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मायावती के करोड़ों रुपये हवाला के माध्यम से विदेशी बैंकों में जमा है!

बात निकली है तो दूर तलक जाएगी. कभी महाईमानदार माने जाने वाले विजय शंकर पांडेय आज महाभ्रष्ट से संबंध रखने के कारण नप गए और आगे के उनके दिन दुर्दिन में तब्दील होने वाले हैं. सोचिए, विजय शंकर पांडेय जैसे अफसर मायावती के इतने करीब क्यों होते हैं. नीरा यादव और अखंड प्रताप सिंह जैसे महाभ्रष्ट मुलायक के बेहद करीब क्यों होते थे. इसलिए कि खग जाने खग ही की भाषा. बेइमानी करने की चाह रखने वाले अपने आसपास इस काम में दक्ष खिलाड़ी को ही रखते हैं.

बात निकली है तो दूर तलक जाएगी. कभी महाईमानदार माने जाने वाले विजय शंकर पांडेय आज महाभ्रष्ट से संबंध रखने के कारण नप गए और आगे के उनके दिन दुर्दिन में तब्दील होने वाले हैं. सोचिए, विजय शंकर पांडेय जैसे अफसर मायावती के इतने करीब क्यों होते हैं. नीरा यादव और अखंड प्रताप सिंह जैसे महाभ्रष्ट मुलायक के बेहद करीब क्यों होते थे. इसलिए कि खग जाने खग ही की भाषा. बेइमानी करने की चाह रखने वाले अपने आसपास इस काम में दक्ष खिलाड़ी को ही रखते हैं.

मायावती जब पिछली बार मुख्यमंत्री थीं और इस बार मुख्यमंत्री हैं, तो उसमें कुछ फर्क है. सत्ता के गलियारों की चर्चा पर भरोसा करें तो पिछली बार नोटों भरे ट्रक और नोट गिनने वाली मशीनें व इस पूरे अघोषित उपक्रम को संभालने वाले चंगू-मंगू इस बार सीन से गायब हैं. न ट्रक है, न नोट गिनने वाली मशीन है और न ही धोती-कुर्ता धारी चंगू-मंगू. इस बार सिर्फ गोलमोल करने कहने वाले टाई-कोट वाले गंगू-संगू हैं. धोती-कुर्ता यानि राजनीति. टाई-कोट यानि ब्यूरोक्रेसी. सत्ता के गलियारों की बात को सच मानें तो इस बार कागज के टुकड़ों ने वो कमाल दिखा दिया जो पिछली बार ट्रक व मशीन नहीं दिखा पाए. इधर एक सुपर प्रोजेक्ट फाइनल उधर दूर देश नोट के एक टुकड़े पर छपे नंबरों की मिलान के बाद करोड़ों-अरबों इस बैंक से उस बैंक में शिफ्ट.

पोंटी चड्ढा हों या जेपी ग्रुप वाले जयप्रकाश. सबने सत्ता को पटाने व रिश्वत देने के तरीके बदल डाले हैं. अब कोई बड़ा नेता या मुख्यमंत्री या मंत्री या प्रधानमंत्री रिश्वतखोरी में सीधे नहीं पकड़ा जा सकता. उसे रिकार्ड नहीं किया जा सकता. उसका स्टिंग नहीं हो सकता. क्योंकि अब लेनदेन इस देश में नहीं होता. यहां सिर्फ डील होती है और लेनदेन अरब देशों या यूरोपीय देशों के बैंक एकाउंट्स के जरिए हो जाता है. मनुष्य की जगह हवाला माध्यम बन गया है. इन कहानियों को विजय शंकर पांडेय के हसन अली के रैकेट में शामिल होना पुष्ट करता है. और कई संदेश व इशारे भी कर जाता है. सूत्रों के मुताबिक मायावती इस बार के कार्यकाल में जिन कुछ ब्यूरोक्रेट्स से घिरी हैं, शशांक शेखर, विजय शंकर से लेकर फतेह बहादुर तक, उन सभी ने बहुत कायदे से सब कुछ मैनेज किया है. इसी कारण बहन जी इस तिकड़ी चौकड़ी के चंगुल से बाहर निकलने को तैयार नहीं क्योंकि इस तिकड़ी के पास सारे राज हैं.

और, जरूरत सिर्फ बहन जी को ही नहीं थी. खुद इस तिकड़ी को भी जरूरत थी विदेशी लिंक की. इसलिए बहनजी के इस बार के कार्यकाल में लेनदेन की कहीं कोई अफरातफरी नहीं दिखी. लखनऊ में माहौल शांत रहता. सूत्रों के मुताबिक हसन अली के माध्यम से कई विदेशी बैंकों के एजेंट दिल्ली समेत कई राज्यों की राजधानियों के बड़े व भ्रष्ट नेताओं से मिलकर अपने अपने बैंकों की कार्यप्रणाली समझा चुके हैं और हसन अली जैसे कुछ देसी लोगों का भरोसा दिला चुके हैं. इसी कारण हसन अली हर पार्टी के नेता का प्रिय पात्र रहा. हर प्रदेश के भ्रष्ट नौकरशाह का प्रिय पात्र रहा. प्रवर्तन निदेशालय भले ही अभी सिर्फ किसी अमलेंदु पांडेय से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर कुछ लोगों यथा विजयशंकर पांडेय आदि से पूछताछ करने जा रहा है लेकिन सच्चाई तो तब सामने आएगी जब विजय शंकर पांडेय जैसे लोग पूरी हकीकत को बयान करें कि उन्होंने किस तरह अपने आकाओं के पैसों के विदेशों में उचित ठिकानों में ठिकाने लगाने की रणनीति समझाई-बताई और बनाई.

और सिर्फ विजय शंकर पांडेय ही क्यों, यूपी के कई शीर्ष नौकरशाह इस रैकेट के हिस्से हो सकते हैं. क्योंकि हसन अली किसी अमलेंदु के जरिए हसन अली नहीं बना बल्कि हसन अली के रैकेट का अमलेंदु बहुत छोटा खिलाड़ी था. पर यह आपको और हमको भी पता है कि राजपाठ करने वाले लोग बड़े शिकारियों-खिलाड़ियों को कभी नहीं छेड़ते क्योंकि ये बड़े शिकारी और बड़े खिलाड़ी तो वे खुद राजपाठ करने वाले लोग ही होते हैं सो भला वे खुद को कैसे छेड़ सकते हैं. हां, ये जरूर कर सकते हैं कि उनका अगर कोई भेद खोले हमारे आप जैसा आदमी तो हमें कानून की परिभाषा समझा कर जेल में जरूर डलवा सकते हैं. पहले भी कहा जा चुका है कि कानून सिर्फ वंचितों के लिए होता है और भरे पेट वालों के लिए कानून सिर्फ खेलने चीज होती है. और ये राजपाठ करने वाले कानून से खेलते हैं.

मुलायम सिंह के सगे भाई और मुलायम राज में माल पीटो अभियान के नेता शिवपाल यादव भले ही मायावती की तरफ इशारे कर करके गालियां दे रहे हों लेकिन सही बात तो ये है कि खुद समाजवादी मुलायम ने अपने कुनबे के हाथों अपनी राजनीति सौंप कर और अपने शासनकाल में ब्लाक व तहसील स्तर पर उगाही फैक्ट्री खुलवाकर इतनी मिट्टी पलीद करवा ली है कि उनमें नैतिक साहस नहीं है कि वे उगाही और भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलें. आज यूपी में हालात ये हैं कि लोग मुलायम सिंह यादव व उनका कुनबा व उनकी पार्टी शासन में न आ जाए, इस डर से मायावती से परेशान होकर भी मायावती को फिर से शासन में लाने के लिए तैयार हैं.

क्योंकि लोगों को ये लगता है कि माया राज में तो सिर्फ मायावती लूटपाट करती हैं लेकिन मुलायम के राज में तो तहसील व ब्लाक स्तर का सपाई भी कुख्यात व बर्बर लुटेरा बन जाता हैं. माया राज में कम से कम ये है कि अगर कोई बसपाई विधायक या मंत्री भी लूटपाट करता दिख जाता है या फंस जाता है तो मायावती उसे फौरन निपटाकर ये मैसेज देती हैं कि उनका कार्यकाल सपा वाला काल नहीं कि जिसका जो मन हो वो कर ले. तो, मुलायम और उनके भाई-बंधु इंतजार में हैं कि अराजकता, भ्रष्टाचार और कुशासन को मुद्दा बनाकर मायावती को सत्ता से बेदखल कर दिया जाए.

और फिर सत्ता की मिलाई सब लोग मिलकर खाई बांटी लूटी जाए. इसी कारण मुलायम के भाई-बंधु मायावती पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ते. कल शिवपाल ने मायावती पर कई आरोप लगाए. सुनिए उन्होंने क्या क्या कहा- ”मुख्यमंत्री मायावती के करोड़ों रुपये हवाला के माध्यम से विदेशी बैंकों में जमा किया गया है. मुख्यमंत्री के नजदीकी प्रमुख सचिव विजय शंकर पांडेय का नाम हसन अली के साथ आना गंभीर मामला है. इससे साबित होता है कि हसन अली के तार सीधे मुख्यमंत्री तक जुड़े हैं. मुख्यमंत्री का पैसा पांडेय के माध्यम से विदेशों में जमा किया गया है. प्रवर्तन निदेशालय ने कई बार इस मामले की जांच करने की प्रक्रिया प्रारंभ की लेकिन मुख्यमंत्री कार्यालय ने बाधा डाल दी. राज्यपाल अब मुख्यमंत्री को बरखास्त करें और पांडेय सहित सबकी जांच कराकर मुकदमा चलाकर जेल भिजवाएं. मुख्यमंत्री मायावती ने न्यायालय के आदेशों की अवहेलना की है. इस सिलसिले में सपा का प्रतिनिधिमंडल जल्द ही राज्यपाल से मिलेगा.  यह तो शुरुआत है. अभी मायावती के निकटस्थ कई शीर्ष अधिकारियों व उनके मंत्रिमंडल के कई मंत्रियों के नाम सामने आएंगे जिनका पैसा विदेशों में जमा है. मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ हसन अली से मायावती के रिश्तों का आरोप लगा रहा हूं. जांच में मुख्यमंत्री कार्यालय के रोड़ा डालने की बात तो खुद प्रवर्तन निदेशालय ने सर्वोच्च न्यायालय में ही कही है. सपा के पास और कई तथ्य हैं. कई और मंत्रियों व अधिकारियों के खिलाफ तथ्य एकत्र किए जा रहे हैं. अभी बहुत कुछ सच सामने आना बाकी है. इस मुद्दे पर सपा चुप नहीं बैठेगी.”

शिवपाल के आरोपों में दम है. विजय शंकर पांडेय सबसे पहले निपट जाएंगे ये किसी को अंदाजा नहीं था लेकिन यही खेल अब मायावती व उनके आसपास के ब्यूरोक्रेट्स पर भारी पड़ने वाला है. शशांक शेखर भले ही विजय शंकर के निपट जाने से खुद को यूपी का बादशाह मानने लगे हैं लेकिन सूत्र कहते हैं कि विजय शंकर के पास मायावती, शशांक शेखर, फतेह बहादुर आदि से संबंधित कुछ ऐसे दस्तावेज हैं जिसके सार्वजनिक हो जाने पर कोई नहीं बचेगा. सबकी कमजोर कड़ियों को विजय शंकर पांडेय ने बहुत करीने से अपने पास व्यवस्थित कर रखा था.  पर वे इसका इस्तेमाल इससे ज्यादा के लिए नहीं करने वाले थे कि कभी उनकी अनदेखी न की जाए. लेकिन अब जब वे अचानक काले धन वाले मामले में फंस चुके हैं तो इससे निकलने का कोई रास्ता भी विजय शंकर पांडेय के पास नहीं है. ऐसे में संभव है कि वे खुद तो डूबेंगे सनम, तुमको भी ले डूबेंगे वाला खेल खेल दे.

विजय शंकर पांडे का नाम आने के बाद भले ही यूपी सरकार ने विजय शंकर को पद से हटाकर राजस्व बोर्ड का सदस्य बना दिया हो और शशांक शेखर कह रहे हों कि यह विजय का पर्सनल मामला है लेकिन गेम इतना आसान नहीं है जितना आसान प्रोजेक्ट किया जा रहा है. अब यूपी की सीएम मायावती की किस्मत काफी कुछ विजय शंकर पर निर्भर करती है. और, अगर किन्हीं दूसरे ब्यूरोक्रेट्स के नाम भी किसी तरह सामने आ गए, जैसा सपा के शिवपाल दावा कर रहे हैं, और मायावती के रिश्ते जाहिर हो गए तो वो दिन दूर नहीं जब यूपी की जनता मायावती को भ्रष्टाचार व काले धन का प्रतीक मानकर जगह-जगह उनके खिलाफ अभियान शुरू कर दे. फिर मायावती सरकार को निपटाने में वर्षों से इंतजार में बैठी कांग्रेस को मौका मिल जाए और करप्शन के गेम को यूपी में मायावती तक सीमित करते हुए और कड़ी कार्रवाई का प्रदर्शन करते हुए उन्हें बर्खास्त कर दे.

संभवतः ये वो रणनीति होगी जिससे यूपी में राहुल और कांग्रेस को उबरने व उभरने का मौका मिल जाएगा. फिलहाल तो लोग यूपी की मीडिया से आस लगाए बैठे हैं कि यहां के खोजी और महान पत्रकार अपने सोर्सेज से करप्शन से जुड़ी कोई बड़ी खबर ब्रेक करेंगे, हालांकि इसकी संभावना कम है क्योंकि लखनऊ के पत्रकारों में भ्रष्ट और पतितों की संख्या ज्यादा है,  मंगलगान गाने वालों की तादाद ज्यादा है, असली पत्रकार बेहद कम हैं. और जो असली पत्रकार हैं, वे अपने संस्थानों की सत्ता के चरणागत होने वाली नीतियों से इतने बंधे होते हैं कि चाहकर भी खुद की आंखें खोलकर नहीं देख पाते, सो वे धृतराष्ट्र बनकर निजी मंगलगान करने में लगे रहते हैं.

यशवंत

एडिटर

भड़ास4मीडिया

यशवंत तक अपनी खबर या सूचना या जानकारी या गुप्त दस्तावेज [email protected] के जरिए पहुंचाएं. आपके नाम पहचान को गोपनीय रखने का वादा है.

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0 Comments

  1. c.k.tiwari

    April 17, 2011 at 1:19 pm

    mayawati, mulayam me adhik fark nahi hai, ek ka managment kamjoor tha to dusare ka social eng. ek ka monopoly me viswas to dusra sarwhara hai. Congress abhi mahngai ur ghotalo ka sukha ped hai……………..bacha BJP to aapna vajud dund raha hai……..Public jaye to jaye kaha………….jaise ud jahaj ka panchi…..fir jahaj par aayo…….koi chmatkar hona jaroori hai bhai

  2. मदन कुमार तिवारी

    April 17, 2011 at 1:30 pm

    सबका एक हीं हाल है किसको अच्छा कहें किसको बुरा । मायावती के शासन में उनके विधायक मंत्री लूट ्रहे हैं , वहीं मुलायम के शासन में हर गांव मुहल्ले में एक गुंडा पैदा हो गया था । मैं खुद गोरखपुर में मुलायम के गुंडो की गुंडागर्दी के खिलाफ़ लड चुका हूं , मेरे मामा डाक्टर थें , गोलघर के जे जे टेलर्स के उपर वाला सरकारी फ़्लैट उन्हे एलाट था , एक दिन मुलायम के गुंडो ने जबरदस्ती पुरे परिवार को निकालकर ताला जड दिया । हम सब परिवार और मित्र जूटे तथा ताला तोडा और घुस गये । बगल की कोतवाली पुलिस भी शामिल थी गुंडो के साथ । खुब हंगामा हुआ था। रह गई विदेश में रकम की बात तो देश का कोई दल यह कहने की स्थिति में नही है की उसके नेताओं का पैसा विदेश में नही जमा है। कांग्रेस खुद भ्रष्टाचार से जुझ रही है थोडी सी राहत जरुर मिली है अन्ना हजारे के अनशन से । कोई रास्ता नही दिखता , न तो भ्रष्टाार मिटाने का और न हीं अमीर -गरीब की खाई को कम करने का ।

  3. Indian citizen

    April 17, 2011 at 6:21 pm

    आज तिवारी जी की टिप्पणी से सौ प्रतिशत सहमत..बस भ्रष्टाचार से जूझने वाली बात पर घोर संदेह है..

  4. jeet singh

    July 12, 2011 at 8:23 am

    samajwadi parti ka worker kabhi kisi ka ghr khali nahi kara sakta mai gorakhpur ke daudpur ka rahne wala hu.,gorakhpur me sarkar badlte he,gunde party aur jhnde badal lete hai,isese ye nahi ki wo samjwadi party ke workar the.WO BJP ke honge,

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