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दुख-दर्द

लखनऊ में शिव शंकर गोस्वामी पिटे

दैनिक जागरण, लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार शिव शंकर गोस्वामी के बारे में सूचना है कि कल उनकी पिटाई निर्वाचन आयोग के कार्यालय के सामने हो गई. उन्होंने निर्वाचन आयोग आफिस के सामने तैनात सुरक्षा गार्डों ने पीटा. विवाद की वजह आफिस के सामने स्कूटर खड़ा करना बताया जाता है. शिव शंकर गोस्वामी अमर उजाला व राष्ट्रीय सहारा के भी ब्यूरो चीफ रह चुके हैं.

दैनिक जागरण, लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार शिव शंकर गोस्वामी के बारे में सूचना है कि कल उनकी पिटाई निर्वाचन आयोग के कार्यालय के सामने हो गई. उन्होंने निर्वाचन आयोग आफिस के सामने तैनात सुरक्षा गार्डों ने पीटा. विवाद की वजह आफिस के सामने स्कूटर खड़ा करना बताया जाता है. शिव शंकर गोस्वामी अमर उजाला व राष्ट्रीय सहारा के भी ब्यूरो चीफ रह चुके हैं.

दैनिक जागरण के स्टेट ब्यूरो में लंबे समय से रिपोर्टिंग कर रहे हैं. वे चुनाव आयोग के प्रदेश कार्यालय में होने वाली नियमित ब्रीफिंग में शामिल होने गए थे. चुनाव आयोग का कार्यालय लखनऊ में पीसीएफ बिल्डिंग में है. इसी कारण यहां पीसीएफ के ही निजी सुरक्षा गार्ड तैनात रहते हैं. सूत्रों का कहना है कि आफिस के सामने शिव शंकर गोस्वामी ने अपना स्कूटर खड़ा किया तो सुरक्षा गार्डों से कुछ कहासुनी हो गई. इसी के बाद गार्डों ने उन्हें पीटना शुरू कर दिया. बताया जाता है कि स्वतंत्र भारत, कानपुर के कोई पत्रकार उनके साथ थे. उन्होंने बीच-बचाव का प्रयास किया तो वे भी पिट गए.

पता चला है कि अपने साथ हुए व्यवहार की शिकायत शिव शंकर गोस्वामी ने निर्वाचन कमिश्नर से किया है. शिव शंकर गोस्वामी की उम्र करीब साठ साल के आसपास है. वे एकाध साल में रिटायर होने वाले हैं. उन पर हुए हमले की खबर से लखनऊ के मीडिया वाले सन्न हैं. ज्ञात हो कि कुछ दिनों पहले यूएनआई टीवी के एक युवा पत्रकार विशाल रघुवंशी के साथ पुलिस वालों ने बदतमीजी की थी. तब भी लखनऊ के पत्रकार संगठन खामोश रहे. अब शिव शंकर गोस्वामी पिट गए हैं तो भी किसी संगठन की तरफ से कोई आवाज नहीं उठ रही है. लगता है लखनऊ वालों की किस्मत में पिटना ही पिटना है.

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0 Comments

  1. shravan shukla

    September 22, 2010 at 2:03 pm

    ho sakta hai aisi hi kuch baat ho…ya fir inki aadat hi pad chuki ho baar baar pitne ki…arey bhai problem to yahi hoti hai na ki tum jab hamare saath nahi khade the to ham kyu tumhare saath aaye….agar goswami ji vishal ke saath aaye hote to aajka najara kuch aur hi hota….bas ab to yahi hai ki kahi muh dikhane layak nahi rah gaye…budhauti me ek daag lag gaya ki police walo se pit chuke hai bhaiya…gaao ghar me bhi yahi haal hoga…ab to jab tak jiyenge yah taana unke saath taumra rahega….yah sirf hasi udaane ki baat nahi hai…..ab se bhi kuch seekha jaye to aage se aise waakaye hone hi nahi paayenge….ek saath rahna ab bhi seekh le…bahut der nahi hui…..bhaiya ji..sabhi aawaaj uthaao..nahi to jo aaj bade reporter banke baithe ho na kal aap bhi pitoge or aapke saath bhi koi nahi khada hoga…SEEKHO YAARO SEEKHO…
    DIL ME DARD SA UTHA HAI U SABKI BERUKHI SE…
    AAJ GOSWAMI JI PITE KAL KOI OR HOGA BAS UHI APNI HI KARNI SE..

  2. SHIVANAND GIRI

    September 22, 2010 at 2:43 pm

    Bahut sharm ki baat hai ki Lucknow me senior reporter ki mayawati madam ki dulari police pit rahi hai aur media jagat ke reporter chuppi sadhe hua hai. Akhir mediakarmiyo ki chuppi ka raj kya hai? Shalabhjee aapne to Bihar me bhi kam kiya hai,dekha hai yahan ke mediakarmion ki ekta? To uthaiye aawaz……..

  3. rajendra kumar gautam

    September 22, 2010 at 4:04 pm

    ØãU ƒæÅUÙæ ß·¤æ§ü ×ð´ ·¤æÈ¤è àæ×üÙæ·¤ ãñUÐ ãU×ð´ §â·¤è çÙ¢Îæ ·¤ÚUÙè ¿æçãU°Ð Üð緤٠˜淤æÚUæð´ ·¤æð Öè ¥ÂÙè §”æÌ ÕÙæ° ÚU¹Ùð ·ð¤ çܰ °ðâð ¥æ¿ÚU‡æ ·¤ÚUÙð ¿æçãU°, çÁââð ãU׿ÚUæ SßæçÖ×æÙ ¥æñÚU ˜淤æçÚUÌæ ·¤æ â×æÙ ÕÚU·¤ÚUæÚU ÚU¹ðÐ
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  4. deepak sharma

    September 22, 2010 at 7:52 pm

    this is bad news. Luk. Parrshan ko action lanna chyia.

  5. Ravi Shankar Maurya

    September 23, 2010 at 5:37 am

    journalist ke pas hamesha hi samay ki kami hoti hai ..agar gate par 2-4 min ke liye shivsankar ji ne apna scotar khada bhi kar diya tha to koe badi bat nahi thi …lakin gardo ne jo mar peet kiya wo bahut galat kiya ..unko uski saja milni cahiye ..kyoki unko marpeet karne ka koe adikar nahi hai ..wo pyar se bhi bat kar sakte the ..har masle ka hal mar peet nahi hota . journalist par hamla ..kitni anuchit bat hai ye ….

  6. पीडित पत्रकार

    September 23, 2010 at 10:01 pm

    यह पिटाई बडे पत्रकारों की भी हुई है और शिवशंकर गोस्वामी की भी हुई है। पिटाई उस अहंकार की हुई है जो पत्रकार बनने पर खुद को रावण की तरह व्यवहार करते हैं जैसे सर्वशक्तिसम्पन्न हों। बात तो यह है कि यह पत्रकार इसलिए पिटे क्योंकि ऐसे बडे पत्रकार हमेंशा यह साबित करना चाहते हैं कि सूबे के आला अफसर उनकी उंगलियों पर नाचते हैं। वे जब चाहेंगे तब यह कर देंगे, वह कर देंगे, ऐसा कर देंगे, वैसा कर देंगे। कर-धर तो ऐसे पत्रकार केवल अपने मालिको के लिए केवल दलाली ही करते हैं, बाकी बचा तो अपने लिए गाडी-घोडा जुटा लेते हैं। बडे अफसरों तक पहुंच का दावा करते हुए यह छोटे अफसरों पर अपनी धाक जमाते रहते हैं। लेकिन अब यह धौंस उस गार्ड पर कैसे चल सकती है जिसे अपनी ड्यूटी से मतलब होता है, ना कि आला अफसरों को मक्खन लगाने वाले पत्रकारों की मनमर्जी करने से। ये गार्ड अगर अपना काम नहीं करते, तो उनके अफसर उनकी खाल खींच लेते हैं। यह गार्ड जानते हैं कि आला अफसर किस कीमत को चुका कर अपनी कुर्सियों से चिपके हैं और एक झटके में ताश के पत्तों की तरह फेंट दिये जाते हैं। ऐसे में अफसरों की औकात से परिचित इन गार्डो को ऐसे पत्रकारों की लंगोट और करतूतों के बारे में खूब पता रहता है।
    यशवंत भइया। आप भी पोर्टल अखबार चला रहे हैं। मैं आपकी सौगन्ध खाकर कहता हूं कि इन घटिया पत्रकारों को ज्यादा भाव मत दीजिए। इन लोगों की करतूतों से लखनउ का हर पत्रकार वाकिफ है। खासकर शिवशंकर गोस्वामी जैसे लोगों के बारे में। सरकारी विज्ञप्ति के बल पर पाठकों को लग्गी से पानी पिलाने वाले गोस्वामी इसके पहले भी कई बार पिट चुके हैं। इन लोगों से बात कीजिए तो यह लन्तरानियां हांकेंगे और अफसरों और मंत्रियों के सामने जीभ लपलपाते दिखायी पडते हैं।
    पिछले दिनों कई पत्रकारों पर हमले हुए। लेकिन यह बडे पत्रकार एक बार भी मंुह नहीं खोले। क्योंकि यह बडे थे और छोटों पर टिप्पणी करना इनकी शान के खिलाफ था। इसलिए छोटे पत्रकारों को अपने अहंकार के सामने बलि चढा दिया। अब भुगतो। और मार खाओ। इससे बडी शर्म की बात और क्या होगी यशवंत भइया कि इन्हीं गोस्वामी की इस सरेआम पिटाई, जिसमें गार्डों ने उन्हें जमीन पर गिराकर जूतों और लातों से पीटा, उन्हीं के संस्थान यानी दैनिक जागरण के लोग उनके पक्ष में अब तक चुप्पी साधे हुए बैठे हुए हैं। मैं तो कहता हूं कि अब यूपी में पत्रकारों की पिटाई का एक निहायत बेहतरीन दौर शुरू हो चुका है। कम से कम छोटे पत्रकारों को तब तक इसका स्वागत करना चाहिए जब तक कि बडे पत्रकारों को ऐसी पिटाई से खौफ ना लगने लगे और वे छोटों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठायें। ना कि अपनी दलाली तक पर ही जुटे रहें। मैं तो कहता हूं कि शिवशंकर गोस्वामी को अपनी करतूतों और बडे पत्रकारों को छोटे पत्रकारों की हाय लगनी शुरू हो गयी है। बधाई हो बडे पत्रकारों।

  7. amitabh

    September 24, 2010 at 12:02 am

    big deal.why should he park his scooter anywhere? why did he abused the cops doing their jobs.

  8. sushil tripathi

    September 24, 2010 at 5:19 am

    ye ghatna sirf lucknow ke liye balki pure desh ke liye sharmanak hai. kam se kam gardon ko goswami ji ke umra ka khyal to karna chahiye tha. is par patrakaron ki chuppi aur jyada pareshan karne wali hai. kam se kam unhe doshiyon ko saja dilane tak chup nahi hona chahiye. aur phir gardon ko mar pit ka adhikar kisne diya hai.

  9. noopur67

    September 24, 2010 at 12:18 pm

    यह बेहद मजेदार घटना है गोस्वामी जी की तुलना रावण से भी कर दी गई है एक तो उनकी पिटायी हुई उपर से ऐसे कमेंट मिल रहें है तो जाहिर है कि यह बात साफ हो गई कि सब पत्रकार अच्छे नही होते है। सुना है गोस्वामी जी पत्रकारों की एक समिति के सचिव है जिसे प्रदेश्‍ा सरकार से काफी फंड मिलता है जहां वे रहते है वहीं उप्र सरकार ने समिति के नाम से एक मकान आवंटित कर रखा है जिसक भरपूर उपयोग गोस्वामी के द्वारा किया जाता है, जिस समिति में गोस्वामी है उसमे नये सदस्य नही बनाए जाते है क्योंकि फंड का अपने खास लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है चर्चा है कि समिति के फंड से ही गोस्वामी जी अपने तीन पेंशन पालसी का प्रीमियम भरते है, किसकों एक भी नही कोई तीन तीन पालसी का प्रीमियम सरकारी धन से वह भी मायावती के राज में।

  10. rizwan mustafa

    September 25, 2010 at 11:51 am

    patrkaro par ho rahe hamlo se dalal type ke reporter behad khush hote hai ,aisa pichle dino se aa rahi khabre sabit kar rahi hai ,lanat hai Patrkaro ki beizzati karne walo,dalalo, tum apna kam karte raho,reporter ki hanak dhamak na kam hoti na kam hogi, ha agar hum in hadso se khush hone ke bajaye ehtejaj shuru karde to beizzati karne ki mansha rakhne walo ke munh kale honge

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