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वह गर्लफ्रेंड के साथ नाचने लगा तो पत्नी ने चप्पलों की बौछार कर दी

विजेंदर त्यागी: पीसीआई और मेरी यादें – पार्ट तीन : प्रेस क्लब में एक की हत्या हो गई, हत्यारे छूट गए क्योंकि सबने कहा- हत्या होते मैंने नहीं देखा: विजय पाहुजा प्रेस क्लब से मुर्गा-शराब उठाकर उस अड्डे पर ले जाते थे : दक्षिण एशिया के पत्रकारों का संघ बनाकर विनोद शर्मा दूसरा खेल खेल रहे थे : चेतन चड्ढा नामक पत्रकार शहर के जुआरियों का खास आदमी था :

विजेंदर त्यागी: पीसीआई और मेरी यादें – पार्ट तीन : प्रेस क्लब में एक की हत्या हो गई, हत्यारे छूट गए क्योंकि सबने कहा- हत्या होते मैंने नहीं देखा: विजय पाहुजा प्रेस क्लब से मुर्गा-शराब उठाकर उस अड्डे पर ले जाते थे : दक्षिण एशिया के पत्रकारों का संघ बनाकर विनोद शर्मा दूसरा खेल खेल रहे थे : चेतन चड्ढा नामक पत्रकार शहर के जुआरियों का खास आदमी था :

हिन्दुस्तान टाइम्स के पत्रकार पात्रा साहब की पत्नी आईएएस बन चुकी थी. जब दिल्ली से उनका ट्रांसफर कहीं बाहर के लिए हो गया तो उनके नाम पर एक कमरा दिल्ली के कर्ज़न रोड के आफिसर हास्टल में लिया गया, जिसमें समय समय पर दावतें होती रहती थीं. प्रेस क्लब के सचिव विजय पाहुजा क्लब से मुर्गे अंडे और शराब लेकर आता था और महफ़िलें चलती थीं, वहां पर रशीद किदवई रहता था. महफ़िलें सजाने के लिए किदवई और आरके जोशी खाना बनाते थे. इन लोगों ने अपना एक अड्डा प्रगति मैदान में भी बना रखा था.

जब जीके सिंह क्लब के सेक्रेटरी बने तो उनकी टीम ने कस्तूरबा गांधी मार्ग पर अपना एक अड्डा बनाया था. वहां एक कमरा प्रकाश पात्रा ने अपनी पत्नी के नाम पर ले रखा था. वह आईएएस अधिकारी थीं और दिल्ली के बाहर तैनात थीं. उस कमरे में अक्सर दावतें होती थीं. उन दावतों में मेरे मित्र विनोद शर्मा, जीके सिंह, आलोक मुखर्जी, रेणु मित्तल व उनके पति के श्रीनिवासन, आरके जोशी, रशीद किदवई, ललित मोहन गौतम, सुभाष अरोरा आदि मौजूद रहते थे. विजय पाहुजा वहां पर मुर्गा और शराब लाते थे, जो वे प्रेस क्लब से ही उठाते थे. जीके सिंह कभी-कभी तीतर और बटेर भी लाते थे. हमारे कुछ मित्रों ने प्रेस क्लब के भुने हुए मुर्गे और शराब का लुत्फ़ उठाना शुरू कर दिया.

प्रेस क्लब के अपने अनुभवों को भड़ास4मीडिया के लिए लिखते विजेंदर त्यागी

हम लोगों का एक मित्र जस्सी बीबीसी लन्दन चला गया था. जब वापस आया तो मित्रों ने दावत दी. वह जगह जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पास थी. जो पत्रकार नीलांजन का घर था. वहीं एक पत्रकार अशोक दामोदरन ने अपनी पत्नी और गर्ल फ्रेंड को बुला रखा था. जब वह अपनी गर्ल फ्रेंड के साथ नाचने लगा तो उसकी पत्नी ने उसके ऊपर चप्पलों की बौछार कर दी. दावत शोक में बदल गयी.

समय बीतता गया. कभी कोई टीम जीतती तो कभी कोई, लेकिन प्रेस क्लब की लूट सभी करते रहे. मेरे मित्र विनोद शर्मा द वीक मैगज़ीन से हटकर हिन्दुस्तान टाइम्स आ चुके थे. उनके द वीक के दिनों में हम दोनों पंजाब के आतंकवाद को कवर करने के लिए साथ जाते थे. हमारी दोस्ती और गहरी हो गयी थी. कुछ दिनों बाद विनोद शर्मा हिन्दुस्तान टाइम्स की ओर से पाकिस्तान में पोस्ट कर दिए गए.

एक बार चेतन चड्ढा नाम के एक पत्रकार ने क्लब की रसोई के सामने पेशाब कर दिया. मैंने उसकी तस्वीरें खींच लीं. वह शहर के जुआरियों का खास आदमी था. यह लोग शहर के कुछ व्यापारियों को प्रेस क्लब लाकर जुआ खिलाते थे. इस मुद्दे पर मैंने खूब हंगामा किया. जनरल बाडी की बैठक हुई जिसमें तय हुआ कि क्लब में जुआ नहीं खेला जाये़या. कुछ लोग कोर्ट गए. लेकिन हार गए, उसी के बाद से मेरा मनोबल खूब बढ़ गया. एक बार हिन्दुस्तान टाइम्स यूनियन के पदाधिकारी अपने मित्रों को साथ लेकर आये. उनके विरोधी भी वहां थे. उनमें से एक वकील भी था. कहासुनी हो गयी. गोलियां चलीं. एक आदमी फर्श पर गिर गया. रिवाल्वर भी जमीन पर पड़ा था. जिसको गोली लगी थी, उसने दम तोड़ दिया.

घटना की तस्वीरें अखबारों में छप गयीं, पत्रकारों का एक दल पुलिस कमिश्नर से मिला और हत्यारा बाइज्ज़त बरी हो गया. क्योंकि किसी ने हत्यारे के बारे में गवाही नहीं दी थी. एक बार विनोद शर्मा पाकिस्तान से आये हुए थे. मैंने कहा कि विनोद जी याद है, हम लोग प्रेस क्लब से माफिया को हटाने के लिए इकट्ठा हुए थे. अब तो हमारे मित्र ही माफिया बन गए. उन्होंने कहा कि मैं अभी तो इस पर कुछ नहीं कह सकता क्योंकि मैं कल जा रहा हूँ. जब वापस आऊँगा तब इस पर चर्चा करेंगे, लेकिन वापस आने पर उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान टाइम्स में रहते हुए वे इस तरह के कामों में नहीं पड़ सकते. अब काम आप करें, मैं आपका साथ दूंगा. परन्तु विनोद शर्मा तो दूसरा खेल खेल रहे थे. उन्होंने पाकिस्‍तान के कुछ पत्रकारों के साथ मिलकर दक्षिण एशिया के पत्रकारों का एक संघ बना लिया, जिसमें उन्होंने प्रेस क्लब के कुछ पदाधिकारियों को भी शामिल कर लिया था.

…जारी…

प्रेस क्लब आफ इंडिया के अपने अनुभवों को भड़ास4मीडिया के लिए प्रेस क्लब में बैठकर लिखते विजेंदर त्यागी.

लेखक विजेंदर त्यागी देश के जाने-माने फोटोजर्नलिस्ट हैं और खरी-खरी बोलने-कहने-लिखने के लिए चर्चित हैं. पिछले चालीस साल से बतौर फोटोजर्नलिस्ट विभिन्न मीडिया संगठनों के लिए कार्यरत रहे. कई वर्षों तक फ्रीलांस फोटोजर्नलिस्ट के रूप में काम किया और आजकल ये अपनी कंपनी ब्लैक स्टार के बैनर तले फोटोजर्नलिस्ट के रूप में सक्रिय हैं. ”The legend and the legacy : Jawaharlal Nehru to Rahul Gandhi” नामक किताब के लेखक भी हैं विजेंदर त्यागी. यूपी के सहारनपुर जिले में पैदा हुए विजेंदर मेरठ विवि से बीए करने के बाद फोटोजर्नलिस्ट के रूप में सक्रिय हुए. विजेंदर त्यागी को यह गौरव हासिल है कि उन्होंने जवाहरलाल नेहरू से लेकर अभी के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तस्वीरें खींची हैं. वे एशिया वीक, इंडिया एब्राड, ट्रिब्यून, पायनियर, डेक्कन हेराल्ड, संडे ब्लिट्ज, करेंट वीकली, अमर उजाला, हिंदू जैसे अखबारों पत्र पत्रिकाओं के लिए काम कर चुके हैं. विजेंदर त्यागी से संपर्क 09810866574 के जरिए किया जा सकता है.

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0 Comments

  1. jagdish yadav

    September 4, 2011 at 7:02 pm

    tyagi ji jeevan paryant bhrast patrakaron ke liye daravane rahe hain. sarkari sampatti ko apni achal sammpatti samajhne wale patrakaron ke sarkari awason ko khali karwakar apne jujharupan ka saboot to kayee varsh pahle hi de chuke hain.
    bhagwan unhe swasth aur lambi aayu de yahi hamari kamna hai.

  2. arun khare

    September 10, 2011 at 2:40 pm

    भाई यशवंत जी आपने श्री विजेंद्र त्‍यागी के संस्‍मरण की शुरूआत करके एक बहुत अच्‍छा काम किया है। मैं न जाने कब से त्‍यागी जी से कहता आ रहा था कि वे अपने जीवन के प;कारिय अनुभवों से अपने जूनियर साथियों को लाभांन्वित कराएं। भाई जगदीश यादव जी ने सही कहा है कि बेईमानी में संलग्‍न साथी हमेशा त्‍यागी जी से खौफ खाते है कि पता नहीं यह मंुह फटट आदमी कब किसकी पोल खोलकर कपडे उतार दे। बहरहाल एक अच्‍छा कालम है। त्‍यागी जी को यह कालम शुरू करने और आपको इसे प्रकाशित करने के लिए बहुत बहुत साधुवाद।

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