha ke manayi wala dhad (e hi ja faizabad ke kahani ba)… khair yashwant ji akhiri wala point ta tohar damdar baa…lekin ekra ke kaise clean chit dihal jayi…ee uhe time agar kauno bachhi chhora na bachha pa gayil hot ki to apne se kamjor purushe mil gayil hot ekra ke ta ee ta kayile rahal ha gajab…sonchi na ki kutiya ke sath jekar sex iccha jag sakela oo ketna bhaynak aadmi hoyi.

  14. kamlesh

    October 2, 2010 at 5:28 pm

    यशवंतजी , आपकी दलील कुछ ऐसी ही है जैसे बड़े आदमी की बेटी की इज्जत लुट गई तो बलात्कार हो गया और गरीब की बेटी की अस्मत लुटी तो मामूली बात हो गई। माना कि वो कुतिया है.. अपनी इज्जत लुटने की बात मीडिया और अदालत में अपनी जुबानी पेश नहीं कर सकती। लेकिन जिस तरह उसने अन्न जल का त्याग किया है उससे साफ है कि इज्जत लुटे जाने का उसे कितना गहरा सदमा पहुंचा है। ये तो वही बात हो गई कि इंसान की इज्जत इज्जत और कुतिया की इज्जत कुछ भी नहीं।
    रही बात आपकी इस दलील की कि उस दुराचारी ने कुतिया को हवस का शिकार बनाकर बहू बेटियों को बख्श दिया और समझदारी का परिचय दिया। अगर उसमें इतनी ही समझदारी होती तो हवस निकालने के कई आसान और निर्दोष तरीके हैं। मेरा तो यही मानना है कि उस आदमी ने ये काम कर निहायत कुत्तेपन का परिचय दिया है। कोई हैरत की बात नहीं कि आनेवाले दिनों में कुत्ते अपनी जवां बेटियों को इंसानों के पास भेजने से डरने लगें।
    kamlesh, mumbai

  15. YOGESH MISHRA"YUG"

    October 3, 2010 at 9:06 pm

    bilkul sahi likhaa hai aapne….aajkal media apne pad ka durupyog kar rahi hai….kisi ke baare me ho kuchh bhi chhap de rahi hai….govt. ko media ke liye bhi sensor board jaisa board ka gatthan karne hogaa…varna ye mediaa waale aur pataa nahin kitne baaton ka batangad karenge…….yogesh mishra katagi.raipur

  16. SHATRUGHNA GUPTA

    October 3, 2010 at 11:38 pm

    bilkul sahi likhaa hai aapne……………….yashwant ji

  17. डा. महाराज सिंह परिहार

    October 4, 2010 at 7:11 pm

    इस खबर को पढ्कर ऐसा लगता है कि काम वासना मानव में इतनी तीव्रता से हावी है कि वह जानवरों तक को नहीं छोड् रहा है। ऐसे लोग ही रिश्‍तों की मर्यादा को पहले तार तार करते हैं फिर इससे आगे घिनौने कार्यों पर उतर आते हैं। सवाल यह पैदा होता है कि इंसान के लिए अगर सेक्‍स जरूरी है तो देह व्‍यापार को मुक्‍त करने में क्‍या बुराई है।

  18. bhim

    June 21, 2014 at 10:50 pm

    Aapke vechar mujhe bhut hi ache lage mujhe lagta h ki is
    Aadmi ni ek bhut hi aemanveye kam kiya
    Hai par is tooic m ek bhut hi badi samsya h
    Ki oon gared bacheyo ki hephajat kon.karega
    Jin ko ghar se nekal kar kodho par betha diya jata hai

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