: जोरदार आइडिया : ‘प्रदेश टुडे’ में प्रकाशित मीडिया मिर्ची से कई तिलमिलाए : अगर कोई अखबार या पत्रिका मीडिया हाउसों के अंदर की खबरें छापने लगे तो जाहिर है, कम से कम मीडिया सर्किल में इसकी खूब चर्चा होगी. यह फार्मूला भोपाल से 20 दिनों पहले प्रकाशित सांध्य दैनिक प्रदेश टुडे ने आजमाया है. सांध्य दैनिक ‘प्रदेश टुडे’ संपादकों का संपादक बन बैठा है.
इस अखबार के एडिटर इन चीफ मिस्टर हृदयेश दीक्षित हैं. इन महोदय ने अपने अखबार में दूसरे प्रमुख अखबारों की समीक्षा का काम शुरू कर दिया है. ये वही हृदयेश दीक्षित हैं जो राज एक्सप्रेस, इन्दौर में रह चुके हैं. ये भास्कर में राजनैतिक संवाददाता रह चुके हैं. प्रदेश टुडे में जो मीडिया मिर्ची नामक कालम शुरू हुआ है, उसमें सूरमा भोपाली के नाम से लेखन हृदयेश दीक्षित ही करते हैं. इनकी समीक्षाओं को लेकर अब सवाल खड़े होने लगे हैं. आरोप है कि हृदयेश दैनिक भास्कर व इसके संपादक कल्पेश याज्ञनिक की भरपूर व भूरिभूरि तारीफ करते हैं जबकि पत्रिका की खाट खड़ी करने में कोई कसर नहीं छोड़ते. कुछ लोगों का कहना है कि यह समीक्षा दरअसल हृदयेश द्वारा अपना अखबारी कॅरियर सुरक्षित रखने का एक उपाय है ताकि आगे-पीछे जरूरत पड़ने पर भास्कर की दया-दृष्टि बनी रहे.
भास्कर की निरन्तर तारीफ का दूसरा कारण यह बताया जा रहा है कि इस अखबार की प्रिन्टिंग भी भास्कर में ही हो रही है. भोपाल का दूसरा सबसे बड़ा अखबार पत्रिका इन्हें नहीं सुहा रहा है. उसके एक ब्यूरो चीफ की यह प्रतिदिन बुराई करते हैं क्योंकि भास्कर के समय से ही इस वरिष्ठ पत्रकार से इनकी पटरी नहीं बैठी और उनके रहते पत्रिका में इनकी दाल नहीं गलने वाली, यह जानते हैं. बाकी दैनिक जागरण, पीपुल्स समाचार, नवदुनिया को यह अपनी समीक्षा में श्रीकृष्ण के दूसरे अवतार की तरह सफलता का पाठ पढाते दिखते हैं और प्रतिदिन उनकी कोई ना कोई मीन-मेंख निकाल ही देते हैं. मजेदार बात यह है कि बाहुबली के रूप में जाने जाने वाले राज एक्सप्रेस के चेयरमैन से खौफजदा हृदयेश दीक्षित इस अखबार का नाम तक अपनी समीक्षा में लिखने से डरते हैं. जो भी हो, लेकिन सांध्य दैनिक में प्रातःकालीन अखबारों की समीक्षा एक जोरदार आइडिया है और इस मीडिया मिर्ची के कारण कई लोग तिलमिला रहे हैं तो भी पापुलरटी नए ब्रांड व हृदयेश दीक्षित को मिल रही है.
प्रदेश टुडे के 22 और 21 अप्रैल के अंकों में प्रकाशित मीडिया मिर्ची कालम को पढ़ने के लिए क्लिक करें…
अखबारों की समीक्षा (22 अप्रैल)
अखबारों की समीक्षा (21 अप्रैल)
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.












ritesh
April 23, 2011 at 8:45 am
सबसे पहले इन्हें अपने अखबार और अपने कर्मचारियों की समीक्षा करनी चाहिए…अखबार में हेडर गलत जा रहे हैं…ख़बरों में कोई दम नहीं…अखबार के नाम पर दलाली शुरू हो चुकी है
Ankit Khandelwal
April 23, 2011 at 9:37 am
Iska naam badakarke ‘chaplooss time’ rakh dena chahyein…
lovely
April 23, 2011 at 9:40 am
This is very good idea that the analysis of the leading morning newspaper and their work towards the readers. I hope that there are so many things to analyze i.e. what happen in the media houses, how the employees will run their life in these situations. I think the inhouse activities and atmosphere in which the employees working at present now of the media houses is also be analyze by you to give some relief to your collegues and other employees of the media. By the help of god you r doing good job but u will try to expand your area of job and do the best for the needy persons of the media houses.
ravindra
April 23, 2011 at 9:49 am
hridesh babu apni line lambi karna nahi aaya to doosroo ke line chooti karne lage. poori tarah se bajaj ke foot print pal chal rahe ho. bajaj bichoo to tum snake. doono he without teeth. dalali kare bina bhe patrakarita ho sakti yah baat shayad aapko aapke GURU ne nahi padai. doosre akhbaro ke samicha kar aapna akhwar kala kane ke bajaye aapna PILLA akhwar sudharo.
balwant
April 23, 2011 at 9:55 am
वाह सूरमा दीक्षित ,
यह तो वही बात हुयी कि कोई चौथी फेल छात्र
बीए की कापियां जांचने का शौक पाल ले ……
शायद इसी लिए खुदा कभी गंजों को नाखून नहीं देता….
rahulraj
April 23, 2011 at 10:01 am
एडिटर इन चीफ मिस्टर हृदयेश दीक्षित IAS joshi dampti se kam nahi hain inke bade bade karname hain ,Raj Exp. ke sampadak rahte huae inke ghar per income tex ka rade padi the Tabi se Raj Exp.Ke malik Arun Ji ke najar me ye aa gaye they our kuch time bhad inhe chalta kar diya tha imandari se kam karne wale patrakaro ke kam ke samikasha be imandar patrakar he kar sakta hain Kalpesh Yagnik kee chaddi dhone se ye imandar kabhi be nahi ho sakte
sharma_bpl
April 23, 2011 at 11:57 am
ok………………………..bhai
पहले अपने अखबार की समीक्षा करनी चाहिए इन्हें
ashish kulkarni
April 23, 2011 at 12:01 pm
Ghatiya log akhbar chalayenge to ghatiya idea hi aayenge …..
rakesh
April 23, 2011 at 12:50 pm
शायद आप लोगों को पता नही है कि इससे तीन साल पहले अवधेश बजाज इस तरह का कालम अपनी वेबसाइट पर चलाते थे। उस समय भड़ास भी ब्लाग जैसा ही था और मध्यप्रदेश में पत्रकार भड़ास से ज्यादा अवधेश बजाज की वेबसाइट पढ़कर मजे लेते थे।
vijay singh
April 23, 2011 at 2:56 pm
ये होते कौन है. दुसरे अखबारों को समीक्षा करने वाल़े. पहले अपना अख़बार ठीक से निकाले…….
arvind khare
April 23, 2011 at 5:05 pm
ya idea predesh today ka nahi ha balki indore ke ek sadakchap sandhya akhbar se churaya ha. isise pradesh today ka istar jahir hota ha.
arbaaz
April 23, 2011 at 9:26 pm
indore se prakashit ho rahe prabhat kiran mein arse se aisee samiksha aati rahi hai lekin soorma kee tarah faaltu baaton par bhee prashansa ke pool nahin baandhe jaate..rochak hota hai vah analysis..soorma kaa vishleshan to ubaaoo hai..sanyog hee hai ki ye akhbaar bhee bhaskar printery mein hee chhapta hai….
Dinesh Joshi, [email protected]
April 24, 2011 at 4:22 am
वाह भाई, अब राखी सावंत सचिन तेंडूलकर को बेटिंग सिखाने चली हे. धन्य हो.
sanjay kshitiz
April 24, 2011 at 11:59 am
दिनेशजी परफेक्ट कमेंट। बल्कि राखी सावंत के बजाए पूनम पांडे कहिए।