असम सरकार द्वारा बांटे गए लैपटाप से वंचित उपसंपादकों ने एक संगठन बनाया है। ताकि संगठन के माध्यम से डेस्क पर काम करने वाले उपसंपादकों की मांगों को सरकार के सामने उठाया जा सके। प्रदेश के करीब 30 अखबारों के उपसंपादकों ने गुवाहाटी प्रेस क्लब में एक बैठक कर संगठन बनाने का फैसला किया। आनन-फानन में असम वर्किंग जर्नलिस्ट (उपसंपादक) नाम से एक संगठन भी बना लिया गया। विभाग भी बांट दिए गए।
बैठक में शामिल उपसंपादकों ने अपने विचार रखे, संगठन के माध्यम से उपसंपादकों के हितों के लिए काम करने का दावा किया लेकिन उनका क्षोभ मुख्य रूप से लैपटाप को लेकर था। कई उपसंपादकों का कहना था कि सरकार लैपटाप वितरण के मामले में उपसंपादकों के साथ भेदभाव कर रही है। लैपटाप वितरण सहित तमाम वे योजनाएं, जो पत्रकारों के लिए सरकार शुरू करती है उसका फायदा सिर्फ रिपोर्टरों को प्रदान किया जाता है।
कई उपसंपादकों ने तो एक्रिडिशन के मामले को भी बैठक में उठाया। उनका कहना था कि एक्रिडिशन के मामले में पूरी तरह से भेदभाव बरता जाता है। कई बार दस साल से ज्यादा अनुभव वाले लोगों को झट से एक्रिडिशन दे दी जाती है तो कुछ लोगों के आवेदन पर वर्षों तक विचार तक नहीं किया जाता है। बैठक में कई लोगों ने सरकार से यह सार्वजनिक करने की मांग की कि लैपटाप किस आधार पर बांटा गया और किन लोगों को दिया गया।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.












shiv thakur
March 8, 2011 at 2:49 am
doob maro saalo…………………………………………….
shiv thakur
March 8, 2011 at 2:50 am
doob maro saalo
kranti kari patrakar
May 10, 2011 at 7:25 pm
dupty editor apni mansikta pradrshit kar jag hasai kra rahe hai ladai to desh ki aan baan saan ke liye ladi jati hai laptop ke liye etna bada drama lanat hai
RAJ ANANT PANDEY
August 5, 2011 at 8:20 am
Bad News for Editors which has orgnasied forLAPTOP.