वाराणसी से खबर है कि शुक्रवार को एक प्रेस कान्फ्रेंस में हिंदुस्तान के रिपोर्टर को छोड़ सभी पत्रकार महज एक-एक सौ रुपये में बिक गए। इस तरह हिंदुस्तान के रिपोर्टर ने एक मिसाल कायम की। हुआ यह कि कारमाइकल लाइब्रेरी में एक प्रेस कान्फ्रेंस रखी गयी थी। ओलंपियन लक्ष्मीकांत पांडेय उर्फ चिक्कन गुरु की स्मृति में 13 मार्च को दिन में 12 बजे से कुश्ती दंगल का आयोजन किया गया है। चिक्कन गुरु के बेटे कपिल पांडेय ने यह पीसी बुलाई थी।
शुरुआती दौर में पीसी में महज दो-चार लोग थे। पहले एक पेन के साथ राइटिंग पैड बंटा। फिर एक-एक लिफाफा धराया जाने लगा। जब लोगों ने देखा कि सभी लिफाफों में एक-एक सौ का नोट है तो धीरे से संवाददाताओं ने नोट जेब में डालना शुरु किया। हिंदुस्तान के रिपोर्टर रविकर दुबे ने जैसे ही लिफाफा खोला उसमें एक सौ रुपया देखकर लिफाफा आयोजक के मुंह पर फेंक दिया और अपना विरोध दर्ज कराया।
रविकर का कहना था कि यह गलत परंपरा डाली जा रही है। इस तरह से पत्रकारों को भ्रष्ट बनाया जा रहा है। चिक्कन गुरु के बेटे के चेहरे की चिकनाई उतर चुकी थी। उन्होंने हिंदुस्तान के रिपोर्टर को मनाने की कोशिशे कीं। पर, वे नहीं माने। यहां आपको बता दें कि रविकर दुबे प्रख्यात खेल पत्रकार शुभाकर दुबे के भतीजे हैं। शुभाकर दुबे हमेशा ताव से जिए और ‘आज’ अखबार की खेल पत्रकारिता को नयी बुलंदियों तक पहुंचाया। शुभाकर दुबे खुद एक बेहतरीन खिलाड़ी रहे हैं और कभी मूल्यों से समझौता नहीं किया। आज भी पूरे दम पर अपनी लेखनी शुभाकर दुबे चलाए हुए हैं।
उनके भतीजे को यह नैतिक मूल्यों का ह्रास और बेइज्जती कैसे बरदाश्त होती? सो, उन्होंने पैसा आयोजक के मुंह पर दे मारा। लोगों ने मनाने का प्रयास किया पर वे पीसी से निकल गए। मजे की बात यह थी कि जैसे ही अन्यान्य पत्रकारों को पता चला कि खेल की एक पीसी में रुपये बंट रहे हैं, कम से कम पचास पत्रकार इकट्ठे हो गए। बनारस के ज्ञात इतिहास में पहली बार लोगों ने देखा कि किसी खेल की पीसी में पचास से अधिक पत्रकार इकट्ठे हुए हैं। अमूमन दो-चार पत्रकार ही इकट्ठे होते हैं। हिंदुस्तान को छोड़ सभी अखबारों के संवाददाताओं ने चुपचाप एक-एक सौ का नोट अपनी जेब के हवाले किया और निकल गए। यह है बदलते बनारस का हाल और उसकी बदलती पत्रकारिता का नमूना।
बनारस से अजय कृष्ण त्रिपाठी की रिपोर्ट.












Rahul Kumar Thakur
March 13, 2011 at 6:30 am
Banaras ke reporteron kuchh to sharm karo. kam se kam Banaras ki patrakarikta mein jo den hain uska khyal karo.Agar patrakarikta se pet nahin harta hai to dusra dhandha kar lo.samajik pratistha ka chola odh kar kam se kam ise apavitra mat karo.Dubeyg aur ujagar karne ke liye Tripathig dono badhai ke patra hain.
nagmani pandey
March 13, 2011 at 11:23 am
रविकर दुबे ko salam
ramkumar
March 13, 2011 at 2:52 pm
lagta hai pc main paisa batne ka dimag Prof ram mohan pathak ne diya hoga.
NISHANT
March 14, 2011 at 9:32 am
ravikar ji ki jai ho
subhash kumar rai
May 10, 2011 at 7:20 am
ravikar ji ki jai ho
bhai sahab
sports man jo hain
subhash rai
r.sahara
varanasi
RAJ ANANT PANDEY
August 5, 2011 at 8:17 am
Ravikar has taken good step. Reporter & News can not sale.It is good and really apreciating for that. Regards RAJ ANANT PANDEY Press Reporter Hindustan Press Chauri Chaura, Gorakhpur
rajkumar
October 21, 2011 at 3:43 pm
bhai media sansthan kuch dete nahi to patrakar kya kare…..koi 100 rupaye me bik raha to koi 1000 me sahi kisako mane……..rajkumar reporter firozabad 09808898695