: अपडेट-3 : नेशनल ब्यूरो से अमिताभ, विकास और विजेन्द्र के नाम : हिन्दुस्तान से एक बड़ी खबर आ रही है. नेशनल ब्यूरो से तीन तथा संपादकीय से एक वरिष्ठ को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. शशि शेखर के संपादक बनने के बाद से ही मृणाल पांडे के समय महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत लोगों को बाहर भेजे जाने का सिलसिला लगातार जारी है.
नेशनल ब्यूरो से अमिताभ पराशर, विकास द्विवेदी और विजेन्द्र रावत को हटाये जाने की खबर है. तीनों लोग नेशनल ब्यूरो में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे थे. हालांकि सूत्रों का कहना है कि अमिताभ पराशर और विजेन्द्र रावत अभी भी हिन्दुस्तान के हिस्से हैं. उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया गया है. विजेन्द्र रावत और अमिताभ पराशर की गिनती तेजतर्रार पत्रकारों में की जाती है. ये लोग पिछले कई वर्षों से हिन्दुस्तान की टीम से जुड़े हुए हैं.
पुराने हिन्दुस्तानी और हिन्दुस्तान, दिल्ली के एसोसिएट एडिटर अरुण कुमार त्रिपाठी पर भी गाज गिरी है. उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया है. अरुण त्रिपाठी ने अपने इस्तीफा देने की पुष्टि की. उन्होंने इस्तीफा देने के कारणों पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. लेकिन बताया जा रहा है कि शशि शेखर के आने के बाद कार्यालय के माहौल में व्याप्त तनाव और राजनीति से अरुण काफी परेशान चल रहे थे. अरुण की गिनती क्षमतावान पत्रकारों में की जाती है.
इधर, पुराने हिन्दुस्तानियों पर गाज गिराने का क्रम लगातार चल रहा है. उल्लेखनीय है कि इसके पूर्व हिन्दुस्तान से वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सौरभ को इस्तीफा देने पर मजबूर किया गया था. प्रदीप सौरभ दिल्ली के चर्चित और बेहतरीन पत्रकारों में शुमार किए जाते हैं. सूत्रों के मुताबिक शशि शेखर एंड कंपनी जिस तरह पुराने हिन्दुस्तानियों को एक-एक कर निपटा रही है उससे दिल्ली-एनसीआर के पुराने लोगों का दिल काम करने में कम लग रहा है. उनकी ज्यादा ऊर्जा यह सोचने में जाया हो रही है कि न जाने अब किसकी बारी है, न जाने अब किस पर गाज गिरेगी.
प्रदीप सौरभ के पहले शशि शेखर के निजी सहायक यानी पीए अमित शर्मा पर भी गाज गिरी थी. अमित की नियुक्ति हिंदुस्तान प्रबंधन की तरफ से की गई थी. लेकिन अमित का सहायक रवैया प्रधान संपादक शशि शेखर को रास नहीं आया. लिहाजा अमित को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.
सूत्रों का कहना है कि पुराने हिन्दुस्तानियों को हटाने का पूरा तानाबाना नये प्रबंधन द्वारा अपने विश्वसनीय लोगों को लाने के लिए बुना जा रहा है. शशि शेखर के आने के बाद से ही पूर्व प्रधान संपादक मृणाल पांडे के लोगों को बाहर किए जाने का सिलसिला शुरू कर दिया गया था. पुराने हिन्दुस्तानियों को हटाकर शशि शेखर अपने कई विश्वस्त उजालाइटों को अपनी टीम से जोड़ चुके हैं. इसे लगातार मजबूत करने का सिलसिला अब भी जारी है. अब हिन्दुस्तान से कौन जायेगा और अमर उजाला से कौन आयेगा, इसकी चर्चा आम हो गई है.












sunita
October 30, 2010 at 3:33 am
Abhi to harjindar bhee jayenge.
anupam akela
October 31, 2010 at 2:55 am
newspaper ke daftaro ke liye ye 4 din purani khabar hai aab kyo published ker rahe ho