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भ्रष्‍टाचार और लालच ने बनाया पुलिस को पंगु

सेमिनार : पुलिस व्‍यवस्‍था में सुधार विषय पर सेमिनार : विधि विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय के नवीन परिसर में विधि विभाग तथा इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड डॉक्यूमेंटेशन इन सोशल साइंसेस (आईआरडीएस) द्वारा “पुलिस व्यवस्था में सुधार” विषय पर एक सेमिनार आयोजित किया गया. इस सेमिनार में पुलिस व्यवस्था में सुधार को उसकी समग्रता में समझने का प्रयास किया गया.

सेमिनार : पुलिस व्‍यवस्‍था में सुधार विषय पर सेमिनार : विधि विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय के नवीन परिसर में विधि विभाग तथा इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड डॉक्यूमेंटेशन इन सोशल साइंसेस (आईआरडीएस) द्वारा “पुलिस व्यवस्था में सुधार” विषय पर एक सेमिनार आयोजित किया गया. इस सेमिनार में पुलिस व्यवस्था में सुधार को उसकी समग्रता में समझने का प्रयास किया गया.

पुलिस व्‍यवस्‍था में सुधार विषय पर आईसी द्विवेदी, श्रीराम अरुण, केएल गुप्ता, एमसी द्विवेदी, जीएन सिन्हा, एसवीएम त्रिपाठी, एसआर दारापुरी (सभी वरिष्ठ अवकाश प्राप्त आईपीएस अधिकारी), आईपीएस अमिताभ ठाकुर (वर्तमान में आईआईएम में अध्ययनरत) ने पुलिस की ओर से, राम दत्त त्रिपाठी, जगदीश नारायण शुक्ल, देवकी नंदन मिश्र तथा ब्रज मोहन दुग्गल मीडिया की ओर से तथा डॉ. एके अवस्थी एवं डॉ. नूतन ठाकुर ने आमजन की ओर से सहभागिता की.

सेमिनार में विषय प्रस्‍तावना डॉ एके अवस्थी ने रखी. उन्‍होंने उपस्थित लोगों का स्‍वागत करते हुए वर्तमान में पुलिस व्‍यवस्‍था में सुधार की जरूरत को रेखांकित किया. इसके बाद पूर्व आईपीएस जीएन सिन्हा ने अपने समय की पुलिस और वर्तमान पुलिस का तुलनात्मक विश्लेषण किया और बताया कि समय के साथ व्यवस्था में गड़बड़ी आई है, जिसका मुख्य कारण राजनैतिक हस्तक्षेप है. एमसी द्विवेदी का मत था कि इन स्थितियों के लिए जनता भी जिम्मेदार है. आज के समय पुलिस व्यवस्था में तत्काल एक भारी परिवर्तन की जरूरत है ताकि इसका असर दिखना शुरू हो.

आईसी द्विवेदी ने तमाम सरकारी और विधिक दस्तावेजों का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि पुलिस में मुख्य समस्या बाह्य हस्तक्षेप से जुडी है. स्वतन्त्रता से पूर्व यह समस्या नहीं थी, पर देश के आजाद होने के बाद से लगातार हालत बिगड़ते गए हैं. उनका मानना था कि आज इस बात की जरुरत है कि प्रकाश सिंह मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय का तुरंत अनुपालन हो.

श्रीराम अरुण ने कहा कि आज पुलिस में जो भी समस्या है उसका मुख्य कारण पुलिस के अंदर ही विद्यमान है. अपनी लालच और अपनी असीम इच्छा के कारण पुलिस के अधिकारी सही-गलत करते ही जा रहे हैं, जो काफी खतरनाक रूप ले चुका है. इस स्थिति पर तत्काल रोक जरूरी है. केएल गुप्ता ने कहा कि लोगों के मन में साइड पोस्टिंग और फील्ड पोस्टिंग से सम्बंधित जो धारणा हैं, वह भी इसके लिए बहुत जिमेदार है. उन्‍होंने एक राज्य का उदाहरण दिया, जहां यदि कोई अफसर साइड पोस्ट पर रहता है तो कई लोग यह कहते हुए पहुंच जाते हैं कि चलो मुख्यमंत्री से मिला कर और पैसे दे-दिला कर तुरंत अच्छी पोस्टिंग करा देंगे.

एसवीएम त्रिपाठी चूंकि काफी समय तक उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग के सदस्य रहे हैं, अतः उन्होंने मानव अधिकारों के बचाव और पुलिस द्वारा इसका सही पालन करने पर विशेष बल दिया. उन्होंने पुलिस में बिगड़ रहे अनुशासन की स्थिति पर भी गहरी चिंता जताई. एसआर दारापुरी ने मूलतः एक सामजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ता के रूप में अपनी बात कही और यह निवेदन किया कि पुलिस को अब जनतांत्रिक मूल्यों का पालन करते हुए अपना काम करना चाहिए न कि जन-विरोधी अपने वर्तमान स्वरुप में.

अमिताभ ठाकुर ने कहा कि आज इस बात पर विशेष बल दिया जाना चाहिए कि पुलिस द्वारा देश के विभिन्न कानूनों का सम्यक पालन हो और पुलिस अनावश्यक रूप से दूसरे विभागों की समस्या अपने ऊपर आधे-अधूरे ढंग से न ले. इससे हो यह रहा है कि पुलिस अपना भी काम ठीक से नहीं कर पाती और दूसरे विभागों को भी उचित सहयोग देने में सफल नहीं हो पाती. अतः पुलिस को अपने कार्य को क़ानून और अपनी निर्धारित सीमाओं में करना चाहिए.

देवकी नंदन मिश्र ने कहा कि पुलिस को जनता को साथ ले कर चलना चाहिए और जन भावनाओं का पूरा सम्मान करना चाहिए. जगदीश नारायण शुक्ल ने भ्रष्टाचार को इस सारी समस्या का जड़ बताया और यह कहा कि सतर्कता और भ्रष्टाचार- निवारण संगठनों को और अधिक अधिकार तथा स्वतंत्रता दिए जाने की जरूरत है. राम दत्त त्रिपाठी का मानना था कि पुलिस एक बड़ी व्यवस्था का अंग है और पुलिस में कोई भी सुधार पूरे परिप्रेक्ष्य में ही हो सकता है. दिल्ली से आये ब्रज मोहन दुग्गल ने बहुत सूक्ष्मता से अपनी बात रखते हुए पुलिस के अच्छे पक्ष पर भी बल देने की बात कही.

डॉ एके अवस्थी ने इस पूरे सन्दर्भ को न्यायिक और अकादमिक दृष्टि से देखते हुए अपने छात्रों का यह आह्वान किया कि वे पुलिस सुधार को बहुत गंभीरता से लें और इसके महत्व को समझते हुए इस पर आगे कुछ योगदान देने के हिसाब से अभी से सोचें.

डॉ नूतन ठाकुर ने समस्‍त वार्ता को एकीकृत करते हुए इसके निष्कर्ष प्रस्तुत किये. उन्होंने विशेषकर भड़ास के यशवंत सिंह की मां के गाजीपुर से जुड़े प्रकरण की भी चर्चा की और उस पर सही कार्रवाई नहीं होने को यहां की पुलिसिया व्यवस्था का एक उदाहरण बताते हुए उस मामले में त्वरित न्याय और प्रदेश में पुलिस व्यवस्था में सही सुधार की जरूरत पर बल दिया. साथ ही यह भी बताया कि इस सेमिनार से उभर कर आये महत्वपूर्ण तथ्यों और विशलेषणों को एक एक्शन टेकिंग रिपोर्ट के रूप में लाया जाएगा और उसे गृह मंत्रालय भारत सरकार तथा गृह विभाग, उतर प्रदेश सरकार को पुलिस सुधार पर होने वाले किसी भी नीति-निर्देश बनाते समय ध्यान में रखने का अनुरोध किया जाएगा. उन्‍होंने यह भी बताया कि इस सेमिनार से निकली बातों को आगे बढाते हुए शीघ्र ही एक विस्तृत कार्यशाला भी आयोजित की जायेगी.

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