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संपादकों के सवाल और प्रधानमंत्री के जवाब

प्रधानमंत्री साथ लगभग सत्‍तर मिनट के प्रेस कांफ्रेंस में संपादकों ने अनेक सवाल पूछे कुछ तीखे- कुछ हल्‍के। संपादक रूपी जीव भी अब आम आदमी से कितना दूर जा चुका है, यह प्रेस कांफ्रेंस में देखने को मिला। इन महान संपादकों ने आम आदमी से जुड़ा एक सवाल नहीं पूछा। युवाओं के सबसे बड़े देश में बेरोजगारों के लिए क्‍या कदम उठाया जा रहा है, किसी का ध्‍यान नहीं गया। कर्ज में डूबा किसान आत्‍महत्‍या कर रहा है, महंगाई आम आदमी को लील रही है, ऐसे सवाल हाशिए पर रहे। नीचे आप भी पढि़ए संपादकों के सवाल और पीएम के जवाब।

प्रधानमंत्री साथ लगभग सत्‍तर मिनट के प्रेस कांफ्रेंस में संपादकों ने अनेक सवाल पूछे कुछ तीखे- कुछ हल्‍के। संपादक रूपी जीव भी अब आम आदमी से कितना दूर जा चुका है, यह प्रेस कांफ्रेंस में देखने को मिला। इन महान संपादकों ने आम आदमी से जुड़ा एक सवाल नहीं पूछा। युवाओं के सबसे बड़े देश में बेरोजगारों के लिए क्‍या कदम उठाया जा रहा है, किसी का ध्‍यान नहीं गया। कर्ज में डूबा किसान आत्‍महत्‍या कर रहा है, महंगाई आम आदमी को लील रही है, ऐसे सवाल हाशिए पर रहे। नीचे आप भी पढि़ए संपादकों के सवाल और पीएम के जवाब।

अरुण पुरी (इंडिया टुडे ग्रुप) : आपने ए राजा को दूरसंचार मंत्री क्यों बनाया जबकि उनकी भूमिका पर सवाल उठे थे ?

प्रधानमंत्री : हालांकि कई शिकायतें आई थीं, लेकिन मुझे इसका अंदाज़ा नहीं था कि इतने गंभीर आरोप लगे हैं। उस समय तक मुझे नहीं पता था कि इतनी गंभीर चीज़ें हुई हैं, इसलिए मुझे राजा को कैबिनेट को रखने पर आपत्ति नहीं थी। कैबिनेट में कैसे राजा को शामिल किया गया, उसके बारे में मैं नहीं बताउंगा, लेकिन ये गठबंधन सरकार है और राजा और मारन द्रमुक की पसंद थे। पहले आओ और पहले पाओ की नीति के तहत किसको-किसको क्या मिला, इन सब बातों पर हमारे साथ या कैबिनेट में र्चचा नहीं हुई, ये दूरसंचार मंत्रालय का काम था, इसलिए मैंने इस बात पर ज़ोर नहीं दिया था। जब सभी संबंधित विभाग और मंत्रालय इसके पक्ष में नहीं, तो मैं क्यों इस पर ज़ोर दूं। बाद में वित्त मंत्री और दूरसंचार विभाग ने भी इस पर सहमति जताई थी कि 2-जी में ऑक्शन की आवश्यकता नहीं। उन्होंने कहा था कि 2-जी मामले में ट्राई, दूरसंचार आयोग और उनकी राय में ऑक्शन वाजिब नहीं है। ऑक्शन के समय राजा ने मुझे बताया था कि ट्राई ने इसका विरोध किया था। मैंने 2007 में पत्र लिखकर अपनी चिंता जताई थी। राजा ने मेरे पत्र का जवाब दिया था और कहा था कि उन्होंने इस मामले में पूरी तरह पारदर्शिता निभाई है और आगे भी निभा रहे हैं।

आर प्रशांत (एशियानेट ) : न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और केरल चुनाव पर आपका क्या कहना है ?

प्रधानमंत्री : हमारी पार्टी चुनाव में अच्छा करेगी और भ्रष्टाचार कहीं भी हो, उसकी जांच होनी चाहिए और उससे निपटना चाहिए।

प्रांजल (ब्लूमबर्ग) : सरकार कड़े सुधारवादी क़दम क्यों नहीं उठा रही है?

प्रधानमंत्री : गुजरात के एक मंत्री के खिलाफ़ कार्रवाई हुई है, उसकी वजह से ये हंगामा हो रहा है, लेकिन मैं इस मामले पर कुछ और नहीं कहना चाहता। विपक्षी पार्टी खासकर भारतीय जनता पार्टी ने बहुत ही गलत रुख अपना रखा है, लेकिन मैं इस पर ज्‍यादा नहीं कहना चाहता। जब संसद नहीं चलने दी जाती, तो काम कैसे हो।

राजदीप सरदेसाई (सीएनएन-आईबीएन) : क्या आपने इस्तीफ़ा देने का विचार किया था और जेपीसी और पीएएसी पर आपकी राय क्या है?

प्रधानमंत्री : गठबंधन सरकार में गठबंधन धर्म होता है और कई बार ऐसा होता है कि आप जिस तरह चाहते हैं, गठबंधन सरकार में वैसा नहीं होता, लेकिन मैं पद छोड़ने का कभी नहीं सोचता और मैं अपना कार्यकाल पूरा करूंगा। मैं किसी भी समिति के सामने पेश होने के लिए तैयार हूं। प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार आवश्यक है और इसकी ज़रूरत है। मुझे अनियमितताओं पर सबसे ज्‍यादा खेद है और अंतरराष्ट्रीय मंदी में अर्थव्यवस्था को बचाए रखना सबसे बड़ी उपलब्धि हैं। राष्ट्रमंडल घोटाले की जांच में थोड़ा समय लग रहा है, लेकिन मैं भरोसा दिलाता हूं कि गलती करनेवाले छोड़े नहीं जाएंगे। 2-जी स्पेक्ट्रम मामले में राजस्व नुकसान की शुरुआती बिंदू समझने की आवश्यकता है, नुक़सान का आकलन करना मुश्किल काम है।

प्रेरणा सूरी (अल जज़ीरा) : मिस्र के बारे में आपका क्या कहना है?

प्रधानमंत्री : मिस्र में जो भी हुआ, वह चिंता का विषय है। वहां भारतीयों की भी चिंता है। मिस्र की तरह भारत में ऐसा नहीं हो सकता, क्योंकि यहां लोगों के पास सरकार बदलने का अधिकार है। यहां फ्री मीडिया है, इसलिए मिस्र में जो कुछ हुआ, वैसा भारत में नहीं हो सकता।

ईटीवी : तेलंगाना मामले पर केंद्र और पार्टी की नीति क्या है?

प्रधानमंत्री : यह जटिल मामला है। गृहमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से पहले दौर की बात की है, लेकिन अभी विचार-विमर्श की प्रक्रिया चलेगी।

सुभाशीष मोइत्रा (कोलकाता टीवी) : क्या भ्रष्टाचार के मामले पर यूपीए टूट सकता है और क्या वाममोर्चे से फिर गठबंधन होगा?

प्रधानमंत्री : फि़लहाल वाममोर्चे के साथ गठबंधन नहीं है और जो भी गठबंधन में शामिल हैं, सरकार के साथ मज़बूती से जुड़े हुए हैं।

संजय पुगलिया (सीएनबीसी-आवाज़) : आधारभूत क्षेत्र में दीर्घकालिक फंड के बारे में क्या योजना है?

प्रधानमंत्री : सबसे पहले हमें कॉरपोरेट माहौल अच्छा बनाना होगा। विदेशी निवेश के लिए कोशिश होनी चाहिए, इस पर विचार चल रहा है। वित्तमंत्री भी इस पर काम कर रहे हैं। कृषि क्षेत्र में सुधार पर राज्य सरकारों के साथ विचार चल रहा है। कहीं सफलता मिल रही है और कहीं नहीं मिल रही है।

प्रणय रॉय (एनडीटीवी) : आपकी हो रही आलोचना के बीच क्या आप अगली बार प्रधानमंत्री बनना चाहेंगे?

प्रधानमंत्री : इस पर कुछ कहना जल्दबाज़ी होगी, क्योंकि अभी अगले चुनाव काफ़ी दूर हैं। बजट सत्र के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल होगा।

अनुराधा प्रसाद (न्यूज़ 24) : जेपीसी की मांग पर संसद की कार्यवाही नहीं चली थी, क्या बजट सत्र चलेगा?

प्रधानमंत्री : पूरी कोशिश की जा रही है और उम्मीद है कि कार्यवाही चलेगी।

सीएनएन : महंगाई का गरीबों पर पड़नेवाले असर के बारे में आपका क्या कहना है?

प्रधानमंत्री : महंगाई है, लेकिन हमने कई योजनाएं बनाई हैं और ग़रीबों का ख्याल रखा जा रहा है। जन वितरण प्रणाली में वर्ष 2002 से क़ीमतों में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। हम ग़रीबी की मुश्किल समझते हैं। केंद्र सरकार गरीबों के लिए कई योजनाएं चला रही है।

एक पत्रकार : उल्फा समस्या के समाधान के लिए क्या कोई समयसीमा है?

प्रधानमंत्री : अभी प्रक्रिया शुरू हो रही है। ये कहना बेहतर होता कि हम तुरंत इसे कर लेंगे, लेकिन अभी प्रक्रिया शुरू हुई है, इसमें समय लगेगा और सरकार इसे काफ़ी गंभीरता से ले रही है। असम में कांग्रेस सरकार ने बहुत अच्छा काम किया है। शांति की कोशिशें हो रही हैं।

शाजी ज़मां (स्टार न्यूज़) : भ्रष्टाचार के मामले में क्या आपको कभी लगा कि ये आपकी नैतिक जिम्मेदारी है?

प्रधानमंत्री : मैं अपनी ज़िम्मेदार समझता हूं, लेकिन गठबंधन सरकार की कुछ मजबूरी होती है। गठबंधन सरकार में कुछ समझौते करने पड़ते हैं। राजनीति में कुछ चीज़ें है जो मेरे हिसाब से नहीं है, लेकिन मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला है।

अर्णव गोस्वामी (टाइम्स नाउ) : देवास समझौते में प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों पर आरोप है, उस पर क्या कहना है?

प्रधानमंत्री : सौदा अभी अमल में नहीं आया है और सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति इसे निरस्त करने के बारे में जल्द फैसला करेगी। इस बारे में पिछले साल दो जुलाई को फैसला हो चुका था। यह खबर भी गलत है कि प्रधानमंत्री कार्यालय पिछले साल नवम्बर तक परदे के पीछे कोई चर्चा कर रहा था जबकि सौदा निरस्त करने का फैसला उससे पहले ही हो चुका था। मैंने किसी से बात नहीं की पीएमओ ने किसी से बात नहीं की। जर्मनी के विदेश मंत्री ने भी मुझसे मुलाकात के दौरान इस मुद्दे पर र्चचा नहीं की। कानून मंत्रालय सहित विभिन्न विभागों ने सौदे को निरस्त करने की सिफारिश की थी लेकिन यह फैसला करने में केवल प्रक्रियागत विलंब हुआ है।

संजॉय मजूमदार (बीबीसी) : ब्रिटेन सरकार की ओर से फंड की क्या आवश्यकता है?

प्रधानमंत्री : भारत अब भी ग़रीब देश है और अगर कोई मित्र देश भारत में निवेश करता है तो हम उसका स्वागत करते हैं। मीडिया में भ्रष्टाचार की खबरों के कारण देश की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिगड़ रही है इसलिए मीडिया बिना किसी तथ्य के निष्कर्ष पर न पहुँचे।

सतीश के सिंह (जी न्यूज़) : आपने प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों बुलाई? आप कहते हैं कि आप भ्रष्टाचार पर गंभीर हैं, लेकिन मीडिया में रिपोर्ट आए बिना सरकार सामने क्यों नहीं आती?

प्रधानमंत्री : मैं यह नहीं कहता कि मुझसे गलती नहीं हुई, लेकिन मैं उतना दोषी नहीं हूं जितना दिखाया जा रहा है। ग्रुप ऑफ़ मिनिस्टर्स इस मामले को देख रहे हैं। काले धन के बारे में हम क़दम उठा रहे हैं और पैसा वापस लाने की हरसंभव कोशिश करेंगे।

उपेंद्र राय (सहारा नेटवर्क) : 2009 में फॉरेन एफडीआई फंड करीब 40 बिलियन डॉलर आया था जबकि 2010 के पहले 8 महीने में केवल 14 बिलियन डॉलर तक ही ये सिमट कर रह गया है। इसमे कहां गलती हुई ?

प्रधानमंत्री : गलती हमारे यहां नहीं हुई। अंतरराष्ट्रीय इनवायरमेंट ऐसा है कि पिछले दिनों में तमाम इमरजिंग मार्केट से फंड वापस गए हैं। हम लोग आज एक ऐसे माहौल में काम कर रहे हैं कि बाहर देशों में जो कुछ भी होता है उसका असर हम पर भी पड़ता है। इसलिए यह कहना इतना आसान नहीं जो कि कुछ भी हमारे फंडफ्लो के साथ होता है वह हमारी नीतियों की वजह से होता है। यह इस बात से भी प्रभावित होता है कि दूसरे देश खासतौर पर विकसित देश किस तरह की नीतियों को अपनाते हैं, लेकिन मैं इससे सहमत हूं कि हमें अपने फंड को और मजबूत करने की जरूरत है ताकि ऐसा माहौल बन सके जिसमें विदेशों से अधिक मात्रा में फंड आ सके।

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0 Comments

  1. yash

    February 17, 2011 at 5:25 am

    इस कांफ्रेंस को देखकर तो ऐसा लगा कि सब कुछ पहले से ही फिक्स था। यहां तक की संपादकों के द्वारा पूछे गए सवाल भी संपादको को बताए गए लगते थे कि प्रधानमंत्री जी से बस ये ही सवाल पूछे जाएं…..मेरे हिसाब से वहां किसी भी चैनल के मालिक रूपी संपादकों को बुलाने का कोई मतलब नहीं था क्योंकी ये मालिक रूपी संपादक वहां प्रधानमंत्री से आम आदमी से जुड़े सवाल पूछने नही बल्कि भविष्य में होने वाले घोटालों की रूपरेखा तैयार करने गए थे….किसी ने भी वो सवाल नहीं पूछा जो आज भारत का हर आम आदमी सोच रहा है……

  2. govind goyal,sriganganagar

    February 17, 2011 at 10:23 am

    — चुटकी—

    मजबूर नहीं
    मजबूत
    प्रधानमंत्री लाओ,
    अरे! कोई तो
    ये बात
    सोनिया को
    समझाओ।

  3. chandra kumar

    February 17, 2011 at 1:24 pm

    P.M. ne chahete media ko sath lekar desh ki janta ko gumrah karne ki koshis matra hai. Ye Public hai sab janti hai. P.M. hokar koshis jasi bat kare ye bat logo ke gale nahi utarti. Parti dwara janta me faily nakaratmak vichar ko sakaratmk banene ka naya funda hai.

  4. rajkumar sahu, janjgir chhattisgarh

    February 18, 2011 at 6:49 am

    vastav mein yashvant ji, savaalon mein vo dam nahi raha, jinke liye ye naam ( sampadak ) jaane jaate hain. is niras vaarta se lagata hai ki adhikans sampadak bina koi taiyari ke liye chale gaye the, chehra dikhane. bada dukh hota hai. aapne shuru mein ji muddon ka jikra kiya hai, nishchit hi un baaton pa gaur kiya jaana tha. yahi to hai, bade naamon ki sankirn soch, kyonki kaoyon ne mahaj rajyon se jude sawaal kiye.

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