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तो ये है इनकी तरक्की का राज

भास्‍करइसे कहते हैं अखबार का सही उपयोग, ऐसे ही नहीं इस अखबार ने दिन दोगुनी रात चौगुनी तरक्की कर ली। जी आप बिल्कुल ठीक समझें, यहां बात दैनिक भास्कर की हो रही है। इस अखबार पर हमेशा से ही प्रशासन से साठ-गांठ कर अपना हित साधने के आरोप लगते रहे हैं।

भास्‍करइसे कहते हैं अखबार का सही उपयोग, ऐसे ही नहीं इस अखबार ने दिन दोगुनी रात चौगुनी तरक्की कर ली। जी आप बिल्कुल ठीक समझें, यहां बात दैनिक भास्कर की हो रही है। इस अखबार पर हमेशा से ही प्रशासन से साठ-गांठ कर अपना हित साधने के आरोप लगते रहे हैं।

जिसके भौतिक उदाहरण है- गरीबों की हड़पी हुई जमीन पर अरबों रूपये का डीबी मॉल, आदित्य एवेन्यू जैसे कई पॉश्‍ा कॉलोनियां, नमक, कपडों की फैक्ट्री, एफएम, केबल और ना जाने क्या-क्या? यह सब भी केवल अखबार की दम पर, कैसे? आइए आपको इनकी तरक्की का राज बताते है। यह अखबार अपने सर्कुलेशन को बिल्कुल प्रोफेशनल तरीके से भुनाता है। इसीलिए तो इनके कोई भी काम शासन-प्रशासन में अटकते नहीं।

जब कभी कोई बड़ा प्रोजेक्ट किसी राज्य में शुरू करना हो तो वहां की सरकार को घेरना शुरू कर देते हैं, इसी के चलते उमा भारती ने प्रेस कान्फ्रेन्स बुलाकर खुले तौर पर इस अखबार की ब्लैकमेलिंग उजागर की थी। उमा जी ने तमाम इलेक्‍ट्रॉनिक एवं प्रिन्ट मीडिया के सामने भास्कर पर आरोप लगाया था कि उनके किसी भूमि संबंधी विवाद का चूंकि उमा भारती ने समर्थन नहीं किया इसीलिए अखबार में उनकी झूठी खबरें प्रकाशित की गईं।

ताजा उदाहरण मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का है, एक और जहां अन्य सभी अखबार खजुराहों इन्वेस्टर्स समिट की सराहना कर रहे थे, वहीं इस अखबार ने शुरू से ही समिट को लेकर निगेटिव खबरें प्रकाषित की, गलत आंकड़े प्रस्तुत किए और जब इतने से भी बात नहीं बनी तो दिनांक 28 अक्टूबर के अखबार के प्रथम पृष्ठ पर पूरे समिट के नतीजों को ही संदेहास्पद बता कर लीड स्टोरी प्रकाशित कर दी।

परन्‍तु कल शिवराज सिंह से हुई संपादक की ‘विषेष अनौपचारिक चर्चा’ के बाद आज ठीक इसके उलट पूरी तरह सकारात्मक खबर प्रकाशित की गई। साथ ही इसके लिए मुख्यमंत्री की प्रशंसा भी की गई। अब इस प्रकार की मेनूपूलेटिव खबरों के साथ इस अखबार के उज्‍ज्‍वल भविष्य का सपना देख रहे इसके आकाओं को गंभीर विचार करना चाहिए, क्योंकि एक समय के बाद आप पाठक को अधिक मूर्ख नहीं बना सकते। दोनों खबरें मय फोटों के आपके सामने है बाकी की टिप्पणी आप खुद ही कीजिए।

भोपाल से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


दैनिक भास्‍कर

भास्‍कर

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0 Comments

  1. Akhil Chandigarh

    October 31, 2010 at 3:44 am

    भैया भास्कर का सच केवल ब्लैकमेलिग़ ही है. चंडीगढ़ मे भी यही करता रहा है. इस बारे मे आम से लेकर खास तक सब जानते है. हरियाणा और पंजाब सरकार के साथ भी यही खेल हुआ. एनसीआर मे जमीन हथियाना हो या पंचकुला और चंडीगढ़ सभी जगह यही खेल. चंडीगढ़ की इमारत मे बहुत अवैध बना है, प्रसाशन ने नोटिस भी दिया है. यहाँ के बड़े पत्रकारों पर भी गहरे आरोप लगते है. लोकसभा चुनाव मे पूर्व केन्द्रीय मंत्री बसपा के हरमोहन धवन ने तो मंच पर ही भास्कर के धंधे का खुलासा किया था, उन्हें फिर भी शर्म नहीं आई.

  2. अमित गर्ग. जयपुर. राजस्थान.

    October 31, 2010 at 1:22 am

    देश के बड़े मीडिया घरानों में अधिकतर की ये ही हालत है. अखबार काले करते-करते ये कब जमीनें दबाने लग जाते है, किसी को कानों-कान खबर तक नहीं होती. और जब खबर होती है तब तक बात हाथ से ही निकल जाती है. ख़ास बात ये है कि ये मीडिया घराने खुद तो सारे काले काम करते हैं और दूसरों को नसीहत देते फिरते हैं अच्छे काम करने की. धन्य हैं ऐसे मीडिया घराने और इनके मालिक-संपादक, जो देश के अंधे-बहरे पाठकों को देश सुधारने के बड़े-बड़े सब्ज बाग़ दिखा रहे हैं.

  3. Parvej

    October 31, 2010 at 2:13 am

    Yashvant Ji Aapke web portal par Bhaskar ki khabar padhkar bhaut achcha laga jo kisi patrakar ke dilo-dimag par nahi utar rahi hai

  4. Parvej

    October 31, 2010 at 2:38 am

    [s][u][i][b][url][quote][img][/img][/quote][/url][/b][/i][/u][/s];D>:(:P8):o:(>:(:D;D:-*:'(:P:-*:o>:(:D;):)[i][quote][/quote][/i]

  5. govind goyal,sriganganagar

    October 31, 2010 at 3:10 am

    aisa hee hota hai. baba sabko lade babe ko koun lade.

  6. Rishi Naagar

    October 31, 2010 at 7:09 am

    SHAME SHAME Bhaskar!

  7. sanjay sinha

    October 31, 2010 at 11:25 pm

    yaswantji,
    bhaskar ke chairman aur state editor khajuraho me the phir bhi coverage me patrika ne bhaskar ko nipta diya.state head khandekar hi satranj ki gotiyan bichaten hain.malikon ka lena dena nahi rahta hai.khandekar ke karan hi journalish effected ho raha hai.—- sanjay sinha

  8. मदन कुमार तिवारी

    November 1, 2010 at 12:30 am

    सभी मिडिया घराने की यही स्थिति है । अपने व्यवसायिक साम्राज्य को और आगे बढाने के लिए अखबारो का उपयोग कर रहें हैं । हालात अगर नहीं बदले तो आने वाले कल में देश की जनता का विश्वास पत्रकारों से उठ जायेगा । ईलेक्ट्रोनिक मिडिया की स्थिति तो और खराब है । फ़िर भी अच्छे पत्रकारों की कमी नही है।

  9. rk mishra

    November 1, 2010 at 4:41 am

    hall hi me mandla ke yogiraj hospital me jile ke aadiwasio ki aakh ke motiyabind ke opration yaha ke doctors dwra kiya gaye….jisse 41 aadiwasio ki ek-ek aankh ki rosni chali gayi…national chennal lo par din din bhar ye khabar chali bhasker ko chhod sabhi aakhbar ne pramukhta se lambbe samay tak chhapa lekin bhasker ne is per ek sabd bhi nahi likha kyouki yogiraj hospital trast ke bhasker malik sadasya hai….ab aap andaj laga sakte hai ki kya bhasker patrakarita ka dharm nibha raha hai..?????

  10. rajesh

    November 1, 2010 at 4:03 pm

    yashwantji
    patrika bhaskar dono ki ladai main aap tool ban gaye ho.. bhaskar ne jo aakande diye hain woh bhi poori tarah galat nahi hai.. rahi patrika ki baat to patrika ne paid news ke khilaf hamesh awaj uthai par khajuraho sammit main jo jacket aur char panne chaape hai sarkar ki prashansa main woh paid news hi the.. ap khud anubhavi hain. kabhi kisi akhabar nai kisi business summit ke shuru hone ke pehle jacket aur char page chaapen hai. yeh poora paid news tha jiske khilaf gulab kothari hamesh bhasan deten hai..

  11. kumar, bhopal

    November 1, 2010 at 10:02 pm

    प्रिय राजेश जी,
    आपकी जानकारी के लिये बता दे १९९६ से अब तक जितनी भी समिट जयपूर या राजस्थान मे हुई हे उन सब मे भास्कर ने ग्लेज्ड पेपर पर जेकेट और स्मारीकाये प्रिंट की हे. और हजारो कि संख्या मे फ्री वितरीत करवाई हे. एयरपोर्ट एवं आयोजन स्थळ पर अधिकारियो और उद्योग्पातियो का स्वागत , आपकी भाषा मे खुशामद की हे, जिसमे स्वयं रमेश जी और गिरीश तथा पवन अग्रवाल उपस्थित रहे हे. इसलिये कॉमेंट्स करने से पहले जरा दिमाग लगआये. गुलाब जी अपना व्यवसाय सिद्धान्तो पर करते हे नही तो उनके पास भी कई माल, कालोनिया और फेक्ट्रिया होती, खजुराहो समिट मे भास्कर अपने ही जाल मे उलझ गया हे. पत्रिका ने उसे जबरदस्त शिकस्त दी हे.

  12. ashish goswami

    December 27, 2010 at 7:22 am

    yashwantji,

    graduation ke bad apne arrier ki suruaat bhaskar ke sath hi ki thi (2002-03) 2year ke work exp. ek badi baat jo same aai….apne employee ka kis tarah use kiya jaye yeh bahut acchi tarah se aata hai……akhbar ke safal hone ka mool mantra yahi….hai ki……jo bhi planning banate hai..us par Seriously kam karte hai…top management stoff ko Big package (sallary) par rakhna….baki kam repoter/mktg. executive….other staff karta , magar inhe lagta hai…ki hum kar rahe hai….in short…IN ANY ORGANIZATION SINGLE MAN CAN,T DO EVERYTHING…ITS ALL ABOUT TEAMWORK.

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