वेतन बोर्ड लागू करने में हो रही देरी से नाराज पत्रकारों ने शुक्रवार को यहां श्रम मंत्रालय और अखबार मालिकों के संगठन आईएनएस के सामने विरोध प्रदर्शन करते हुए सरकार को चेतावनी दी कि अगर 16 जून तक इस संबंध में अधिसूचना जारी नहीं की गई, तो वे देशव्यापी हड़ताल प्रदर्शन करेंगे. वेतन बोर्ड लागू करने की मांग को लेकर तख्तियां और बैनर लिए आईएनएस के सामने जुटे पत्रकारों और गैर पत्रकारों ने इस दलील को झूठ बताया कि इसे लागू होने से अखबार उद्योग कठिनाई में आ जाएगा.
अखबारी कर्मचारियों के महासंघों के शीर्ष संगठन कनफेडरेशन ऑफ न्यूजपेपर्स एंड न्यूज एजेंसी एम्प्लायज यूनियंस के महासचिव एमएस यादव ने कहा कि यह एक तथ्य है कि हर बार बेतन बोर्ड के बाद अखबारों की कमाई में बढ़ोतरी ही हुई है. उन्होंने कहा कि पिछले 15 वर्षों में अखबारों के मुनाफे में अंधाधुंध वृद्धि हुई है जबकि पत्रकारों और गैर पत्रकारों के वेतन में मामूली वृद्धि हुई है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर 16 जून तक वेतन बोर्ड की सिफारिशों संबंधी अधिसूचना जारी नहीं की गई तो पत्रकार और गैर पत्रकार देश भर में बड़े पैमाने पर धरना, विरोध प्रदर्शन और हड़ताल करेंगे.
यादव ने कहा कि अखबार के मालिक प्रेस की आजादी का भी हनन कर रहे हैं. एक ओर तो वे वेतन बोर्ड लागू होने अखबारों पर पड़ने वाले कथित दबाव की दलीलें दे रहें लेकिन वे पत्रकारों के पक्ष को प्रकाशित नहीं कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रेस की आजादी के इस दुरुपयोग के खिलाफ हम प्रेस कौंसिल में भी जाएंगे. कनफेडरेशन के तहत आयोजित विरोध प्रदर्शन को आईजेयू के अध्यक्ष सुरेश अखौरी, यूनएनआई के एमएल जोशी और मुकेश कौशिक और आईएफडब्ल्ूयूजे के परमानंद पांडेय के अलावा कुछ अन्य नेताओं ने संबोधित किया. यादव ने कहा कि जीआर मजीठिया की अध्यक्षता वाले वेतन बोर्ड ने 31 दिसम्बर, 2010 को अपनी अंतिम सिफारिशें सरकार को सौंप दी थी लेकिन दबाव के कारण सरकार ने अभी तक इसे अधिसूचित नहीं किया है, जिसे लेकर पत्रकारों में भारी रोष है. साभार : जनसत्ता












