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दुख-दर्द

सहारा समय के पूर्व ब्रांड हेड बीएम द्विवेदी ने आत्महत्या की

बीएमसहारा समय मध्यप्रदेश के पूर्व ब्रांड हेड बृजमोहन द्विवेदी उर्फ बीएम द्विवेदी ने इंदौर के सुखलिया इलाक़े में स्थित अपने प्राइम सिटी निवास में आत्महत्या कर ली. उनका शव उनके घर के किचेन में पत्‍नी की साड़ी से लटकता मिला. उनके हाथों का नस भी कटा हुआ था. बीएम के आत्‍महत्‍या की जानकारी उस समय हुई जब उनके सहयोगी तन्‍मय मोबाइल रिसीव न होने पर उनके घर पहुंचे. पुलिस मामले की जांच कर रही है.

बीएमसहारा समय मध्यप्रदेश के पूर्व ब्रांड हेड बृजमोहन द्विवेदी उर्फ बीएम द्विवेदी ने इंदौर के सुखलिया इलाक़े में स्थित अपने प्राइम सिटी निवास में आत्महत्या कर ली. उनका शव उनके घर के किचेन में पत्‍नी की साड़ी से लटकता मिला. उनके हाथों का नस भी कटा हुआ था. बीएम के आत्‍महत्‍या की जानकारी उस समय हुई जब उनके सहयोगी तन्‍मय मोबाइल रिसीव न होने पर उनके घर पहुंचे. पुलिस मामले की जांच कर रही है.

बीएम सहारा समय से हटाए जाने के बाद से वे बहुत परेशान चल रहे थे, क्योंकि सहारा ने उनके करीब छ्ह लाख रुपये का भुगतान तो रोक ही रखा था, साथ ही सहारा समय मध्य प्रदेश चैनल की ब्रान्डिंग के लिए भोपाल, इंदौर, रायपुर, जबलपुर, सतना, कटनी, उज्जैन, रतलाम आदि शहरों में लगाए गये आठ लाख रुपये के होर्डिंग्स का पेमेंट भी रोक रखा था और होर्डिंग्स कंपनियाँ उन पर तकादे पर तकादे लगा रही थी.

इसके चलते द्विवेदी बार-बार अपना फ़ोन नंबर बदलते फिर रहे थे. जब उन्हें घर का खर्च चलाना कठिन हो गया तब उन्होंने एक टिफिन सेंटर और रेस्टोरेंट खोला, लेकिन उसमें भी भारी घाटा हो गया था और कर्ज़दार पीछे पड़ गये थे. बीएम द्विवेदी की नियुक्ति सहारा समय में सुमित रॉय के वक्त की गयी थी. उस दौर में सहारा की कोई पहचान एड वर्ल्ड में नहीं थी. सहारा की ब्रान्डिंग के लिए उन्हें कहा गया तो उन्होंने अपने राज एक्सप्रेस और दैनिक भास्कर के पुराने संपर्कों का लाभ लेते हुए सहारा की ब्रान्डिंग में अपना तन मन लगा दिए.

सहयोगी कहते ही रह गये कि ये सहारा कंपनी है जो कभी किसी की नहीं हुई और यह बात सच हो गयी जब उन्हे परेशान कर कर के इस्तीफ़ा देने को मज़बूर कर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. कुछ ही दिन बाद सुमित रॉय को भी चलता कर दिया गया लेकिन बीएम का हिसाब नहीं किया गया.  उन्होंने दर्जनों पत्र लिखे, ई- मेल पर ई-मेल भेजे, लेकिन उनका भुगतान नहीं हुआ. सहारा वाले सुमित रॉय के आदेश से किए गये खर्च का भुगतान नहीं करने पर अड़ गये. उन्होंने एचआर हेड लोकेश शर्मा से लेकर सुब्रत रॉय तक को क़ानूनी नोटिस भी दिए मगर सहारा के बड़े-बड़े वकीलों ने उनका पेमेंट नहीं होने दिया.

आर्थिक परेशानी के चलते बीएम ने भारी क़र्ज़ लेकर ‘माय मील’ नामक टिफिन सेंटर खोला और जल्दी ही कारोबार को फैला लिया लेकिन आर्थिक कष्ट पीछे लगे रहे. कर्ज़ लेकर बिजनेस का तरीका उन्हें नहीं आता था. इंदौर में कई अख़बारों का कारोबार जमाने वाले बीएम फेल हो गये. सहारा से उन्हें अपने पैसे मिलने की आशा थी, जिस बूते पर उन्होंने कर्ज़ ले रखा था. फिर उन्होंने अपना जीवन खुद ही समाप्त करने का मन बनाया.

38 साल के बीएम द्विवेदी के जाने से उनके बूढ़े माता-पिता, 11 साल की बेटी और उनकी पत्नी के अलावा किसी को कोई फ़र्क नहीं पड़ा. सहारा की तरफ से उनको श्रद्धांजलि तक देने कोई नहीं गया. अब सहारा को उनकी कोई ई-मेल या चिट्ठी नहीं मिलेगी. कारोबार और मतलब की इस दुनिया में बीएम की जगह और कोई आ जाएगा.

उनकी पत्‍नी कविता उर्फ सोनू और उनकी बेटी कामना दो दिन पहले ही मायके गई हुई थीं. उन्‍होंने आत्‍महत्‍या करने से पहले अपने खून से किचेन की दीवार पर आई एम सॉरी सोनू लिख रखा था. वैसे आत्‍महत्‍या के मूल कारणों की जानकारी नहीं मिल सकी है.

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0 Comments

  1. Anil Saxena

    May 2, 2011 at 4:43 am

    यह अखबारी दुनिया बड़ी रहस्यमई है. यहाँ दूसरे के हक की आवाज उठाई जाती है लेकिन अपने हक की लाश पर खड़े होकर. खुद अँधेरे में रहकर दूसरें को रौशनी दिखाई जाती है. आदर्शवादिता यहाँ सिर्फ ढकोसला है. सीधे सीधे यह एक बनिए की दुकान है. जब तक लाला खुश तब तक नौकरी सलामत. योग्यता गयी भाड़ में. द्विवेदी जी इस तथ्य को समझ नहीं पाए और जिन्दगी से हाथ धो बैठे. भगवान् उनकी आत्मा को शांति दे.

  2. khushbu

    May 2, 2011 at 6:46 am

    shara smay ke brand head ke sath jo kuchh bhi kiya glat hai|uske privaar ko roki gyi raashi shara smay ko deni hi pdegi|dwivedi ke privaar ko insaaf milna hi chahiye……….or shara smay ke khilaaf uchit kaarwai ki jani chahiye,………

  3. pradeep sharma

    May 2, 2011 at 8:13 am

    kya indore k patrakaar bm susaide mamle me sahara valo par aatamhatya k liye prerit karne k liye majboor karne ka mukadma justice k liye dakhil karne ki himmat karege ? ya khud k saath is tarah ki kahani dohrane ka intjaar karege ?

  4. pc ravi

    May 2, 2011 at 8:22 am

    आदमख़ोर सहारा ग्रुप में पेराबेंकिंग में तो ऐसी घटनाएँ आम बात है, पर उनकी तरफ किसी का भी ध्यान नहीं जाता क्योंकि ज़्यादातर वर्कर आठवीं-दसवीं पास होते हैं और रूरल बेल्ट में होते हैं. आप तपतीस करे तो पाएँगे कि यह सामान्य बात है ‘माननीय’ लोगों के लिए.[b][/b]

  5. pappu

    May 2, 2011 at 11:47 am

    kya media me bhi koi aana paida hoga, kahi hum log dusre ke liye larte hua yu her marne ko majboor honge.

  6. sachin dhomne

    May 3, 2011 at 4:04 pm

    mere b m sir aisa karenge maine kabhi ye socha hi nahi tha. mai sir ke sath raj express me tha. sir ne hi mera appointment karaya tha. aur mera kam bhi unhe kafi pasand tha. sir jab hum sab sathiyo ko kuch kahate ya motivate karate to hum bus unhe sunate hi rahate. rat rat bhar hum sab milkar sir ki bate sunate. unase milne ke bad koi bhi person believe nahi kar payega ki b m dwivedi is tarah ka kadam uthayenge. sir kyo apne aisa kiya. apne hi hame jindagi ke har mushkilo ka samana karne ka rasta bataya. aur apne hi aisa kar liya. shayad meri comment padhkar kisi ko hasi aye lekin maine sir ko kafi karib se jana hai. sir apki atma ko shanti mile yahi bhagwan se prarthana hai. aur muje apki kami jindagi bhar mahasus hogi sir.

  7. Awadhesh sharma

    May 3, 2011 at 6:35 pm

    Hum sabhi marketing wale theek usi MAHABHARAT ke Abhimannu ki tarah apne pariwar ki jimmedari nibhane ke liye ,aur apne carrier ko banane liye in Media ke MAHAGRUO ke chakraview me fas to jate hai per use tod nahi pate…
    SAHARA SAMAY …KA KAM SAHARA DE NA HAI NA KI SAHARA CHINNA……………?
    KAB TAK JALAOGE DEEP MERI MAJAR PER AYE YEERO,
    ME TO ROAJ SUBHA JEE KAR SHAAM KO MARNE WOLO ME SE HU.[/b][/b][/b][/b]

  8. ruby sarkar

    May 4, 2011 at 8:03 am

    koii bhii ho ham-safar ‘Raashid’ na ho Khush is qadar
    ab ke logon mein vafaa hai kam zaraa aahistaa chal

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