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माखनलाल विवि के नए कुलपति की तलाश शुरू!

भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में कुलपति बीके कुठियाला के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन में छात्रों का पलड़ा भारी होता नजर आ रहा है। भोपाल से खबर आ रही है कि मुख्यमंत्री कार्यालय कुठियाला कल्प समाप्त करने के मूड में आ गया है। सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री के निर्देश पर नए कुलपति के चयन के लिए चार लोगों का पैनल बनाया गया है, और इसी पैनल में से किसी एक व्यक्ति को विश्वविद्यालय का नया कुलपति बनाया जा सकता है। विश्वविद्यालय के नए कुलपति के संभावति नामों में चार लोगों के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं।

भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में कुलपति बीके कुठियाला के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन में छात्रों का पलड़ा भारी होता नजर आ रहा है। भोपाल से खबर आ रही है कि मुख्यमंत्री कार्यालय कुठियाला कल्प समाप्त करने के मूड में आ गया है। सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री के निर्देश पर नए कुलपति के चयन के लिए चार लोगों का पैनल बनाया गया है, और इसी पैनल में से किसी एक व्यक्ति को विश्वविद्यालय का नया कुलपति बनाया जा सकता है। विश्वविद्यालय के नए कुलपति के संभावति नामों में चार लोगों के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं।

माखनलाल विश्वविद्यालय के नोएडा केंद्र के प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रेस सलाहकार रहे अशोक टंडन, मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व सूचना अधिकारी रवींद्र पांड्या, राष्ट्रीय सहारा से लंबे समय तक जुड़े रहे वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा और दैनिक भास्कर के लंबे समय तक संपादक रहे वरिष्ठ पत्रकार महेश श्रीवास्तव का नाम शामिल है। सूत्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय के मौजूदा घटनाक्रम से सरकार खुश नहीं है। इसकी एक वजह यह भी है कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ही विश्वविद्यालय की महापरिषद के अध्यक्ष होते हैं और कुलपति की नियुक्ति उन्हीं के हाथों होती है। ऐसे में छात्रों के आंदोलन से मुख्यमंत्री की छवि पर भी असर पड़ रहा था।

अनशन पर बैठे छात्रों में से चार छात्रों को अब तक अस्पताल में दाखिल कराना पड़ा है। इनमें से एक छात्र की हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा। उधर विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों पर दर्ज मुकदमे भी अब तक वापस नहीं लिए हैं, हालांकि किसी छात्र को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। इस सिलसिले में छात्रों ने शनिवार को कुलपति से मुलाकात भी की लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका।

उधर शनिवार को रजिस्ट्रार एसके त्रिपाठी ने भी कुलपति की मुश्किलें बढ़ा दीं। धरने पर बैठे छात्रों से मिलने गए त्रिपाठी ने छात्रों के प्रति अपना समर्थन जताया और वहां रखे रजिस्टर में यह बात बाकायदा दर्ज की। छात्र इसे बड़ी कामयाबी मान रहे हैं। गौरतलब है कि करीब एक पखवाड़े पहले श्रीकांत सिंह का इस्तीफा मिलने के बाद त्रिपाठी को रजिस्ट्रार बनाया गया था। सिंह के इस्तीफे के बारे में यही माना जाता रहा कि यह कुलपति के दबाव में की गई कार्रवाई है, हालांकि सिंह ने इस बारे में खुलकर कुछ नहीं कहा।

छात्रों के आंदोलन को मध्य प्रदेश के पत्रकार संघों का भी समर्थन हासिल हो गया है। मध्य प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रमख शलभ भदौरिया, मध्य प्रदेश वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के प्रमुख जयंत वर्मा, आंचलिक पत्रकार संघ के प्रमुख शिव अनुराग पटैरिया ने भी छात्र आंदोलन का समर्थन किया है। ये सभी संघ सोमवार सुबह 11 बजे भोपाल में एक बैठक में अपने समर्थन का एलान करेंगे। इधर दिल्ली में भी छात्र आंदोलन को समर्थन मिला है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र और दिल्ली के प्रतिष्ठित अखबारों में काम कर रहे पत्रकारों के एक दल ने शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय केशवकुंज से भी कुठियाला जी के खिलाफ नैतिक समर्थन मांगा। संघ से समर्थन मांगने की मुख्य वजह यह रही कि कुठियाला जी को संघ का करीबी माना जाता है और छात्र आंदोलन के झंझावत को वह अब तक संघ के नाम पर ही झेलते आए हैं।

आंदोलन से जुड़े एक छात्र ने बताया कि रविवार को छात्रों को विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया गया, ऐसे में छात्रों के पास परिसर के बाहर अनशन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहा। लेकिन शहर में धारा 144 लागू होने के कारण ऐसा करना संभव नहीं था। ऐसे में छात्रों ने अपने शरीर पर कुलपति के खिलाफ तख्तियां टांग कर छोटे-छोटे समूहों में शहर के कई इलाकों में भ्रमण किया। इन तख्तियों पर कुलपति का मोबाइल नंबर और ईमेल लिखा हुआ था और देखने वालों से मांग की गई कि वे कुलपति से पूछें कि छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है।

इस खबर में उल्लखित तथ्यों सूचनाओं के खंडन-मंडन के लिए नीचे कमेंट बाक्स का सहारा ले सकते हैं या फिर [email protected] पर मेल कर सकते हैं.

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0 Comments

  1. ratnesh

    September 26, 2010 at 4:05 pm

    batashe ke dhokhe main rui (kapas) kha gaye kuthiyala jee
    kaha gaya hai jab umar ho jai to ghar jakar pote-poti, nata-nati khelana chahiye na ki kisi univercity main aa kar student ke bhavishya se;;;;;;;
    jane anjae aap unse takra gaye jo har pal apne student ke bhavishya ke bare main sochte rahte hain na ki apne bare main
    kuthiyala jee ka to kam ho gaya samjho
    magar main aap ko bata doon ki aarop lagane wali mahila ka bhi kabhi ahit nahi
    chaha hoga ab aap khud sochain ki aap kiske sath hain

  2. himansu

    September 26, 2010 at 4:08 pm

    ye badi acchi khabar hai, agar sach me aisa hai to.. Chief Minister aage aana hi chahiye aur baccho se baat karni chahiye..

    इस सारे मामले का सबसे बड़ा दुखद पक्ष है कि लोग छात्रो के धुप में जलने, बीमार होकर अस्पताल में पहुँचाने और लगातार भविष्य बिगाड़ देने के धमकी को इस तरह गुमराह कर रहे है कि वो किसी की चाल के शिकार हो गए है. छात्रों के आई सी यु में पहुँचने को भी, सत्ता के चाटुकार झूठ बता रहे है. डॉक्टर बिना चेक किया तो आई सी यु में नहीं भेजा होगा! दुखद है सब कुछ. मुख्यमंत्री आगे आयें और छात्रो से खुद मिले, उनकी बात सुने तो शायद सबकुछ स्पष्ट हो जाएगा.

  3. alok singhai

    September 26, 2010 at 4:38 pm

    माखन लाल पत्रकारिता विवि में शिक्षक की गुंडागर्दी
    सुशासन की राह में रोड़ा बनी ड्डैञ्सले न लेने की महामारी
    भोपाल,रविवारख्म् सितंबर(पीआईसी). राजधानी केञ् माखन लाल पत्रकारिता विवि से पत्रकारिता पढऩे वाले विद्यार्थी पिछले तीन दिनों से अनशन पर बैठे हैं. उनकी मांग है कि उनकेञ् शिक्षक को विभागाध्यक्ष का प्रभार वापस दिलाया जाए. पढ़ाई छोड़कर प्रशासनिक मामलों में दखल देने की उनकी इस जिद से विवि केञ् कुञ्लपति और समूचा प्रशासन स्तホध है. अलोकतांत्रिक कह दिए जाने केञ् भय से प्रशासन ने इन विद्यार्थियों और आरोपी शिक्षक केञ् खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है.यह पूरा मामला प्रदेश में सत्तारूञ्ढ़ भारतीय जनता पार्टी की सरकार की असफलता की जीती जागती तस्वीर पेश कर रहा है.
    प्रशासनिक मामलों में हीलाहवाली और पूर्व वर्ती दिग्विजय सिंह की भ्रष्ट सरकार की नकलपट्टी करने केञ् कारण आज भाजपा की सरकार को अपने ही कार्यकर्ताओं की निंदा का सामना करना पड़ रहा है. माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विवि में भी भाजपा सरकार की यही अदूरदर्शिता आज रोड़ा बन गई है. लंबे समय से विवि में विरोध और छींटाकशी की आवाजें आ रहीं थीं. विवि प्रशासन ने इन आवाजों केञ् पीछे छिपे षडयंत्र को ध्वस्त करने में लापरवाही दिखाई नतीजा आज अनशन केञ् रूञ्प में सामने है.पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी अब विवि प्रशासन को अपनी जिद केञ् आगे झुकाना चाहते हैं.उनकी एकमात्र जिद है कि उनकेञ् विभाग केञ् अध्यक्ष पीपी सिंह को उनका प्रभार वापस लौटाया जाए.
    विवि प्रशासन ने कुञ्लपति बृजकिशोर कुञ्ठियाला केञ् नेतृत्व में विद्यार्थियों से मुलाकात की और उनसे अनशन समाप्त करने का अनुरोध किया. इसकेञ् बावजूद विद्यार्थियों की एक ही जिद थी कि पीपीसिंह को वापस विभागाध्यक्ष बनाया जाए तभी वे अनशन समाप्त करेंगे. कुञ्लपति श्री कुञ्ठियाला ने विद्यार्थियों से कहा कि यदि आपकी कोई शिकायत थी तो आकर चर्चा करनी थी. लेकिन बगैर चर्चा किए विवि में तोड़फोड़ और अनशन कैञ्से जायज ठहराया जा सकता है. विद्यार्थियों की मांग है कि उन पर दर्ज कराए गए तोड़फोड़ केञ् प्रकरण वापस लिए जाएं. इसकेञ् संबंध में श्री कुञ्ठियाला ने उन्हें आश्वस्त किया कि यदि सब ठीक चलता है तो प्रशासन इस मुद्दे पर अवश्य कोई विचार करेगा.
    कुञ्लपति महोदय ने इसकेञ् बाद प्रेस केञ् सवालों केञ् जवाब में कहा कि वे स्वयं इस बात को समझना चाह रहे हैं कि पिछले कुञ्छ महीनों से बाकायदा नियोजित ढ़ंग से विरोध केञ् स्वर タयों उठ रहे हैं. आखिर वे कौन सी ताकते हैं जो विवि में गड़बड़ी ड्डैञ्लाकर अपना उद्देश्य पूरा करना चाहती हैं. उन्होंने कहा कि विवि प्रशासन अपने विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा उपलホध कराने केञ् लिए कटिबद्ध है. यदि शैक्षणिक सुधारों केञ् मार्ग में कोई अड़चन आएगी तो प्रशासन पूरी वैधानिक प्रक्रिञ्या अपनाकर कठोर कार्रवाई अवश्य करेगा.
    हालिया विरोध की वजह समझना बड़़ा सरल है. पत्रकारिता विभाग की ही एक शिक्षिका डॉ.ज्योति वर्मा ने राज्य महिला आयोग में अपने विभागाध्यक्ष पीपीसिंह केञ् विरोध में शिकायत दर्ज कराई है. इस शिक्षिका ने प्रशासन को बताया कि उसे अपनी शिकायत को उचित साबित करने केञ् लिए कई दस्तावेजों की जरूञ्रत है. ये सभी दस्तावेज विभागाध्यक्ष पीपीसिंह केञ् पास हैं. जिसकेञ् चलते विवि प्रशासन ने श्री सिंह को विभागाध्यक्ष केञ् पद से कार्यमुタत कर दिया. यह प्रभार अन्य शिक्षक को दे दिया गया है. इस प्रक्रिञ्या में श्री सिंह न तो निलंबित किए गए हैं और न ही उन्हें नौकरी से निकाला गया. उन्हें अध्यापन कार्य से भी नहीं रोका गया है. इसकेञ् बावजूद विद्यार्थियों ने बगैर विवि प्रशासन को कोई नोटिस दिए अनशन करकेञ् उसे जलील करने की रणनीति बना ली.यह अनशन श्री सिंह की सोची समझी रणनीति का हिस्सा ही माना जा रहा है. बताते हैं कि श्री सिंह की कोशिश है कि अपने खिलाफ शिकायत करने वाली शिक्षिका पर विद्यार्थी दबाव बनाएं ताकि वह शिक्षिका अपनी शिकायत वापस ले ले.
    पिछले लंबे समय से कुञ्लपति प्रो.कुञ्ठियाला केञ् विरोध में विद्यार्थियों और शिक्षकों की छुटपुट नाराजगी केञ् बीच यह कहा जा रहा था कि इन गड़बडि़यों केञ् लिए श्री सिंह ही जिミमेदार हैं. वे पत्रकारिता केञ् अध्यापन से ज्यादा अखबारों और समाचार चैनलों केञ् पत्रकारों से संपर्कञ् में जुटे रहते हैं और संस्थानों में नौकरियां दिलाने केञ् नाम पर विद्यार्थियों को प्रशासन केञ् खिलाफ बरगलाते हैं. प्रेस केञ् दबाव केञ् सहारे वे विवि प्रशासन में अपनी गुंडागर्दी करते रहते हैं और अन्य शिक्षकों को हड़काते भी हैं. उन्होंने विवि में एक गिरोह बना लिया है जो शिक्षा माफिया बनकर काम करता है.
    पीपी सिंह का इतिहास उनकेञ् वर्तमान की पूरी कहानी तफसील से बता देता है. श्री सिंह केञ् पिता मप्र वेयर हाऊसिंग कार्पोरेशन केञ् भ्रष्ट अधिकारियों में गिने जाते थे. पिता ने अपनी काली कमाई को छुपाने केञ् लिए बेटे का इस्तेमाल किया. उन्होंने बेटे को समाजवादी युवजन सभा का पदाधिकारी बनवा दिया. इस राजनीतिक आड़ का उद्देश्य कभी छात्र राजनीति का शीर्ष स्थान पाना नहीं था.अपने डीलडौल की वजह से वे विद्यार्थियों केञ् बीच अपनी मौजूदगी बनाए रहे, और पिता केञ् लिए ये छवि पर्याप्त छांव देती रही.
    बाद में कांग्रेस की क्षत्रिय महासभा परस्त नीतियों केञ् सहारे पीपीसिंह माखन लाल विवि की नौकरी में आ गए. जब दिग्विजय सिंह ने अपने खेमे केञ् क्षत्रिय नेताओं को कप्तान सिंह सोलंकी केञ् माध्यम से भाजपा में शामिल करा दिया तो यह खेमा भाजपा की ठकुञ्र सुहाती में जुट गया. इसी दौर में पीपीसिंह ने अपने नाम में सिंह शホद लगा होने केञ् कारण भाजपा केञ् कुञ्छ नेताओं से भी करीबी स्थापित कर ली. भाजपा में भ्रमपूर्ण राजनीति की आड़ लेकर यह शिक्षक आज प्रशासन और सरकार केञ् लिए सिरदर्द बन गया है. उसका लक्ष्य आज विवि में प्रमोशन पाना तो है ही साथ में वह विवि में होने वाली उन बाईस नियुタतियों में भी अपनी हिस्सेदारी चाहता है जिसकी चर्चाएं काफी दिनों से चल रहीं हैं. कुञ्लपति श्री कुञ्ठियाला का कहना है कि ये नियुタतियां मेरिट केञ् आधार पर की जाएंगी और इसमें किसी किस्म का दबाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
    विभागाध्यक्ष बनाए जाते समय इस शिक्षक ने प्रशासन को आश्वासन दिया था कि वह अपनी पीएचडी एक साल में कर लेगा. लेकिन आज पांच सालों बाद भी तिकड़मबाजियों में मशगूल होनेकेञ् कारण वह अपना शोध पत्र प्रस्तुत नहीं कर सका है. पिछले कुञ्लपति अच्युतानंद मिश्र ने उन्हें शोधपत्र जमा करने केञ् लिए समय सीमा बढ़ा दी थी. जबकि यह प्रक्रिञ्या पूरी तरह अवैधानिक है. タयोंकि विवि केञ् तमाम ड्डैञ्सले महापरिषद केञ् माध्यम से ही लिए जाते हैं. इस लिहाज से पीपीसिंह को विभागाध्यक्ष पद पर रहने की योग्यता नहीं है जिसकेञ् लिए वह विद्यार्थियों को ढाल बनाकर प्रशासन पर दबाब बनाने की कोशिश कर रहा है.
    पीपीसिंह ने यह शैली सागर विवि में पत्रकारिता विवि केञ् विभागाध्यक्ष रहे प्रदीप कृञ्ष्णात्रे से सीखी है. प्रदीप कृञ्ष्णात्रे केञ् कार्यकाल में विभाग केञ् विद्यार्थियों से विवादास्पद सवाल पूछा गया था. शरारत पूर्ण तरीकेञ् से पूछे गए इस सवाल केञ् जवाब में युवक कांग्रेस केञ् लड़कों ने श्री कृञ्ष्णात्रे का मुंह काला करकेञ् जुलूस निकाला था. आज उस घटनाक्रञ्म केञ् लिए दोषी बताए गए राकेञ्श शर्मा उसी विभाग केञ् विभागाध्यक्ष हैं. इस घटनाक्रञ्म को लेकर देश भर में सहानुभूति की लहर बनी और इसकेञ् बाद प्रदीप कृञ्ष्णात्रे ने भी कई बार इस्तीफा देकर विवि प्रशासन पर अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाया. उन्होंने भी विद्यार्थियों को अपनी राजनीतिक आकांक्षाओं का हथियार बनाया. आज पीपीसिंह भी यही कर रहे हैं तो इसमें कोई अनहोनी बात नहीं है.
    अचरज की बात तो यह है कि विवि प्रशासन और सरकार पहले से यह सब इतिहास जानते रहे हैं. उन्हें यह भी मालूम है कि जन संवाद करने में प्रभावशाली माध्यम बन चुकी पत्रकारिता किस तरह जनता पर अपना असर छोड़ती है. इसकेञ् बावजूद पत्रकारिता विवि केञ् शैक्षणिक स्तर में सुधार केञ् लिए कोई प्रयास नहीं किए गए. विवि की स्थापना केञ् दौरान एक पतित व्यタति अरविंद चतुर्वेदी की हरकतों की कहानियां आज भी लोगों को याद हैं. यह व्यタति पं.माखन लालचतुर्वेदी का भतीजा था इसकी आड़ लेकर उसने विवि में खूब गुलछर्रे उड़ाए. उसकी योग्यता सिर्ड्डञ् यह थी कि वह देश केञ् राष्ट्रपति डॉ.शंकर दयाल शर्मा का साढू था. चतुर्वेदी ने तो अपनी छात्राओं तक को नंबर बढ़वाने केञ् नाम पर कहां कहां घुमाया इसकी कहानियां आज भी विवि केञ् स्टाफ में उनकेञ् सहयोगी रहे लोग बड़े चाव से सुनाते हैं. पीपीसिंह केञ् बारे में भी यही बातें छुटपुट तरीकेञ् से उठती रही हैं. अब जबकि ऐसा ही मामला राज्य महिला आयोग से सामने है तब जरूञ्री है कि मामले की जांच पूरी प्रक्रिञ्या केञ् अंतर्गत विधिवत ढंग से पूरी होने दी जाए.
    विवि प्रशासन को इस बात केञ् पूरे सबूत मिले हैं कि विवि परिसर में तोड़फोड़ करवाने केञ् पीछे किसका हाथ था. पिछले दिनों विवि में चल रहे आंदोलनों को कौन शह दे रहा था. उनका उद्देश्य タया था. इस सबकेञ् बावजूद प्रशासन खामोश है. उसने कोई कठोर कार्रवाई आखिर अब तक タयों नहीं की. पीपीसिंह को अपनी व्यタतिगत राजनीतिक आकांक्षाओं को पूरा करने का मौका タयों दिया जाता रहा है. अब तक उन्हें न तो निलंबित किया गया है और न ही बर्खास्त किया गया है. मध्यप्रदेश में अच्छे शिक्षकों का अकाल नहीं है. पत्रकारिता की शिक्षा तो ऐसे शिक्षकों केञ् भरोसे दी ही नहीं जा सकती जिन्हें कभी प्रत्यक्ष पत्रकारिता का अनुभव ही न रहा हो. इस शिक्षण केञ् लिए विद्यार्थियों को पत्रकारिता केञ् क्षेत्र में लंबा अनुभव लेना जरूञ्री होता है. ऐसे में विवि प्रशासन को चाहिए कि वह फीस जमा करकेञ् पत्रकारिता केञ् पेशे में आने केञ् इच्छुक विद्यार्थियों केञ् साथ न्याय करे. उन्हें अच्छे शिक्षकों की सेवाएं उपलホध कराई जाएं. यदि इस राह में कोई रोड़े अटकाता है तो उसे अविलंब निकाल बाहर किया जाए.
    यही नहीं सरकार को भी इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए. विवि की महापरिषद का अध्यक्ष मुチयमंत्री स्वयं होता है. इसलिए जरूञ्री है कि मुチयमंत्री शिवराजसिंह चौहान इस मामले में हस्तक्षेप करें और गंदी मछलियों को तत्काल निकाल बाहर करें ताकि पंडित माखन लाल चतुर्वेदी की अभिलाषा पूरी हो सकेञ्.

  4. Radha saxena

    September 26, 2010 at 4:50 pm

    makhanlal ji ki atma kitne kasht me hogi apne nam ki durdash dekhkar. PPS ne itne salo me jitne paltu taiyar kiye the, aaj ve kitne kam aaye. jay ho.

  5. ravi

    September 26, 2010 at 5:35 pm

    kuthiala ke khilaf 420 ke tahat do do mamle chal rahe hain. vigilance ki janch bhi chal rahi hai.farji tarike se ye reader kuru university me bana tha aur director bhi.hisar me isne- kuthiala ne kya gul khilayen hain ye haryana punjab me sabhi ko malum hai.kurukshetra me jab ise patrakaron ne dhamkaya tha to mai bewkuf hun murkh hun karke jan bachaya tha aur bad me unhen ph. d. ka lalch diya karta tha ye fact hai .ise dhakke mar ke nikalna chahiye.patrkaita education me isase bada fraud koi nahin hai.

  6. ramesh

    September 26, 2010 at 7:28 pm

    ye un chatron ki jeet hain jinhone bhari dhoop me jalkar cm ko majboor kar diya ki ab unke bare me socha jaye…………

  7. rahul

    September 26, 2010 at 7:50 pm

    aapne sir sachai ka shath diya hai.. aap ek nek insaan hai….m aapke saath hu….
    rahul thakur

  8. manorath mishra

    September 27, 2010 at 6:15 am

    yeh PP Singh ki taraf se prayojit khabar hai. PP Singh padhai ke alwa har kaam me mahir hai. Wo kisi bhi star per koi bhi khel kar sakta hai.

  9. dablu

    September 27, 2010 at 6:45 am

    alok ji apne jo bat likhi hai uske sach ka ek dusra pahlu mai batata hun…….. apne jo bat likhi hai usse saf jahir hota hai ki aap bhi kisi khas group ke hain. mai personaly vc kuthiyala ko janta hun. ek ghatna ka example dena jaruri ho gaya hai…ek bar kisi meet me bk kuthiyala ke speech se maine apti jatayi thi ..unhone kaha tha ki media me rajniti ho rahi hai aur media bajaru ho gaya hai,,,,is par unhone jabab diya ki mai vc hun mai spashtikaran nahi9 dene aaya hun…iske bad ka mamla sun lijiye….unhone mujhe bulaya aur mere bare kuchh puchhkar kaha……tumhare class aur campus me ladkiyan to bahut mast mast ladkiyan hain unka maja liya karo……kyon bekar me apna dimag khapate ho…..ye usi vc ka sach haihai…jo mere sath hua tha…….a aap bhi jara sochiyega ki sahi koun hai…..rahi bat jyoti verma ki to..wo to class me hi damaki deti thi ki mera husband ias hai aur vc se mai tumhe university se nikalwa sakti hun…………..sach to ye bhi hai ki jyoti ke alawa aur ichh logon ki niyukti bhi galat dhang sehui thi….isme mamla ye tha ki inka interview hud inke research ke guide ne liya tha….aur noukri de di thi…….rahi bat kuthiyala ki to ye bhi mast khiladi hain….aakhir inke upar murder ka case bhi chal raha hai…..yahi nahi inke itra rammohan pathak bhi vishwavidhayalay se jude hain…inpar bhi varanasi ke chetgang thane me murti chori ka FIR darg hua tha……yahi nahi vc ne vishwavidhyalay me ek aise vyakti ko noukri de dali hai jo khud unka research scholar hai…ye sab kuthiyala ki pol kholti sach hai….sach to aisi bhi mai janta hun jise kaha nahi ja sakta…….

  10. dablu

    September 27, 2010 at 7:30 am

    sir ji apne jo bat likhi hai usse saf jahir hota hai ki aap bhi kisi khas group ke hain. mai personaly vc kuthiyala ko janta hun. ek ghatna ka example dena jaruri ho gaya hai…ek bar kisi meet me bk kuthiyala ke speech se maine apti jatayi thi ..unhone kaha tha ki media me rajniti ho rahi hai aur media bajaru ho gaya hai,,,,is par unhone jabab diya ki mai vc hun mai spashtikaran nahi9 dene aaya hun…iske bad ka mamla sun lijiye….unhone mujhe bulaya aur mere bare kuchh puchhkar kaha……tumhare class aur campus me ladkiyan to bahut mast mast ladkiyan hain unka maja liya karo……kyon bekar me apna dimag khapate ho…..ye usi vc ka sach haihai…jo mere sath hua tha…….a aap bhi jara sochiyega ki sahi koun hai…..rahi bat jyoti verma ki to..wo to class me hi damaki deti thi ki mera husband ias hai aur vc se mai tumhe university se nikalwa sakti hun…………..sach to ye bhi hai ki jyoti ke alawa aur ichh logon ki niyukti bhi galat dhang sehui thi….isme mamla ye tha ki inka interview hud inke research ke guide ne liya tha….aur noukri de di thi…….rahi bat kuthiyala ki to ye bhi mast khiladi hain….aakhir inke upar murder ka case bhi chal raha hai…..yahi nahi inke itra rammohan pathak bhi vishwavidhayalay se jude hain…inpar bhi varanasi ke chetgang thane me murti chori ka FIR darg hua tha……yahi nahi vc ne vishwavidhyalay me ek aise vyakti ko noukri de dali hai jo khud unka research scholar hai…ye sab kuthiyala ki pol kholti sach hai….sach to aisi bhi mai janta hun jise kaha nahi ja sakta…….

  11. ramlal

    September 27, 2010 at 10:54 am

    आदरणीय मनोरथ मिश्र जी
    न तो ये पोर्टल पीपी सिंह जी का है और न ही अविनाश जी ने पैसे खाए होंगे
    पीपी सिंह क्या करते है ये न तो आप जानते है और न ही बताने की जरुरत है
    लेकिन आप जिस स्तर तक गिरे है गिरे रहिये

  12. ramlal

    September 27, 2010 at 11:02 am

    आदरणीय आलोक जी
    शायद जितना बड़ा आपका कमेन्ट है उतनी बड़ी अक्ल भी होगी लेकिन अफ़सोस एक छोटी सी बात नहीं जान आप भले ही सच जानकर भी आखें बंद कर सकते है हम नहीं
    और रही बात आपकी बेहूदा बैटन की तो या तो पागलखाने चले जाये वर्ना लोग ……..

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