देश में बनते दो भारत के बीच एक भारत रोज कुंआ खोदने और पानी पीने में लगा है तो दूसरा भारत इन जरूरतों को पूरा करने के बाद नए नए चीजों की तरफ आकर्षित हो रहा है. दूसरे भारत को आकर्षित करने के लिए तमाम प्रोडक्शन कंपनियां अपने उत्पादों को दूसरे भारत के उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की होड़ कर रही हैं. इसका फायदा टीवी एवं प्रिंट माध्यमों को हो रहा है.
पहले आवश्यकता को आविष्कार का जननी माना जाता था, परन्तु अब आविष्कार करने के बाद लोगों को बताया जा रहा है कि आपको इन चीजों की जरूरत है. इसके लिए विज्ञापनों का सहारा लिया जाता है. इसी का परिणाम है कि चालू वित्तीय वर्ष के पहले छमाही में टीवी एवं प्रिंट माध्यमों के विज्ञापनों में अच्छी खासी वृद्धि देखने को मिली है.
टीवी एवं प्रिंट माध्यम आमदनी कम होने तथा मंदी का बहाना बनाकर भले ही अपने कर्मचारियों के वेतन एवं अन्य सुविधाओं पर कम खर्च और कटौती करते हुए धन की कमी का विधवा विलाप कर रहे हों, परन्तु दूसरी तरफ वो विज्ञापनों के माध्यम से जमकर पैसा पीट रहे हैं. एक बाजार सर्वेक्षण में पता चला है कि टीवी एवं प्रिंट माध्यमों में क्रमश: 18 एवं 16 फीसदी की वृद्धि पहली छमाही में हुई है. नीचे भाषा की खबर.
टीवी, प्रिंट के विज्ञापनों में जोरदार वृद्धि
इस साल के पहले छह महीनों में देश में टेलीविजन तथा प्रिंट मीडिया के विज्ञापनों में अच्छी खासी वृद्धि देखने को मिली। मीडिया बाजार अनुसंधान फर्म एडेक्स इंडिया का कहना है कि पहले छह महीनों में इसमें क्रमश: 18 प्रतिशत और 16 प्रतिशत की तेजी आई। इसके अनुसार इस दौरान टेलीविजन खंड के विज्ञापनों में बड़ा हिस्सा खाद्य एवं पेय, पर्सनल केयर तथा सेवाओं का रहा जबकि प्रिंट के विज्ञापनों में शिक्षा तथा सार्वजनिक क्षेत्र का बोलबाला रहा।
एडेक्स इंडिया का कहना है कि टीवी पर विज्ञापनों की समयावधि (एयरटाइम) पहले छम महीने (2011) में 18 प्रतिशत बढ़कर 1,27,256 घंटे हो गई। टेलीविजन के विज्ञापनों में 60 प्रतिशत हिस्सा खाद्य व पेय, पर्सनल केयर, सेवा, वाहन तथा दूरसंचार कंपनियों का रहा। टीवी के लिए विज्ञापन देने वाली पांच शीर्ष कंपनियों में यूनिलीवर, रेकिट बेंकिसर, कोका कोला इंडिया, कैडबरी इंडिया तथा आईटीसी हैं। इस दौरान जिन पांच ब्रांडों के विज्ञापन सबसे अधिक रहे उनमें स्पराइट, कंपलान, कोलगेट डेंटल क्रीम, माजा तथा आइडिया सेल्यूलर है। वहीं प्रिंट मीडिया में विज्ञापनों में तीन क्षेत्रों सेवा, शिक्षा तथा बैंकिंग (फिनांस व निवेश सहित) का बोलबाला रहा। साभार : भाषा











