सीएम ने पत्रकारिता विश्‍वविद्यालय की विद्या परिषद में पांच पत्रकारों का नामांकन किया

भोपाल. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की विद्यापरिषद में सदस्यों का नामांकन विश्वविद्यालय की महापरिषद के अध्यक्ष एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा किया गया है। नये सदस्यों में देश के वरिष्ठ पत्रकार राधेश्याम शर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार, लेखक एवं पत्रकार कैलाश पंत, राष्ट्रीय एकता परिषद के उपाध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार, समाजसेवी एवं पत्रकार कृष्ण कुमार अष्ठाना एवं दैनिक भास्कर, भोपाल के स्थानीय संपादक आनंद पाण्डे शामिल हैं।

विज्ञापनों से जमकर पैसा पीट रहे हैं टीवी एवं प्रिंट माध्‍यम

देश में बनते दो भारत के बीच एक भारत रोज कुंआ खोदने और पानी पीने में लगा है तो दूसरा भारत इन जरूरतों को पूरा करने के बाद नए नए चीजों की तरफ आकर्षित हो रहा है. दूसरे भारत को आकर्षित करने के लिए तमाम प्रोडक्‍शन कंपनियां अपने उत्‍पादों को दूसरे भारत के उपभोक्‍ताओं तक पहुंचाने की होड़ कर रही हैं. इसका फायदा टीवी एवं प्रिंट माध्‍यमों को हो रहा है.

अयोध्याकांड : पत्रकारिता दिवस यात्रा वाया मच्छर से लिंग तक

यशवंत सिंहपत्रकारिता दिवस आया और चला गया. 29 और 30 मई को जगह-जगह प्रोग्राम और प्रवचन हुए. मैंने भी दिए. अयोध्या में. अयोध्या प्रेस क्लब की तरफ से आमंत्रित था. अपने खर्चे पर गया और आया. लौटते वक्त 717 रुपये अतिरिक्त ट्रेन में काली कोट वाले को दे आया. वापसी का टिकट कनफर्म नहीं हो पाने के कारण रुपये देकर भी ट्रेन में ठीक से सो न सका.

मीडिया का दूसरा नाम विपक्ष और हस्तक्षेप

: रामनगर (उत्तराखंड) में 14 वरिष्ठ पत्रकार हुए सम्मानित : रामनगर। श्रमजीवी पत्रकार यूनियन रामनगर ईकाई ने पत्रकारिता दिवस के मौके पर वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मानित करने के साथ ही गोष्ठी आयोजित की। नवनिर्मित आडिटेरियम भवन में श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ हाईकोर्ट के न्यायाधीश पीसी पंत व कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वीपीएस अरोरा ने दीप प्रज्जवलित कर किया।

चंडी, अमिताभ समेत कई को राजीव गांधी एक्सीलेंस एवार्ड

चौराहा.इन के संपादक और चर्चित युवा पत्रकार चंडीदत्त शुक्ल को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से प्रकाशित “सीमापुरी टाइम्स” हिंदी समाचार पत्रिका की ओर से “राजीव गाँधी एक्सीलेंस अवार्ड-2011” से सम्मानित किये जाने की घोषणा की गयी है. समाज में विभिन्न क्षेत्रों में किये गए उत्कृष्ट कार्यों हेतु सीमापुरी टाईम्स की ओर से हर वर्ग के लोगों को सम्मानित किया जाता है. शुक्ल को न्यू मीडिया, पत्रकारिता, साहित्य लेखन में महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया जा रहा है.

अब मदरसों में होगी पत्रकारिता की पढ़ाई

उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड ने प्रशिक्षित उर्दू पत्रकारों की कमी दूर करने के लिये कोर्स शुरू किया है. प्रशिक्षित उर्दू पत्रकारों की ‘कमी” को दूर करने और पत्रकार के लिये जरूरी क्षमताओं को विकसित करने के लिये उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड ने ‘उर्दू सहाफत’ में एक खास प्रशिक्षण कोर्स शुरू किया है. बोर्ड के रजिस्ट्रार जावेद असलम ने बताया, “पत्रकारिता में प्रशिक्षित लोगों की कमी को दूर करने और उर्दू को हिन्दी और अंग्रेजी की तरह जनसंचार का माध्यम बनाने के लिये हम मदरसे से पढ़कर निकलने वाले आलिम (12वीं) और कामिल (स्नातक) छात्रों को उर्दू पत्रकारिता का प्रशिक्षण दे रहे हैं.”

”छत्‍तीसगढ़ का निर्माण यहां के पत्रकार और अखबारों ने किया”

: मीडिया विमर्श के आयोजन में बोले दिग्‍गज पत्रकार : वरिष्ठ पत्रकार बसंतकुमार तिवारी का कहना है कि छत्तीसगढ़ जैसे पिछड़े इलाके में जागरूकता और विकास के काम दरअसल पत्रकारिता के सक्रिय हस्तक्षेप से ही संभव हो पाए। यहां तक कि राज्य निर्माण के लिए कोई प्रभावी आंदोलन न होने के बावजूद भी यह राज्य बना तो इसका श्रेय भी यहां के स्थानीय पत्रकारों और अखबारों को है। वे मीडिया विमर्श (जनसंचार के सरोकारों पर केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका) द्वारा आयोजित संगोष्ठी ‘छत्तीसगढ़ के विकास में मीडिया की भूमिका’ विषय पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन रायपुर प्रेस क्लब के सभागार में किया गया था।

पत्रकार कहीं क्रांतिकारी हिंसा की ओर न जाने लगे

पत्रकारिता में जिस तरह से पूंजीवादी शक्तियों का शोषण बढ़ता जा रहा है, उसे देखते हुए ऐसी संभावना बन सकती है कि पत्रकार क्रांतिकारी हिंसा का रास्ता अपनाकर चुन-चुन कर उन लोगों को मारे जो इस मानवीय क्षेत्र को पाशविक शोषण का शिकार बनाए हुए हैं. पत्रकारिता में ऐसे लोगों की कोई कमी नहीं, जिनके अंदर खुदी राम बोस, चंद्रशेखर आज़ाद और भगत सिंह वाला ज़ज्बा पलता है, लेकिन इस देश में उस ज़ज्बे की चिंगाड़ी को शोला बनाने वाली विचारधारा का अभाव है.

इंटर्नशिप के लिए सीएम, नौकरी के लिए पीएम

आशीष: गांधी की पत्रकारिता आउटडेटेड हो गई है : आदेश ने छह साल पहले गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज में दाखिला लिया था। वह आने वाले दस साल में खुद को प्रभु चावला, आशुतोष, दीपक चौरसिया के आस-पास देख रहा था। गौरतलब है कि इनमें एक भी पत्रकार प्रिंट के नहीं हैं। वैसे आदेश को जल्द ही यह बात समझ आ गई कि यह क्षेत्र उसके लिए नहीं है। तकरीबन दो साल पहले उसने पत्रकारिता को तौबा कर एक आयुर्वेदिक कंपनी के दवा बेचने का काम शुरु किया। इस काम से आदेश बीस-बाइस हजार रुपए हर महीने कमा लेता है।